Main Menu

सीवीसी से दिल्ली पुलिस की शिकायत

सीवीसी से दिल्ली पुलिस की शिकायत

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सेंट्रल विजिलेंस कमीशन) भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से सम्बन्धित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। केन्द्रीय सतर्कता आयोग को भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप को प्रकट करने अथवा कार्यालय का दुरुपयोग करने से सम्बन्धित लिखित शिकायतें प्राप्त करने तथा उचित कार्यवाही की सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त है। 

केन्द्रीय सतर्कता आयोग का काम क्या है- 

  • ऐसे किसी भी लेन-देन के मामले में जांच करना या कराना, जिसमें केंद्र सरकार के अधीन अधिकारी के शामिल होने का शक हो।
  • केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों और उसके नियंत्रण में आनेवाले दूसरे संगठनों के सतर्कता और भ्रष्टाचार निवारण संबंधी कामों की सामान्य जांच और निगरानी करना।
  • विजिलेंस संबंधी मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष सलाह देना। 
  • भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप को सामने लाना और उस पर उचित कार्रवाई की सिफारिश करना। 
  • सीबीआई और एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट के अलावा दिल्ली की स्पेशल सेल के उच्च अधिकारियों की चयन समितियों की अध्यक्षता करना।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग के अधिकार क्षेत्र में आनेवाले अधिकारियों और संगठनों के खिलाफ की गई भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच सीबीआई या संबंधित संगठन के चीफ विजिलेंस ऑफिसर द्वारा कराई जाती है।
  • टेंडरों के खिलाफ शिकायतों के बारे में सीवीसी संबंधित विजिलेंस ऑफिसर के माध्यम से जांच कराता है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता। सीवीओ की रिपोर्ट के आधार पर ही केन्द्रीय सतर्कता आयोग मामले में आगे कार्रवाई करता है।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग को किसी भी जांच का संचालन करते समय सिविल न्यायालय के सभी अधिकार प्राप्त होंगे। 

केन्द्रीय सतर्कता आयोग से शिकायत कैसे करें- 

  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग को सीधे पत्र लिखकर शिकायत की जा सकती है।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग की वेबसाइट www.cvc.nic.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

  • शिकायत करने से पहले यह जांच लें कि जिस संगठन या अधिकारी के खिलाफ शिकायत करनी है, वह सीवीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है या नहीं।
  • 'लोकहित प्रकटीकरण और मुखबीर संरक्षण (पब्लिक इंटरेस्ट डिस्क्लोजर ऐंड इनफॉर्मर प्रॉटेक्शन)' के तहत की गई शिकायत सिर्फ डाक से ही भेजी जानी चाहिए। लिफाफे पर मोटे शब्दों में 'पीआईडी पीआई' या 'पर्दाफाश' लिखा होना चाहिए।
  • जो शिकायतकर्ता अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं, आयोग उनकी पहचान छुपाकर रखता है।
  • जिन शिकायतों को जांच के लायक पाया जाता है, उनमें शिकायतकर्ता को एक कंप्लेंट नंबर दिया जाता है। ऐसी शिकायतों का स्टेटस विभाग की वेबसाइट पर कंप्लेंट ऑप्शन में जाकर चेक किया जा सकता है।

शिकायत भेजते समय सावधानी बरतें- 

  • शिकायत सीधे सीवीसी को भेजी जानी चाहिए। बहुत से अधिकारियों/विभागों को भेजी गई शिकायतों पर सामान्यत: केन्द्रीय सतर्कता आयोग कार्रवाई नहीं करता।
  • गुमनाम या गलत नामों से की गई शिकायतों पर भी केन्द्रीय सतर्कता आयोग कार्रवाई नहीं करता। अपना नाम-पता जरूर दें।
  • राज्य सरकारें और प्राइवेट संगठन व संस्थाएं केन्द्रीय सतर्कता आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। राज्य सरकार के खिलाफ शिकायतें राज्यों के स्तर पर 'स्टेट विजिलेंस कमिश्नर' या लोकायुक्त को ही भेजें।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग को शिकायत भेजने का पता- 

केन्द्रीय सतर्कता आयोग,

सतर्कता भवन, ए ब्लॉक,

जीपीओ कॉम्प्लेक्स,

आईएनए, नई दिल्ली- 110023

ईपीएबीएक्स: - 011- 24600200 (30 लाइन्स)

फैक्स: 011- 24651010/24651186

ईमेल: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

सहायता करें


आज जिस तरह मीडिया कारपोरेट ढर्रे पर चल रही है, इसी ने हमें यह संकल्प लेने पर मजबूर किया कि हमें चुपचाप मौजूदा मीडिया के रास्ते पर नहीं चलना है, बल्कि देश के उन करोड़ों लोगों के अधिकारों की आवाज बनना है, जो इस लोकतांत्रिक देश में हर रोज अपने अधिकारों को पाने के लिए पुलिस, अधिकारी और नेता की मनमानी का शिकार बन रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हालांकि जब हमने इसे शुरु किया तो हमारे सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गयी, लेकिन हमने चुनौती को स्वीकार करते हुए थोड़े कम पैसों में ही एक कठिन रास्ते पर चलने की ठान ली और एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई। इंटरनेट का सहारा लिया और बिल्कुल अगल ही तरह का न्यूज पोर्टल बनाया। इसमें हमने अधिकारों की जानकारी देने के साथ ही अधिकारों से संबधित घटनाओं को लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत की।

हमारा ऐसा मानना है कि यदि लोकसेवा अधिकारों को बचाए रखना है तो ऐसी पत्रकारिता को आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी। इसके लिए कारपोरेट घरानों और नेताओं की बजाय आम जनता को इसमें भागीदार बनना होगा। जो लोग भ्रष्टाचार मुक्त सच्ची पत्रकारिता को बचाए रखना चाहते हैं, वे सामने आएं और अधिकार एक्सप्रेस को चलाने में मदद करें। एक संस्थान के रूप में ‘अधिकार एक्सप्रेस’ लोकहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार चलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमें पढ़ें और इस जानकारी को जन-जन तक पहुंचाएं, शेयर करें, और बेहतर करने का सुझाव दें।