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यदि आप वर्ष 2013 से अब तक की इंण्टरीडिएट की मार्कशीट को घर बैठे ऑनलाइन डाउनलोड करना चाहते हैं और उसके प्रिंट भी लेना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गयी प्रक्रिया को फॉलो करें। आप बड़ी आसानी से डाउनलोड करने के बाद उसका प्रिंट भी ले सकेंगे।
सबसे पहले आप गूगल पर upmsp टाइप करें। upmsp टाइप करने के बाद आपके सामने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की अधिकारिक वेबसाइट का लिंक खुल जाएगा।
अब आप https://upmsp.edu.in/ के लिंक पर क्लिक करें। इस लिंक पर क्लिक करते ही upmsp का होम पेज खुल जाएगा।

इसके बाद आप होम पेज के नीचे बायीं ओर "समस्त परीक्षाफल" पर क्लिक करें ।
यहां पर आप जिस वर्ष की मार्कशीट डाउनलोड करना चाहते हैं । उस वर्ष के रिजल्ट के बगल में "डाउनलोड करें" ऑप्शन पर क्लिक करें।
"डाउनलोड करें" ऑप्शन पर क्लिक करते ही आपके सामने एक फॉर्म खुलकर आ जाएगा। जिसमें आपको परीक्षा का नाम, वर्ष, रोल नंबर और सिक्यूरिटी कोड डालकर "Submit" बटन पर क्लिक करना होगा।

"Submit" बटन पर क्लिक करते ही आपकी मार्कशीट डाउनलोड होने लगेगी।

जब आपकी मार्कशीट डाउनलोड हो जाए तो आप उसे ओपन कर लें और फिर अपने कंप्यूटर में Save कर लें।
इसके बाद आप चाहें तो मार्कशीट का प्रिंट आउट भी ले सकते हैं।
यदि आप वर्ष 2013 से अब तक की हाईस्कूल की मार्कशीट को घर बैठे ऑनलाइन डाउनलोड करना चाहते हैं और उसके प्रिंट भी लेना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गयी प्रक्रिया को फॉलो करें। आप बड़ी आसानी से डाउनलोड करने के बाद उसका प्रिंट भी ले सकेंगे।
सबसे पहले आप गूगल पर upmsp टाइप करें। upmsp टाइप करने के बाद आपके सामने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की अधिकारिक वेबसाइट का लिंक खुल जाएगा।

अब आप https://upmsp.edu.in/ के लिंक पर क्लिक करें। इस लिंक पर क्लिक करते ही upmsp का होम पेज खुल जाएगा।
इसके बाद आप होम पेज के नीचे बायीं ओर "समस्त परीक्षाफल" पर क्लिक करें । यहां पर आप जिस वर्ष की मार्कशीट डाउनलोड करना चाहते हैं । उस वर्ष के रिजल्ट के बगल में "डाउनलोड करें" ऑप्शन पर क्लिक करें।
"डाउनलोड करें" ऑप्शन पर क्लिक करते ही आपके सामने एक फॉर्म खुलकर आ जाएगा।

जिसमें आपको परीक्षा का नाम, वर्ष, रोल नंबर और सिक्यूरिटी कोड डालकर "Submit" बटन पर क्लिक करना होगा।

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लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। हरदोई पेट्रोल पंप प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव पर रिश्वत का आरोप लगाने वाले अभिषेक गुप्ता को मंहगा पड़ गया। पुलिस ने अभिषेक गुप्ता को हिरासत में ले लिया है। और उससे पूछताछ की जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अभिषेक गुप्ता के हरदोई स्थित पेट्रोल पंप की स्थापना संबंधी मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों से पता चला है कि अभिषेक ने भाजपा के प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल का खास बनकर मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव सुभ्रांत शुक्ला को फोन किया था। एसपी गोयल से जमीन के विनिमय की फाइल बढ़ाने की पैरवी कर रहा था। इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस पूछताछ कर रही है।
आपको बता दें कि प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाने के बाद भाजपा ने पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाकर हजरतगंज थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज मुकदमा दर्ज कराया। जिसके बाद अभिषेक गुप्ता ने यूपी प्रेस क्लब में शुक्रवार को प्रेसवार्ता बुलाई। लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। अभिषेक ने प्रेसक्लब में प्रेसवार्ता कैंसिल कर अपने घर पर ही पत्रकारों को बुलाया, परंतु गाजीपुर थाना पुलिस ने प्रेसवार्ता से पहले ही अभिषेक गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। प्रमुख सचिव पर रिश्वत लगाने का आरोप लगाने वाले अभिषेक गुप्ता की लखनऊ में शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद उसके नाना ओम प्रकाश गुप्ता मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे थे। नाना ओम प्रकाश पं. दीन दयाल उपाध्याय के समय में भाजपा के प्रचारक रह चुके हैं। मुख्यमंत्री आवास पर उपस्थित पुलिस अधिकारी से उन्होंने फरियाद की-'साहेब उसे गोली न मरवा देना।' अभिषेक की बहन और नाना ने कहा कि हम सीएम से मिलकर उनके सामने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद नहीं थे। जिसके बाद सभी वापस घर चले गए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर 25 लाख रुपये घूस मांगने का आरोप है। अभिषेक गुप्ता का कहना था कि यह घूस की मांग पेट्रोल पम्प के लिए जमीन देने को लेकर की गई थी। उसने हरदोई जिले की संडीला तहसील केरैसो गांव में पेट्रोल पंप की स्थापना के लिए मुख्य मार्ग की चौड़ाई कम होने के कारण आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की मांग की थी। अभिषेक का आरोप है कि घूस नहीं देने पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल ने जमीन देने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। पीड़ित अभिषेक ने इसकी शिकायत राज्यपाल राम नाईक से की, जिस पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर संबंधित प्रकरण पर कार्रवाई के लिए लिखा था। अभिषेक गुप्ता ने कहा कि अगर उनके साथ न्याय नहीं हुआ, तो वह आत्मदाह कर लेंगे। वहीं इस मामले में प्रधान सचिव सूचना अवनीश अवस्थी का कहना है कि प्रमुख सचिव गोयल पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। भ्रष्टाचार पर अंकुश लागने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिशों को पलीता लगाने से अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा आरोप प्रदेश के नौकरशाह और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर लगा है। जिसमें कहा गया है कि उन्होंने हरदोई में पेट्रोल पंप की जमीन दिलवाने के बदले अभिषेक गुप्ता नाम के व्यक्ति से 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। वहीं इस मामले की शिकायत मिलने के बाद राज्यपाल राम नाईक ने 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायतकर्ता को परेशान करने और उससे 25 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में कार्रवाई की निर्देश दिया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय शिकायतकर्ता को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
आपको बता दें कि लखनऊ के इंदिरानगर में रहने वाले अभिषेक गुप्ता को हरदोई की संडीला तहसील के रैसो में एस्सार ऑयल लिमिटेड द्वारा स्वीकृत पेट्रोल पंप आवंटित किया गया था। लेकिन पेट्रोल पंप के निर्माण में जमीन कम पड़ रही थी। अभिषेक गु्प्ता ने जिलाधिकारी हरदोई से जमीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। जिसके बाद उपजिलाधिकरी आशीष कुमार सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जिस जमीन पर अभिषेक पेट्रोल पंप खरीदना चाहते हैं, वह हरदोई-लखनऊ मुख्य मार्ग पर है, लेकिन उसकी चौड़ाई कम है। इसलिए वह रास्ते की सुरक्षित जमीन खरीदना चाहते हैं। आगे उन्होंने कहा था कि ग्राम सभा की जमीन पेट्रोल पंप के लिए दी जा सकती है, जिससे वाहनों के आने-जाने का रास्ता मिल सके। इसके बाद अभिषेक गुप्ता ने मामले की शिकायत ई-मेल से 18 अप्रैल को राज्यपाल को भेजी थी। जिसमें कहा गया था कि पेट्रोल पंप के मुख्य मार्ग की चौड़ाई कम होने के कारण आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के लिए उनका आवेदन जानबूझकर प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री के स्तर रोका गया है। और प्रमुख सचिव द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। जिसके बाद राज्यपाल ने 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पेट्रोल पंप के मुख्य मार्ग के लिए जमीन दिवालने के लिए प्रमुख सचिव एसपी गोयल उनसे 25 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।
जबकि सरकार की ओर से बताया गया कि अभिषेक गुप्ता अपनी जमीन पर पेट्रोल पंप लेना चाहते थे, लेकिन उसका फ्रंट मानक के अनुसार नहीं था। इस जमीन के आगे ग्राम सभा की जमीन है और मानक पूरा करने के लिए अभिषेक ने ग्राम सभा की जमीन के एक्सचेंज का प्रस्ताव रखा था। इसलिए अभिषेक गुप्ता के पेट्रोल पंप के आवंटन को रद्द कर दिया गया है। वहीं भाजपा ने शिकायकर्ता अभिषेक गुप्ता पर पार्टी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी भारत दीक्षित ने लखनऊ के एसएसपी को पत्र लिखकर गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया है। वहीं अभिषेक का कहना है कि पेट्रोल पंप के लिए उसने एक करोड़ रुपए का लोन ले रखा है। पेट्रोल पंप के निर्माण पर अभी तक करीब 25 लाख रुपए भी खर्च हो चुके हैं। उसका कहना है कि यदि उनके साथ न्याय नहीं हुआ तो वह आत्मदाह कर लेगा।
जनहित गारण्टी अधिनियम के अन्तर्गत दी जाने वाली सेवाओं हेतु अपलोड किये जाने वाले विभिन्न प्रपत्र / दस्तावेज-
मूल प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र:-
प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
मूल अंक पत्र जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
अंकपत्र की द्वितीय प्रतिलिपि जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
संशोधित प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
संशोधित अंक पत्र जारी करने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
निरस्त "CANCELLED" परीक्षाफल के निराकरण हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
रोके गये "WITHELD" परीक्षाफल के निराकरण हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण परीक्षाफल के संशोधन हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
प्रमाण-पत्र के सत्यापन कराने हेतु UPLOAD किये जाने वाले प्रपत्र -
नोट - वर्ष 2003 से वर्तमान वर्ष तक के सत्यापन परिषद की वेबसाइट upmspresults.up.nic.in से तथा upmsp.edu.in से किये जा सकते है। अस्तु इन वर्षों के सत्यापन के ऑनलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेगें।
माध्यमिक शिक्षा विभाग यूपी बोर्ड से जुड़ी 9 सेवाएं जनहित गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लायी गयी हैं। इस अधिनियम के तह यह सेवाएं तय समयसीमा में उपलब्ध करायी जाएंगी। अभी तक इन सेवाओं के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं थी जिसकी वजह से बोर्ड/परिषद के अधिकारी व कर्मचारी उन्हें बेवजह दौड़ाते थे और रिश्वत की मांग करते थे। यूपी बोर्ड की इन नौ सेवाओं के लिए बोर्ड के उप सचिव को नामित प्राधिकारी बनाया है। नामित प्राधिकारी द्वारा इन सेवाओं को मुहैया कराने के बारे में तय समयसीमा में निर्णय न ले पाने पर इसके खिलाफ प्रथम अपीलीय अधिकारी के यहां अपील दर्ज करायी जा सकती है।

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सेवाएं |
आवेदन की तिथि से |
प्रथम अपील |
द्वितीय अपील |
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1. मूल प्रमाण-पत्र जारी करना । |
15 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
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2. प्रमाण-पत्र की द्वितीय प्रतिलिपि जारी करना । |
30 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
|
3. मूल अंक पत्र जारी करना । |
30 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
|
4. अंकपत्र की द्वितीय प्रतिलिपि जारी करना । |
30 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
|
5. संशोधित प्रमाण-पत्र जारी करना । |
30 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
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6. संशोधित अंक पत्र जारी करना । |
30 दिन |
15 दिन |
15 दिन |
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7. निरस्त "CANCELLED" परीक्षाफल का निराकरण करना । |
45 दिन |
30 दिन |
15 दिन |
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8. रोके गये "WITHELD" परीक्षाफल का निराकरण करना । |
45 दिन |
30 दिन |
15 दिन |
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9. अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण परीक्षाफल का संशोधन करना । |
45 दिन |
30 दिन |
15 दिन |
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10. अंकपत्र एवं प्रमाण पत्रों का सत्यापन करना । |
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यूपी बोर्ड के हाईस्कूल या इण्टरमीडिए परीक्षा का परिणाम आप SMS के जरिए बहुत ही आसान से जान सकते हैं। इसके लिए आपको उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के 56263 नंबर पर रोल नंबर SMS करना होगा।
अपना परीक्षाफल जानने के लिए आपको नीचे दी गयी प्रक्रिया को फॉलो करना होगा।

उत्तर प्रदेश में आप बहुत ही आसान तरीके से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in पर जाकर यूपी बोर्ड के 12वीं कक्षा का परिणाम चेक कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप वेबसाइट पर ऑनलाइन मार्कशीट भी देख सकते हैं।
इसके लिए आपको नीचे दी गयी प्रक्रिया को फॉलो करना होगा।



नोटः – क्षेत्रीय कार्यालय बरेली, इलाहाबाद तथा वाराणसी / गोरखपुर के सभी जनपदों के वर्ष 1923 से 1985 तक के तथा क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ के सभी जनपदों के वर्ष 1923 से 1983 तक की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षाओं से सम्बन्धित समस्त कार्यों के लिये माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्य कार्यालय इलाहाबाद से सम्पर्क करें। नवसृजित क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर से सम्बन्धित सभी जनपदों के वर्ष 1986 से 2017 तक के सभी कार्यों के लिये क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी से सम्पर्क करें।
मुख्यालय
माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश
9, सरोजिनी नायडू मार्ग, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, पिन- 211001
उत्तर प्रदेश में आप बहुत ही आसान तरीके से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in पर जाकर यूपी बोर्ड के 10वीं कक्षा का परिणाम चेक कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप वेबसाइट पर ऑनलाइन मार्कशीट भी देख सकते हैं।
इसके लिए आपको नीचे दी गयी प्रक्रिया को फॉलो करना होगा।



नोटः – क्षेत्रीय कार्यालय बरेली, इलाहाबाद तथा वाराणसी / गोरखपुर के सभी जनपदों के वर्ष 1923 से 1985 तक के तथा क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ के सभी जनपदों के वर्ष 1923 से 1983 तक की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षाओं से सम्बन्धित समस्त कार्यों के लिये माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्य कार्यालय इलाहाबाद से सम्पर्क करें। नवसृजित क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर से सम्बन्धित सभी जनपदों के वर्ष 1986 से 2017 तक के सभी कार्यों के लिये क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी से सम्पर्क करें।
मुख्यालय
माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश
9, सरोजिनी नायडू मार्ग, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, पिन- 211001
पलामू (झारखंड)। मेदिनीगर में एसटी-एससी एक्ट के तहत फर्जी मुकदमे को निपटाने के नाम पर रिश्वतखोरी का बहुत शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने डालटनगंज अनुसूचित जाति जनजाति थाना के प्रभारी मिथलेश राम को 10 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथों थाना परिसर में गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता दिव्यांग ललित दुबे का कहना है कि उसके ऊपर एससी-एसटी एक्ट के तहत फर्जी केस दर्ज है। उसी के सिलसिले में आरोपी दारोगा उससे 10 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था। दिव्यांग का कहना है कि वह भ्रष्टाचार मुक्त देश चाहता है, ऐसे में उसे यह बर्दाश्त नहीं था कि कोई घूस मांगे और वह उसे दे दे। इसीलिए उसने एसीबी से मामले की शिकायत की।
पलामू में चैनपुर प्रखंड के पुरुबडीहा गांव के निवासी पीड़ित दिव्यांग ललित का कहना है कि फरवरी वर्ष 2018 में पूर्वडीहा के बिहारी राम एवं उनकी पत्नी गीता देवी ने बिना राशन कार्ड के मेरी पीडीएस दुकान पर राशन की मांग की थी। राशन नहीं देने पर उन्होंने एससी-एसटी थाने में मेरे ऊपर मारपीट का मामला दर्ज करा दिया था। उसी केस के एवज में थाना प्रभारी मिथलेश राम ने 20 हजार रुपए की मांग की थी और कहा था कि तुम्हें केस से बरी कर देंगे। थाना प्रभारी की इस मांग से बेबस होकर उसने एक सप्ताह पूर्व थाना प्रभारी को 1000 रुपए रिश्वत दी थी और कहा था कि उसके पास अब रुपया नहीं है। इतना ही नहीं वह थाना प्रभारी के सामने बहुत रोया और गिड़गिड़ाया और दया की भीख मांगी, लेकिन थाना प्रभारी का दिल नहीं पसीझा। ऐसी दशा में उसने रिश्तेदार से कर्ज लेकर 10 हजार रुपये और देने का वादा किया। और बाद में उसने इस बात की शिकायत एसीबी से कर दी। एसीबी की टीम ने दिव्यांग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए डालटनगंज एससी-एसटी थाना प्रभारी मिथिलेश राम को 10000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों थाना से गिरफ्तार कर लिया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में बिजली चोरी करने वालों की अब खैर नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बिजली चोरी रोकने के लिए बड़ा अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक थाने खोले जाएंगे। मंगलवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इन थानों को एंटी पावर थेफ्ट के नाम से जाना जाएगा। थानों की स्थापना के बाद सभी मुकदमे और विवेचना की पैरवी बिजली विभाग के अधीन पुलिसकर्मी करेंगे।
योगी सरकार यूपी को चौबीस घंटे बिजली देने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बिजली चोरी को मानती है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि राज्य में चौबीस घंटे बिजली सुनिश्चित करने के लिए चोरी रोकना आवश्यक है। श्रीकांत शर्मा ने बताया कि बिजली चोरी होने की वजह से सुचारु आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न होती है और आम लोगों का हक मारा जाता है। अब तक विद्युत चोरी के मामलों की विवेचना भी ठीक से नहीं हो पाती थी। थाना खुलने से मुकदमा दर्ज कराने से लेकर तकनीकी रूप से विवेचना में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधीन वर्तमान 33 छापेमार दल कार्यरत है और यूपी शासन 55 अतिरिक्त प्रवर्तन दल की स्वीकृत दी जा चुकी हैं। इन थानों के खुलने से व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही वितरण हानि में कमी आएगी और ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण होगा। उन्होंने बताया कि गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था चल रही है। सरकार ने थानों में तैनात किये जाने वाले पुलिसबल की संख्या निर्धारित कर दी है। हर थाने में 28 पुलिसकर्मी तैनात किये जाएंगे। इनमें इंस्पेक्टर के रूप में एक प्रभारी निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, 11 मुख्य आरक्षी, नौ आरक्षी और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात होंगे। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस बल के तैनात से पारदर्शी विवेचना होगी और चोरी पर अंकुश लगेगा। थानों में पुलिस बल की तैनाती के लिए सरकार ने 2157 पदों का सृजन किया है। इस बल की तैनाती के बाद राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड इस व्यवस्था पूरा खर्च उठाएगा। पुलिसकर्मियों के वेतन से लेकर सभी सुविधाओं के व्यय भार का दायित्व पावर कारपोरेशन का ही होगा।
दरअसल बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने में खुद बिजली विभाग को ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। एफआईआर दर्ज कराने में ही विभाग के अधिकारियों को थानों में चक्कर लगाने पड़ते हैं। अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराने में समय भी लगता है। उधर पुलिस थानों में काम भी ज्यादा है, लिहाजा कार्रवाई महज खाना पूर्ति बनकर रह जाती थी। अब सरकार ने तैयारी की है कि नए बिजली थाने खोले जाएं, जिनकी व्यवस्था पुलिस ही संभालेगी, लेकिन यहां सिर्फ बिजली के मामले ही निपटाए जाएंगे।
यदि आप आय प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं तो अब आप चाहें तो बहुत ही आसान तरीके से अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन चेक भी कर सकते हैं।
इसके लिए आपको हरियाणा सरकारी की आधिकारिक वेबसाइट http://edisha.gov.in/ पर जाना होगा।

वेबसाइट के खुलने पर आपको Enter/Saral ID के सामने सीरियल आईडी और Enter Mobile No. or Verification Code or Citizen ID के सामने अपना सत्यापित अंक डालना होगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद जब Search बटन पर क्लिक करेंगे तो आपके आवेदन की स्थित सामने आ जाएगी।
आप बड़ी आसानी से घर बैठे हरियाणा में ऑनलाइन आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए।
आय प्रमाण पत्र क्या है
आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता
आय प्रमाण पत्र के लिए दस्तावेज
ऑनलाइन आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन
इसके लिए सबसे पहले आप हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट http://www.haryana.gov.in/ पर जाएं।

जब वेबसाइट का होम पेज खुल जाए तो फिर आप दायी तरफ दिखाई दे रहे "Services" ऑप्शन पर जाएं।

इसके बाद "Services" के नीचे स्क्रॉल हो रही सेवाओं में से "Income Certificate" पर क्लिक करें।

"Income Certificate" पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। वहां पर नीचे बांयी ओर आप "Download Forms & Instructions" क्लिक करें।
"Download Forms & Instructions" पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। जिसमें आपको "Income Certificate" पर क्लिक करना होगा।
"Income Certificate" पर क्लिक करने के बाद अब आपको "Instructions" पर क्लिक करना होगा। और इस पूरे निर्देश को ध्यान से पढ़ना होगा, जिससे किसी भी प्रकार की गलती न हो।

इस पूरे निर्देश को ध्यान से पढ़ने के बाद आपको "Form" के विकल्प पर क्लिक करना होगा तथा आवेदन पत्र को डाउनलोड करना होगा।

अब आप इस आवेदन पत्र को ध्यान से पढ़ें और इसे सही तरीके से भरकर अपने नजदीकी उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के ऑफिस में जमा करें।
आपके आवेदन पत्र के जमा करने के बाद आय प्रमाण पत्र बनाने की आगे की प्रक्रिया की जाएगी। और आपको एक निश्चित अवधि में आपको आय प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा।
यदि आपने जन्म प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया है तो अब आप उसे डाउनलोड कर सकते हैं। और उसके बाद प्रिंट भी ले सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए गए बहुत ही आसान तरीके को अपनाना होगा।


इस पते पर संपर्क कर सकते हैं
आयुक्त, खाद्य तथा रसद विभाग,
द्वितीय तल, जवाहर भवन, लखनऊ,
उत्तर प्रदेश, 226001.
टोल फ्री नंबर- 18001800150
उत्तर प्रदेश में आप बड़ी आसानी से घर बैठे ही ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। आपको अपने नवजात शिशु के जन्म प्रमाण पत्र के लिए 21 दिनों के अंदर पंजीकरण करना होगा। जिसके बाद संबंधित अस्पताल के वास्तविक रिकार्ड का सत्यापन करने के बाद जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। यदि आप 21 दिन के अंदर जन्म प्रमाण पत्र के लिए पंजीकृत नहीं किया गया है तो राजस्व प्राधिकारी के आदेश पर पुलिस द्वारा विधिवत सत्यापन करने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
राज्य सरकार आपके पंजीकरण की तारीख से 7 से 30 दिन के अंदर बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जारी कर देती है। हम आपको बताते हैं कि आप कैसे ऑनलाइन अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं।
महापंजीयक- केंद्र में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है।
मुख्य पंजीयक- राज्यों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है।
जिला पंजीयक- गांवों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का काम करता है।
पंजीयक परिसर- नगरों में जन्म और मृत्यु प्रसव का पंजीकरण का करता है।
जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज-
जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन से पहले इन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
अब आइए हम आपको बताते हैं कि आप कैसे ऑनलाइन अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। इसके लिए आप नीचे दी गयी आसान प्रक्रिया को फॉलो करें।
आप सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की नगरीय स्थानीय निकाय की आधिकारिक वेबसाइट http://e-nagarsewaup.gov.in पर जाना होगा।



जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किसके लिए है-
गिरीडीह (झारखंड)। मंगरगड्डी गांव में सरकारी अधिकारियों की मनमानी के चलते सावित्री देवी नाम की एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गयी। महिला को कई दिनों तक भोजन नहीं मिला, जिसके कारण उसने तड़प-तपड़कर दम तोड़ दिया। सावित्री देवी को सरकारी तंत्र एक राशन कार्ड तक मुहैया नहीं करा सका। घोर गरीबी में जकड़ी सावित्री को राशन कार्ड के अभाव में सरकार से मिलने वाला राशन नहीं मिला। छह साल पहले पेंशन की स्वीकृति होने के बावजूद अब तक उसकी पेंशन का भुगतान भी शुरू नहीं हो पाया था। कहने को तो देशभर में सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू कर रखा है, जिसके तहत हर गरीब परिवार को अनाज मिलना चाहिए। सरकार ने गरीब परिवार को अनाज देने की जिम्मेदारी जनवितरण प्रणाली की दुकानों को दे रखी है।
आपको बता दें कि सावित्री के नाम पर पूर्व में राशन कार्ड जारी किया गया था। उससे वह राशन लेती थी। 2012 में उसके राशन कार्ड को रद्द कर विभाग ने नया राशन कार्ड बनवाने की बात कही थी। लेकिन कई साल तक राशन कार्ड बनवाने के लिए चक्कर काटने के बाद भी महिला को नया राशन कार्ड नसीब नहीं हुआ। मंगरगड्डी गांव के मुखिया का कहना है कि सावित्री देवी ने राशन कार्ड बनाने के लिए चार महीने पहले ही ऑनलाइन आवेदन किया गया था। लेकिन नियमों के चलते उसे सत्यापित करके आगे नहीं बढ़ाया गया। यही कारण था कि राशन कार्ड नहीं बन पाया। यदि उसे राशन कार्ड मिला होता तो भूख से उसकी मौत नहीं होती। वहीं मार्केटिंग ऑफिसर शीतल प्रसाद काशी ने आरोपों से पल्ला झड़ते हुए पंचायत सचिव पर आरोप जड़ दिया। उसका कहना था कि पंचायत सचिव ने आवेदन को सत्यापित करके उन्हें नहीं दिया। इसी के चलते महिला का राशन कार्ड नहीं बन सका। और महिला की मौत हो गयी। जबकि विभाग के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि राशन कार्ड के लिए जब से ऑनलाइन आवेदन होने लगे हैं, तब से इसमें पंचायत सेवक की भूमिका खत्म हो गई है। ऐसे में मार्केटिंग ऑफिसर द्वारा पंचायत सचिव को जिम्मेदार ठहराना समझ से परे है। अब देखना है कि राशन न मिलने के चलते हुई महिला की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या फिर हमेशा की तरह लीपापोती करके मामले को खत्म कर दिया जाता है।
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद जिले की ग्राम पंचायत आनापुर में भ्रष्टाचार के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आनापुर गांव की ग्राम प्रधान श्रीमती तारा देवी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ करीब साढ़े चार लाख रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप की अंतिम जांच के आदेश दिए हैं।
आपको बता दें कि ग्राम पंचायत निवासी श्यामापति त्रिपाठी, विनीता त्रिपाठी समेत गांव के कई लोगों ने विकास खंड कौड़िहार की बीडीओ को लिखित शिकायत की थी कि आनापुर ग्राम पंचायत की प्रधान तारा देवी ने ग्राम विकास अधिकारी शेख कुतुबुद्दीन और ग्राम पंचायत अधिकारी अखिलेश सिंह की मिलीभगत से 4 लाख 31 हजार 5 सौ 44 रुपए का घोटाला किया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जिसके बाद आनापुर की ग्राम प्रधान तारा देवी ने विकास खंड कौड़िहार के माध्यम से जिला पंचायत राज अधिकारी को अपना स्पष्टीकरण पेश किया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस स्पष्टीकरण में आरोपों के खिलाफ कोई सबूत नहीं पेश किया गया। जिससे यह साबित हो सके कि ग्राम प्रधान तारा देवी के ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
वहीं ग्राम प्रधान के पुत्र पर भी आरोप है कि उसने इंदिरा आवास देने के एवज में गांव के लोगों से रिश्वत ली। ग्राम प्रधान पर आरोप है कि उसने दो रास्तों की इंटरलॉकिंग, एक नाले की खुदाई, 5 सोलर लाईट लगाने, एक रास्ते में खड़ंजा निर्माण और तालाब खुदाई में लाखों रुपए का गबन किया है। जब इस मामले की जांच की गयी तो सभी को वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया ।
जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए सहायक अभियंता, लघु सिंचाई, इलाहाबाद एवं तकनीकि मूल्यांकन के लिए अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, इलाहाबाद को नामित किया है और निर्देशित किया है कि वो ग्राम प्रधान के ऊपर लगाए गए आरोपों के आधार पर ग्राम प्रधान को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करें। और प्रकरण की जांच करके आख्या को दो महीने के अंदर पेश करें। इसके साथ ही खंड विकास अधिकारी कौड़िहार को निर्देशित किया है कि वो तत्काल ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी आनापुर के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराएं और एफआईआर की कॉपी को जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में पेश करें।
इसके अलावा जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान के ऊपर लगे आरोपों को संज्ञान में लेते हुए श्रीमती तारा देवी, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत आनापुर के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को प्रतिबंधित करते हुए प्रधान पद की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए तीन ग्राम पंचायत सदस्यों के नेतृत्व में एक संयुक्त समिति का गठन करने का आदेश दे दिया। ये समिति अब ग्राम पंचायत आनापुर की वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों का प्रयोग संयुक्त रुप से करेगी। वहीं जिलाधिकारी के इस फैसले के बाद तारा देवी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद एक महीने का स्थगन देते हुए वित्तीय गड़बड़ी की फिर से अंतिम जांच करने का आदेश दिया है।
नई दिल्ली। वाहन मालिकों के लिए यह राहत भरी खबर है। अब वाहन खरीदने के बाद उसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) के लिए परिवहन विभाग का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। डीलर ही बिक्री के साथ वाहनों का आरसी और नंबर आदि जारी कर देंगे। शासन के दिशा-निर्देश पर इस नई व्यवस्था जुलाई महीने से शुरू हो जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया पर अमल शुरू हो चुका है।
इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डीलरों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। जून में इसके लिए अधिकारियों, कर्मचारियों और डीलरों के बीच बैठक होगी। जिसमें विशेषज्ञ लोगों को प्रशिक्षित करेंगे। जुलाई के प्रथम सप्ताह से यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देश पर परिवहन विभाग ने कार्यालय की पूरी व्यवस्था को ही आनलाइन और पारदर्शी बना दिया है। अब वाहन स्वामियों और अभ्यर्थियों को किसी भी लेनदेन के लिए भागकर आरटीओ दफ्तर पहुंचने की जरूरत नहीं है। वह घर बैठे ही परिवहन विभाग की वेबसाइट https://parivahan.gov.in/parivahan/ पर सभी प्रकार के लेनदेन कर सकते हैं। इसमें वाहनों के टैक्स, ट्रांसफर फीस, पता परिवर्तन फीस, एचपीए निरस्तीकरण, एचपीए दर्ज करना, डुप्लीकेट आरसी, एनओसी जारी करने व इन प्रपत्रों में मोबाइल नंबर अपडेट आदि के ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हो रहे हैं। इससे पहले लोगों को अपने वाहन पास करवाने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता था। इस व्यवस्था से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और यह नया सिस्टम पारदर्शिता भी लाएगा। दलालों पर भी रोक लगेगी, क्योंकि फिलहाल लोग अपने काम जल्दी करवाने के चक्कर में दलालों के हाथों में फंस जाते हैं और व्यर्थ में इन कामों के लिए पैसे दे बैठते हैं। अब वाहन खरीदने के बाद डीलर के माध्यम से रजिस्ट्रेशन होगा और इसके बाद स्पीड पोस्ट से उन्हें घर बैठे ही आर.सी. मिल जाएगी।
नई दिल्ली । भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने निजता से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए वर्चुअल आईडी प्रणाली शुरू करने की घोषणा कर दी है। इस प्रणाली के जरिये कोई भी आधार कार्ड धारक अपनी वेबसाइट से वर्चुअल आइडी निकाल सकेगा। अब उसे अपने 12 अंकों का आधार नंबर किसी को देने की ज़रूरत नहीं है। इसकी बजाय एक वर्चुअल नंबर जनरेट कर सकेंगे, जिससे किसी भी तरह का सरकारी वैरीफिकेशन करा सकेंगे। यह केवाईसी की प्रक्रिया आधार जैसी ही होगी।
आपको बता दें कि आधार नंबर जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने वर्चुअल आईडी (वीआईडी) बनाने के लिए बीटा संस्करण लांच कर दिया है। 1 जून, 2018 से किसी भी तरह की सेवा प्रदाता संस्थाएं आधार नंबर के स्थान पर इस वीआईडी को स्वीकार करने लगेंगी। यूआईडीएआई ने बैंक और दूरसंचार कंपनियों के लिए वर्चुअल प्रणाली लगाने और आधार के बदले इसे स्वीकार करने की समय सीमा एक महीने बढ़ाकर अब एक जुलाई कर दी है। वर्चुअल आईडी का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को यह विकल्प उपलब्ध करवाना है कि उन्हें प्रमाणन के समय अपना आधार नंबर नहीं बताना पड़े। यूआइडीएआइ के सीईओ अजय भूषण पांडे ने बताया कि हम इसके लिए तैयार हैं। लेकिन, एजेंसियों को नई प्रणाली अपनाने के लिए कुछ और समय चाहिए। इसलिए हमने उन्हें एक जुलाई तक का समय दिया है।
यूआइडीएआइ ने उपयोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे अपनी वीआईडी बना लें। यूआइडीएआइ के मुताबिक आधार वर्चुअल आईडी एक तरह का अस्थायी नंबर है। यह 16 अंकों का नंबर है। इसमें कुछ ही डिटेल होंगी। वर्चुअल आईडी आधार से मैप होगी। इसे यूआईडीएआई की वेबसाइट से जनरेट किया जा सकेगा। जरूरत के मुताबिक, आधार होल्डर कई बार आईडी जनरेट कर सकते हैं। नई वर्चुअल आईडी जनरेट होने पर पुरानी अपने आप कैंसल हो जाएगी। यदि किसी को कहीं अपने आधार की डिटेल देनी है तो वो 12 अंकों के आधार नंबर की जगह 16 अंकों का वर्चुअल आईडी दे सकता है। वर्चुअल आईडी जनरेट करने की सुविधा 1 जून से अनिवार्य हो गयी है। दूसरी ओर, सरकार केवाईसी के लिए आधार के इस्तेमाल को भी सीमित करेगी। अभी कई एजेंसियों के पास आपकी डिटेल पहुंच जाती है और वो उसे अपने पास रखते हैं। प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक देश के 119 करोड़ लोगों को आधार नंबर (बायोमैट्रिक आईडी) जारी किए जा चुके हैं। कोई भी इसे पहचान के तौर पर पेश कर सकता है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी के साथ बैठक में एसएसपी राजेश साहनी की मौत की जांच सीबीआई से कराने का फैसला लिया है। वहीँ एटीएस की आगरा यूनिट में तैनात इंस्पेक्टर यतीन्द्र शर्मा ने एएसपी राजेश साहनी की मौत से दुखी होकर बुधवार को अपना इस्तीफा डीजीपी को भेज दिया है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि "राजेश साहनी की आत्महत्या से बेहद दुखी होकर पुलिस व्यवस्था से परेशान होकर मैंने त्यागपत्र दिया है।" उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एटीएस में ईमानदार और काम करने वाले लोग घुटन महसूस कर रहे हैं। यतीन्द्र गुरूवार शाम को डीजीपी से भी मुलाकात करेंगे।
आपके बता दें कि एटीएस के एडिशनल एसपी राजेश साहनी का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया था। राजेश साहनी को यूपी पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राजेश साहनी की अर्थी को उनकी इकलौती बेटी श्रेया ने मुखाग्नि दी। वहीं, डीजीपी ओपी सिंह भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पहुंचे। उन्होंने राजेश साहनी की अर्थी को कंधा भी दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ये पूरी यूपी पुलिस के लिए एक दुख की घड़ी है कि प्रदेश का एक बहादुर और ईमानदार अधिकारी अब हमारे बीच नहीं रहा। हालांकि शाम होते होते डीजीपी ने मामले की जांच एडीजी जोन राजीव कृष्णा को सौंपी है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि साहनी करीब 11 बजकर 30 मिनट पर दफ्तर आए थे। उन्होंने ड्राइवर से पिस्तौल मंगाई और गोली में मार ली। उन्होंने जान देने का फैसला क्यों लिया, इसे लेकर अभी कोई सुराग नहीं मिला है। एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि एक होनहार और जांबाज़ पुलिस अफसर ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के कारणों की लखनऊ पुलिस गहनता से जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी में बस यह पता चला है कि उन्होंने ड्राइवर से पिस्टल मंगाई और कार्यालय में ही खुद को गोली मार ली।
बताया जा रहा है कि राजेश साहनी 1992 में पीपीएस सेवा में आए थे। 2013 में वह अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर प्रमोट हुए थे। एटीएस में रहते हुए राजेश साहनी ने कई ऑपरेशन को सफलता से अंजाम दिया। इस दौरान उन्होंने कई आतंकियों को गिरफ्तार करने में सफल भूमिका निभाई। राजेश साहनी एटीएस के तेज तर्रार अफसरों में से एक माने जाते थे। अभी पिछले हफ्ते ही एटीएस की टीम को राजेश साहनी के नेतृत्व में बड़ी सफलता उत्तराखंड में हाथ लगी थी। एटीएस टीम ने यहां मिलिट्री इंटेलिजेंस और उत्तराखंड पुलिस के साथ मिलकर संदिग्ध आईएसआई एजेंट रमेश सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद राजेश साहनी ने रमेश सिंह को कोर्ट में पेश किया था और उसे ट्रांजिट रिमांड पर यूपी लाए थे।