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लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार पर बार कोडिंग की नई व्यवस्था शुरू की है। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की कालाबाजारी को रोकने के लिए ये नई पहल की है। इतना ही नहीं पुष्टाहार अब बाल विकास परियोजना कार्यालय के बजाय सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जायेगा। सरकार ने पुष्टाहार की विविधता बढ़ाने के लिए इसमें नमकीन व मीठा दलिया के साथ ही प्रीमिक्स लड्डू को भी शामिल किया है।
योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को 14 मंडल समूहों में पुष्टाहार सप्लाई के लिए हुए न्यूनतम रेट लगाने वाली फर्मों के टेंडर फाइनल कर दिए। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की सप्लाई के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किये थे। इस बार प्रदेश के 18 मंडलों को 14 हिस्सों में बांटकर यह टेंडर किये गए थे। कैबिनेट ने टेंडर में पुष्टाहार सप्लाई की आई न्यूनतम दरों को मंजूरी दे दी है। पुष्टाहार की सप्लाई में कोई घपला न हो इसलिए इसमें अलग-अलग रंग के पैकेट रखे गए हैं। बच्चे, गर्भवती महिलाएं व धात्री महिलाएं सभी के लिए पोषाहार के पैकेट अलग-अलग रंग के होंगे। पुष्टाहार के पैकेटों की बार कोडिंग से यह पता चल जायेगा कि पोषाहार का पैकेट किस आंगनबाड़ी केंद्र का है। इससे पोषाहार की कालाबाजारी करने वालों को पकड़ा जा सकेगा। इस बार पुष्टाहार की सप्लाई करने वाली पांच कंपनियां यूपी के बाहर की हैं। इनमें तमिलनाडु, गुवाहाटी व राजस्थान की एक-एक व झारखंड की दो कंपनियां शामिल हैं।
नई दिल्ली। सरकार ने लोगों को अपनी स्थायी खाता संख्या (पैन) को बायोमीट्रिक पहचान आधार से जोड़ने के लिए चौथी बार समयसीमा बढ़ाई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने आधार से पैन लिंक करने की डेडलाइन बढ़ा दी है। अब 30 जून तक पैन को आधार से लिंक किया जा सकता है। अभी तक यह समयसीमा 31 मार्च थी। आदेश में कहा गया है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए पैन- आधार को जोड़ने की समयसीमा बढ़ाई जा रही है। आधार को पैन कार्ड से इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाकर लिंक किया जा सकता है।
आपको बता दें कि अब तक 16.65 करोड़ लोगों ने अपने पैन को आधार से लिंक करा लिया है। देश में करीब 33 करोड़ लोगों के पास पैन (स्थायी खाता संख्या) है। सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने और नया पैन लेने के लिए आधार नंबर को देना अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं किसी को पैन कार्ड बनवाना है तो उसके लिए भी आधार अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक पांच जजों वाली कांस्टीट्यूशन बेंच का अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक कोई अंतिम तिथि नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट विभिन्न सेवाओं को आधार से जोड़ने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। समझा जाता है कि सीबीडीटी का ताजा आदेश उच्चतम न्यायालय के इसी महीने आए आदेश के मद्देनजर आया है।
हिमाचल प्रदेश में NOC कैसे प्राप्त करें
अधिकार एक्सप्रेस के इस नए वीडियो में आपका स्वागत है। आज हम इस वीडियो में आपको बताएँगे कि किस तरह आप हिमाचल प्रदेश में बहुमंजिले भवन, उद्योग, स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, नर्सिंग होम और हास्पिटल जैसे भवनों की अग्नि सुरक्षा के लिए कैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
आवश्यकता पड़ने पर आप नीचे दिए गए पते पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी
हिमाचल प्रदेश, शिमला-2
ई-मेल This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
फोन नंबर. 0177-2629945
फैक्स नंबर. 0177-2622945
हिमाचल प्रदेश में अपील कैसे करें
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नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय आधार की कानूनी वैधता को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है, वहीं भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने एलान किया है कि वह अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों के अलावा अब चेहरे की पहचान को भी एक जुलाई से शामिल करने को तैयार है।
आपको बता दें कि यूआईडीएआई ने जनवरी में ही एलान किया था कि वह चेहरे के पहचान के फीचर को भी शामिल करेगा। इस फीचर से खासतौर पर उन लोगों को फायदा होगा, जिनके अंगुलियों के निशान या आंख को स्कैन करने में दिक्कतें आ रही हैं। यूआइडीएआइ का कहना है कि चेहरे की पहचान वाला फीचर फिंगरप्रिंट, आइरिश या ओटीपी में से किसी एक के साथ होगा। यूआइडीएआइ के सीईओ अजय भूषण पांडे ने पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि चेहरे की पहचान के फीचर को एक जुलाई से शुरू कर देगा। उनका कहना था कि अब तक 1,696.38 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन और 464.85 करोड़ ई-केवाइसी ट्रांजेक्शन हो चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह बात सुरक्षा संबंधी जानकारी देते हुए सर्वोच्च न्यायालय से कही थी।
गौरतलब है कि यूआईडीएआई ने एक सप्ताह पहले ही एलान किया था कि रिजनल सेंटर के अलावा आप डाकघर से भी आधार का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। देशभर के 6500 से ज्यादा डाकघर में आधार के रजिस्ट्रेशन के साथ ही इसे अपडेट भी किया जाएगा। यूआईडीएआई जल्दी ही 13 हजार पोस्ट ऑफिस तक यह सुविधा पहुंचाएगी। आप चाहें तो अपडेट सेंटर्स की लिस्ट यूआईडीएआई की वेबसाइट uidai.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल करके भी इस बारे में जानकारी ले सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में फायर ब्रिगेड की NOC कैसे प्राप्त करें
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जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने शुक्रवार को राज्य कर्मचारियों को डीए का तोहफा दिया है। सरकार ने कर्माचारियों का महंगाई भत्ता और पेशनर्स की महंगाई राहत दर में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है । मंहगाई भत्ता और पेंशनर्स की मंहगाई दर में बढ़ोतरी का यह आदेश 1 जनवरी,2018 से लागू होगा । वसुंधरा राजे सरकार के इस आदेश से राजस्थान के करीब 8 लाख कर्मचारी और 3.5 लाख पेंशनर्स लाभान्वित होंगे ।
आपको बता दें कि जनवरी और फरवरी माह के बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि संबंधित कर्मचारियों के सामान्य प्रावधायी निधि खातों में जमा की जाएगी और 1मार्च,2018 से नकद भुगतान किया जाएगा । 1 जनवरी,2004 एवं इसके बाद नियुक्त राज्य कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा । सरकार के इस फैसले से राज्य पर वार्षिक 975 करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा । वहीं सरकार के इस फैसले से राज्य के कर्मचारियों में भारी खुशी का माहौल है।
जयपुर (राजस्थान)। वसुंधरा राजे सरकार ने शुक्रवार को राज्य कर्मचारियों को डीए का तोहफा दिया है। सरकार ने कर्माचारियों का महंगाई भत्ता और पेशनर्स की महंगाई राहत दर में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है । मंहगाई भत्ता और पेंशनर्स की मंहगाई दर में बढ़ोतरी का यह आदेश 1 जनवरी,2018 से लागू होगा । वसुंधरा राजे सरकार के इस आदेश से राजस्थान के करीब 8 लाख कर्मचारी और 3.5 लाख पेंशनर्स लाभान्वित होंगे ।
आपको बता दें कि जनवरी और फरवरी माह के बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि संबंधित कर्मचारियों के सामान्य प्रावधायी निधि खातों में जमा की जाएगी और 1मार्च,2018 से नकद भुगतान किया जाएगा । 1 जनवरी,2004 एवं इसके बाद नियुक्त राज्य कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा । सरकार के इस फैसले से राज्य पर वार्षिक 975 करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा । वहीं सरकार के इस फैसले से राज्य के कर्मचारियों में भारी खुशी का माहौल है।
जयपुर (राजस्थान)। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार ने सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का तोहफा दिया है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रही राजस्थान सरकार ने सरकारी डॉक्टर्स की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है। सर्विस रूल्स में संशोधन के बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को राज्यपाल कल्याण सिंह की अनुमति के लिए भेज दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव लागू हो जाएगा।
आपको बता दें कि राजस्थान में डाक्टरों की बहुत कमी है। जिसके चलते ही सरकार ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाए जाने के बाद विभिन्न विषयों के अनुभवी डॉक्टर्स पहले से अधिक उपलब्ध हो सकेंगे। 61 बड़े विशेषज्ञ और सर्जन आगामी दिनों में सेवानिवृत्ति होने वाले थे, अब वे इस फैसले के बाद अगले तीन वर्ष तक काम करेंगे। गौरतलब है कि काफी समय से डॉक्टर्स की भर्ती नहीं हो पाने के कारण प्रदेश में चिकित्सकों की काफी कमी थी। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने सीनियर डाक्टरों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाई है।
जयपुर (राजस्थान)। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार ने सरकारी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का तोहफा दिया है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रही राजस्थान सरकार ने सरकारी डॉक्टर्स की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है। सर्विस रूल्स में संशोधन के बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को राज्यपाल कल्याण सिंह की अनुमति के लिए भेज दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव लागू हो जाएगा।
आपको बता दें कि राजस्थान में डाक्टरों की बहुत कमी है। जिसके चलते ही सरकार ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाए जाने के बाद विभिन्न विषयों के अनुभवी डॉक्टर्स पहले से अधिक उपलब्ध हो सकेंगे। 61 बड़े विशेषज्ञ और सर्जन आगामी दिनों में सेवानिवृत्ति होने वाले थे, अब वे इस फैसले के बाद अगले तीन वर्ष तक काम करेंगे। गौरतलब है कि काफी समय से डॉक्टर्स की भर्ती नहीं हो पाने के कारण प्रदेश में चिकित्सकों की काफी कमी थी। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने सीनियर डाक्टरों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाई है।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। लोकायुक्त पुलिस ने एक रिश्वतखोर कर्मचारी पंचायत सचिव को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है। मिर्जापुर ग्राम पंचायत का ये सचिव आठ हजार रुपए की रिश्वत ले रहा था तभी लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। वह एक प्लॉट का नक्शा पास करने के एवज में रिश्वत की मांग रहा था। हैरानी की बात यह है कि जब लोकायुक्त पुलिस ने उसे पकड़ा तो वह कहने लगा पैसे ऊपर भी देने पड़ते हैं और मेरे हाथ तो कुछ लगता ही नहीं है। पुलिस अब उसके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
एसपी लोकायुक्त दिलीप सोनी का कहना है कि रामनगर मूसाखेड़ी निवासी भारत पटेल के शिकायत के आधार पर विनोद प्रजापति के खिलाफ कार्रवाई की गयी और उसे रंगेहाथ पकड़ा गया। विनोद प्रजापति के खिलाफ कार्रवाई करने वाले डीएसपी प्रवीण सिंह बघेल ने बताया कि पटेल का रामजी वाटिका फेस टू में 1050 वर्गफीट का प्लॉट है। इस प्लाट में मकान बनाने की अनुमति मिर्जापुर ग्राम पंचायत देती है। मकान बनाने के लिए जब प्रजापति से संपर्क किया तो उसने कहा 10 हजार रुपए ऑनलाइन भरने होंगे। साथ ही 10 हजार अलग से खर्च करने पड़ेंगे। इतना ही नहीं फाइल तैयार करने के तीन हजार रुपए भी लगेंगे। पीड़ित भारत पटेल का कहना है कि विनोद प्रजापति ने उससे तीन हजार रुपए ले लिए थे। और वह बाकी 10 हजार रुपए मांग रहा था, लेकिन उसने 10 हजार रिश्वत देने की बजाय इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस से कर दी। डीएसपी बघेल ने बताया शिकायत के बाद गुरुवार रात पटेल को एक बार फिर पंचायत सचिव के घर भेजा गया। जब भारत पटेल रिश्वत की राशि लेकर प्रजापति के पास पहुंचा तो उसने कहा कि आठ हजार रुपए से कम में वह उसका काम नहीं करेगा। इसके बाद शुक्रवार को लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाकर उसे ऑफिस में रुपए लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया । अब आरोपी पंचायत सचिव से पूरे मामले पर पूछताछ की जा रही है।
रोहतक (हरियाणा)। प्रदेश सरकार ने टीबी मरीजों के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यदि कोई निजी डॉक्टर या केमिस्ट टीबी से ग्रसित किसी मरीज को दवाई देता है और इलाज करता है, लेकिन इसकी सूचना जिला के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या जिला टीबी अधिकारी को नहीं देता है तो इसके लिए उसे अपराधी माना जाएगा। भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। धारा 269 के तहत छह माह तक सजा और जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान किया गया है। वहीं प्राथमिक स्तर पर अगर कोई डॉक्टर या केमिस्ट टीबी की बीमारी से ग्रसित मरीज के बारे में सूचना देता है तो उसे 500 रुपये मिलेंगे। इतना ही नहीं मरीज को भी न्यूट्रिशनल सपोर्ट के लिए हर महीने 500 रुपये दिए जाएंगे। हालांकि इस राशि को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपना बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड उपलब्ध कराना होगा। यह राशि लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जायेगी।
आपको बता दें कि सरकार की ओर से टीबी के मरीजों को चिह्नित करने और उनका इलाज करा कर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह इंतजाम किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी या विश्व क्षयरोग दिवस मनाया जाता है। पूरे विश्व में वर्ष 2030 और भारत में वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार टीबी के संक्रमण को रोकने और उसे खत्म करने का प्रयास में लगी हुई है।
रोहतक (हरियाणा)। प्रदेश सरकार ने टीबी मरीजों के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यदि कोई निजी डॉक्टर या केमिस्ट टीबी से ग्रसित किसी मरीज को दवाई देता है और इलाज करता है, लेकिन इसकी सूचना जिला के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या जिला टीबी अधिकारी को नहीं देता है तो इसके लिए उसे अपराधी माना जाएगा। भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। धारा 269 के तहत छह माह तक सजा और जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान किया गया है। वहीं प्राथमिक स्तर पर अगर कोई डॉक्टर या केमिस्ट टीबी की बीमारी से ग्रसित मरीज के बारे में सूचना देता है तो उसे 500 रुपये मिलेंगे। इतना ही नहीं मरीज को भी न्यूट्रिशनल सपोर्ट के लिए हर महीने 500 रुपये दिए जाएंगे। हालांकि इस राशि को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपना बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड उपलब्ध कराना होगा। यह राशि लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जायेगी।
आपको बता दें कि सरकार की ओर से टीबी के मरीजों को चिह्नित करने और उनका इलाज करा कर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह इंतजाम किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी या विश्व क्षयरोग दिवस मनाया जाता है। पूरे विश्व में वर्ष 2030 और भारत में वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार टीबी के संक्रमण को रोकने और उसे खत्म करने का प्रयास में लगी हुई है।
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डूंगरपुर (राजस्थान)। जिले में रिश्वतखोरी का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 55 उच्च माध्यमिक और माध्यमिक स्कूलों में वित्तीय घपलों की जांच की जिम्मेदारी संभालने वाले 8 ऑडिटर्स ही रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। मामले के जांच के आखिरी दिन एसीबी ने इन्हें घपले दबाने की एवज में 10 से 15 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
इन आरोपियों कि गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने बताया कि ऑडिट टीम में शामिल आडिटर्स ने लेखा रिकॉर्ड व कैशबुक में स्कूल स्तर पर हुए घपले को दबाने और ऑडिट आक्षेप नहीं लगाने के एवज में स्कूल के प्रिंसिपल और कैशियर से ये रिश्वत ली। इन आरोपी आडिट अफसरों की जेबों से 18,235 रुपए नकद के अलावा होटल के कमरों सहित कुल 81,735 रु. बरामद किए गए। इतना ही नहीं अब इनके बैंक अकाउंट की भी जांच की जाएगी। इन आरोपियों में सीनियर आडिटर बाबूलाल मीणा, सहायक लेखाधिकारी सुरेंद्र रैगर, सहायक लेखाधिकारी राजाराम विश्नोई, वरिष्ठ लेखा परीक्षक रामकरण मीणा, लेखापरीक्षक शेखर शर्मा, सीनियर आडिटर पवन कुमार, सहायक लेखाधिकारी सीताराम मीणा, वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी जगन्नाथ प्रसाद कोली के नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि प्रधान महालेखाकार (सामान्य एवं सामाजिक क्षेत्र लेखा परीक्षा) जयपुर ने 9 मार्च को डीईओ माध्यमिक डूंगरपुर के 55 उमावि और मावि के तीन साल के लेखा कार्यों की जांच कराने के आदेश दिए थे। 12 मार्च से शुरू हुए इस आडिट का बुधवार को आखिरी दिन था। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
नई दिल्ली। दिल्ली में आए दिन आग लगने की दुर्घटनाए होती रहती हैं, जिसका खामियाजा दिल्ली वालों को भुगतना पड़ता है। आपात स्थिति में सबसे ज्यादा दुर्घटना उस वक्त होती है जब बचाव दल समय पर घटना स्थल पर नहीं पहुंच पाता है। दिल्ली में लगने वाले यातायात जाम से बचाव दल किसी भी हालत में घटना स्थल पर समय पर नहीं पहुंच पाता है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने एक नई पहल की है, जिसके तहत दमकल विभाग की गाड़ियों का रास्ता रोकने वालों की पहचान करके उन्हें दंडित किया जा सके। दिल्ली सरकार ने दमकल गाड़ियों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है। सभी दमकल गाड़ियों में जीपीएस लगाया जाएगा ताकि उनकी स्थिति पर नजर रखी जा सके।
दिल्ली के गृहमंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा कि सरकार ने सभी दमकल गाड़ियों के सामने सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है ताकि आपात स्थिति में उनका मार्ग रोकने वाले वाहनों की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहनों की नंबर प्लेट के जरिए पहचान की जाएगी और सरकार नियमों के उल्लंघन के मामले में उनके चालान काटेगी। सत्येन्द्र जैन ने बताया कि दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली अग्नि शमन सेवा की बैठक में कहा कि दिल्ली फायर सर्विस को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना चाहिए. जिससे दिल्ली में आए दिन हो रही अग्नि दुर्घटनाओं को कुशलतापूर्वक रोका जा सके।
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान देशभर में एससी/एसटी एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को स्वीकार करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के तहत अपराध में नए दिशा निर्देश जारी किए। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया है कि ऐसे मामले में अब तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। इतना ही नहीं गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है और गिरफ्तारी से पहले जमानत भी दी जा सकती है। कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है और जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है, उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी। हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया गया है कि गिरफ्तारी की इजाजत लेने के लिए उसकी वजहों को रिकॉर्ड पर रखना होगा।
इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने की। बेंच ने ऐसे मामलों में नए सिरे से गाइडलाइंस जारी की हैं। जस्टिस गोयल ने फैसला सुनाते हुए देश की सभी निचली अदलतों के मजिस्ट्रेट को निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत उन्हें कहा गया है कि एससी/एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने के आरोपी को जब मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए तो उस वक्त उन्हें आरोपी की हिरासत बढ़ाने का फैसला लेने से पहले गिरफ्तारी की वजहों की समीक्षा करनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला पुणे के राजकीय फार्मेसी कॉलेज, कारद में पोस्टेड अफसर डा. सुभाष काशीनाथ महाजन की याचिका का पर दिया। महाजन पर कालेज के एक कर्मचारी ने केस किया था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दे दी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इसके लिए नई गाइडलाइंस दी हैं। जिसमें कहा गया है कि 1. ऐसे मामलों में निर्दोष लोगों को बचाने के लिए कोई भी शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सबसे पहले शिकायत की जांच डीएसपी लेवल के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी। यह जांच समयबद्ध होनी चाहिए। जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा समय तक न हो। डीएसपी शुरुआती जांच कर नतीजा निकालेंगे कि शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या फिर तरीके से झूठे आरोप लगाकर फंसाया जा रहा है? 2. ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है और जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है, उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी। हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया गया है कि गिरफ्तारी की इजाजत लेने के लिए उसकी वजहों को रिकॉर्ड पर रखना होगा। 3. सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा कि इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। 4. एससी/एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने के आरोपी को जब मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए तो उस वक्त उन्हें आरोपी की हिरासत बढ़ाने का फैसला लेने से पहले गिरफ्तारी की वजहों की समीक्षा करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन दिशा. निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अफसरों को विभागीय कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाही का भी सामना करना होगा।
अब तक एससी/एसटी एक्ट के मामलों में ये प्रावधान थे। जिसमें 1. एससी/एसटी एक्ट में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होता था। 2. ऐसे मामलों में जांच केवल इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर ही करते थे। 3. सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को कर्मचारी के विभागाध्यक्ष से इसकी इजाजत लेनी होती थी। 4. मामले में तुरंत गिरफ्तारी का भी प्रावधान था। 5. ऐसे मामलों में कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत नहीं दी जाती थी। नियमित जमानत केवल हाईकोर्ट के द्वारा ही दी जाती थी। 6. ऐसे मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट करती थी।
गौरतलब है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा 2016 में एससी/एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई थी। जिसमें देशभर में जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के 11060 शिकायतों की जांच पुलिस ने की। इन शिकायतों में से 935 शिकायतें झूठी पाई गई थी। वहीं लोगों का आरोप है कि कुछ लोग अपने फायदे और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
अजयगढ़, पन्ना (मध्य प्रदेश)। प्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं । ताजा मामला तहसील अजयगढ़ का है। जहां लोकायुक्त पुलिस की टीम ने मंगलवार को बाबू राजेश रावत को तहसील कार्यालय में बीपीएल कार्ड बनाने के नाम पर ग्रामीण से 1500 रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
लोकायुक्त पुलिस की सागर टीम के टीआई वीएन द्विवेद्वी का कहना है कि 14 मार्च को माखनपुर निवासी मुन्नालाल साहू ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि तहसील के बाबू राजेश रावत ने बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए उससे दो हजार रुपए की मांगे हैं। उसका कहना था कि उसने बाबू को 500 रुपए पहले ही दे दिए थे। इसके बावजूद बाबू कई दिनों से 1500 रुपए की मांग कर रहा था। बाबू की इस करतूत से परेशान होकर मुन्नालाल ने मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस कर दी। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन कराने के बाद मंगलवार बाबू के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दिया। टीआई वीएन द्विवेदी के अनुसार लोकायुक्त टीम ने मुन्नालाल को कलर लगे नोट देकर तहसील कार्यालय में ही बाबू को देने के लिए भेजा। जैसे ही राजेश ने मुन्नालाल से रिश्वत के नोट लिए, वैसे ही लोकायुक्त टीम ने छापा मारकर रिश्वत लेते हुए बाबू राजेश रावत को गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त पुलिस की टीम अब पूरे मामले की जांच में जुट गयी है।
इटावा (उत्तर प्रदेश)। सरकार के तमाम दावों के बावजूद एआरटीओ में रिश्वतखोरी रुकने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को देर रात पुलिस ने एआरटीओ कार्यालय, लिपिक व दलाल के यहां छापेमारी की कार्रवाई की । इस कार्रवाई में पुलिस ने लाखों रुपये की नकदी व सोना चांदी बरामद करने के साथ ही एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन व एआरटीओ प्रवर्तन मोहम्मद अजीम को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सोमवार को लखनऊ के एंटी करप्शन न्यायालय में भेज दिया गया।
इन आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में मुकदमे दर्ज कराया गया था। इस एफआईआर में आगरा के जैतपुर निवासी प्रदीप गुप्ता, इटावा के एआरटीओ प्रवर्तन मो. अजीम, एआरटीओ प्रशासन हिमांशु जैन, लिपिक बेबी व कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी को नामजद किया गया है। इसके बाद साक्ष्य मिलने पर एआरटीओ हिमांशु जैन व मो. अजीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 28 लाख 63 हजार 774 रुपये नकद, दो किग्रा सोना, 10 किलो चांदी बरामद किया है।
एसएसपी वैभव कृष्ण का कहना है कि नगर मजिस्ट्रेट शमशाद हुसैन व सीओ अंजलि चतुर्वेदी की टीम ने एआरटीओ कार्यालय में छापामारी के दौरान प्रदीप गुप्ता से तीन लाख तीन हजार रुपये नकद, दो लाख 37 हजार की चेक व डायरी बरामद की हैं। एआरटीओ कार्यालय से काफी ऐसे प्रपत्र मिले जिस पर प्रदीप गुप्ता खुद हस्ताक्षर करता था। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस में यह बात सामने आई है कि वह एआरटीओ प्रशासन के नाम से हस्ताक्षर करता था। एआरटीओ प्रवर्तन भी अलग-अलग तिथियों में गाडिय़ों का चालान करने के लिए प्रदीप गुप्ता को भेजते थे। वह उनके हस्ताक्षर बनाकर चालान काट देता था। यह सब दोनों एआरटीओ के संज्ञान में था। पिछले कई दिनों से वह वाहनों के नकली कागज तैयार करता रहा है। मुरैना के वाहन स्वामी रमेश तोमर की फर्जी आइडी लगाकर परमिट बनाने का मामला भी सामने आया है। वह रविवार को भी आफिस खुलवाकर काम करता था।
गौरतलब है कि इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम ताखा घनश्याम वर्मा व सीओ जसवंतनगर एसएन वैभव पांडेय की टीम ने प्रदीप के जैतपुर स्थित आवास 19.41 लाख नकद, सोना चांदी, कार्यालय की 45 मुहरें, पांच बोरों में एआरटीओ कार्यालय की फाइलें और रजिस्टर बरामद किए हैं। वहीं लिपिक बेबी के घर से एसडीएम सदर सिद्धार्थ व सीओ चकर नगर उत्तम ङ्क्षसह ने 6.19 लाख नकद, 17 चांदी के बिस्कुट, अस्थायी परमिट की 30 बुकलेट व रजिस्टर बरामद किए हैं। वहीं पुलिस अब आगे की कार्रवाई में जुट गयी है, और पूरे मामले की जांच कर रही है।
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