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यदि आपका नाम राजस्थान रशन कार्ड सूची 2018 में नहीं है और नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो खाद्य विभाग राजस्थान के आधिकारिक पोर्टल http://food.raj.nic.in/ के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते हैं ।
राशन कार्ड आवेदन फॉर्म की स्थिति जांचने के लिए राजस्थान सरकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वेबसाइट पर जाना होगा । वहां फॉर्म नम्बर के विकल्प पर क्लिक करने के बाद चेक स्टेटस (http://food.raj.nic.in/Form_Status.aspx) पर क्लिक करना होगा।
इस पेज का फोटो नीचे दिया गया है, जिसे आप देख सकते हैं-

राजस्थान में राशन कार्ड गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली अधिकांश योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ है । आप राशन कार्ड के माध्यम से अपने पास स्थित विभिन्न राशन की दुकानों से रियायती दर पर वस्तुएं खरीद सकते हैं ।
हर व्यक्ति राजस्थान के खाद्य विभाग की राशन कार्ड सूची में अपने नाम को शामिल करने के लिए, राजस्थान राशन कार्ड आवेदन फार्म 2018 को ऑनलाइन जमा कर सकता है।
राजस्थान में आप अपने राशन कार्ड का आवेदन अपने निकट के सरकारी राशन के दुकान तथा राशन कार्ड से सम्बंधित सभी जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।
राजस्थान में तीन प्रकार के राशन कार्ड जारी किए गए हैं-
ऑनलाइन राशन कार्ड आवेदन करने की प्रक्रिया-
आप चाहें तो स्वयं आनलाइन राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। सबसे पहले आवेदन के लिए आपको राजस्थान सरकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की वेबसाइट के लिंक http://food.raj.nic.in/Docs/NFSA_Application_Form.pdf पर जाना होगा। इसके बाद खाद सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन पत्र पर क्लिक करना होगा।
आवेदन पत्र के विकल्प पर क्लिक करते ही आवेदन फॉर्म खुल जायेगा । आप अपने वर्ग (APL, BPL) के अनुसार फॉर्म भर कर डाउन लोड कर उसकी प्रतिलिपि निकाल सकते हैं।
APL आवेदन फॉर्म का फोटो नीचे दिया गया है-
BPL राशनकार्ड के आवेदन फॉर्म का फोटो नीचे दिया गया है-
राशन कार्ड के आवेदन के लिए दस्तावेज़-
नोट- आप राशन कार्ड के लिए आवेदन आवेदन ई-मित्र / कॉमन सर्विस सेंटर केंद्र पर जाकर भी करवा सकते हैं-
बदायूं (उत्तर प्रदेश)। अस्पताल प्रशासन की मनमानी ने सोमवार एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया। जिला अस्पताल में दो-दो शव वाहन होने के बावजूद एक व्यक्ति अपनी पत्नी का शव कंधे पर लादकर इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन उपलब्ध कराने से मना कर दिया।
बदायूं के थाना मुसाझाग के मजारा गांव के रहने वाले सादिक ने सुबह जिला अस्पताल में अपनी पत्नी मुनीशा को गंभीर रूप से बीमार होने के कारण भर्ती कराया। अस्पताल में उसको समय पर अपेक्षित इलाज नहीं मिला, जिसके कारण इलाज के दौरान मुनीशा की मौत हो गई। मौत के बाद गरीब सादिक ने लोगों से एक प्रार्थन पत्र अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आरएस यादव के नाम लिखवाया। उसमें उसने पत्नी का शव घर ले जाने के लिए शव वाहन की मांग की, लेकिन सादिक को शव वाहन नहीं मुहैया कराया गया। आरोप है कि उस समय जिला अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध था। इसके बाद सादिक अस्पताल में शव वाहन के लिए इधर उधर भटकता रहा, लेकिन कोई भी उसकी पत्नी का शव ले जाने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद थक-हार पर वह कंधे पर अपनी पत्नी का शव लाश लेकर चल दिया। पत्नी का शव कंधे पर ढोते समय गरीब पति की बेबसी और आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह शव को कंधे पर रखकर ऑटो स्टैंड की तरफ चल दिया। इस दौरान लोगों ने मानवता दिखाई और गरीब सादिक को चंदा देकर उसकी पत्नी के शव को घर ले जाने के लिए मदद की।
वहीं इस घटना के मीडिया में आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की लीपापोती शुरु कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील और अमानवीय कृत्य से जुड़ा हुआ है। अब इस मामले की जांच कर अस्पताल प्रभारी को नोटिस जारी किया जाएगा। इस मामले के संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी दी है। देर शाम सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल पहुंच कर मामले की छानबीन शुरू कर दी। अब देखना ये है कि अस्पताल प्रशासन की मानमानी का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा या फिर सख्त कार्रवाई के द्वारा इन पर लगाम भी लगाई जायेगी।
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड)। शुक्रवार को पिथौरागढ़ कलेक्ट्रेट में सरकार और अधिकारियों के नाकारपन का एक ऐसा अजब-गजब नजारा देखने को मिला, जिसे पढ़कर आपको प्रशानिक व्यवस्था से नफरत होने लगेगी। सरकार के नाकारापन से परेशान चीन सीमा से लगे इलाके का क्षेत्र पंचायत सदस्य साठ किलो वजन का प्रार्थना पत्र पीठ पर लादकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। 72 वर्ष के मनोज कुमार नगन्याल नाम के इस व्यक्ति की यह हालत देखकर लोग हैरान रह गए। मनोज कुमार नगन्याल ने मीडिया को बताया कि उन्हें यह कदम क्षेत्र की समस्याओं का निदान न होने पर उठाना पड़ा। मनोज ने कहा कि वर्षों से समस्याओं से निजात दिलाने की गुहार लगाते-लगाते 60 किलो ज्ञापनों का पुलिंदा बन गया है, लेकिन क्षेत्र की समस्याएं जस की तस बनी हैं। किसी भी ज्ञापन पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई।
पिथौरागढ़ जिले के दारमा क्षेत्र पंचायत के नागलिंग गांव के निवासी मनोज कुमार नगन्याल 2009 से लेकर 2014 तक ग्राम प्रधान रहे चुके हैं। अब वह 2014 से दारमा के क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। इस पंचायत क्षेत्र में सीपू, मार्छा, गो, तिदांग, विदांग, बालिंग, बौगलिंग, सौन, चल, नागलिंग, सेला, दर, दुग्तू, दांतू, ढाकर, दर गांव आते हैं। ये सभी गांव उच्च हिमालयी चीन सीमा से लगे हुए हैं। यह क्षेत्र आपदा से लेकर तमाम तरह की समस्याओं से जूझता रहता है। मनोज कुमार नगन्याल केंद्र, राज्य सरकारों के अलावा डीएम, एसडीएम को इस क्षेत्र की समस्याओं के निदान के लिए हमेशा पत्र भेजते रहे हैं। इन 9 वर्षों के बीच उन्होंने शासन, प्रशासन और सरकार को हजारों की संख्या में पत्र भेजे। इन पत्रों का वजन अब 60 किलो हो चुका है। लेकिन अभी तक भेजे गए पत्रों में से केवल 20 फीसदी समस्याओं का ही निदान हो सका है। मनोज ने बार-बार आवाज उठाने के बाद भी क्षेत्र की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने समस्याओं का निदान न होने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी भी दी है।
हालांकि बाद में जिलाधिकारी सी रविशंकर ने मनोज कुमार नगन्याल को बुलाकर उनसे बातचीत की और समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिलाया। इस दौरान नगन्याल ने प्रधानमंत्री का संबोधित 26 सूत्री मांगों का ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं के निदान के लिए जल्द पहल नहीं हुई तो वह मुख्यालय में अनशन पर बैठेंगे।
यदि आपका राशन कार्ड बन गया है, लेकिन आप राशन कार्ड को डाउनलोड करने में असमर्थ हैं, क्योंकि आपका पंजीकृत मोबाइल नंबर डिस्कनेक्ट कर दिया गया है। तब आप दिल्ली राशन कार्ड में मोबाइल नंबर को पंजीकृत या बदल सकते हैं। इसके लिए आप नीचे दिए गए चरणों का पालन करें
आप सबसे पहले, इस लिंक http://nfs.delhi.gov.in/Citizen/UpdateMobileNumber.aspx पर जाएं।
इसके बाद, नीचे दिया गया पेज आपकी स्क्रीन पर दिखाई देगा।

आप सभी विवरण जैसे घर के मुखिया का आधार नंबर, राशन कार्ड संख्या,घर के मुखिया का नाम और नया मोबाइल नंबर दर्ज करें।
नोट- आपके बता दें कि मोबाइल नंबर पंजीकृत या बदलने की प्रक्रिया में लगभग 15 से 30 दिन लगते हैं।
यदि आपका राशन कार्ड सफलतापूर्वक बन गया है, तो आप नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करके अपना ई-राशन कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं –
सबसे पहले, इस लिंक http://nfs.delhi.gov.in/Citizen/E_RationCard.aspx पर जाएं।
उसके बाद, निम्न पृष्ठ आपकी स्क्रीन पर दिखाई देगा।
दिल्ली में राशन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले आवेदक अपने राशन कार्ड के आवेदन की स्थिति को जांचने के लिए नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें।
अपने राशन कार्ड के आवेदन की स्थिति को जांचने के लिए सबसे पहले, इस लिंक पर जाएं- http://nfs.delhi.gov.in/Citizen/ViewApplicationStatus.aspx
इस लिंक पर जाने के बाद, निम्नलिखित पृष्ठ दिखाई देगा।
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यदि आपका राशन कार्ड सफलतापूर्वक बन गया है तो आपको सभी विवरण जैसे कि राशन कार्ड नंबर, परिवार के मुखिया का नाम आदि दिया जाएगा।
दिल्ली सरकार ने अब राशन कार्ड बनवाने की सुविधा ऑनलाइन कर दी है। आप स्वयं दिल्ली में राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
इसके लिए आपको दिल्ली सरकार की http://nfs.delhi.gov.in/ वेबसाइट पर जाना होगा।
वहां जाकर आपको “Apply Online for Food Security” लिंक पर क्लिक करना होगा।
लिंक पर क्लिक करने के बाद “Citizen Login Form” पेज खुल जाएगा।

यदि आप रजिस्टर्ड यूजर है, तो आप लॉगिन पासवर्ड डाल कर लॉगिन करें।
यदि आप रजिस्टर्ड यूजर नहीं है तो आप को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन अकाउंट बनाना होगा।
लॉगिन अकाउंट बनाने के लिए “Register” पर क्लिक करें। जिसके बाद “Citizen Registration Form” खुलेगा। जो नीचे दिया गया है।

इसके बाद आप डॉक्यूमेंट टाइप सिलेक्ट करें, जिसमें आपका आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड होगा। इसके बाद उसका नंबर दर्ज करें और कैप्चा कोड डाल कर सबमिट कर दें।
उसके बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा, जिसमें आपको अपनी पूरी जानकारी भरनी होगी और अंत में एक फोटो भी लगाना होगा।
ध्यान रखें कि आधार कार्ड और भरी गई जानकारी दोनों एक समान होनी चाहिए। अन्यथा आवेदन के समय समस्या हो सकती है। यह रजिस्ट्रशन आप ई-डिस्ट्रिक्ट दिल्ली की (https://edistrict.delhigovt.nic.in) वेबसाइट के माध्यम से भी कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
दिल्ली में राशन कार्ड का आवेदन शुल्क
आप राशन कार्ड से सम्बंधित सभी जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप मध्य प्रदेश में ऑनलाइन राशन कार्ड की सूची देखना चाहते हैं तो नीचे दी गयी प्रक्रिया का पालन करें-
राशन कार्ड की सूचि में अपना नाम देखने के लिए आपको सबसे पहले नेशनल इन्फ़ोर्मटिक सेण्टर मध्य प्रदेश (NIC) की वेबसाइट की पेज पर जाना होगा।
इस पेज पर दिए हुए विकल्प BPL Register पर क्लिक करना है । फिर उसमें से विकल्प नए शामिल किये गए बीपीएल परिवारों की सूचि पर क्लिक करना है। इस पेज की फोटो देखिये नीचे:-
इस पेज पर दिए जिला, ग्राम पंचायत, स्थानीय निकाय, गाँव आदि विकल्पों को भरते ही सूची देखें का विकल्प आ जायेगा।
अब आपको इस विकल्प पर क्लिक करना है, इस पेज का फोटो देखिये नीचे:-
जब आप सूची देखें पर क्लिक करेंगे तो राशन कार्ड की सूची खुल जाएगी। आप इसमें अपने वार्ड नम्बर के अंतर्गत अपने घर के पते और घर के मुखिया के नाम द्वारा राशन कार्ड की सूचि में अपना नाम देख सकते हैं। इस पेज की फोटो देखिये नीचे:-

आप राशन कार्ड का आवेदन, राशन कार्ड से सम्बंधित सभी जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। राशन कार्ड देश और राज्य की नागरिकता का परिचय पत्र भी होता है । अतः सरकार द्वारा प्रत्येक नागरिक के लिए राशन कार्ड बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार द्वारा आय वर्ग के श्रेणी के अनुसार अलग-अलग रंग के राशन कार्ड जारी किये गए हैं।
राशन कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज
मध्य प्रदेश राशन कार्ड की सरकारी वेबसाइट- http://www.food.mp.gov.in
मध्य प्रदेश BPL/ AAY ऑनलाइन राशन कार्ड पंजीकरण करने की प्रक्रिया:-
इसके लिए आपको सबसे पहले बीपीएल परिवार पंजीकरण एवं प्रबंधन प्रणाली के वेबसाइट (http://samagra.gov.in/SamagraPortals/BPL/BPL_Register.aspx) का पेज खोलना होगा। इस पेज की फोटो देखिये नीचे:- 
प्राप्त हुई सूची में आप अपने परिवार की आईडी, मुखिया का नाम, सदस्यों की संख्या और पता आदि की जानकारी देख सकते हैं।
देहरादून (उत्तराखंड)। एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आयी है, जिसे देखकर इंसानियत शर्मशार हो गयी। एक गरीब व्यक्ति अपने छोटे भाई की लाश कंधे पर उठाकर इधर से उधर भटकता रहा, लेकिन अस्पताल के डाक्टरों ने उसकी मदद नहीं की। दरअसल शव को घर तक ले जाने के लिए उसके पास निजी एंबुलेंस करने के लिए पैसे नहीं थे। उस गरीब ने कई लोगों से मदद की विनती की, लेकिन कोई आगे नहीं आया। हालांकि कुछ समय बाद अस्पताल के कर्मचारी और इलाज के लिए वहां आए किन्नरों ने निजी एंबुलेंस के लिए 3000 रुपए चंदा जुटाकर शव को उसके घर भेजा।
आपको बता दें कि सड़क के किनारे ठेला लगाने वाले पंकज का छोटा भाई सोनू उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर में हलवाई की दुकान में काम करता था। सोनू टीबी से ग्रस्त था। जब सोनू की तबियत ज्यादा खराब हुई तो पंकज इलाज के लिए उसे देहरादून ले आया, लेकिन इलाज के दौरान ही गुरुवार को दून मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में उसकी मौत हो गई। पंकज ने अपने भाई के शव को धामपुर ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस संचालक से बात की, जिसने 5000 रुपये किराया बताया, लेकिन उसके पास महज 1000 रुपये थे। ऐसी दशा में पंकज ने शव को ले जाने के लिए अस्पताल के 108 एंबुलेंस के चालक से बात की, लेकिन उसने शव ले जाने से मना कर दिया है। उसका कहना था कि 108 एंबुलेंस में शव नहीं ले जाते हैं।
गौरतलब है कि दून अस्पताल में श्वास एवं छाती रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामेश्वर पांडे सोनू को देख रहे थे। उन्होंने आर्थिक हालत को देखते हुए तमाम जांच निश्शुल्क लिखी, लेकिन उसके उत्तराखंड का मूल निवासी न होने के कारण यह सुविधा भी नहीं मिल पाई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को समाचार पत्रों में प्रकाशित “दून अस्पताल में शव के लिए स्ट्रेचर या वाहन न मिलने “ सम्बंधी समाचार का संज्ञान लेते हुए सचिव स्वास्थ्य से प्रकरण की रिपोर्ट तलब की। सचिव स्वास्थ्य ने इस सम्बंध में चिकित्सा अधीक्षक का जवाब तलब किया। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि मृतक रोगियों को ले जाने के लिए रोगी एंबुलेंस का प्रयोग इसलिए नहीं किया जाता क्योंकि इससे अन्य रोगियों में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। मृतक रोगियों को ले जाने के लिए मृतक वाहन चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं है। मृतक वाहन की व्यवस्था के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अपर्याप्त मानते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य महानिदेशक को एक सप्ताह में विस्तृत जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
यदि आप राशन कार्ड की सूची में अपना नाम देखना चाहते हैं तो उत्तर प्रदेश राशन कार्ड सूची 2018 में नाम ढूंढने के लिए नीचे दिए गए नियमों का पालन करें।
सबसे पहले, http://164.100.181.140/fcs/Food/citizen/NFSASearch.aspx इस पेज पर जाएँ। पेज खोलने के बाद, आपको जिले, निर्वाचन क्षेत्र, कार्ड प्रकार, नाम आदि जैसे विवरण भरना होगा।
इसके बाद, आपको सर्च बटन पर क्लिक करना होगा।
यदि आपके द्वारा दर्ज किए गए विवरण डेटाबेस से मेल खाते हैं, तो आप अपनी जानकारी को देख सकेंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार, जाली राशन कार्डों को समाप्त करने के लिए राशन कार्डों की आवधिक जाँच सुनिश्चित करेगी तथा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों का दुरूपयोग करने के दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करेगी। राशन कार्डों में कोई नाम जोड़ने या काटने या नया कार्ड बनवाने के लिए समय-सीमा राज्य सरकार द्वारा नीचे दिए चार्ट के अनुसार तैयार की जाएगी-
सेवा (कार्यवाही) स्तर-नया ए0पी0एल0 राशन कार्ड (ग्राम्य/नगरीय)
| क्र0 सं0 | कार्यवाही | वांछित समय | सेवा स्तर (सेवा अनुरोध के दिनांक से) |
|---|---|---|---|
| 1. | आवेदन का प्रस्तुतीकरण | 1 दिन | प्रथम दिन |
| 2. | एस0आई0/जी0वी0पी0ए0 की जाँच हेतु आदेश जारी किया जाना | 1 दिन | दूसरा दिन |
| 3. | एस0आई0/जी0वी0पी0ए0 द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन रिपोर्ट को अपडेट (अद्यावधिक) किया जाना | 1 दिन | नौंवा दिन |
| 4. | ए0आर0ओ0/बी0डी0ओ0 द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन रिपोर्ट पर निर्णय लेना | 1 दिन | दसवां दिन |
| 5. | नया राशन कार्ड जारी करना | 2 दिन | बारहवां दिन |
| क्र0 सं0 | कार्यवाही | कार्यवाही कर्ता | सेवा स्तर | एल-1 | एल-2 | एल-3 | |||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नाम | समय | नाम | समय | नाम | समय | ||||
| 1. | जाँच करने हेतु एस0आई0/जी0वी0पी0ए0 को आदेश जारी | ए0आर0ओ0 /बी0डी0ओ0 | 1 दिन | डी0एस0ओ0 | 2 दिन | डी0एम0 | 2 दिन | ||
| 2. | एस0आई0/जी0वी0पी0ए0 द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन रिपोर्ट को अपडेट (अद्यावधिक) करना | एस0आई0/ जी0वी0पी0ए0 | 7 दिन | ए0आर0ओ0/ बी0डी0ओ0 | 2 दिन | डी0एस0ओ0 | 1 दिन | डी0एम0 | 1 दिन |
| 3. | एस0आई0/जी0वी0पी0ए0 द्वारा प्रस्तुत क्षेत्रीय सत्यापन रिपोर्ट पर निर्णय करना | ए0आर0ओ0/ बी0डी0ओ0 | 1 दिन | डी0एस0ओ0 | 2 दिन | डी0एम0 | 1 दिन | ||
| 4. | नये राशन कार्ड का तैयार किया जाना और जारी करना | एस0आई0/ जी0वी0पी0ए0 | 2 दिन | ए0आर0ओ0/ बी0डी0ओ0 | 1 दिन | डी0एस0ओ0 | 1 दिन | ||
राशन कार्ड की सहायता से प्रदेश की गरीब परिवारों को सरकार द्वारा कम रेट पर राशन जैसे तेल, शक्कर ,दाल , गेहूं और चावल प्रदान किया जाता है। राशन कार्ड का उपयोग ना केवल सरकारी राशन की दुकानों से कम रेट में राशन प्राप्त करने के लिए किया जाता है। बल्कि सरकारी योजनाओं में परिवार के पहचान पत्र के रुप में भी राशन कार्ड का का भी उपयोग किया जाता है।
राशन कार्ड की पात्रता के लिए आवश्यक शर्तें-
राशन कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज-
राशन कार्ड के लिए आवेदन कैसे करे:-
आप नीचे बताए गए आसान से स्टेप्स को फॉलो करके राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सम्पर्क करने के लिए मुख्यालय का पता
आयुक्त, खाद्य तथा रसद विभाग उ० प्र०,
द्वितीय तल, जवाहर भवन, लखनऊ (उ० प्र०), 226001
ऑनलाइन शिकायत के लिए नंबर:-
टोल फ्री नंबर: 1967
टोल फ्री नंबर: 1800 1800 150
राज्य सरकार ने तीन प्रकार के राशन कार्ड जारी किए हैं:-
सरकार द्वारा जारी किए गये प्रत्येक राशन कार्ड पर प्रदेश सरकार के चिन्ह का होलोग्राम चस्पा होना आवश्यक है।
आपको बता दें कि पहले राशन कार्ड के लिए आप घर बैठे ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते थे। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने यह कार्य जन सुविधा केंद्रों और विभाग के ऑफिसियल केंद्र तक सीमित कर दिया है।
इसलिए अब आप अपने आप राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते हैं। यदि आप ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं। तो आपको अपने किसी नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाना होगा।
या फिर आपको अपना ऊपर बताये गए तरीके से सही सही फॉर्म भर के अपने तहसील के खाद्य एवं रसद विभाग में जमा करना होगा। जहां से आपको राशन कार्ड जारी कर दिया जाएगा।
बिहार। मोतीहारी बस हादसे में बड़ा खुलासा यह हुआ है। हादसे की शिकार हुई बस का परिचालन अवैध तरीके से हो रहा था। इस बस को किसी भी राज्य से परमिट नहीं मिला हुआ था। बस पर नंबर यूपी75एटी-2312 लिखा हुआ मिला है, जो एक मोटर कैब का है।
उत्तर प्रदेश में इटावा के परिवहन विभाग के यात्रीकर अधिकारी अरविंद कुमार जैसल का कहना है कि यूपी75एटी-2312 नंबर पर परिवहन विभाग में सचेंद्र कुमार सिंह पुत्र अंगद सिंह निवासी नगला रामसुंदर, इटावा का नाम दर्ज है। यह मोटर कैब श्रेणी में दर्ज है और महिंद्रा एण्ड महिंद्रा की गाड़ी है। उन्होंने बताया कि इस नंबर पर टैक्स व फिटनेस पूरा जमा है। हैरानी की बात यह है कि यह नंबर बस पर कैसे चलाया जा रहा है, इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा। वहीं बस नंबर के इस खुलासे के बाद बिहार के परिवहन मंत्री संतोष निराला ने भी ऐलान किया कि मोतिहारी बस हादसे की जांच होगी। वहीं इस खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
आपको बता दें कि गुरुवार की शाम मुजफ्फरपुर से दिल्ली जा रही बस के एनएच-28 पर मोतीहारी के कोटवा क्षेत्र में पलट गई । इसके बाद बस में आग लग गयी। आग लगने से कई लोग झुलस गए । बताया जा रहा है कि पलटने के बाद सबसे पहले बस के एसी में आग लगी थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना में लोगों की मौत पर गहरा दुख एवं संवेदना व्यक्त की है।
राजस्थान में राशन डिपो का आवंटन
डिपो आवंटन के लिए सलाहकार समिति का गठन
मध्य प्रदेश में राशन की दुकान का आवंटन
राजस्थान में मृत्यु पंजीकरण-
प्रत्येक ग्राम पंचायत / नगरपालिका / नगर परिषद / नगर निगम मुख्यालय पर स्थित मृत्यु पंजीयक कार्यालय रजिस्ट्रार के कार्यालय में मृत्यु की सूचना घटना घटित होने के 21 दिवस की अवधि में परिवार के सदस्य या नजदीकी रिश्तेदार द्वारा प्रपत्र-1 में प्रपत्र-2 में (मृत्यु की सूचना) भरकर देने पर मृत्यु प्रमाण-पत्र निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है।
मृत्यु की सूचना निर्धारित अवधि 21 दिवस पश्चात् परन्तु 30 दिवस के अन्दर देने पर दो रूपये विलम्ब शुल्क जमा करवाकर मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
मृत्यु की सूचना 30 दिवस से अधिक परन्तु 1 वर्ष के भीतर स्थानीय पंजीयक को देने पर आवेदक द्वारा निर्धारित प्रारूप में नोटरी पब्लिक से प्रमाणित एवं संबंधित जिला पंजीयक (जिला संख्यिकी अधिकारी)/ अतिरिक्त जिला पंजीयक ( विकास अधिकारी) से लिखित अनुज्ञा प्राप्त एक शपथ पत्र देकर तथा सम्बन्धित पंजीयक कार्यालय में पॉंच रूपये विलम्ब शुल्क जमा करवाकर मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के नियम 9(3) के अनुसार मृत्यु की घटना चाहे कितनी पुरानी हो, उसका पंजीयक कराया जा सकता है। इसके लिये आवेदक को पॉंच रूपये के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा एवं मृत्यु की घटना घटित होने के क्षेत्र के कार्यकारी मजिस्ट्रेट यथा जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट/ अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट/ सिटी मजिस्ट्रेट/उपखण्ड अधिकारी/ सहायक कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट/ तहसीलदार आदि में से किसी एक से उक्त घटना के पंजीकृत करवाने हेतु अनुज्ञा प्राप्त करेगा अनुज्ञा प्राप्त कर आवेदक स्थानीय पंजीयक कार्यालय में 10 रूपये विलम्ब शुल्क जमा करवाकर जन्म के पंजीयन हेतु आवेदन कर मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा।
लापता व्यक्ति का मृत्यु पंजीकरण-
किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर उसकी पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज होनी चाहिए एवं पुलिस द्वारा व्यक्ति का कोई अता-पता नहीं होने का प्रतिवेदन दिया जाना चाहिए। तभी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद मृत्यु का पंजीकरण होता है।
उत्तर प्रदेश में ऑनलाइऩ मृत्यु प्रमाणपत्र-
उत्तर प्रदेश में मृत्यु का पंजीकरण-
परिवार में किसी शिशु के जन्म होने पर इसकी सूचना अपने क्षेत्र के जन्म रजिस्ट्रार कार्यालय (ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत कार्यालय एवं शहरी क्षेत्र में नगर पालिका / नगर परिषद / नगर निगम कार्यालय) को देकर जन्म का पंजीकरण कहलाता है। जन्म का रजिस्ट्रीकरण कराना कानूनी रुप से अनिवार्य है।