Total: 1726 results found.
Page 37 of 87
आपने अपने जनपद की तहसील के राजस्व विभाग के महत्वपूर्ण अधिकारी, चकबंदीकर्ता का नाम तो आपने सुना ही होगा। जिसके पास जमीन होगी, उनका तो चकबंदीकर्ता से पाला भी पड़ा होगा। क्योंकि भूमि की नाप के मामले में लेखपाल से वरिष्ठ चकबंदीकर्ता ही होता है, जिसकी चकबंदी के कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि , हो सकता है कि आप लोगों में से बहुत से लोगों को पता ही नहीं हो कि चकबंदीकर्ता कौन होता है? और उसके अधिकार एवं जनता के प्रति कर्तव्य क्या होते हैं? चलिये आपको बताते हैं,,,। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
किसी भी गाँव में महिला की डिलीवरी करानी हो या फिर किसी बच्चे का टीकाकरण कराना हो। किशोरियों के साथ स्वच्छता की बैठक होनी हो या फिर घर-घर जाकर बच्चे की देखरेख करनी हो। इन सब कार्यों का उत्तरदायित्व आशा कार्यकर्ता पर है। इसके बावजूद इन आशाओं को निश्चित वेतन तक नहीं मिलता है, फिर भी गांव के प्रधान इस पद पर उनका चयन कराने के लिए घूस लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। चलिये आपको सुनाते हैं एक गरीब महिला की जुबानी....। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
यदि आपके क्षेत्र में चकबंदी हो चुकी है या फिर अभी भी चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है तो आप चकबंदी लेखपाल से अवश्य परिचित होंगे। हालांकि इस प्रक्रिया के समय कई लोगों को चकबंदी लेखपाल की कार्यशैली नहीं पसंद आ रही होगी। और वे चकबंदी लेखपाल का विरोध भी करना चाह रहे होंगे, लेकिन उनको पता ही नहीं होगा कि भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य करने वाले इस कर्मचारी का जनता के प्रति कर्तव्य क्या हैं। यदि आपको भी नहीं पता है तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं....। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
यदि आपके क्षेत्र में चकबंदी हो चुकी है या फिर अभी भी चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है तो आप चकबंदी लेखपाल से अवश्य परिचित होंगे। हालांकि इस प्रक्रिया के समय कई लोगों को चकबंदी लेखपाल की कार्यशैली नहीं पसंद आ रही होगी। और वे चकबंदी लेखपाल का विरोध भी करना चाह रहे होंगे, लेकिन उनको पता ही नहीं होगा कि भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य करने वाले इस कर्मचारी का जनता के प्रति कर्तव्य क्या हैं। यदि आपको भी नहीं पता है तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं....। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
देशभर में सरकार की ओर से गांव के गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिये कई योजनाएं चला रही है, लेकिन ग्राम प्रधानों की मनमानी के चलते सभी पात्र गरीबों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही हाल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मारुफपुर गांव का भी है। यहां के ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का प्रधान नियमों की अनदेखी करके अपने करीबियों को शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे रहा है। जिसके कारण गांव के बेबस निर्धन लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चलिए आपको सुनाते हैं, ग्रामीणों का क्या कहना है। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
देशभर में सरकार की ओर से गांव के गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिये कई योजनाएं चला रही है, लेकिन ग्राम प्रधानों की मनमानी के चलते सभी पात्र गरीबों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही हाल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मारुफपुर गांव का भी है। यहां के ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का प्रधान नियमों की अनदेखी करके अपने करीबियों को शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे रहा है। जिसके कारण गांव के बेबस निर्धन लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चलिए आपको सुनाते हैं, ग्रामीणों का क्या कहना है। हमारी वेबसाइट है: http://adhikarexpress.com/
देश में हो रहे भ्रष्टाचार के कारनामों के बारे में तो आप अक्सर सुनते और देखते ही रहते हैं, लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के आनापुर गांव के प्रधान का जादुई कारनामा दिखाने जा रहे हैं। जिसे देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान इतनी चमत्कारिक हैं, कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करके बिना ईंट के ही कागज पर सड़क बनाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
चलिए आपको सुनाते हैं कि ग्रामीणों का क्या कहना है...।
देश में हो रहे भ्रष्टाचार के कारनामों के बारे में तो आप अक्सर सुनते और देखते ही रहते हैं, लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के आनापुर गांव के प्रधान का जादुई कारनामा दिखाने जा रहे हैं। जिसे देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान इतनी चमत्कारिक हैं, कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करके बिना ईंट के ही कागज पर सड़क बनाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
चलिए आपको सुनाते हैं कि ग्रामीणों का क्या कहना है...।
आप किसान हैं और आपके पास खेती या अन्य कोई भूमि है तो आपने अपने जनपद की तहसील के सहायक चकबंदी अधिकारी के कार्यालय का चक्कर अवश्य लगाया होगा। यदि बड़ी आसानी से आपका कार्य हो गया हो गया था तो यह बहुत प्रसन्नता की बात है,,, लेकिन सामान्य रुप से सुनने और देखने को मिलता है कि लोग काफी समय से कार्यालय का चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन उनका कार्य नहीं होता है। कई बार तो घूस भी मांग ली जाती है,,,। चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं...।
आप किसान हैं और आपके पास खेती या अन्य कोई भूमि है तो आपने अपने जनपद की तहसील के सहायक चकबंदी अधिकारी के कार्यालय का चक्कर अवश्य लगाया होगा। यदि बड़ी आसानी से आपका कार्य हो गया हो गया था तो यह बहुत प्रसन्नता की बात है,,, लेकिन सामान्य रुप से सुनने और देखने को मिलता है कि लोग काफी समय से कार्यालय का चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन उनका कार्य नहीं होता है। कई बार तो घूस भी मांग ली जाती है,,,। चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं...।
केंद्र सरकार ने गावों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना की है। यहां पर चिकित्सकों और एएनएम(ANM) की तैनाती भी कर दी गयी है। इसके साथ ही विभिन्न तरह की दवायें भी उपलब्ध करा दी गयी हैं, लेकिन बड़ी परेशानी की बात यह है कि इन सुविधाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मारुफपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर अक्सर ताला लगा रहता है। डॉक्टर महीने में कभी-कभी आते हैं, ऐसी स्थिति में भला रोगियों की चिकित्सा कैसे होगी। आप स्वयं सोंचिये। चलिए आपको सुनाते हैं कि ग्रामीणों का क्या कहना है,,,,।
केंद्र सरकार ने गावों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना की है। यहां पर चिकित्सकों और एएनएम(ANM) की तैनाती भी कर दी गयी है। इसके साथ ही विभिन्न तरह की दवायें भी उपलब्ध करा दी गयी हैं, लेकिन बड़ी परेशानी की बात यह है कि इन सुविधाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मारुफपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर अक्सर ताला लगा रहता है। डॉक्टर महीने में कभी-कभी आते हैं, ऐसी स्थिति में भला रोगियों की चिकित्सा कैसे होगी। आप स्वयं सोंचिये। चलिए आपको सुनाते हैं कि ग्रामीणों का क्या कहना है,,,,।
भारत जैसे विशाल देश में, जहां विश्व के सबसे अधिक पशु रहते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती उन पशु चिकित्सा अधिकारियों के सामने है, जो इन पशुओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए उत्तरदायी हैं। क्योंकि उचित चिकित्सा मिलने पर ही पशुओं की मृत्यु पर विराम लगेगा। हालांकि पशु चिकित्सकों से अधिक उत्तरदायित्व जनपद में बैठे मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का है जो पूरे जनपद के पशुपालन कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। और चिकित्सा की सुविधायें उपलब्ध करवाते हैं। ,,, चलिए आपको विस्तार से बताते हैं,,,।
भारत जैसे विशाल देश में, जहां विश्व के सबसे अधिक पशु रहते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती उन पशु चिकित्सा अधिकारियों के सामने है, जो इन पशुओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए उत्तरदायी हैं। क्योंकि उचित चिकित्सा मिलने पर ही पशुओं की मृत्यु पर विराम लगेगा। हालांकि पशु चिकित्सकों से अधिक उत्तरदायित्व जनपद में बैठे मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का है जो पूरे जनपद के पशुपालन कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। और चिकित्सा की सुविधायें उपलब्ध करवाते हैं। ,,, चलिए आपको विस्तार से बताते हैं,,,।
आज हम आपको प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत भ्रष्टाचार का शिकार बने एक ऐसे गरीब परिवार की पीड़दायक कहानी दिखायेंगे, जिसे देखकर आप हैरान और परेशान हो जायेंगे । लेकिन 25 वर्ष से सड़क के किनारे बोरी तानकर जीवन यापन कर रहे, इस गरीब परिवार की स्थिति को देखकर गांव के प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव समेत किसी भी स्थानीय अधिकारी का सिर शर्म से नहीं झुका। चलिए हम आपको सुनाते हैं उस गरीब परिवार की कहानी उसी की जुबानी,,,,।
आज हम आपको प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत भ्रष्टाचार का शिकार बने एक ऐसे गरीब परिवार की पीड़दायक कहानी दिखायेंगे, जिसे देखकर आप हैरान और परेशान हो जायेंगे । लेकिन 25 वर्ष से सड़क के किनारे बोरी तानकर जीवन यापन कर रहे, इस गरीब परिवार की स्थिति को देखकर गांव के प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव समेत किसी भी स्थानीय अधिकारी का सिर शर्म से नहीं झुका। चलिए हम आपको सुनाते हैं उस गरीब परिवार की कहानी उसी की जुबानी,,,,।
फायनेंसियल एक्सप्रेस में छपे समाचार के अनुसार पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत भले ही कुल 11 करोड़ 7 लाख लाभार्थी पंजीकृत हैं, लेकिन इसका लाभ पाने वालों की संख्या लगातार घट रही है। पीएम किसान योजना के अंतर्गत मिलने वाली छठीं किस्त केवल 3 करोड़ 77 लाख किसानों तक पहुंची है। यह संख्या पहली किस्त से लेकर छठीं किस्त तक लगातार कम हुई है। यानी छठीं किस्त आते-आते यह संख्या करीब 6 करोड़ 49 लाख घट गई है। ,,,, सच्चाई क्या है चलिए हम आपको सुनवाते हैं,,,।
फायनेंसियल एक्सप्रेस में छपे समाचार के अनुसार पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत भले ही कुल 11 करोड़ 7 लाख लाभार्थी पंजीकृत हैं, लेकिन इसका लाभ पाने वालों की संख्या लगातार घट रही है। पीएम किसान योजना के अंतर्गत मिलने वाली छठीं किस्त केवल 3 करोड़ 77 लाख किसानों तक पहुंची है। यह संख्या पहली किस्त से लेकर छठीं किस्त तक लगातार कम हुई है। यानी छठीं किस्त आते-आते यह संख्या करीब 6 करोड़ 49 लाख घट गई है। ,,,, सच्चाई क्या है चलिए हम आपको सुनवाते हैं,,,।
यदि आप किसी नगर में रहते हैं तो आपको पता होगा कि आपके यहां विकास कार्यों को करने के लिए नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत होती है। इसका एक अध्यक्ष और कई सदस्य होते हैं, जिन्हें जनता द्वारा निर्वाचित किया जाता है, जबकि एक अधिशासी अधिकारी भी होता है। जो नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत की बैठक में लिये गये निर्णयों के अनुसार नगर के विकास कार्यों को कार्यान्वित करता है। और उनका निरीक्षण भी करता है। ,,,,, चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं।
यदि आप किसी नगर में रहते हैं तो आपको पता होगा कि आपके यहां विकास कार्यों को करने के लिए नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत होती है। इसका एक अध्यक्ष और कई सदस्य होते हैं, जिन्हें जनता द्वारा निर्वाचित किया जाता है, जबकि एक अधिशासी अधिकारी भी होता है। जो नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत की बैठक में लिये गये निर्णयों के अनुसार नगर के विकास कार्यों को कार्यान्वित करता है। और उनका निरीक्षण भी करता है। ,,,,, चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं।