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निवास स्थान/निवास प्रमाण पत्र साधारणत: यह साबित करने के लिए जारी किया जाता है कि प्रमाण पत्र धारण करने वाला व्यक्ति उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का निवासी है जिसके द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है। इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता निवास के प्रमाणपत्र के रूप में होती है, जिससे कि शैक्षिक संस्थानों और सरकारी सेवाओं में निवास स्थान/निवास का कोटा लिए जा सकते हैं और नौकरी के मामले में भी जहां स्थानीय निवासियों को वारीयता दी जाती है।
निवास स्थान प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए क्या करें
निर्धारित आवेदन पत्र या तो ऑनलाइन उपलब्घ होते हैं या स्थानीय प्राधिकारियों से अर्थात सब डिविजनल मजिस्ट्रेट/तहसीलदार का कार्यालय/राजस्व विभाग/जिला कलेक्टर का कार्यालय या अन्य प्राधिकारी जैसा कि आपके निवास के राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा विनिर्दिष्ट है। आपको निर्धारित न्यूनतम अवधि के लिए लगातार राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में निवास करने का प्रमाण देने की आवश्यकता होगी या राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में भूमि रखने का यह संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के नियमों पर निर्भर करता है। अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज, आवश्यकता प्राधिकारी के अधिकारी द्वारा फॉर्म को अनुप्रमाणीकरण, स्कूल प्रमाण पत्र और तहसील की पूछताछ रिपोर्ट की भी आवश्यकता हो सकती है। महिलाएं, जो राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में मूलरूप से रहती हैं परन्तु ऐसे पुरूषों से विवाह करती हैं जो स्थायी रूप से राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में निवास करते हैं, जो राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के निवास स्थान प्रमाण पत्र के पात्र है, वे निवास स्थान प्रमाण पत्र के लिए पात्र है।
टिप्पणी:
निवास स्थान प्रमाण पत्र केवल एक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में बनाए जा सकते हैं। एक से अधिक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से निवास स्थान प्रमाण पत्र प्राप्त करना एक अपराध हैं।
उत्तर प्रदेश में जनहित गारंटी अधिनियम के तहत राजस्व विभाग में निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए 20 कार्य दिवस निर्धारित किया गया है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था के खिलाफ महासंग्राम शुरु हो गया है। नई पेंशन प्रणाली को धोखा करार देते हुए राज्य कर्मचारियों ने सोमवार को काला दिवस मनाया। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर प्रदेश के सभी जिलों में कर्मचारियों ने धरना दिया और उनकी मांग न माने जाने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी। लखनऊ समेत प्रदेश के दूसरे जिलों में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले आयोजित सभा में कहा गया कि देश में दोहरी संवैधानिक व्यवस्था चल रही है। राज्य कर्मचारियों का कहना था कि एक तरफ जनप्रतिनिधियों (विधायकों और सांसदों ) की पेंशन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है तो वहीं 20 से 30 साल की सेवा के बाद शासकीय सेवकों को पेंशन से वंचित किया जा रहा है। लखनऊ में कर्मचारी नेता बीएन सिंह की प्रतिमा के सामने आयोजित आम सभा में कहा गया कि नई पेंशन व्यवस्था लागू कर कर्मचारियों को छला जा रहा है। इस सभा में कर्मचारी नेताओं ने नई पेंशन व्यवस्था को मानने से इनकार कर दिया और एलान किया कि जल्दी ही नई पेंशन व्यवस्था के विरोध में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
इस मौके पर परिषद के मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव का कहना था कि पुरानी पेंशन व्यवस्था राज्यकर्मियों के बुढ़ापे का सहारा थी, जिसे हटाकर एक जनवरी 2004 से केंद्र में और एक अप्रैल 2005 से राज्य में नई अंशदायी पेंशन व्यवस्था लागू कर दी गई है। मनोज श्रीवास्तव ने आगे बताया कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी चुनाव से पहले वादा किया था कि केंद्र में भाजपा सरकार बनी तो पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने पर विचार किया जाएगा। इतना ही नहीं कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 50 सांसद भी पुरानी पेंशन बहाली योजना पर पुनर्विचार के लिए सहमत हैं। वहीं एनडीए सरकार को बने चार साल से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन अभी तक नई पेंशन व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं किया गया है। इस वजह से राज्य के कर्माचरियों में काफी निराशा की भावना है। जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
क्रेडिट कार्ड क्या है
क्रेडिट कार्ड बैंकों द्वारा दी जाने वाली एक ऐसी उधार की सुविधा है, जिसमें आप खुद के पास से नकद पैसे खर्च करने की बजाय बैंक की तरफ से आपको दिए गए क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड के जरिये आप तरह-तरह की खरीदारी और अन्य जरूरी भुगतान कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड कैसे मिल सकता है
क्रेडिट कार्ड के लाभ क्या हैं
क्रेडिट कार्ड का बिलिंग साइकिल क्या होता है
जब बैंक आपको क्रेडिट कार्ड देता है, तो उसके चालू होने के दिन से ठीक एक महीने बाद तक का समय आपका बिलिंग साइकिल का समय होता है। मान लीजिए, आपका कार्ड किसी महीने की 5 तारीख को चालू हुआ है तो अगले महीने की 6 तारीख को पिछले एक महीने में आपके क्रेडिट कार्ड के जरिये किये गए खर्च का हिसाब जोड़कर इसका बिल बनाया जायेगा। इसके बाद इस बिल को आपके दिए गए पते पर डाक या कूरियर से भेज दिया होगा। इसके अलावा इस बिल की जानकारी की सुविधा आपके मोबाइल और ईमेल पर भी मिल सकती है। बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों तक आपको अपने बिल के भुगतान की समयसीमा दी जाती है। इस समय सीमा की आखिरी तारीख तक आपको अपने बिल का भुगतान करना होता है। क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान आप बैंक में चेक के जरिये कर सकते हैं। इसके अलावा अपने बैंक के एटीएम या इंटरनेट बैंकिंग के जरिये भी आप इस बिल का भुगतान कर सकते हैं। अगर आपने आखिरी तारीख तक बिल नहीं जमा किया तो आपको जुर्माने की राशि अदा करनी पड़ेगी।
क्रेडिट कार्ड की मेम्बरशिप फीस
अब अलग-अलग श्रेणियों और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंकों ने कई ऐसे क्रेडिट कार्ड उपलब्ध किये हैं, जिनके लिए आपको कोई मेम्बरशिप फी या एनुअल चार्ज नहीं देना पड़ता। ये कार्ड अपनी वैधता की अवधि तक मुफ़्त रहते हैं। आप अपने बैंक से कहकर ऐसा कार्ड चुन सकते हैं, जो लाइफ टाइम फ्री हो।
समय पर भुगतान करने वाले ग्राहकों का क्रेडिट कार्ड देने वाले बैंक ज्यादा ख्याल रखते हैं और इसी वजह से समय-समय पर आपके क्रेडिट कार्ड पर दी गई अधिकतम लिमिट को आपके अच्छे भुगतान और आय की बढ़ोत्तरी के आधार पर खुद ब खुद बढ़ाते जाते हैं।
अपने किसी खास का कार्ड भी मुफ़्त में बनवा सकते हैं
बैंक आपको ऐड ऑन कार्ड बनवाने की सुविधा भी देते हैं। यानि आपके क्रेडिट कार्ड की दी गई सीमा के अंदर ही आप अपनी पत्नी या अपने परिवार के किसी खास सदस्य के नाम से एक और कार्ड बनवा सकते हैं। इसका बिल आपके बिल के साथ जोड़कर आपको भेजा जायेगा। अब बिना अपनी छुट्टी और काम का नुकसान किये हुआ आप अपने परिवार के लिए ऐड ऑन कार्ड बनवा कर अपनी झंझटों से मुक्ति पा सकते हैं।
ऋण प्राप्त करने के तरीके
ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया
बैंक जमा खाते खोलने की प्रक्रिया
बैंक ऋण के लिए खाते
बैंक क्या है?
बैंक एक वित्तीय संस्थान है , जिसकी प्राथमिक गतिविधि ग्राहकों के लिए भुगतान के ऐजेंट के रुप में में उधार लेने और उधार देने का कार्य करना है ।
बैंक में जमा खाते के प्रकार
1. बचत खाते(Savings Accounts)
2. आवर्ती खाते(Recurring Accounts)
3. मियादी जमा खाते(Fixed Deposit Accounts)
रायपुर (छत्तीसगढ़)। बिलासपुर जिले के कई नाकारा शिक्षकों पर राज्य सरकार की गाज गिरी है। शिक्षा विभाग ने जिले के 11 शिक्षकों को रिटायर कर दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के सर्विस रिव्यू के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को जबरदस्ती रिटायर करने का आदेश दिया है।
आपको बता दें कि शिक्षा विभाग ने सर्विस रिव्यू के आधार पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की गयी थी, जिन पर गंभीर आरोप थे, जो ड्यूटी से गायब रहते थे, जिनका प्रदर्शन ठीक नहीं था, या जिनका शैक्षिक स्तर अच्छा नहीं था। शिक्षा विभाग के रिव्यू की सूची प्राप्त करने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस वर्ष मार्च में शिक्षकों को रिटायर करने की सहमति दे दी थी। अब जाकर मामले पर अमल किया जा रहा है। रिटायर किए गए इन शिक्षकों में प्रधान पाठक ग्रेगरी कुजूर, अशोक चंद्रिकापुरे, नीलकिरण तिवारी, तिलकराम देवांगन, आरएस कछावा, अनूराम सिंगरील, नैनदास मिरे, त्रिलोकीनाथ दुबे, उच्च श्रेणी शिक्षक नीलेश चंद्र मदने, निर्मला भारद्वाज, राजीव कश्यप के नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि सर्विस रिव्यू के लिए विभागवार समितियां बनाई गई थीं। केंद्र सरकार के सर्विस रिव्यू में जहां दो आईएएस और तीन आईपीएस अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी, वहीं राज्य सरकार के सर्विस रिव्यू में पुलिस विभाग के प्रधान आरक्षक, एएसआई स्तर के करीब 40 अधिकारियों को हटाया गया था।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। बिलासपुर जिले के कई नाकारा शिक्षकों पर राज्य सरकार की गाज गिरी है। शिक्षा विभाग ने जिले के 11 शिक्षकों को रिटायर कर दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के सर्विस रिव्यू के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को जबरदस्ती रिटायर करने का आदेश दिया है।
आपको बता दें कि शिक्षा विभाग ने सर्विस रिव्यू के आधार पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की गयी थी, जिन पर गंभीर आरोप थे, जो ड्यूटी से गायब रहते थे, जिनका प्रदर्शन ठीक नहीं था, या जिनका शैक्षिक स्तर अच्छा नहीं था। शिक्षा विभाग के रिव्यू की सूची प्राप्त करने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस वर्ष मार्च में शिक्षकों को रिटायर करने की सहमति दे दी थी। अब जाकर मामले पर अमल किया जा रहा है। रिटायर किए गए इन शिक्षकों में प्रधान पाठक ग्रेगरी कुजूर, अशोक चंद्रिकापुरे, नीलकिरण तिवारी, तिलकराम देवांगन, आरएस कछावा, अनूराम सिंगरील, नैनदास मिरे, त्रिलोकीनाथ दुबे, उच्च श्रेणी शिक्षक नीलेश चंद्र मदने, निर्मला भारद्वाज, राजीव कश्यप के नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि सर्विस रिव्यू के लिए विभागवार समितियां बनाई गई थीं। केंद्र सरकार के सर्विस रिव्यू में जहां दो आईएएस और तीन आईपीएस अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी, वहीं राज्य सरकार के सर्विस रिव्यू में पुलिस विभाग के प्रधान आरक्षक, एएसआई स्तर के करीब 40 अधिकारियों को हटाया गया था।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। धार में पदस्थ जिला आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह चंद्रावत के इंदौर, जावरा और धार के कई ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी के दौरान सैकड़ों करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी का कहना है कि उन्हें चंद्रावत के पास अनुपातहीन संपत्ति जमा करने की शिकायत मिली थी। मामले की जांच के बाद शुक्रवार को उन्होंने टीमें बनाकर उनके घर पर दबिश दी, जहां से बड़ी संख्या में संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए गए। इंदौर में ही चंद्रावत के दो पेट्रोल पंप, स्कीम नंबर 74 में एक बंगला मिला है। जावरा और धार में भी संपत्ति मिली है। लोकायुक्त की टीम के छापे के दौरान चंद्रावत के घर से मर्सिडीज और इनोवा दो कार मिली हैं, जबकि एक ऑडी लेकर उनकी माताजी कालूखेड़ा गांव गई हुई थीं। जांच टीम को जब लगा कि मर्सिडीज कार में कुछ दस्तावेज हैं तो उसकी तलाशी ली गई। टीम ने कारों की डिक्की भी खुलवा ली। दोनों पेट्रोप पंप भी सील कर दिए गए।
इस छापेमारी में स्कीम नंबर 74 में एक आलीशान मकान, बीसीएम हाईटस में एक फ्लैट, बंशी ट्रेड सेंटर में दो दुकान, लसूड़िया मोरी और स्कीम 140 एक-एक प्लॉट, दो पेट्रोल पंप, 6 टैंकर, करीब साढ़े 11 लाख रुपए नकद, करीब 1 करोड़ रुपए के जेवर, गुलाब बाग में एक सिक्युरिटी एजेंसी में पत्नी की पार्टनशिप, करीब 7 बैंक खाते, दो लॉकर विजय नगर स्थित निजी बैंक में, जावरा में वेयर हाउस होने का खुलासा हुआ है।
आपको बता दें कि चंद्रावत पूर्व कांग्रेसी नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के भतीजे हैं। उनकी अनुकंपा नियुक्ति में भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने काफी मदद की थी। चंद्रावत के पिता नरेंद्रसिंह चंद्रावत पुलिस में टीआई थे। 90 के दशक में महू में एक आरोपी को पकड़ते समय हुई मुठभेड़ में वे शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उन्हें डीएसपी का दर्जा भी दिया गया। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सयाजी चौराहे पर पेट्रोल पंप भी दिया गया। वर्ष 2001 में पराक्रम को आबकारी विभाग में नियुक्ति दी गई। 2003 से उन्होंने विभाग में ज्वाइनिंग दे दी। उनकी अब तक की कुल तनख्वाह करीब 1 करोड़ रुपए होती है।
हैरानी की बात यह है कि चंद्रावत 15 साल से काली कमाई कर रहा था, लेकिन भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ रखने वाली सरकार की कभी उस पर नजर नहीं गई। अब मामला सामने आने के बाद भाजपा पराक्रम के कालूखेड़ा का भतीजा होने का कनेक्शन कांग्रेस से जोड़कर अपनी झेंप छुपाने का प्रयास कर रही है।
पासपोर्ट खोने पर क्या करें
पासपोर्ट ऑनलाइन बनाने प्रक्रिया


तत्काल पासपोर्ट के लिए फीस
डुप्लीकेट पासपोर्ट के लिए फीस
नए पासपोर्ट की फीस
दस साल की अवधि खत्म होने पर पासपोर्ट फीस
पासपोर्ट आवेदन के साथ कागजात
2. राष्ट्रीयता-जन्मतिथि प्रमाण पत्र
3.अनापत्ति प्रमाण पत्र
तत्काल पासपोर्ट योजना में तीन दस्तावेजों के साथ एफिडेविट दें
ये दस्तावेज सेल्फ अटेस्टेड कॉपियों के साथ मूल रुप में पेश किए जाते हैं ।
पासपोर्ट री-इश्यू के लिए दस्तावेज
पासपोर्ट तीन प्रकार के होते हैं
पासपोर्ट फार्म दो तरह के होते हैं
पासपोर्ट प्राप्त करने के योग्य व्यक्ति, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, और केवल संबंधित पासपोर्ट कार्यालय के अधिकार क्षेत्र के निवासी ही वेबसाइट द्वारा ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन केवल इन शहरों के लिए उपलब्ध है।
राज्य के पासपोर्ट सेवा केन्द्र का पता लगाएँ-
http://passportindia.gov.in/AppOnlineProject/locatePSK/locatePFCInp
पासपोर्ट फार्म प्राप्त /जमा करने के स्थान
दिल्ली में पासपोर्ट फार्म प्राप्त/जमा करने के स्थान
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। एसआईटी ने आजम खान के अलावा पूर्व नगर विकास सचिव एसपी सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ इस मामले में केस दर्ज किया है। इसमें जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसुदानी और जल निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल खरे को भी नामजद करते हुए परीक्षा कराने वाली संस्था ‘एपटेक’ के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। एसआईटी ने जालसाजी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। आजम खान के खिलाफ आरोप है कि साल 2016-17 में जल निगम के भर्ती बोर्ड का चेयरमैन रहते हुए उन्होंने जल निगम में बगैर अनुमति और रिक्तियों के सैकड़ों पदों पर भर्ती कर ली जिसमें भर्ती नियमों की अनदेखी की गई थी।
आपको बता दें कि 2016 में जल निगम में इंजीनियर से लेकर क्लर्क तक के 1300 पदों पर भर्ती हुई थी। आज़म खान उस समय निगम के अध्यक्ष थे। भर्ती में गड़बड़ी को लेकर आजम खान पर भष्टाचार के आरोप हैं। योगी सरकार ने मामले की एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। एसआइटी ने 29 मार्च को अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी, जिस पर राज्य सरकार ने एफआइआर दर्ज किए जाने की अनुमति दे दी। एसआइटी ने अपने जांच में पाया है कि जल निगम में भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई थी। डीआइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पांच नामजद आरोपितों सहित अन्य के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, षड्यंत्र, साक्ष्य छिपाने व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि सैकड़ों अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरते जाने के साथ ही उनके जवाबों का गलत मूल्यांकन तथा उत्तर पुस्तिकाएं भर्ती प्रकिया पूरी होने के बाद दिखाए जाने के आरोप लगाए थे। जलनिगम में भर्ती 122 सहायक अभियंताओं की नियुक्तियां अगस्त 2017 में रद कर दी गई थीं। यह मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है, जबकि 1178 पदों पर भर्ती अवर अभियंता व लिपिक वर्तमान में कार्यरत हैं और वेतन पा रहे हैं। एसआइटी ने बीती 17 जनवरी को पूर्व मंत्री आजम खां के बयान दर्ज किए थे। पूर्व नगर विकास सचिव एसपी सिंह व एमडी पीके आसूदानी सहित अन्य अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए गए थे। आजम खां ने पत्रावलियों पर उन्हें धोखे में रखकर हस्ताक्षर कराए जाने की बात एसआइटी से कही थी। वहीं जांच के लिए एसआईटी को मिले शिकायती पत्रों में यह आरोप लगाया गया है कि उनके हस्तक्षेप और दबाव से भर्तियों में अनियमितता हुई। इसी आधार पर एसआईटी ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी ‘अपटेक’ का भी बयान दर्ज किया। इसके अलावा जल निगम की ओर से बनाई गई परीक्षा आयोजन समिति के लोगों का भी बयान लिया गया। शासन से अनुमति मिलने के बाद एसआईटी आजम खान समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
वैशाली (बिहार)। वैशाली जिले में एक अनाथ गरीब बच्चे ने पुलिस की रिश्वतखोरी को सरेआम नंगा कर दिया। 12 साल के बच्चे विवेक ने थानेदार को रिश्वत देने के लिए गले में एक तख्ती लटकाई । जिस पर लिखा था कि थानेदार को 10 हजार रूपये रिश्वत देने में मेरा सहयोग कीजिये। दरअसल इस गरीब बच्चे की जमीन पर दबंगों ने कब्ज़ा कर लिया है। इसी जमींन पर से कब्ज़ा हटवाने के लिए वह पुलिस थाने पंहुचा था, लेकिन थानेदार ने मदद की एवज में उससे 10 हजार रूपये की रिश्वत मांगी। जिसके बाद बच्चे ने इस अनोखे तरीके को अपनाया। बच्चा भीख मांगते हुए कलेक्ट्रेट के पास पहुंचा तो कलेक्ट्रेट कार्यालय में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी बच्चे से मिले और मामले की जाँच के निर्देश दिए। जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर मामले की जाँच शुरू की। डीडीसी सर्वनारायां का कहना है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जायेगा। अनाथ बच्चे को जरूर न्याय मिलेगा।
आपको बता दें कि यह अनाथ बच्चा वैशाली जिले के चेहराकलां गांव का रहने वाला है। वह अपनी जमीन को दबंगों के कब्जे से छुड़ाने के लिए ओपी थाना प्रभारी राकेश रंजन से गुहार लगाने गया था, राकेश रंजन ने मदद करने की एवज में उससे 10 हजार रूपये की रिश्वत मांगी। मासूम विवेक का कहना है कि उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वह थानेदार को रिश्वत दे सके। इसीलिए उसने भीख मांगने का रास्ता चुना , ताकि वह अपनी जमीन मुक्त करा सके।
नई दिल्ली। आधार कार्ड माडल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को काफी गरमागरम बहस हुई। यूआइडीएआइ ने आधार को जनता के लिए उपयोगी साबित करने के लिए अपने समर्थन में तमाम दलीलें पेश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वो इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि इस मॉडल से ही सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये कहां तक उचित है कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अधिकारियों तक जाना चाहिए, जबकि होना ये चाहिए कि सरकार को खुद लोगों के पास जाना चाहिए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अगुवाई वाली बेंच ने यह बात कही। संवैधानिक बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, एएम खानविलकर एके सिकरी व अशोक भूषण शामिल हैं। बेंच ने कहा कि यूआइडीएआइ कहती है कि आधार पहचान का जरिया है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी खामी है कि इससे कोई बाहर नहीं रह सकता है।
पांच जजों की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच ने कहा कि यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) का कहना है कि आधार लोगों की पहचान का एक जरिया है, लेकिन आप किसी को इससे बाहर कैसे कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यूआईडीएआई की तरफ से जानकारियों का दुरुपयोग भले ही न हो, लेकिन आप ये कैसे कह सकते हैं कि आधार सत्यापन में शामिल निजी कंपनियां इसका गलत इस्तेमाल नहीं करेंगी। वहीं यूआईडीएआई के वकील राकेश द्विवेदी ने यह कहा कि किसी भी तरह का डेटा प्रोटक्शन कानून 100% सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकता है। जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं को कौन जान सकता है। कुछ भी 100% सुरक्षित नहीं है। लोग हवाई यात्रा और सड़क यात्रा के दौरान दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। राकेश द्विवेदी का कहना था कि गरीबी हटाने के लिए विकास योजनाओं को क्रियान्वित करना बेहद जरूरी है। तब बेंच ने कहा कि लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाना और निजता का अधिकार अलग-अलग पहलू हैं। कोर्ट ने पूछा कि जिस तरह डेटा लीक के मामले सामने आए, इसकी क्या गारंटी है कि इससे चुनाव नतीजे प्रभावित नहीं होंगे। इस पर द्विवेदी ने कहा कि आधार लोगों के डेटा के लिए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराता है। इसमें किसी तरह की चोरी पर सजा का प्रावधान है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आधार और इससे संबंधित 2016 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी। केस की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।
नई दिल्ली। आजकल आधार कार्ड की सुरक्षा और डेटा लीक की बात आए दिन चर्चा में रहने लगी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आधार की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए UIDAI ने अब नया क्यूआर कोड (QR code) बनाया है। इसमें यूजर का नाम, पता, उसकी फोटो और जन्मतिथि जैसी जानकारियां मौजूद होंगी, जिसे 12 अंकों का आधार नंबर बताए बिना ऑफलाइन यूजर वेरिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नए क्यूआर कोड में फोटो को जोड़ा गया है। आधार का इस्तेमाल आजकल कई सेवाओं की खातिर वेरिफिकेशन के लिए हो रहा है। ऐसे में नए क्यूआर कोड से ऑफलाइन वेरिफिकेशन किए जाने पर डॉक्युमेंट्स में किसी तरह की छेड़छाड़ से बचने में मदद मिलेगी। कहा जा रहा है कि यह सभी के डेटा सुरक्षित रखने के लिए एक सुरक्षात्मक कवर की तरह काम करेगा। पूरी प्रक्रिया में आधार नंबर और बायोमेट्रिक्स का खुलासा नहीं होगा।
गौरतलब है कि नया क्यूआर कोड जो अब फोटो के साथ आता है, का उपयोग ऑफलाइन मोड में किया जा सकता है। इससे व्यक्तिगत डेटा की हैकिंग नहीं हो पाएगी। आप यूआईडीएआई की वेबसाइट या इसके मोबाइल एप से क्यूआर कोड वाला बायोमेट्रिक आईडी डाउनलोड कर सकते हैं। यूजर्स आधार नंबर को काले रंग से छिपा सकते हैं और नए क्यूआर कोड के साथ प्रिंटआउट का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्यूआर कोड एक बारकोड लेबल होता है कि जिसमें छुपी सूचनाएं मशीन पढ़ सकती है। कार्ड धारक विभिन्न जगहों पर सत्यापन के लिए बगैर अपनी आधार संख्या बताए केवल इस बारकोड का इस्तेमाल कर सकता है। उदाहरण के लिए होटल में जब रिसेप्शनिस्ट की ओर से आइडी मांगी जाती है तब आधार धारक अपना प्रिंटेड क्यूआर कोड दिखा सकते हैं जो तब आधार साइट पर अपडेटेड क्यूआर कोड रीडर के जरिए स्कैन कर देखा जा सकता है। इसमें आधार नंबर की बजाय केवल नाम, फोटो और जन्म की तारीख दिखेगी।
इससे आधार कार्ड होल्डर की प्राइवेसी बनी रहेगी। यूआईडीआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा, 'ऑफलाइन क्यूआर कोड एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हर नागरिक बिना आधार नंबर बताए ऑफलाइन वेरिफिकेशन करा सकता है।'