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नई दिल्ली। यदि आप 20 वर्ष से ज्यादा पुराने वाणिज्यिक वाहन को इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि अब 20 वर्ष से ज्यादा पुराने वाणिज्यिक वाहनों को अनिवार्य रूप से कबाड़ घोषित कर सड़कों से हटाने की लंबित नीति को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी घोषणा की है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए वाहनों को नष्ट करने की नीति को तकरीबन अंतिम रूप दिया जा चुका है। बताया जा रहा है कि यहां पर कबाड़ घोषित किए गए कमर्शियल वाहन के बदले एक नए कमर्शियल वाहन की खरीद पर 28 फीसद के बजाय 18 फीसद जीएसटी लगाने की अपील की जाएगी। वहीं जीएसटी काउंसिल केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से प्रस्तावित छूट पर विचार करेगी। यह व्यवस्था एक अप्रैल, 2020 से लागू हो जाएगी।
आपको बता दें कि इस बैठक में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, वित्त सचिव, भारी उद्योग सचिव, इस्पात सचिव के साथ ही सड़क, परिवहन व राजमार्ग के सचिव शामिल हुए। इसी बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।
गौरतलब है कि नितिन गडकरी ने कहा था कि वाहनों के प्रदूषण को खत्म करने के लिए नीति लाने की जरूरत है। साथ ही हर साल वाहनों की बढ़ती तादाद को देखते हुए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त हाईवे लेन बनानी होगी, जिसकी लागत 80,000 करोड़ रुपये होगी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।
दिल्ली। यदि आप अभी तक आधार का रजिस्ट्रेशन या आधार को अपडेट नहीं करवा पाए हैं तो अब आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। अब रिजनल सेंटर के अलावा आप डाकघर से भी आधार का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। देशभर के 6500 से ज्यादा डाकघर में आधार के रजिस्ट्रेशन के साथ ही इसे अपडेट भी किया जाएगा। यूआईडीएआई जल्दी ही 13 हजार पोस्ट ऑफिस तक यह सुविधा पहुंचाएगी।
आप चाहें तो अपडेट सेंटर्स की लिस्ट यूआईडीएआई की वेबसाइट uidai.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल करके भी इस बारे में जानकारी ले सकते हैं।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अऩुसार डाक घर में रजिस्ट्रेशन का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन यदि आप अपना आधार अपडेट करवाते हैं तो आपको उसके लिए 29.50 रुपए शुल्क भुगतान करना होगा। इसके अलावा यदि आपके बच्चे का कोई आईडेंटिटी कार्ड नहीं है तो आप बच्चे का बर्थ सर्टीफिकेट को लेकर आधार केंद्र पर जाएं, वहां पर आपके बच्चे का आधार कार्ड बन जाएगा।
नई दिल्ली। नागरिकों के निजता के मूलभूत अधिकार की सुनवाई कर रहे सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि यूआइडीएआइ द्वारा 2010 से 2016 तक नागरिकों से व्यक्तिगत सूचनाओं को एकत्रित किया जाना अवैध था। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा कि जो सूचनाएं एकत्रित की गईं उन्हें नष्ट किया जाना चाहिए। यह बात मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने कही।
आपको बता दें कि यह पांच जजों की संविधानिक पीठ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केएस पुट्टास्वामी की आधार योजना और उसके लिए 2016 में बने कानून को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रही है। इस सांविधानिक पीठ में जस्टिस एके सीकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण शामिल हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय की ओर से पेश अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने कहा कि पूरे छह साल सरकार ने आधिकारिक प्रक्रिया पूरी किए बगैर लोगों से उनकी सूचनाएं लीं। इसलिए यह डाटा नष्ट किया जाना चाहिए। अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने कहा कि 2010 से 2016 तक लोगों से एकत्रित व्यक्तिगत सूचनाओं को लेने, उन्हें और उनके इस्तेमाल के बारे में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं थे। इसलिए यह नागरिकों के निजता के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन था। साथ ही आशंका जताई कि सरकारी और निजी एजेंसियों ने इन सूचनाओं का अपने हितों के लिए इस्तेमाल किया। एकत्रित सूचनाओं के प्रति गोपनीयता की बाध्यता आधार के कार्य में लगी सरकारी और निजी एजेंसियों की है और उनके साथ समझौता हुआ है। लेकिन पूरे छह साल तक उनकी जवाबदेही नहीं रही।
वहीं इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अपनी पहचान और सूचनाएं सार्वजनिक करने या न करने का अधिकार हर नागरिक को होना चाहिए। हालांकि इस मामले में बहस गुरुवार को भी जारी रहेगी। अब 20 मार्च को केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को जवाब देना है।
क्या आपने अपने आधार नंबर को बैंक अकाउंट से लिंक कर दिया है, यदि नहीं तो हम इस वीडियो में बता रहे हैं कि किस तरह आप बड़ी आसानी से दो मिनट में एटीएम के जरिए अपने बैंक अकाउंट को आधार नंबर से लिंक कर सकते हैं.
इस वीडियो के जरिए बड़ी आसानी से आप दो मिनट में अपने मोबाइल से SMS के द्वारा आप पैन को आधार से लिंक कर सकते हैं।
सूरतगढ़ (राजस्थान)। श्री गंगानगर जिले के सूरतगढ़ में एक रिश्वतखोर सब इंस्पेक्टर रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एक सब इंस्पेक्टर को 4500 रुपयों की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बीकानेर रेंज एसपी एसीबी ममता विश्नोई ने बताया कि रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी सब इंस्पेक्टर का नाम प्रताप सिंह है। वह सूरतगढ़ शहर पुलिस थाने में सब इंस्पेक्टर है। सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह के खिलाफ गांव चाढ़सर, सूरतगढ़ के रहने वाले मघानाथ ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी। मघानाथ ने बताया कि सूरतगढ़ थाना पुलिस ने एमवी एक्ट के तहत चालान कर उसकी पिकअप जीप को जब्त कर लिया था और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था। जब उसने जीप को छोड़ने की गुजारिश की तो वहां तैनात सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह 4500 रुपयों की रिश्वत की मांग की।
जब इस बात की शिकायत एसीबी हनुमानगढ़ के उपाधीक्षक गणेश नाथ को मिली तो उन्होंने शिकायत का सत्यापन करने के बाद सब इंस्पेक्टर को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। और पीड़ित मघानाथ को रिश्वत की रकम लेकर सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह के पास भेजा। जैसे ही आरोपी सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह ने मघानाथ से 4500 रुपए की रिश्वत ली। इसी दौरान संकेत मिलने पर एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। अब सब इंस्पेक्टर से पूरे मामले पर पूछताछ जारी है।
नई दिल्ली। यदि आपने अभी तक आधार नंबर को बैंक अकाउंट, मोबाइल फोन या फिर किसी और सरकारी सेवा से लिंक नहीं कराया है तो आपको परेशान होने की बिल्कुल जरुरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर समेत सभी सरकारी सेवाओं से आधार लिंक करने की सीमा अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा कि सरकार आधार लिंकिंग पर किसी को बाध्य नहीं कर सकती। हालांकि, अदालत ने ये भी कहा कि लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी के मामलों मे आधार लिंक की समय सीमा पहले की तरह लागू रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण भी पीठ के सदस्य थे। केन्द्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने प्रतिपक्षियों की मांग पर कहा कि अगर कोर्ट को ठीक लगता है तो वह आधार लिंक कराने की समय सीमा 31 मार्च से आगे बढ़ा सकता है लेकिन इससे आधार कानून की धारा 7 के तहत सब्सिडी के नगद भुगतान व लाभ तथा सेवाओं को अलग रखा जाए। कोर्ट ने अटार्नी जनरल का अनुरोध स्वीकार करते हुए सेवा, सब्सिडी और लाभ के मामलों को छोड़ कर बाकी के लिए आधार लिंक कराने की 31 मार्च की तय तिथि सुनवाई पूरी होने और फैसला आने तक बढ़ा दी है।
इसके अलावा जिस तरह से बैंक में नया खाता खुलवाने के समय आधार कार्ड न होने पर आधार के लिए आवेदन करने की अर्जी का नंबर देने से खाता खुल जाता है वही नियम तत्काल के तहत पासपोर्ट बनवाने के मामले में लागू होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आधार लिंक कराने की समय सीमा 31 मार्च से आगे बढ़ाने वाले अपने आदेश में गत 15 दिसंबर के आदेश का हवाला दिया है जिसमें बैंक में नया खाता खोलने के लिए तय की गई व्यवस्था का जिक्र है। कोर्ट ने कहा है कि यही प्रक्रिया पासपोर्ट बारे में भी लागू होगी। आधार कानून की वैधानिकता पर मंगलवार को भी सुनवाई जारी रही। जिसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने अपनी बहस पूरी कर ली। वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन बुधवार को बहस करेंगे।
गौरतलब है कि आधार को बैंक खाते, मोबाइल नंबर और तमाम सेवाओं से लिंक कराने की समय सीमा 31 मार्च तक थी। सरकार के मुताबिक हर बैंक खाते को 12 डिजिट के यूनीक आईडेंटिटी नंबर (आधार) के साथ 31 मार्च 2018 तक हर हाल में जोड़ा जाना अनिवार्य है। इतना ही नहीं आधार कार्ड को पैन से जोड़ा जाना भी अनिवार्य है। ऐसा न करने पर आपका आईटीआर रिटर्न स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। वहीं अगर आप अपने बैंक खाते से आधार को लिंक नहीं कराएंगे तो आपके बैंक खाते को फ्रीज भी किया जा सकता है।
आपको बता दें कि बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर से आधार लिंक करना जरूरी किए जाने के नियम को कोर्ट में चुनौती दी गई है। पिटीशनर्स का कहना है कि ये गैर-कानूनी और संविधान के खिलाफ है। पिटीशन में कहा गया है कि यह नियम संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत दिए गए फंडामेंटल राइट्स को खतरे में डालता है। हाल ही में 9 जजों की की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच ने कहा था कि राइट ऑफ प्राइवेसी फंडामेंटल राइट्स के तहत आता है।
नई दिल्ली। विजय माल्या और नीरव मोदी के बैंकों से कर्ज लेकर विदेश भाग जाने के आरोपों को झेल रही मोदी सरकार ने अब एक सख्त कदम उठाया है। पंजाब नेशनल बैंक में 12,672 करोड़ फ्रॉड के बाद केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बैंकों के लिए एहतियातन नई गाइडलाइन जारी की। केंद्र सरकार ने कहा है कि 50 करोड़ से ज्यादा लोन लेने वाले नए कर्ज आवेदकों को अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ ही पासपोर्ट विवरण जमा कराना होगा, जबकि मौजूदा कर्जदारों को पासपोर्ट विवरण जमा कराने के लिए 45 दिनों की मोहलत दी गई है। ताकि अगर कोई फ्रॉड सामने आए तो बैंक वक्त रहते संबंधित अथॉरिटी को सूचना दे पाएं और आरोपी को विदेश भागने से पहले पकड़ा जा सके। मोदी सरकार की इस नई रणनीति से कर्ज लेकर विदेश भागने वालों का रास्ता बंद हो गया है। पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे।
आपको बता दें कि पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, जतिन मेहता और इस तरह के कई अन्य डिफॉल्टर विभिन्न बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर विदेश भाग चुके हैं और अब वापस आने को तैयार नहीं हैं। पंजाब नेशनल बैंक को 12,700 करोड़ रुपये तक का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी ने तो देश लौटने और विभिन्न एजेंसियों के साथ सहयोग करने से साफ तौर पर मना कर दिया है।
वहीं नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के भागने के बाद ही पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल ने फ्युजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स बिल को मंजूरी दे दी थी। बिल के तहत ऐसे भगोड़ों की जब्त की गई संपत्ति जल्द से जल्द बेच दिए जाने का प्रावधान भी है, ताकि रकम की जल्द भरपाई की जा सके।
नई दिल्ली। विजय माल्या और नीरव मोदी के बैंकों से कर्ज लेकर विदेश भाग जाने के आरोपों को झेल रही मोदी सरकार ने अब एक सख्त कदम उठाया है। पंजाब नेशनल बैंक में 12,672 करोड़ फ्रॉड के बाद केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बैंकों के लिए एहतियातन नई गाइडलाइन जारी की। केंद्र सरकार ने कहा है कि 50 करोड़ से ज्यादा लोन लेने वाले नए कर्ज आवेदकों को अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ ही पासपोर्ट विवरण जमा कराना होगा, जबकि मौजूदा कर्जदारों को पासपोर्ट विवरण जमा कराने के लिए 45 दिनों की मोहलत दी गई है। ताकि अगर कोई फ्रॉड सामने आए तो बैंक वक्त रहते संबंधित अथॉरिटी को सूचना दे पाएं और आरोपी को विदेश भागने से पहले पकड़ा जा सके। मोदी सरकार की इस नई रणनीति से कर्ज लेकर विदेश भागने वालों का रास्ता बंद हो गया है। पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे।
आपको बता दें कि पासपोर्ट विवरण नहीं होने की सूरत में बैंक अपने डिफॉल्टर्स, खास तौर पर विलफुल डिफॉल्टर्स के विदेश भाग जाने के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, जतिन मेहता और इस तरह के कई अन्य डिफॉल्टर विभिन्न बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर विदेश भाग चुके हैं और अब वापस आने को तैयार नहीं हैं। पंजाब नेशनल बैंक को 12,700 करोड़ रुपये तक का चूना लगाने वाले हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी ने तो देश लौटने और विभिन्न एजेंसियों के साथ सहयोग करने से साफ तौर पर मना कर दिया है।
वहीं नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के भागने के बाद ही पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल ने फ्युजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स बिल को मंजूरी दे दी थी। बिल के तहत ऐसे भगोड़ों की जब्त की गई संपत्ति जल्द से जल्द बेच दिए जाने का प्रावधान भी है, ताकि रकम की जल्द भरपाई की जा सके।
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकारी अस्पतालों की हालत के बारे में सख्त आदेश सुनाया। हाईकोर्ट ने चिकित्सा व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए डाक्टरों व स्टाफ के 50 फीसदी खाली पदों को शीघ्र भरने का निर्देश दिया। और साथ ही अस्पतालों और मेडिकल केयर सेंटरों की कैग से आडिट कराने तथा सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक जिले में विजिलेंस टीम गठित करने का निर्देश दिया । इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने सरकारी वेतनभोगी कर्मियों और उऩके परिवार का इलाज सरकारी अस्पताल में कराने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट न दिया जाए। कोर्ट सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि ऐसे अधिकारी, कर्मचारी जो सरकारी अस्पताल के बजाए प्राइवेट अस्पताल में इलाज करायें, उन्हें इलाज खर्च की सरकारी खजाने से भरपाई न की जाए। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खण्डपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने तथा कार्यवाही रिपोर्ट 25 सितम्बर को पेश करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर के हालात पर भी रिपोर्ट मांगी है।
आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों व स्टॉफ के खाली पदों में से 50 फीसदी चार माह में तथा शेष अगले तीन माह में भरने का निर्देश दिया है । साथ ही हर स्तर के सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने और कैग को सरकारी अस्पतालों व मेडिकल केयर सेन्टरों की आडिट दो माह में पूरी करने का आदेश दिया है। विशेष आडिट टीम फंड की उपलब्धता व उपयोग का 10 साल की आडिट करेगी। यदि कोई अनियमितता पायी जाती है कि संबंधित विभाग दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करे। बड़े सरकारी अस्पतालों के बाद जिला स्तर के अस्पतालों की भी आडिट की जाए। इसकी जांच दो माह में पूरी करने के बाद सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की भी आडिट की जाय। सारी प्रक्रिया एक साल के भीतर पूरी कर ली जाय। कोर्ट ने रेडियो डायग्नोसिस व पैथालाजी सेन्टरों की विजिलेन्स से जांच की हर जिले में टीम गठित करने का निर्देश दिया है।
इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकारी डाक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाते हुए कहा है, जो डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए पाये जाय, उनसे नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउन्स की वसूली की जाय। इलाहाबाद में ट्रामा सेन्टर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के लिए विभागीय कार्यवाही करने का भी निर्देश दिया है।
वहीं हाईकोर्ट ने झूठा हलफनामा दाखिल करने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं शिक्षा रजनीश दुबे, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद के प्राचार्य डा.एस.पी.सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी की है। कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत आपराधिक मुकदमा कायम किया जाए। यही नहीं दोनों अधिकारियों को कोर्ट ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा है कि यह बतायें कि क्यों न इनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जाए।
जयपुर (राजस्थान)। राजस्थान पुलिस ने महिलाओं प्रति बढ़ते अपराध व महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सराहनीय कदम उठाया है। जयपुर में अब मुसीबत में फंसी महिलाओं को डरने की जरुरत नहीं है । उनको तत्काल मदद पहुंचाने के लिए 26 स्कूटी सवार महिला पुलिस कंट्रोल यूनिट की 52 महिला कांस्टेबल पूरे जयपुर में चौबीस घंटे तैयार हैं।
आपको बता दें कि जयपुर पुलिस आयुक्त ने यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और मदद को लेकर यह योजना पिछले वर्ष शुरू की थी। इस योजना के तहत अभी तक ये महिला पेट्रोल यूनिट ढाई सौ से ज्यादा महिलाओं की मदद कर चुकी है। नीले रंग की यूनिफॉर्म में स्कूटी सवार महिला कांस्टेबल महिलाओं में सुरक्षा का अहसास और आत्मविश्वास तो भरती ही हैं। इसके अलावा मनचलों और अपराधियों के अपराधी मंसूबों को भी पस्त करती हैं। इन महिला पुलिसकर्मियों की रुटीन ड्यूटी भीड़-भाड़ वाले इलाकों, स्कूल- कॉलेज और बाजार में रहती है, लेकिन कंट्रोल रूम से किसी घटना की सूचना मिलने पर ये फौरन पीड़ित को मदद पहुंचाने के लिए घटना स्थल को रवाना हो जाती हैं। एक घटना पर रिपोर्ट के लिए दो स्कूटी पर सवार कुल चार महिला कांस्टेबल मौके पर पहुंचती हैं। और फिर मौके पर पहुंचते ही वाकीटाकी पर पीसीआर वैन को घटना की सूचना देती हैं, ताकि पीड़िता को जरूरत पड़ने पर अस्पताल या अन्य सुरक्षित और सुविधा जनक जगह ले जाया जा सके। घर से बाहर निकलने वाली कामकाजी महिलाएं जयपुर पुलिस की इस पहल से काफी खुशी है, और वे चाहती हैं कि इस सेवा को हमेशा के लिए जारी रखा जाए, जिससे उन्हें घर से बाहर निकलने में कोई परेशानी न हो।
जयपुर (राजस्थान)। राजस्थान पुलिस ने महिलाओं प्रति बढ़ते अपराध व महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सराहनीय कदम उठाया है। जयपुर में अब मुसीबत में फंसी महिलाओं को डरने की जरुरत नहीं है । उनको तत्काल मदद पहुंचाने के लिए 26 स्कूटी सवार महिला पुलिस कंट्रोल यूनिट की 52 महिला कांस्टेबल पूरे जयपुर में चौबीस घंटे तैयार हैं।
आपको बता दें कि जयपुर पुलिस आयुक्त ने यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और मदद को लेकर यह योजना पिछले वर्ष शुरू की थी। इस योजना के तहत अभी तक ये महिला पेट्रोल यूनिट ढाई सौ से ज्यादा महिलाओं की मदद कर चुकी है। नीले रंग की यूनिफॉर्म में स्कूटी सवार महिला कांस्टेबल महिलाओं में सुरक्षा का अहसास और आत्मविश्वास तो भरती ही हैं। इसके अलावा मनचलों और अपराधियों के अपराधी मंसूबों को भी पस्त करती हैं। इन महिला पुलिसकर्मियों की रुटीन ड्यूटी भीड़-भाड़ वाले इलाकों, स्कूल- कॉलेज और बाजार में रहती है, लेकिन कंट्रोल रूम से किसी घटना की सूचना मिलने पर ये फौरन पीड़ित को मदद पहुंचाने के लिए घटना स्थल को रवाना हो जाती हैं। एक घटना पर रिपोर्ट के लिए दो स्कूटी पर सवार कुल चार महिला कांस्टेबल मौके पर पहुंचती हैं। और फिर मौके पर पहुंचते ही वाकीटाकी पर पीसीआर वैन को घटना की सूचना देती हैं, ताकि पीड़िता को जरूरत पड़ने पर अस्पताल या अन्य सुरक्षित और सुविधा जनक जगह ले जाया जा सके। घर से बाहर निकलने वाली महिलाएं जयपुर पुलिस की इस पहल से शहर की काफी खुशी है, और वे चाहती हैं कि इस सेवा को हमेशा के लिए जारी रखा जाए।
केंद्र सरकार सड़क पर ड्राइविंग करने वाले वाहन चालकों की यात्रा को सुखद और आरामदायक बनाने जा रही है। बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को 'सुखद यात्रा' मोबाइल एप के साथ हाईवे इमरजेंसी नंबर 1033 लांच किया। नितिन गडकरी का दावा है कि 'सुखद यात्रा' ऐप, ड्राइविंग की सभी मुश्किलों से निदान दिलाएगा। इस एप की मदद से राजमार्ग पर वाहन चलाने वाला व्यक्ति सड़क की स्थिति, टोल सुविधाओं, टोल दर, प्रतीक्षा अवधि आदि का पता लग सकता है। यही नहीं, वह सड़क के गड्ढे, दुर्घटना आदि के बारे में शिकायत भी दर्ज करा सकता है। एप से फास्टैग को भी खरीदा जा सकता है। टोल फ्री नंबर 1033 डायल कर कोई भी व्यक्ति हाईवे पर दुर्घटना की सूचना आपात सेवाओं को सूचना दे सकता है। इस नंबर को एंबुलेंस तथा वाहन उठाने वाली टो-अवे क्रेन सेवाओं के साथ लोकेशन ट्रैकिंग फीचर से जोड़ा गया है। इस पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में बात की जा सकती है।
इस मोबाइल एप को डेवलप करने वाले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) का दावा है कि इस ऐप के जरिए लोगों की बहुत सी परेशानियों का एक साथ समाधान किया जा सकेगा। राज्य हाईवे से जुड़ी शिकायतें भी इस ऐप के जरिए की जा सकती हैं।
केंद्र सरकार सड़क पर ड्राइविंग करने वाले वाहन चालकों की यात्रा को सुखद और आरामदायक बनाने जा रही है। बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को 'सुखद यात्रा' मोबाइल एप के साथ हाईवे इमरजेंसी नंबर 1033 लांच किया। नितिन गडकरी का दावा है कि 'सुखद यात्रा' ऐप, ड्राइविंग की सभी मुश्किलों से निदान दिलाएगा। इस एप की मदद से राजमार्ग पर वाहन चलाने वाला व्यक्ति सड़क की स्थिति, टोल सुविधाओं, टोल दर, प्रतीक्षा अवधि आदि का पता लग सकता है। यही नहीं, वह सड़क के गड्ढे, दुर्घटना आदि के बारे में शिकायत भी दर्ज करा सकता है। एप से फास्टैग को भी खरीदा जा सकता है। टोल फ्री नंबर 1033 डायल कर कोई भी व्यक्ति हाईवे पर दुर्घटना की सूचना आपात सेवाओं को सूचना दे सकता है। इस नंबर को एंबुलेंस तथा वाहन उठाने वाली टो-अवे क्रेन सेवाओं के साथ लोकेशन ट्रैकिंग फीचर से जोड़ा गया है। इस पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में बात की जा सकती है।
इस मोबाइल एप को डेवलप करने वाले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) का दावा है कि इस ऐप के जरिए लोगों की बहुत सी परेशानियों का एक साथ समाधान किया जा सकेगा। राज्य हाईवे से जुड़ी शिकायतें भी इस ऐप के जरिए की जा सकती हैं।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। अभी तक आपने इंसानों के आधार नंबर की बात सुनी होगी। लेकिन अब सरकार आधार की तर्ज पर दुधारू पशुओं को भी यूनिक आईडी नंबर देने जा रही है। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पशुओं की जानकारी जुटाने के बाद उन्हें 12 अंकों का एक नंबर दिया जाएगा और कान में बार कोड वाला विशेष टैग लगाया जाएगा।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में गोवंश की संख्या 1 करोड़ 96 लाख जबकि भैंसवंश की संख्या 81 लाख है। योजना के पहले चरण में इन 2 करोड़ 77 लाख पशुओं में से प्रजनन योग्य 90 लाख गाय-भैंस को यह टैग लगाया जाएगा। पशुओं को यूआईडी देने का काम केंद्र सरकार के इंफॉर्मेशन नेटवर्क फॉर एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ (इनफ) योजना के तहत किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से एक क्लिक पर पशु और मालिक से जुड़ी तमाम जानकारी इकट्ठा हो जायेगी। वहीं पशु की नस्ल, उम्र, आखिरी प्रजनन और गर्भाधान का समय, दूध की मात्रा, बीमारियां, दी जाने वाली दवाइयां आदि का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही मालिक का नाम, पता आदि भी दर्ज होगा।
भोपाल मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पशुओं को यूआईडी देने की योजना डेढ़ साल पहले बनी थी। चार जिलों आगर मालवा, शाजापुर, धार और खरगोन में इसे पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था। वहां सफल होने के बाद इसे सभी जिलों में लागू किया जा रहा है। पशु चिकित्सा सेवा के उपसंचालक सीके रत्नावत ने बताया कि जब कोई पशु सरकारी अस्पताल आता है तो उसकी सही उम्र, नस्ल, प्रजनन, बीमारी संबंधी जानकारी नहीं होती। इससे इलाज में परेशानी होती है। यूआईडी नंबर से उसकी जानकारी मिलेगी तो डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री ध्यान में रख इलाज करेगा।
वहीं एचबीएस भदौरिया, प्रबंध संचालक, मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम का कहना है कि अभी तक देश में पशुओं का व्यवस्थित और पूरा रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर यह कार्यक्रम शुरू किया गया है ताकि दुधारू पशुओं के प्रजनन तथा स्वास्थ्य संबंधी मामले में बेहतर सेवाएं दी जा सके। प्रदेश में पहले चरण में 90 लाख प्रजनन योग्य गो-भैंसवंश को टैग लगाया जाएगा और जानकारी सॉफ्टवेयर पर अपलोड होगी। इससे पशुओं का व्यवस्थित और पूरा रिकार्ड रखा जा सकेगा।
केंद्र सरकार के तमाम दावों के बावजूद अब तक 87 करोड़ बैंक खाते और 60 फीसदी मोबाइल नंबर ही अब तक लिंक हो पाए हैं। आधार-लिंकिंग की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, लेकिन स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में जब सिर्फ एक महीने से भी कम का समय रह गया है अब तक सिर्फ 60 फीसद मोबाइल नंबर ही आधार से जोड़े जा पाए हैं। वहीं आधार सेंटरों पर आधार से मोबाइल या बैंक अकाउंट लिंक करवाने के लिए लोग सुबह से शाम तक लाइन में लगे हुए हैं, लेकिन उनका आधार लिंक नहीं हो पा रहा है। इस समस्या के बारे में आधार सेंटर के अधिकारियों का कहना है कि उनके यहां प्रतिदिन 25 से 70 लोगों के आधार ही लिंक किए जा सकते हैं। ऐसी दशा में वे जनता की कोई मदद नहीं कर सकते हैं। गौरतलब है कि सभी मोबाइल नंबर को आधार से जोड़े जाने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2018 है।
इतना हीं नहीं अब केंद्र सरकार अब आधार को लेकर एक और फैसला करने जा रही है। आईटी एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए वो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से वह बातचीत कर रहे हैं। जबकि अभी तक सभी मोबाइल सिम और बैंक खातों को आधार से जोड़ा नहीं जा सका है।
सिरमौर (हिमाचल प्रदेश)। नाहन के हेड कांस्टेबल को चेक बाउंस के मामले में रिश्वत लेना मंहगा पड़ गया। चेक बाउंस मामले में तीन हजार रुपये रिश्वत लेने का अभियोग साबित होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरमौर ने हेड कांस्टेबल को चार साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 45 हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा। जुर्माना नहीं देने की सूरत में छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
आपको बता दें कि चेक बाउंस मामले में आरोपी को गिरफ्तारी से बचाने के लिए हेड कांस्टेबल ने रिश्वत की मांग की थी। विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर पुलिसकर्मी को रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। जिला न्यायवादी एमके शर्मा और स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो के अधिवक्ता सुनील वासुदेवा ने संयुक्त रूप से मामले की पैरवी की। जिला न्यायवादी एमके शर्मा ने बताया कि पच्छाद के फागला निवासी सतीश कुमार ने जून 2013 में भेलन निवासी वीरेंद्र सिंह को एक लाख का चेक दिया। बैंक खाते में राशि न होने से चेक बाउंस हो गया। वीरेंद्र ने इसकी शिकायत अदालत में की। अदालत ने सतीश कुमार के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर एसएचओ पच्छाद को उसकी गिरफ्तारी के आदेश दिए। मुख्य आरक्षी (एचएचसी) हरि कृष्ण पच्छाद में कार्यरत था। हरिकृष्ण ने सतीश को फोन किया और उसकी गिरफ्तारी की सूचना दी। हेड कांस्टेबल ने गिरफ्तारी से बचाने के लिए सतीश से तीन किस्तों में नौ हजार रुपये की मांग की। सतीश ने इसकी शिकायत विजिलेंस से की। विजिलेंस ने जाल बिछाया और आरोपी पुलिस कर्मी को तीन हजार रुपये देने के लिए बुलाया। 28 जनवरी, 2014 को सराहां में सब्जी की दुकान के समीप ही सतीश ने हरिकृष्ण को तीन हजार दिए। विजिलेंस टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। जिला न्यायवादी ने बताया कि इसके बाद विजिलेंस में भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अदालत में 26 गवाह और दलीलों के दम पर यह अभियोग साबित किया गया। अदालत ने आरोपी एचएचसी हरि कृष्ण निवासी गड्डा बुड्डी को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा सात के तहत तीन साल कैद और 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
दिल्ली। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने डोर स्टेप डिलीवरी योजना को लेकर उप राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्वी दिल्ली जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंचे मनीष सिसोदिया ने आरोप उपराज्यपाल पर आरोप लगाया कि यहां लोग एक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चार-पांच दिनों से कार्यालयों का चक्कर लगा रहे है। बुजुर्ग यहां कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि बगैर दलालों को पैसा दिए यहां पर काम नहीं होता है। इसी भ्रष्ट सिस्टम को खत्म करने के लिए वह डोर स्टेप डिलीवरी योजना लेकर आ रहे थे।
मनीष सिसोदिया का कहना है कि इस योजना के तहत जिसे प्रमाण पत्र बनवाना था वह कॉल सेंटर में कॉल करता। सूचना मिलने के बाद सरकार का कर्मचारी उसके घर जाता। उसकी बायोमैट्रिक पहचान, आंखों की पुतली भी स्कैन करता। दस्तावेज जमा करता। फिर जांच के बाद आवेदक को प्रमाण पत्र घर पहुंचाता। जबकि एलजी साहब का कहना है कि इससे प्रदूषण बढ़ जाएगा। आगे उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना से प्रदूषण नहीं बढ़ेगा, बल्कि इससे भ्रष्ट सिस्टम खत्म हो जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जब मैंने लोगों से बात की तो पता चला कि वे चार पांच दिन से यहां काम कराने आ रहे हैं। लेकिन वहीं उपराज्यपाल साहब को लाइन में खड़े लोगों और सरकारी कार्यालयों के बाहर बैठे बिचौलिये नहीं दिखाई दे रहे हैं।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह उपराज्यपाल साहब से आग्रह करते हैं कि एक दिन वह बिना बताएं किसी सरकारी कार्यालय जाकर वहां के हालात देखें। वहीं बीजेपी के सवाल उठाने पर सिसोदिया ने कहा कि वह आम लोगों को बरगलाना बंद करें। उन्हें बीजेपी पर आरोप लगाया कि उन्हें लोगों की नहीं बल्कि कंपनियों की चिंता है। साथ ही सवाल किया कि क्या बिचौलिये बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। फिर वह क्यों भ्रष्टाचार खत्म करने वाली योजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पिज्जा, क्रेडिट कार्ड की होम डिलीवरी हो सकती है तो प्रमाण पत्र क्यों नहीं हो सकता है।