आइए जानते हैं वो 10 जरूरी काम कौन से हैं, जिनको आप बिना पैन कार्ड के नहीं कर सकते हैं:-
- बैंक अकाउंट खोलना या फिक्स डिपॉजिट करवाना
- प्रॉपर्टी खरीदना
- होटल का बिल पेमेंट करना
- शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड या डिबेंचर खरीदना
- बैंक में एक दिन में 50 हजार या उससे ज्यादा रकम जमा कराना
- गाड़ी खरीदना
- आपने कहीं से कोई फीस ली है या कमाई की हो। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो टीडीएस कटेगा
- प्री-पेड मनी, वॉलेट या उपहार का इस्तेमाल करना। 50 हजार या उससे ज्यादा की ट्रांजेक्शन पर पैन डीटेल देनी पड़ेगी
- विदेश यात्रा के लिए हवाई टिकट बुक करना
- क्रेडिट, डेबिट कार्ड या डीमैच अकाउंट के लिए अप्लाई करना
आप बहुत आसानी से पैन कार्ड ऑनलाइन बनवा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन ही सारे फॉर्म भर सकते हैं, लेकिन आपको सारे दस्तावेज को इनकम टैक्स ऑफिस के पास पोस्ट करना होगा। तभी आवेदन की प्रक्रिया पूरी होगी। वेबसाइट पर फॉर्म भरने के बाद आप अपने आवेदन को पैन कार्ड ऑफिस भेज दें। इसके बाद आपके आवेदन को प्रोसेस किया जाता है और कार्ड को आपके घर के पते पर भेज दिया जाता है।
यदि आप कहीं पर फंस गए और ज्यादा जानकारी चाहिए तो इस हेल्पलाइन नंबर (18001801961) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पैन कार्ड आवेदन के लिए दस्तावेज
आवेदन करने के लिए आपको PAN Services Unit की वेबसाइट पर कई डॉक्यूमेंट अपलोड करने की जरूरत पड़ेगी। आपको पहचान पत्र, पते का सबूत, जन्मतिथि प्रमाण पत्र और फोटोग्राफ अपलोड करना होगा। नीचे दिए गए हर सेक्शन में से आपको एक डॉक्यूमेंट की स्कैन कॉपी निकालने की जरूरत पड़ेगी।
पैन कार्ड बनवाने के लिए दस्तावेज
- आधार कार्ड
- वोटर आईडी कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस
- पासपोर्ट
- फोटो वाला राशन कार्ड
- आर्म्स लाइसेंस
- केंद्र सरकार या राज्य सरकार या किसी पीएसयू द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र
- तस्वीरों वाला पेंशन कार्ड
- सेंट्रल गवर्मेंट हेल्थ सर्विस स्कीम कार्ड या एक्स सर्विसमेन कॉन्ट्रिब्यूट्री हेल्थ स्कीम फोटो कार्ड
- सांसद या विधायक या पार्षद या गैजेटेड अफसर द्वारा हस्ताक्षर किया हुआ पहचान पत्र का सर्टिफिकेट
पैन कार्ड के पते के लिए प्रमाण
- आधार कार्ड
- वोटर आईडी कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस
- पासपोर्ट
- पति/पत्नी का पासपोर्ट
- पोस्ट ऑफिस पासबुक जिसमें आवेदक का पता दिया हो
- लेटेस्ट प्रॉपर्टी टैक्स एसेसमेंट ऑर्डर
- सरकार द्वारा जारी किया गया निवास प्रमाण पत्र
- केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी एलोटमेंट लेटर ऑफ अकोमडेशन (3 साल से पुराना नहीं)
- प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन
- सांसद या विधायक या पार्षद या किसी गैजेटेड अफसर द्वारा हस्ताक्षर एड्रेस सर्टिफिकेट
- कंपनी द्वारा जारी किया गया ऑरिजनल सर्टिफिकेट
- बिजली बिल(3 साल से पुराना नहीं)
- लैंडलाइल बिल या ब्रॉडबैंड कनेक्शन बिल(3 साल से पुराना नहीं)
- पानी बिल(3 साल से पुराना नहीं)
- गैस कनेक्शन कार्ड या बुक(3 साल से पुराना नहीं)
- बैंक अकाउंट स्टेटमेंट(3 साल से पुराना नहीं)
- जमा खाता स्टेटमेंट(3 साल से पुराना नहीं)
- क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट(3 साल से पुराना नहीं)
जन्मतिथि प्रमाण पत्र के लिए दस्तावेज
- नगर निगम द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
- पेंशन पेमेंट ऑर्डर
- रजिस्टरार ऑफ मैरेज द्वारा जारी किया गया शादी प्रमाणपत्र
- 10वीं क्लास का पासिंग सर्टिफिकेट
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- सरकार द्वारा जारी किया गया निवास प्रमाण पत्र
- मजिस्ट्रेट को दिया गया शपथ-पत्र जिसमें जन्मतिथि का जिक्र है
पैन कार्ड के लिए दो फोटो
आपको पैन कार्ड आवेदन के साथ अपनी दो फोटो भी भेजनी पड़ेगी।
पैन कार्ड के लिए आनलाइन आवेदन

- NSDL की https://www.onlineservices.nsdl.com/paam/endUserRegisterContact.html पर जाएं।
- बॉटम तक स्क्रॉल करें और Apply for a new PAN Card के ड्रॉप डाउन मेन्यू में Individual सेलेक्ट करें। फिर Select करें।
- अब आप फॉर्म भरना शुरू कर सकते हैं। अगर आपको कोई शंका है तो https://tin.tin.nsdl.com/pan/Instructions49A.html फॉर्म भरने की गाइडलाइन को पढ़ सकते हैं।
- पहला फील्ड AO Code है जिसे आप यहां खोज सकते हैं। आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के हेल्पलाइन नंबर 18001801961 पर कॉल करके अपने AO code के बारे में जान सकते हैं।
- name, gender, address जैसे फील्ड को भरने में आपको परेशानी नहीं आनी चाहिए। हां, जिन-जिन डॉक्यूमेंट को आप सब्मिट करने वाले हैं उन्हें चुनते वक्त खास ख्याल रखें। आप प्वाइंट 15 पर बने ड्रॉप डाउन मेन्यू में फॉर्म चुन सकते हैं।
नई दिल्ली। स्कूलो में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाली मिड डे मील योजना को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। मिड डे मील योजना की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसको अब स्थानीय गांव वालों की देखरेख में तैयार कराने और बंटवाने का फैसला लिया है। इसके तहत सभी राज्यों से दो महीने के भीतर योजना तैयार कर उसे पेश करने को कहा गया है। माना जा रहा है कि ग्रामीणों की भागीदारी से मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार होगा।
इस फैसले के तहत प्रत्येक स्कूल स्तर पर एक टीम गठित होगी, जिसमें स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के साथ ही स्कूलों में पढ़ने वालों बच्चों के अभिभावक भी शामिल होंगे। इन लोगों की टीम स्कूलों में हर दिन बनने वाले खाने पर नजर रखेगी। इसके साथ ही टीम यह सुनिश्चित करेगी, कि बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन तय मापदंडों के अनुसार ही तैयार किया जाय। इतना ही नहीं गुणवत्ता में खामी पाए जाने पर टीम अपनी स्वतंत्र टिप्पणी स्कूल रजिस्टर में दर्ज करा सकेगी। इस टिप्पणी के पर बाद में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी। इसके अलावा यह टीम कभी भी औचक निरीक्षण करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।
आपको बता दें कि सरकार के पास मिड डे मील के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर काफी शिकायतें आ रही थी। हालांकि सरकार ने इन गड़बड़ियों को रोकने के लिए काफी सख्ती भी दिखाई गई, लेकिन शिकायतों में कमी नहीं आ रही थी। जिसके बाद सरकार ने गांव वालों को भी इस योजना में जोड़ने का फैसला किया । गौर करने वाली बात यह है कि सोशल आडिट से जोड़ने से पहले इसे देश के 13 राज्यों के दो-दो जिलों में पायलट के तौर लागू किया। उनमें महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, नगालैंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल आदि शामिल थे। जहां इसका काफी अच्छा परिमाण सामने आया है।
नई दिल्ली। स्कूलो में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाली मिड डे मील योजना को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। मिड डे मील योजना की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसको अब स्थानीय गांव वालों की देखरेख में तैयार कराने और बंटवाने का फैसला लिया है। इसके तहत सभी राज्यों से दो महीने के भीतर योजना तैयार कर उसे पेश करने को कहा गया है। माना जा रहा है कि ग्रामीणों की भागीदारी से मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार होगा।
इस फैसले के तहत प्रत्येक स्कूल स्तर पर एक टीम गठित होगी, जिसमें स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के साथ ही स्कूलों में पढ़ने वालों बच्चों के अभिभावक भी शामिल होंगे। इन लोगों की टीम स्कूलों में हर दिन बनने वाले खाने पर नजर रखेगी। इसके साथ ही टीम यह सुनिश्चित करेगी, कि बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन तय मापदंडों के अनुसार ही तैयार किया जाय। इतना ही नहीं गुणवत्ता में खामी पाए जाने पर टीम अपनी स्वतंत्र टिप्पणी स्कूल रजिस्टर में दर्ज करा सकेगी। इस टिप्पणी के पर बाद में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी। इसके अलावा यह टीम कभी भी औचक निरीक्षण करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।
आपको बता दें कि सरकार के पास मिड डे मील के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर काफी शिकायतें आ रही थी। हालांकि सरकार ने इन गड़बड़ियों को रोकने के लिए काफी सख्ती भी दिखाई गई, लेकिन शिकायतों में कमी नहीं आ रही थी। जिसके बाद सरकार ने गांव वालों को भी इस योजना में जोड़ने का फैसला किया । गौर करने वाली बात यह है कि सोशल आडिट से जोड़ने से पहले इसे देश के 13 राज्यों के दो-दो जिलों में पायलट के तौर लागू किया। उनमें महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, नगालैंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल आदि शामिल थे। जहां इसका काफी अच्छा परिमाण सामने आया है।
शिकायत दर्ज कराने का अधिकार
- कोई भी प्राधिकृत अधिकारी शिकायत दर्ज करा सकता है
- संबद्ध उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकता है
- मान्यता प्राप्त उपभोक्ता संगठन शिकायत दर्ज करा सकता है
शिकायत कहां करें
- जिला मुख्यालय स्थित जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत करें
- इलाके के माप-तोल निरीक्षक को शिकायत करें
- संबद्ध राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र के माप-तोल नियंत्रक को शिकायत करें।
- आप इस बारे में अदालत में मुकदमा भी दायर कर सकते हैं यह अदालत मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से निचले दर्जे की नहीं होनी चाहिए ।
माप-तोल मानक अधिनियम 1976 में मनाही
- मानक पर खऱे न उतरने वाले तोल तथा माप के उपकरणओं से चीजों की बिक्री की मनाही।
- अपने घऱ या दुकान में मानक पर खऱे न उतरने वाले माप-तोल के उपकरण रखने पर मनाही।
- माप-तोल के उपकरणों से छेड़छाड़ करने पर मनाही।
- जितना मूल्य चुकाया गया हो, उससे कम मात्रा अथवा संख्या में वस्तु देने पर मनाही।
- जितना मूल्य चुकाया गया हो, उससे ज्यादा मात्रा या संख्या में वस्तु या वस्तुओं की मांग करना अथवा प्राप्त करने पर मनाही।
- किसी संविदा या समझौते में माप-तोल और संख्या के अमानक पैमानों का उल्लेख करने पर मनाही।
- किसी वस्तु का मूल्य माप-तोल के अमानक पैमानों में बताना या प्रदर्शित करने पर मनाही।
- ऊपर उल्लिखित नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना औऱ जेल दोनों की सजा हो सकती है ।
सामान की गुणवत्ता जानने का अधिकार
- सभी उपभक्ताओं को कानूनी रूप से कई अधिकार मिले हैं, जिनमें चयन का अधिकार यानी कोई भी सामान खरीदने से पहले उसका अपनी मर्जी से चयन कर सकता है।
- अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित होने के बावजूद मोल भाव करने का अधिकार है।
- सामान की गुणवत्ता तथा प्रयोग जानने का अधिकार है।
- किसी भी सामान की गारंटी यदि है तो उसका सर्टिफिकेट प्राप्त करने का अधिकार है। कोई भी उपभोक्ता खरीदे हुए सामान का बिल अवश्य ले।
- कोई भी सामन खरीदन से पहले उसके वजन की ठीक से जांच कर लें।
- पेट्रोल पंप से पेट्रोल खरीददते समय जीरो अवश्य देख लें।
- कोई भी मिठाई खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि मिठाई के साथ डब्बा न तौला हो।
- दुकानदार डब्बे में मिठाई तौले तो खाली डब्बा बट की तरफ रखवा लें।
अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) क्या है
- हमारे देश में किसी भी वस्तु का मूल्य निश्चित करने का कोई कानून नहीं है। अधिकतम खुदरा मूल्य क्या होगा इस संबंध में कोई नियम नहीं है। यह पूरी तरह उत्पादक पर निर्भर करता है कि वह अपने माल का अधिकतम खुदरा मूल्य क्या नियत करता है।
- सामान्यतः अधिकतम खुदरा मूल्य लागत मूल्य से 20-30 प्रतिशत से ले कर दोगुना तक होता है। लेकिन यह लागत मूल्य से कई गुना भी हो सकता है। जो भी अधिकतम खुदरा मूल्य किसी वस्तु के पैकेट पर अंकित होता है उस में सभी प्रकार के टैक्स, होलसेल व खुदरा दुकानदारों के कमीशन सम्मिलित होते हैं।
- किसी भी वस्तु को अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य पर नहीं बेचा जा सकता है, लेकिन ग्राहक में मोल-भाव करने की क्षमता हो तो वह उस से कम मूल्य पर उस वस्तु को खरीद सकता है।
- भार और माप-तौल (डिब्बा बंद वस्तु) नियम के अंतर्गत यह आवश्यक किया गया है कि डिब्बे में बंद वस्तुओं के संबंध में कुछ आवश्यक सूचनाएँ डिब्बे पर अंकित की जाएँ। जिन में वस्तु का वजन, संख्या या आयतन, उस के निर्माता का नाम व पता, निर्माण की तिथि तथा अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित किया जाना आवश्यक है। डिब्बे में खाद्य सामग्री होने पर यह भी आवश्यक है कि वस्तु का इस्तेमाल किस तिथि तक कर लिया जाना चाहिए।
अधिकतम खुदरा मूल्य वाली वस्तुएं
- अधिक वजन या आकार वाली वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य लिखा होता है
- एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में बहुत समय लेने वली वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य लिखा होता है
- सजावटी, फैशन की वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य लिखा होता है ।
- ऐसे ब्रांड जिसे उपभोक्ता ज्यादा नहीं जानते हैं उस पर अधिकतम खुदरा मूल्य लिखा होता है ।
भारतीय मानक ब्यूरो के कार्य क्या है:-
- भारतीय मानक ब्यूरो के कार्य किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में भारतीय मानकों की स्थापना, प्रकाशन और संवर्धन करना है;
- किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में भारत में अन्यत्र कहीं किसी अन्य संस्था द्वारा स्थापित किसी भी मानक को 'भारतीय मानक' के रूप में मान्यता देना है;
- भारतीय मानक ब्यूरो प्रमाणन चिह्न कहे जाने के लिए किसी मानक चिह्न का डिजाइन और अन्य वितरण निश्चित करना है।
- इसका कार्य मानक चिह्न के उपयोग के लिए लाइसेंस प्रदान करना, उसका नवीकरण करना, उसे निलंबित करना अथवा रद्द करना और इसके लिए शुल्क लेना है।
- इसका कार्य किसी सामग्री अथवा पदार्थ की जांच करना और नमूना लेना कि क्या कोई वस्तु अथवा प्रक्रिया, जिसके संबंध में मानक चिह्न का उपयोग किया गया है, भारतीय मानक के अनुसार हैं या क्या किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में लाइसेंस सहित अथवा बगैर लाइसेंस के मानक चिह्न का अनुचित उपयोग किया गया है;
- भारतीय मानक ब्यूरो का कार्य वस्तुओं और प्रक्रियाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए प्रयोगशालाओं की स्थापना करना, उनका अनुरक्षण करना और उन्हें मान्यता देना; उपभोक्ताओं और विनिर्माताओं इत्यादि के हित में भारतीय मानकों के निर्माण हेतु अनुसंधान करना है।
- इसका कार्य किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में मानक चिह्न का उपयोग करने के लिए व्यक्ति को लाइसेंस प्रदान करना। ब्यूरो द्वारा विनिर्दिष्ट शर्तों की पूर्ति तथा निर्धारित शुल्क के भुगतान के अध्यधीन आदेश द्वारा लाइसेंस प्रदान करना, उसका नवीकरण करना, उसे निलंबित अथवा रद्द करना है।
मानक चिन्ह की नकल पर रोक के नियम
- मानक ब्यूरो लाइसेंस प्राप्त होने को छोड़कर, किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में अथवा किसी पेटेंट के शीर्षक पर अथवा किसी ट्रेडमार्क अथवा डिजाइन पर मानक चिह्न का अथवा उसकी बनावटी नकल के उपयोग पर रोक है।
- लाइसेंस प्राप्त होने के बाद भी मानक चिह्न अथवा उसकी बनावटी नकल का उपयोग करने की तब तक अनुमति नहीं जब तक कि वस्तु अथवा प्रक्रिया भारतीय मानक के अनुसार न हो।
- किसी नाम जो कि ब्यूरो के नाम से काफी मिलता जुलता हो, जिससे कि जनता को धोखा हो अथवा धोखा होने की संभावना है अथवा जिसमें "भारतीय मानक" की अभिव्यक्ति हो अथवा उसका संक्षिप्त नाम हो, का ब्यूरो की अनुमति के बिना उपयोग करने पर रोक है।
- किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया के संबंध में कोई चिह्न अथवा ट्रेडमार्क जिस पर "भारतीय मानक" अथवा "भारतीय मानक का विवरण" अभिव्यक्तियां अथवा ऐसी अभिव्यक्तियों का संक्षिप्तीकरण दिया गया हो, पर भी रोक है।
- किसी भी पंजीकरण प्राधिकारी को किसी ऐसे नाम अथवा चिह्न वाली किसी कंपनी, फर्म अथवा व्यक्तियों के निकाय अथवा किसी ऐसे नाम अथवा चिह्न वाले ट्रेडमार्क अथवा डिजाइन को पंजीकृत करना अथवा किसी ऐसे नाम व चिह्न वाले आविष्कार के संबंध में पेटेंट प्रदान करने पर रोक है;
- यदि केंद्र सरकार की मानक ब्यूरो से परामर्श के पश्चात राय है कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक अथवा उचित है तो यह सरकारी राजपत्र में आदेश प्रकाशित कर किसी अनुसूचित उद्योग की किसी वस्तु अथवा प्रक्रिया जो भारतीय मानक के अनुसार हो, को अधिसूचित कर सकती है; और ऐसी वस्तु पर अथवा प्रक्रिया में लाइसेंस के अधीन अनिवार्य मानक चिह्न के उपयोग का निदेश दे सकती है।
- यदि कोई व्यक्ति अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी भी प्रावधान का उल्लंधन करता है उसे कारावास की सजा हो सकती है, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है अथवा उस पर जुर्माना लग सकता है जो 50 हजार रूपए तक हो सकता है अथवा दोनों ही दंड दिए जा सकते हैं।
एगमार्क क्या है
- कृषि-जन्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रमाणीकरण के लिए एगमार्क का निशान बनाया गया है ।
- इस निशान से पता चलता है कि वस्तु की गुणवत्ता की सरकार द्वारा प्रायोजित किसी संस्था ने जांच कर ली है और खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए सुरक्षित सामग्री से इसे पैक किया गया है ।
- एगमार्क के निशान वाली वस्तु अगर खराब निकले तो बिना कोई पैसा लिए इसे बदल दिया जाता है अथवा कीमत लौटा दी जाती है ।
- आटा , दाल , घी , मसाले और खाद्य तेल जैसी कृषि-जन्य और कच्ची खाद्य सामग्री खरीदते समय एगमार्क का निशान होने की जांच कर लें।
ईको-मार्क क्या है
- ईको-मार्क निशान प्रदूषण मुक्त औद्योगिक इकाई के प्रमाणीकरण के लिए होता है।
- ईको- मार्क पारिस्थितिकी के अनुकूल भवन को मान्यता देने वाला अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन है।
- ईको-मार्क निशान यह बताता है कि वस्तु से पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा ।
हॉलमार्क क्या है
- हॉलमार्क का निशान उपभोक्ता के हितों का संरक्षण और सोने की शुद्धता पर उपभोक्ता को तीसरे पक्ष की गारंटी प्रदान करना है। यह सोने के जेवरात की गुणवत्ता दर्शाता है ।
- भारतीय मानक ब्यूरो परीक्षण और हॉलमार्क केंद्रों को मान्यता प्रदान करता है, जो सोने और चांदी जैसी मुल्यवान धातुओं के आभूषणों/शिल्प वस्तुओं की शुद्धता की जांच के बाद उन्हें हॉलमार्क प्रदान करने के लिए अधिकृत हैं।
- भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लाइसेंस प्राप्त जौहरी इन हॉलमार्क केंद्रों से अपने आभूषणों/शिल्प वस्तुओं की शुद्धता की जांच के बाद उन पर हॉलमार्किग करा सकते हैं।
वुलमार्क क्या है
- ऊन की शुद्धता की पहचान के लिए वुलमार्क का निशान होता है।
- वुलमार्क निशान उसी कपड़े या धागे पर लगा होता है जो शत प्रतिशत प्राकृतिक ऊन से बना होता है।
भारतीय मानक ब्यूरो, भारत में राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने वाली संस्था है। यह उपभोक्ता मामलों , खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन कार्य करती है ।
गुणवत्ता की पहचान के लिए ISI निशान
- इस निशान से पता चलता है कि भारतीय मानक ब्यूरो ने वस्तु को मान्य गुणवत्ता का होने का प्रमाणपत्र दे दिया है ।
भारतीय मानक ब्यूरो से शिकायत
- आईएसआई के निशान वाली वस्तुओं की गुणवत्ता के बारे मे शिकायत के लिए देशभर में कई शाखाएं हैं।
- अपनी शिकायत में सभी ब्यौरे दें जैसे... वस्तु खरीदने की तिथि और स्थान, वस्तु में कमी का विवरण, नगद खरीद की पर्ची संख्या आदि ...
- भारतीय मानक ब्यूरो के नजदीकी शाखा के जन शिकायत अधिकारी अथवा इस कार्यालय के मुख्यालय में निदेशक, उपभोक्ता मामले और जन शिकायत अधिकारी को शिकायत भेजी जा सकती है ।
- भारतीय मानक ब्यूरो ऐसी हर शिकायत की जांच कर सकता है ।
- अगर शिकायत सही पायी जाती है तो उपभोक्ता द्वारा खरीदी गयी चीज बिना कोई पैसा लिए बदल दी जाती है या उसकी खराबी ठीक कर दी जाती है ।
- अगर यह पता चलता है कि किसी वस्तु का निर्माता जानबूझकर घटिया माल तैयार कर रहा है तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है ।
- केंद्र सरकार ने सौ से ज्यादा वस्तुओं के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया है ।
- इस सूची में शामिल है ... दूध का पावडर, सीमेंट, रसोई गैस का सिलेंडर, वनस्पति , बिजली का प्रेस, खाना बनाने वाला बिजली का हीटर, पानी गरम करने वाला इमर्शन रॉड, खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले रंग-फ्लेवर आदि।
मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वार हस्तक्षेप नही किया जा सकता। ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता है। इन अधिकारों का उल्लंघन नही किया जा सकता है। मौलिक अधिकार न्याय योग्य हैं तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से प्राप्त होते हैं। मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक वर्णन किया गया है। भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार अमेरिका के संविधान से लिए गये हैं ।
भारत संविधान में कुल छ: मौलिक अधिकार हैं
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18)
- स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22)
- शोषण के विरूद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 से 24)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28)
- सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार (अनुच्छेद 29 से 30)
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
1.समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18 तक) –
अनुच्छेद 14 के अनुसार सभी व्यक्तियों को राज्य के द्वारा कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण प्राप्त होगा ।
अनुच्छेद 15 के अनुसार:- राज्य किसी भी नागरिक के विरूद्ध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग तथा जन्म स्थान आदि के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।
बालकों और स्त्रियों की स्वाभाविक प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर उनके संरक्षण के लिये उपबन्ध बनाने का अधिकार अनुच्छेद 15(3) के तहत राज्य को प्राप्त है।
अनुच्छेद 15(4) के अनुसार राज्य सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछडे और SC, ST के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है।
अनुच्छेद 16 के अनुसार देश के समस्त नागरिकों को शासकीय सेवाओं में अवसर की समानता होगी ।
अनुच्छेद 16(3) के अनुसार किसी क्षेत्र में नौकरी देने के लिए निवास सम्बन्धी शर्त लगाई जा सकती है ।
अनुच्छेद 16(4) के अनुसार देश के पिछडे नागरिकों को उचित प्रतिनिधित्व के अभाव में आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है
अनुच्छेद 17 के अनुसार अस्पृश्यता का अन्त किया गया है । इसको समाप्त करने के लिए संसद ने अस्पृश्यता अपराध अधिनियम 1955 के तहत दण्डनीय बना दिया है । बाद में 1976 में इसको संशोधित करके सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1976 बनाया गया ।
अनुच्छेद 18 के अनुसार शिक्षा और सैनिक क्षेत्र को छोड़कर राज्य द्वारा सभी उपाधियों का अन्त कर दिया गया है
अनुच्छेद 18(2) के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी पुरस्कार को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना ग्रहण नहीं कर सकता ।
2.स्वतंत्रता का अधिकारः-(अनुच्छेद 19 से 22 तक)
अनुच्छेद 19 के अनुसार नागरिक को 6 प्रकार की स्वतंत्रतायें दी गई है–
अनुच्छेद 19(A) – भाषण और विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत प्रेस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है । इसी के तहत देश के नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज को फहराने की स्वतंत्रता दी गई है ! संविधान के प्रथम संशोधन अधिनियम 1951 के द्वारा विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया है। सरकार राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक कानून व्यवस्था, सदाचार, न्यायालय की अवमानना, विदेशी राज्यों से संबंध तथा अपराध के लिए उत्तेजित करना आदि के आधार पर विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है।
अनुच्छेद 19(B) के तहत शांतिपूर्ण तथा बिना हथियारों के नागरिकों को सम्मेलन करने और जुलूस निकालने का अधिकार होगा । राज्यों की सार्वजनिक सुरक्षा एवं शान्ति व्यवस्था के हित में इस। स्वतंत्रता को सीमित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 19(C) भारतीय नागरिकों को संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता दी गई हैं ! लेकिन सैनिकों को ऐसी स्वतंत्रता नहीं दी गई है
अनुच्छेद 19(D) देश के किसी भी क्षेत्र मे स्वतंत्रता पूर्वक भ्रमण करने की स्वतंत्रता ।
अनुच्छेद 19(E) देश के किसी क्षेत्र में स्थाई निवास की स्वतंत्रता। (जम्मू कश्मीर को छोड़कर)
अनुच्छेद 19(G) कोई भी व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता ।
अनुच्छेद 20 के अनुसार अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबध में संरक्षण दिया गया है
- किसी भी व्यक्ति को तब तक अपराधी नहीं माना जाएगा जब तक यह सिद्ध न हो जाये कि उसने किसी कानून का अल्लंघन किया है ।
- किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए उससे अधिक दण्ड नहीं दिया जा सकता ।
- किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक दण्ड नहीं दिया जा सकता ।
- किसी भी व्यक्ति को स्वयं अपने विरूद्ध गवाही देने या सबूत पेश करने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता ।
अनुच्छेद 21 के अनुसारः- किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और शरीर की स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता ।
अनुच्छेद 21(क) के अनुसार 86वें संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है ।
अनुच्छेद 22 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना कारण बताए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घण्टे के अन्दर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है ।
- शोषण के विरू़द्ध अधिकार (23 से 24 तक)
अनुच्छेद 23 के अनुसार मानव व्यापार व बेगार तथा बलात श्रम पर प्रतिबंध लगाया गया है । लेकिन राज्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए
सार्वजनिक सेवा या श्रम योजना लागू कर सकती है। राज्य इस सेवा में धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करेगा। बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के लिए 1975 में बंधुआ मजदूरी का उन्मूलन अधिनियम पारित किया गया ।
अनुच्छेद 24 के अनुसार बाल श्रम का निषेध किया गया है जिसके अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के किसी भी बच्चे को कारखानो, खदानों या खतरनाक कार्यों में नहीं लगाया जा सकता ।
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकारः- (25 से 28 तक)
अनुच्छेद 25 के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को मानने व आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार है ! लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था व समाज कल्याण एवं सुधार आदि के अन्र्तगत इस पर रोक लगाई जा सकती है
अनुच्छेद 26 के अनुसार धार्मिक प्रयोजन के लिए संस्था बनाने, उसका पोषण करने और धार्मिक कार्यों के प्रबन्ध के लिये सम्पत्ति अर्जित करने का अधिकार है ।
अनुच्छेद 27 के अनुसारः- किसी भी व्यक्ति को किसी धर्म या सम्प्रदाय विशेष के पोषण हेतु कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा ।
अनुच्छेद 28 के अनुसारः- राज्य निधि से वित्त पोषित या आर्थिक सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी और न ही किसी व्यक्ति को धार्मिक शिक्षा या धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
- संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (29से 30 तक)
अनुच्छेद 29 के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी भाषाए लिपि या संस्कृति को सुरक्षित रखने का पूर्ण अधिकार होगा ! राज्य द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त किसी भी शिक्षण संस्था में किसी भी नागरिक को धर्म व मूलवंश व जाति और भाषा आदि के आधार पर प्रवेश लेने से वंचित नही किया जा सकता ।
अनुच्छेद 30 के अनुसारः- धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्प संख्यक वर्गो को अपनी पसंद की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करने और प्रशासन का अधिकार होगा और राज्य इस आधार पर शिक्षा संस्थाओ को आर्थिक सहायता देने के लिए कोई विभेद नही करेगा ।
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनु. 32)
अनुच्छेद 32 के अनुसार यह अधिकार मौलिक अधिकारों के लिए प्रभावी कार्यवाईयाॅं न्यायलय के द्वारा करवाता है । इस अधिकार के तहत यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लघन हुआ है तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जा सकता है ।
अनुच्छेद 32 को डा. भीमराव अम्वेडकर ने भारतीय संविधान की आत्मा कहा है।
अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु 5 रिटे जारी करने का अधिकार है –
- बन्दी प्रत्यक्षीकरण – इसके अन्तर्गत गैर कानूनी या अवैधानिक रूप से बन्द किये गये किसी भी व्यक्ति को सामने लाने हेतु न्यायालय द्वारा आदेश दिया जा सकता है । यह आदेश किसी भी शासकीय कर्मचारी या किसी भी व्यक्ति के लिए जारी किया जा सकता है ।
- परमादेश – यह आदेश सार्वजनिक पद पर काम करने वाले अधिकारियों व सरकार तथा अधीनस्थ न्यायालयों एवं न्यायिक अभिकरण के विरूद्ध़ जारी किया जा सकता है यदि वे अपने कर्तव्यों का सही पालन नही कर रहे हो किन्तु यह किसी संस्था या व्यक्ति के विरूद्ध जारी नही किया जा सकता है ।
- प्रतिषेध – यह निम्न न्यायालयों को जारी की जाने वाली निषेधाज्ञा है जिसमें यह आदेश दिया जाता है कि वे किसी मामले विशेष मे कोई कार्यवाही न करें क्योंकि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है ।
- उत्प्रेषण – इसके द्वारा निम्न न्यायालय के किसी भी केस को या जानकारी को उच्च न्यायालय अपने पास मंगा सकता है यह रिट उस समय जारी की जा सकती है जब निम्न न्यायालय किसी मामले की सुनवाई कर चुका हो ।
- अधिकार पृच्छा – इस रिट द्वारा न्यायालय किसी भी ऐसे व्यक्ति से जो किसी सार्वजनिक पद पर अवैधानिक रूप से कार्य कर रहा होता है। तो उससे पूछा जाता है कि आप इस पद पर किस अधिकार से कार्य कर रहे हैं ।
मौलिक अधिकारों का निलम्बन
अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करती है वि वह स्वतंत्र बलों, अद्धसैनिक बलों, खूफिया ऐजेन्सियों के सदस्यों के संबंध में मौलिक अधिकारो को प्रतिबंधित कर सकती है। ताकि वे अपने कर्तव्यों का उचित पालन कर सकें और उनके अनुशासन बना रहे।
अनुच्छेद 34 मौलिक अधिकारों पर तब प्रतिबंध लगाता है जब भारत में कही भी सेना विधि (मार्शल ला) लागू हो मार्शल लाॅं के क्रियान्वयन के समय सैन्य प्रशासन के पास जरूरी कदम उठाने के लिए असाधारण अधिकार मिल जाते हैं वे अधिकारों पर प्रतिबंध यहां तक कि किसी मामले में नागरिकों को मृत्युदंड तक लागू कर सकता है।
अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपात की घोषणा होने पर उसके द्वारा अनुच्छेद 359 के तहत सभी मौलिक अधिकार निलम्बित किये जा सकते हैं । परन्तु 44वें संविधान संशोधन के पश्चात अनुच्छेद 20 व 21 किसी भी स्थिति में निलबिंत नही किये जा सकते ।
नोट – अनुच्छेद – 15,16,19,29 व 30 के अन्तर्गत प्राप्त मौलिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए है । जबकि शेष सभी अधिकार सभी व्यक्तियों के लिये हैं ।
जोधपुर (राजस्थान)। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाने वालों के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। जोधपुर बेंच ने एक जनहित याचिका पर यातायात पुलिस को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने वाले वाहन चालकों के फोटो लेकर उनके लाइसेंस रद्द करने को कहा है। इसके लिए लाइसेंस जारी करने वाले परिवहन विभाग से इस मामले में सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। यातायात पुलिस मोबाइल पर बात करने वाले वाहन चालकों के फोटो लेगी और तत्काल परिवहन विभाग को यह फोटो भेजी जाएगी। इसके बाद वाहन चालकों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।
महेन्द्र लोढ़ा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और न्यायाधीश रामचन्द्र सिंह झाला की खंडपीठ ने कहा कि दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर मोबाइल पर बात करना गैर कानूनी है। कोर्ट के ध्यान में लाया गया है कि इस कारण से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। लोगों की इस प्रवृति पर अंकुश लगाना आवश्यक है। ऐसे में राज्य सरकार और यातायात पुलिस को आदेश दिया जाता है कि वे इस बात को सुनिश्चित करे कि कोई भी चालक वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करता नजर नहीं आए। यदि कोई ऐसा करता पाया जाता है तो यातायात पुलिस मोबाइल पर बात करते हुए उसकी फोटो लेने के साथ अन्य प्रक्रिया को पूरा करे। इसके पश्चात उस चालक की पूरी जानकारी लाइसेंस जारी करने वाले परिवहन अधिकारी के पास भेजे। परिवहन विभाग को आदेश दिया जाता है कि यातायात पुलिस से मिली ऐसी शिकायत पर त्वरित कदम उठाते हुए मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने वाले चालक का लाइसेंस नियमानुसार रद्द कर दिया जाए। यदि आवश्यक हो तो ऐसे चालक को एक बार अपना पक्ष रखने की अनुमति प्रदान की जा सकती है। खंडपीठ ने 22 मई को इस आदेश की पालना रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
मेडिकल लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- अस्पताल अपने यहां नियुक्त डॉक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही के लिए जिम्मेदार होगा.
- बालक के माता-पिता उपभोक्ता की तरह मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के अधिकारी होंगे।
- कोई भी परामर्शदाता अपने जूनियर को यदि बिना उनकी काबिलियत जाने अपने जिम्मदारी का प्रत्यायोजन करता है तो यह लापरवाही मानी जायेगी।
- मरीज के प्रश्नों के प्रति डॉक्टर तथा स्टाफ उत्तरदायी होगा।
- डॉक्टर दवाईयों के नाम पूरा तथा साफ तरीके से लिखेंगे ताकि मरीज को समझने में आसानी हो।
- मरीज को उसकी बीमारी एवं इलाज के बारे में पूरी जानकारी देगा ताकि डॉक्टर एवं मरीज के बीच का विश्वास बना रहे।
- मरीज अपने इलाज, खान-पान के संबंध में डॉक्टर द्वारा बताए गए निर्देशों का पालन करेगा।
- डॉक्टरी रिकॉर्ड में पारदर्शिता होनी चाहिए, उनकी उचित देखरेख होनी चाहिए तथा वह मरीज को उपलब्ध होने चाहिए।
- नर्सिंग स्टाफ प्रशिक्षित होना चाहिए तथा उन्हें मेडिकल की वर्तमान जानकारी होनी चाहिए।
- मरीजों के प्रति डॉक्टरों , नर्सों तथा अस्पताल के अन्य कर्मचारियों का नजरिया मानवीय होना चाहिए , लाभ प्राप्त करने वाले व्यवसाय की तरह नहीं होना चाहिए।
मरीज को सूचना लेने का अधिकार
- मरीज को डॉक्टर के बारे में पूरी जानकारी लेने का अधिकार है। जो भी स्वास्थ्य कर्मचारी एवं डॉक्टर उसके इलाज के लिए जिम्मेदार है, वह उसके बारे में सूचना ले सकता है ।
- मरीज को बताई गई एवं खरीदी गयी सभी दवाईयों के बारे में सूचना का अधिकार है। जिसमें दवाइयों की कीमत, सुरक्षा आदि की जानकारी लेना शामिल है।
- सभी दवाइयों पर कंपनी का लेबल होना चाहिए, उनको बनाने वाले कंपनी का नाम लिखा होना चाहिए, दवाई की मात्रा तथा खाने का समय भी अंकित होना चाहिए। इसके अतिरिक्त दवाई का उद्देश्य, संभव प्रभाव, खाने की सावधानी और यदि दवाई लेना मरीज भूल जाए या ज्यादा खा ले तो उससे संबंधित जानकारी होनी चाहिए ।
- यदि मरीज अस्पताल में है तो उसे ट्रांसफर करने या इलाज बदलने या फिर उसे छुट्टी देते समय उससे सलाह लेना आवश्यक है ।
- किसी भी मरीज का इलाज उसकी इच्छा के बिना नहीं किया जाएगा। नाबालिग मरीज की स्थिति में उसके माता-पिता या अभिभावक की इच्छा आवश्यक है। यदि मरीज इच्छा बताने में असक्षम है और इलाज में विलंब खतरनाक साबित हो सकता है तो डॉक्टर जरुरी इलाज या ऑपरेशन कर सकता है ।
- किसी दवा से संबंधित शोध कार्य करने से पहले मरीज की लिखित मंजूरी लेनी आवश्यक है। मरीज को सही तरीके से इस शोध कार्य के उद्देश्य, तरीके तथा इससे संबंधित नुकसान एवं फायदे बताए जाने चाहिए।
- मरीज को अपनी बीमारी, इलाज, स्थिति, पूर्वानुमान तथा अन्य सभी रिकॉर्डों को देखने का अधिकार है ।
मरीज को कानूनी अधिकार
- मरीज को उचित क्षतिपूर्ति प्रक्रिया अपनाने का अधिकार हासिल है।
- अस्पताल के डॉक्टर , स्टाफ या किसी अन्य बुरी प्रक्रिया के विरुद्ध मरीज को कानूनी सलाह लेने का अधिकार है ।
- मरीज को अस्पताल स्टाफ या डॉक्टर की लापरवाही , गैर इंतजामी, गलत प्रक्रिया अपनाए जाने के कारण हुई चोट, तकलीफ, बीमारी के विरुद्ध मुआवजा लेने का अधिकार है।
मरीज को शिकायत का अधिकार
- यदि किसी मरीज को हास्पिटल के इलाज, जांच या दवाईयों को लेकर कोई शिकायत है तो वह सबसे पहले संबंधित डॉक्टर और हॉस्पिटल प्रशासन से इसकी शिकायत कर सकता है। इसके अलावा हॉस्पिटल के शिकायत केंद्र में भी अपनी बात रखी जा सकती है।
- यदि मरीज को दवा को लेकर कोई शिकायत है तो लोकल फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन में इसकी शिकायत कर सकता है।
- यदि लोकल फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के यहां भी मरीज की समस्या का समाधान न हो तो वह मेडिकल काउंसिल में शिकायत कर सकता है। काउंसिल मरीज को नुकसान की भरपाई या डॉक्टर को सजा तो नहीं दे सकती है, लेकिन संबंधित डॉक्टर का पंजीकरण रद्द कर सकती है। इसके लिए काउंसिल के रजिस्ट्रार को तय फॉर्मेट में शिकायत सौंपना होता है।
मरीज को भाग लेने का अधिकार
- मरीज के स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी निर्णय में मरीज को भाग लेने का अधिकार है ।
- हर व्यक्ति को निवारक तथा रोक नाशक दवाइयों , अच्छा स्वास्थ्य एवं सुविधा की जानकारी लेने का अधिकार है।
मरीज को स्वच्छ वातावरण का अधिकार
- हर व्यक्ति को अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ वातावरण का अधिकार है । इसमें शामिल है चिकित्सा केंद्र, अस्पताल के कमरे या वार्ड तथा अन्य चिकित्सा संबंधी सुविधाएं।
स्वास्थ्य सुरक्षा क्या है
स्वास्थ्य सुरक्षा सामाजिक-चिकित्सा धारण है । यह केवल चिकित्सा नहीं है । इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा केवल बीमारी के समय इलाज तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है, जहां तक हो सके मरीज के शारीरिक , मानसिक तथा कल्याण को बढ़ावा मिल सके।
स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार
उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार है , क्योंकि इसकी उत्पत्ति अनुच्छेद 21 में दिए गए जीने के अधिकार से होती है ।
स्वास्थ्य का अधिकार मानव अधिकार
1948 के मानवधिकार घोषाणपत्र का अनुच्छेद 21 यह सुनिश्चित करता है कि हर एक को ऐसे मापदण्ड के साथ जीने का अधिकार है जो उसके तथा उसके परिवार स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पर्याप्त हो, जिसमें चिकित्सा अवधान तथा जरुरी समाज की सेवाएं एवं बीमारी , अपंगता, वृद्धावस्था आदि से संबंधित सुरक्षा का अधिकार शामिल हैं ।
मनपसंद सुविधा का अधिकार
- मरीज को किसी भी समय चिकित्सा के बारे में दोबारा सोचने का अधिकार है।
- मरीज को अपने इलाज का चिकित्सा रिकार्ड लेने का अधिकार है । वह किसी अन्य व्यक्ति का लिखित रुप में इस रिकॉर्ड को लेने की जिम्मेदारी दे सकता है ।
- मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल एवं डॉक्टर से इलाज कराने का अधिकार प्राप्त है।
- मरीज को अपनी बीमारी के बारे में जानकारी मिलने के बाद यह अधिकार है कि वह इलाज करवाए या नहीं करवाए।
- मरीज का यह अधिकार है कि यदि वह किसी डॉक्टर के इलाज से संतुष्ट नहीं है तो वह डॉक्टर को बदल सकता है ।
सुविधा ग्रहण करने का अधिकार
- इलाज एवं जांच से पहले मरीज को संबंधित इलाज तथा अन्य विकल्पों के बारे में जानने का पूरा अधिकार है ।
- जहां पर संभव हो वहां मरीज को इलाज से संबंधित खतरों, समस्याओं, इलाज के बाद प्रभावों, मृत्यु की संभावना, इलाज के असफल होने की संभावना के बारे में सूचना दी जा सकती है।
- मरीज से यह भी बताया जा सकता है कि इलाज की प्रक्रिया मेडिकल के छात्रों के सामने की जायेगी या छात्रों के द्वारा की जायेगी।
- मरीज किसी भी तरह के इलाज एवं जांच को करवाने से मना कर सकता है ।
चुनाव प्रचार में गड़बड़ी की शिकायत
- पीठासीन अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी या जिला चु्नाव अधिकारी या मुख्य चुनाव अधिकारी या फिर निर्वाचन आयोग से शिकायत कर सकते हैं ।
- न्यायिक मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं।
- लोकपाल नियुक्त हो तो उससे शिकायत कर सकते हैं।
- हर हिंसक घटना की थाने में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं ।
चुनाव में बेहिसाब पैसों के खर्च की शिकायत
- स्थानीय आयकर अधिकारियों से शिकातय करें,
- निर्वाचन आयोग के चुनाव प्रेक्षक से शिकायत करें,
- निर्वाचन आयोग के चुनाव व्यय प्रेक्षक से शिकायत करें,
- राज्य सरकार से शिकायत करें,
- पुलिस से शिकायत करें,
- न्यायिक मजिस्ट्रेट शिकायत करें,
- निर्वाचन अधिकारी या जिला चुनाव अधिकारी या मुख्य चु्नाव अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी से शिकायत करें।
दीवारों पर नारों के खिलाफ शिकायत
- राजनैतिक दलों द्वारा दीवारों और घरों पर नारे लिखना अपराध है। इसके खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाईयां की जा सकती हैं...
- राजनैतिक दल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा सकते हैं,
- संपत्ति के नुकसान का सिविल दावा दर्ज करा सकते हैं,
- निर्वाचन आयोग के प्रेक्षकों से शिकायत कर सकते हैं।
- निर्वाचन अधिकारी या जिला चुनाव अधिकारी या मुख्य चुनाव अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं,
- पुलिस से शिकायत कर सकते हैं ।
लाउडस्पीकर के गलत इस्तेमाल पर शिकायत
- चुनावों के दौरान निर्धारित समय के अलावा अथवा बहुत ऊंची आवाज में लाउज स्पीकरों के इस्तेमाल के खिलाफ निम्नलिखित से शिकायत कर सकते हैं...
- जिला प्रशासन से शिकायत कर सकतें हैं,
- पुलिस से शिकायत कर सकते हैं,
- निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक से शिकायत कर सकते हैं,
- निर्वाचन अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी या निर्वाचन आयोग से शिकायत कर सकते हैं।
मतदान केंद्रों से संबंधित समस्याएं
- अगर मतदान केंद्र ऐसी जगह हो जहां पहुंचना संभव न हो या दूरी ज्यादा हो या आसपास अपराधियों का इलाका हो या राजनीतिक दलों के दफ्तर करीब हो या आस-पास कोई धार्मिक स्थल हो।
- मतदान केंद्र बहुत तंग जगह पर हो और केंद्र में प्रवेश करने तथा निकलने के अलग-अलग रास्ते न हों।
- एक ही इमारत में बहुत अधिक मतदान केंद्र हों, तो इसकी शिकायत करें।
मतदान केंद्रों से संबंधित शिकायतें
- ऊपर उल्लिखित समस्याओं के बारे में जिला चुनाव अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी या मुख्य चुनाव अधिकारी या निर्वाचन आयोग से शिकायत करें।
- मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी से आग्रह करें कि आपकी राय अपनी डायरी में दर्ज करें।
मतदान केंद्रों में गड़बड़ी पर शिकायत
- अगर मतदाताओं या उम्मीदवारों के एजेंटों या मतदान करवाने वाले कर्मचारियों को डराया- धमकाया जाता है,
- मतदान केंद्रों पर कब्जा और अथवा गड़बड़ी फैलाई जाती है ,
- चुनाव प्रचार तथा लोगों से पैसा वसूलने के लिए गुंडों की मदद ली जाती है तो इसकी शिकायत करें।
मतदान केंद्र के कर्चमारी के खिलाफ शिकायत
- मतदान करवा रहा सरकारी कर्मचारी अगर अपने राजनैतिक झुकाव की वजह से अपना दायित्व ठीक से नहीं निभाता है तो आप पुलिस अथवा न्यायिक मजिस्ट्रेट से उसकी शिकायत कर सकते हैं।
मतदान केंद्र पर मौजूद पुलिस बल के खिलाफ शिकायत
- कानून व्यवस्था के प्रभारी अथवा कर्मचारी आपको परेशान करते हैं तो...
- जिला चुनाव अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी या मुख्य चुनाव अधिकारी या निर्वाचन आयोग से शिकायत करें,
- राज्य के पुलिस महानिदेश के शिकायत करें,
- राज्य के मुख्य सचिव से शिकायत करें,
- संघ सरकार के गृहमंत्रालय से शिकायत करें,
मतदाता इन बातों को ध्यान में रखें
- कोई व्यक्ति एक से ज्यादा चुनाव क्षेत्रों में मतदाता के रुप में पंजीकृत नहीं हो सकता है ।
- कोई व्यक्ति एक ही चुनाव क्षेत्र के एक से ज्यादा हिस्सों में मतदाता नहीं हो सकता है ।
- मतदाता कार्ड पर गलत जानकारी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है ।
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत गलत जानकारी देने के अपराध में एक साल की कैद या जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
फर्जी वोटर कार्ड बनाने पर दण्ड
अगर कोई व्यक्ति नकली दस्तावेज या वोटर कार्ड बनाने का काम करता है, तो उस पर आईपीसी की धारा 471 के तहत फर्जीवाड़ा, 467 के तहत धोखा देने व इस संबंध में उपयोग आने वाले उपकरण को रखना या कब्जे में रखने के आरोप में धारा 473 के तहत मुकदम चलाया जा सकता है । मामला साबित होने पर आरोपी को आजीवन कारावास या कम से कम दस वर्ष का कारावास व आर्थिक दण्ड लगाया जा सकता है।
फर्जी वोटर कार्ड के इस्तेमाल पर दण्ड
फर्जी वोटर कार्ड या अन्य नकली दस्तावेज को इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति यह जानते हुए कि वह नकली है, फिर भी उसका इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 471 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। मामला साबित होने पर व्यक्ति को आजीवन कारावास या कम से कम दस वर्ष की सजा या आर्थिक दण्ड हो सकता है ।
अठारह साल उम्र पूरी कर चुके हर भारतीय नागरिक को मतदान करने का अधिकार है।( अगर उसे की सक्षम न्यायालय ने पागल नहीं घोषित किया है या फिर भ्रष्टाचार तथा चु्नाव से संबद्ध किसी अपराध के लिए किसी कानून के अंतर्गत उसे मतदान के अयोग्य घोषित नहीं किया गया है)
मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया
- केवल मतदाता कार्डों में शामिल लोगों के नाम ही नई मतदाता सूची में लिए जाते हैं ।
- निर्वाचन आयोग के द्वारा किसी क्षेत्र की मतदाता सूचियों में संशोधन का आदेश दिए जाते ही, मतदाताओं की गणना करने वाले सरकारी कर्मचारी क्षेत्र के हर घऱ में जाते हैं ।
- कर्मचारी घर के मुखिया और उसकी अनुपस्थिति में परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य उन सदस्यों के नाम तथा अन्य विवरण लेते हैं जो मतदाता सूची में शामिल किए जाने की पात्रता रखते हैं ।
- गणना करने वाले कर्मचारी इन सदस्यों की उम्र तथा आवास के प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र , पासपोर्ट आदि मांग सकते हैं।
- इन ब्योरों से संतुष्ट होने के बाद कर्मचारी मतदाता कार्ड पर इन नामों और ब्योरों को दर्ज करता है और कार्ड पर कोड नंबर डलता है ।
- कर्मचारी मतदाता कार्ड की प्रति घऱ के मुखिया को देता है जिसे भविष्य में संदर्भ के लिए संभालकर रखना चाहिए।
- मतदाता कार्ज के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज किया जाता है ।
- मतदाता कार्ड में सामान्य रुप से रहने वालों के नाम ही दर्ज किए जाते हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए बाहर रहने वाले और छुट्टियों में घऱ आने वाले वयस्क हो चुके बच्चों के नाम भी उनके माता-पिता के पते के साथ मतदाता कार्ड में दर्ज कर लिए जाते हैं ।
- अगर सरकारी कर्मचारी के बार-बार जाने पर भी घऱ का मुखिया अथवा कोई वरिष्ठ व्यक्ति नहीं मिलता है तो कर्मचारी घर में एक फॉर्म छोड़ जाता है । यह फॉर्म भरकर कर्मचारी के अगली बार आने पर उसे दे देना चाहिए।
- यह फॉर्म भरकर चुनाव क्षेत्र के चुनाव पंजीकरण अधिकारी अथवा क्षेत्र के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास सीधे भी भेजा जा सकता है ।
सैन्यकर्मी और बाहर काम करने वालों के लिए प्रक्रिया
- इन वर्गों में शामिल लोग...
- संघ सरकार के अधीन सैन्य बलों में कार्यरत लोग,
- आर्मी एक्ट ,1950 के अंतर्गत आने वाले किसी सैन्य बल में कार्यरत लोग,
- किसी राज्य के ऐसे सैन्य बल के सदस्य , जो राज्य के बाहर कार्यरत हों,
- भारत सरकार के अधीन देश से बाहर के पदों पर कार्यरत व्यक्ति ।
- इन वर्गों के लोग डाक मतपत्र के जरिए मतदान कर सकते हैं ।
- इन लोगों को रिकॉर्ड ऑफिस में उपलब्ध जरुरी फॉर्म भरने होते हैं, रिकॉर्ड ऑफिस इन्हें संबद्ध मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज देता है ।
- निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मतदाता सूची के एक अलग भाग में इन लोगों का नाम दर्ज करता है ।
कच्ची मतदाता सूचियां
- मतदाताओं की गणना का पूरा हो जाने पर , कच्ची मतदाता सूचियां तैयार की जाती हैं और इन्हें प्रकाशित करके लोगों से कहा जाता है कि अगर उनके दावे अथवा आपत्तियां हों तो दर्ज कराएं।
- अपने परिवार के वयस्क सदस्यों के नाम मतदाता सूचियों में दर्ज किया जाना सुनिश्चित करें।
- अगर कच्ची मतदाता सूची में आपके घर के किसी वयस्क सदस्य का नाम नहीं है तो निर्धारित फॉर्म में दावा पेश करें।
- इस दौरान आपको प्रमाण के रुप में मतदाता कार्ड की प्रति पेश करनी पड़ सकती है।
- किसी तरह की परेशानी होने पर चुनाव पंजीकरण अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी या मुख्य निर्वाचन को शिकायत कर सकते हैं।
- आप सीधे निर्वाचन आयोग को भी शिकायत कर सकते हैं ।
देश में छोटे कुटीर उद्योगों को बैंक से आर्थिक मदद आसानी से नहीं मिल पाती है और वे नियमों को पूरा नहीं कर पाते हैं। इस वजह से वे उद्योगों को बढ़ावा देने में असमर्थ होते हैं। इसी समस्या के निदान के लिए मुद्रा बैंक योजना की शुरुआत की गयी है। इसका मुख्य लक्ष्य युवा एवं पढ़े लिखे नौजवानों के हुनर को मजबूत धरातल देना है और साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाना है।
मुद्रा बैंक योजना के लिए पात्रता:
मुद्रा योजना के तहत हर वह व्यक्ति जिसके नाम कुटीर उद्योग है या किसी के साथ पार्टनरशिप के सही दस्तावेज हों या कोई छोटी सी लघु यूनिट हो, वे मुद्रा बैंक योजना के तहत ऋण ले सकते हैं।
मुद्रा बैंक योजना के तहत कर्ज कैसे मिलेंगे:
- सबसे पहले ऋण प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति को नजदीक के किसी बैंक में जाकर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लिए बैंक से संपर्क कर उनसे योजना का फार्म प्राप्त करना होगा।
- इसके बाद ऋण आवेदन फार्म को भरकर साथ में मांगे गए कागजातों और आपके द्वारा किए जाने वाले व्यवसाय या फिर जिस किसी नए व्यवसाय को शुरु करना चाहते हैं, उसका विस्तृत विवरम प्रस्तुत करना होगा।
- फिर बैंक द्वारा निर्धारित सभी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।
- इन सभी औपचारिकाताओं को पूरा करने के बाद आपका ऋण मंजूर होगा और फिर आपको ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
मुद्रा ऋण के लिए पात्रता मानदंड / आवश्यक दस्तावेज:
- पहचान का प्रमाण – मतदाता पहचान पत्र / ड्राइविंग लाइसेंस / पैन कार्ड / आधार कार्ड / पासपोर्ट की स्व प्रमाणित प्रतिलिपि।
- निवास का प्रमाण – हालिया टेलीफोन बिल, बिजली बिल, संपत्ति कर रसीद (2 महीने से अधिक पुरानी न हो), मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और मालिक / भागीदारों / निदेशकों के पासपोर्ट।
- अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अल्पसंख्यक का जाति प्रमाणपत्र।
- व्यावसायिक उद्यम की पहचान / पते का प्रमाण- संबंधित लाइसेंस / पंजीकरण प्रमाण पत्र / व्यापार इकाई के मालिक, पहचान और पते से संबंधित अन्य दस्तावेजों की प्रतियाँ।
- आवेदक को किसी भी बैंक / वित्तीय संस्था का ऋणी नहीं होना चाहिए।
- मौजूदा बैंकर से, यदि कोई, खातों का विवरण (पिछले छह महीनों का)।
- आयकर / बिक्री कर रिटर्न आदि के साथ यूनिटों की पिछले दो वर्षों की बैलेंस शीट (2 लाख और इससे ऊपर के सभी मामलों के लिए लागू)।
- कार्यशील पूंजी की सीमा के मामले में और अवधि ऋण के मामले में ऋण की अवधि के लिए एक वर्ष के लिए अनुमानित बैलेंस शीट (2 लाख और इससे ऊपर के सभी मामलों के लिए लागू)।
- आवेदन जमा करने की तारीख तक मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त बिक्री की रसीद।
- परियोजना रिपोर्ट (प्रस्तावित परियोजना के लिए) जिसमें तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का विवरण शामिल है।
- ज्ञापन और कंपनी के संगठन का लेख / साझीदारों आदि के साझेदारी के दस्तावेज।
- तीसरे पक्ष की गारंटी के अभाव में, निदेशकों और सहयोगियों सहित उधारकर्ता से संपत्ति और देयता कुल मूल्य पता करने की मांग की जा सकती है।
- मालिक / भागीदारों / निदेशकों के फोटो (दो प्रतियों में)।
मुद्रा बैंक ने कर्ज लेने वालों को तीन हिस्सों में बांटा हैः
- व्यवसाय शुरू करने वाले,
- मध्यम स्थिति में कर्ज तलाशने वाले और
- विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले।
इन तीन हिस्सों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुद्रा बैंक ने तीन कर्ज उपकरणों की शुरुआत की हैः
- शिशुः इसके दायरे में 50 हजार रुपए तक के कर्ज आते हैं।
- किशोरः इसके दायरे में 50 हजार से 5 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।
- तरुणः इसके दायरे में 5 से 10 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।
निम्नलिखित विभिन्न मुद्रा उत्पादों को विभिन्न व्यवसायों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं:
- सेक्टर / गतिविधि विशिष्ट योजना
- माइक्रो क्रेडिट योजना (एमसीएस)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए पुनर्वित्त योजना (आरआरबी) /
- अनुसूचित सहकारी बैंक
- महिला उद्द्यमी योजना
- व्यापारी और दुकानदारों के लिए व्यापार ऋण
- लापता मध्य ऋण योजना
- माइक्रो इकाइयों के लिए उपकरण वित्त
- फर्मों के प्रकार जो आवेदन कर सकते हैं :-
किसी भी प्रकार के फर्म चाहे वह स्वामित्व या साझेदारी हो जो एक गैर कॉर्पोरेट छोटे व्यवसाय के (NCSBS) दायरे में आता है इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। NCSBS एक ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में कहीं भी हो सकता है।
- एक सेवा क्षेत्र की इकाई
- एक विनिर्माण इकाई
- एक खाद्य सेवा / खाद्य प्रसंस्करण इकाई
- एक छोटी औद्योगिक इकाई
- एक फल या सब्जी विक्रेता
- एक दुकानदार (आप भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए यदि आप एक मताधिकार आउटलेट खोलने की इच्छा कर सकते हैं)
- एक ट्रक ऑपरेटर
- एक कारीगर
- एक महिला उद्यमी
भविष्य में की जाने वाली कुछ पेशकशः
- मुद्रा कार्ड
- पोर्टफोलियो क्रेडिट गारंटी
- क्रेडिट एनहांसमेंट
मुद्रा बैंक के कामकाज के तौर-तरीके तय हो चुके हैं। यह निर्णय लिया गया है कि सूक्ष्म वित्त संस्थानों की ओर से पैसा उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, छोटे व्यवसायों को मुद्रा बैंक से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल करने और कर्ज के लिए कौन पात्र है और इस योजना का लाभ किस तरह लिया जा सकेगा, इसकी स्पष्टता के लिए इंतजार करना होगा।
मुद्रा बैंक पर ज्यादा जानकारी के लिए
लाग आन करेः http://pmindia.gov.in/en/news_updates/pm-launches-pradhan-mantri-mudra-yojana/
मुद्रा बैंक सम्पर्क करने का विवरण:
रजिस्टर्ड ऑफिस सिडबी, ग्राउंड फ्लोर, वीडियोकॉन टॉवर, झंडेवाला एक्सटेंशन, ई -1, रानी झांसी रोड, नई दिल्ली – 110055
मुख्य व्यवसायिक कार्यालय एमएसएमई डेवलपमेंट सेंटर, सी -11, जी-ब्लॉक, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा ईस्ट, मुंबई – 400 051
मुद्रा बैंक टोल फ्री नंबर
मुद्रा कार्ड
एक पूर्व लोड मुद्रा कार्ड भी उपकरणों, कच्चे माल और पंजीकृत उत्पादकों से या ऑनलाइन साधनों के माध्यम से खरीद के लिए उपलब्ध हो जाएगा। इस कार्ड पर क्रेडिट सीमा, उद्यम के लिए मंजूर ऋण सीमा का 20% होगा । एक कार्ड पर 10,000 रूपये की अधिकतम ऋण सीमा के साथ किया जा रहा है। प्रिंसिपल जारीकर्ता होगी मुद्रा और कार्ड पोर्टफोलियो का 20% तक का ऋण जोखिम मुद्रा के रूप में ऋण गारंटी योजना के तहत कवर किया जाएगा। शेष जोखिम एमएफआई सहयोगियों के साथ बने रहेंगे।
इसके अलावा एक सुविधा को बाद में जोड़ने के लिए आपका (उधारकर्ता) मुद्रा कार्ड बनाया जा सकता है प्रधानमंत्री जन धन योजना बचत खाता और भी तत्काल समस्याओं को पूरा करने के लिए बैंक के एटीएम नेटवर्क के माध्यम से अपने सूक्ष्म इकाई के लिए आवश्यक राशि प्राप्त करने के लिए सुविधा हो सकती है
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लिए राज्यवार टोल फ्री नम्बर:
क्र.सं. राज्य/यू.टी का नाम टोल फ्री नम्बर
1 अंडमान-निकोबार द्वीप समूह 18003454545
2 आंध्र प्रदेश 18004251525
3 अरुणाचल प्रदेश अंडर प्रोसेस
4 असम अंडर प्रोसेस
5 बिहार 18003456195
6 चंडीगढ़ 18001804383
7 छत्तीसगढ़ 18002334358
8 दादरा नगर हवेली 18002338944
9 दमन-दीव 18002338944
10 गोवा अंडर प्रोसेस
11 गुजरात 18002338944
12 हरियाणा 18001802222
13 हिमाचल प्रदेश 18001802222
14 जम्मू और कश्मीर 18001807087
15 झारखंड 18003456576
16 कर्नाटक 180042597777
17 केरल 180042511222
18 लक्षद्वीप 0484-2369090
19 मध्यप्रदेश 18002334035
20 महाराष्ट्र 18001022636
21 मणिपुर अंडर प्रोसेस
22 मेघालय अंडर प्रोसेस
23 मिजोरम अंडर प्रोसेस
24 नागालैंड अंडर प्रोसेस
25 एनसीटी ऑफ दिल्ली 18001800124
26 ओडिशा 18003456551
27 पांडुचेरी 18004250016
28 पंजाब 18001802222
29 राजस्थान 18001806546
30 सिक्किम 18003453256
31 तमिलनाडु अंडर प्रोसेस
32 तेलंगाना 18004258933
33 त्रिपुरा 18003453344
34 उत्तरप्रदेश 18001027788
35 उत्तराखंड 18001804167
36 पश्चिम बंगाल 18003453344
क्र. सं. राष्ट्रीय टोल फ्री नम्बर
- 18001801111
- 1800110001
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