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अरविंद केजरीवाल एवं दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति( जज) के बीच तीखी बहस !

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अरविंद केजरीवाल एवं दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति( जज) के बीच तीखी बहस !

Heated Argument Between Arvind Kejriwal and a Delhi High Court Judge! दिल्ली उच्च न्यायालय में केजरीवाल ने कहा कि यह न्यायालय ईडी और सीबीआई की हर बात का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि आरएसएस की एक इकाई है अधिवक्ता परिषद्। इसके कार्यक्रम में न्यायमूर्ति स्वयं चार बार गई हैं। यह भी कहा कि आरएसएस की विचारधारा के हम सख्त खिलाफ हैं और ये केस राजनीतिक केस है। यदि आप किसी विशेष विचारधारा के कार्यक्रम में भाग ले रही हैं, तो उचित पूर्वाग्रह पैदा होता है। धारणा है कि क्योंकि मैं विपरीत विचारधारा का हूं, तो मुझे न्याय मिलेगा या नहीं। इस पर अदालत ने केजरीवाल से पूछा जब मैं उस प्रोग्राम में गई थी तो क्या मैंने कोई राजनीतिक बयान दिया था या वैचारिक बयान दिया था या फिर वह कोई लीगल प्रोग्राम था? न्यायालय ने कहा कि सिर्फ इस बात से कि मैं गई थी और प्रोग्राम में शामिल हुआ थी, इससे शक पैदा होता है। Follow us- वेबसाइट: https://adhikarexpress.com/ यूट्यूब: https://www.youtube.com/adhikarexpress फेसबुक: https://www.facebook.com/adhikarexpress1 इंस्टाग्राम: https://www.instagram.com/adhikarexpress For any complaint or suggestion mail to This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.. मित्रों, अधिकार एक्सप्रेस एक स्टार्ट-अप ऑनलाइन सूचना/समाचार चैनल है। इसका संचालन adhikarexpress.com दिल्ली के द्वारा किया जा रहा है। अधिकार एक्सप्रेस, सरकार (लोक प्रशासन) एवं नागरिक अधिकारों के विषय में जानकारी देने एवं जागरुक करने के लिए लगातार प्रयासरत है। जिससे लोग निडर होकर अन्याय के विरुद्ध खड़े हो सकें तथा देश एवं समाज को परेशान करने वाले विषयों पर मजबूती से अपना मत प्रकट कर सकें। उपयोग की शर्तें (Disclaimer) यद्यपि, इस सामग्री की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हमने सभी प्रयास किए हैं, फिर भी इसे कानून के एक साक्ष्य के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए या किसी कानूनी उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उपयोग से उत्पन्न होने वाले या डेटा के उपयोग से उत्पन्न होने वाली किसी भी घटना के तहत adhikarexpress.com, बिना किसी सीमा के हानि या नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

नागरिक का मौलिक कर्तव्य

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

बंदी (कैदी) का अधिकार