गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)। पुलिस ने पोलियो वैक्सीन बनाने वाली दवा कंपनी बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को गिरफ्तार कर लिया है। केंद्रीय दवा नियामक के एक अधिकारी ने गाजियाबाद के कवि नगर पुलिस स्टेशन में कंपनी के प्रबंध निदेशक समेत पांच अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है, इसमें कंपनी का डायरेक्टर भी शामिल है। जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। एफआईआर में कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा मुंह में पिलाई जानी वाली पोलियो दवा के कुछ बैचों में टाइप-2 पोलियो वायरस मिला है। हालांकि टीके में पोलियो टाइप-2 विषाणु मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने जांच का आदेश दे दिया है।
आपको बता दें कि दवा कंपनी बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड केवल सरकार की ओर से संचालित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए टीका तैयारी करती थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पोलियो टीका वितरकों से तुरंत बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की वैक्सीन को वापस मांगने का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि पोलियो निगरानी कमेटी उन बच्चों का पता लगाएगी, जिन्हें दवायी दी गयी है, ताकि उन पर निगरानी रखकर यह पता लगाया जा सके कि उस वायरस की वजह से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और महाराष्ट्र सरकार को भी अलर्ट कर दिया है।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी जन स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' को निजी अस्पतालों ने पलीता लगाना शुरु कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई के आह्वान पर राज्य के निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है। इतना ही नहीं जिन मरीजों का इलाज पहले से चल रहा था, उनकी भी छुट्टी की कर दी है। आईएमए का कहना है कि विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए पैकेज 'मनमाने और काफी कम' हैं। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है।
'आयुष्मान भारत' योजना के बारे में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि वो सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं। डाक्टरों का तर्क है कि अफसरों ने अपनी मर्जी से बीमारियों के पैकेज तय कर दिए। कई बीमारियों का यहां तक कि जनरल सर्जरी और वार्ड का चार्ज भी कम कर दिया गया है। ऐसी दशा में अब वे इलाज नहीं करेंगे। वहीं आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. अशोक त्रिपाठी ने कहा 'हम इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। डॉक्टरों से चर्चा के बाद इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।'
डाक्टरों के इस विरोध और तकनीकी खामी के कारण राजधानी में ही 500 से ज्यादा मरीजों का फ्री इलाज नहीं हो सका। अंबिकापुर की रहने वाली सहोदरा बाई ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। जब वह इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचीं और अपना स्मार्ट कार्ड दिखाया तो काउंटर पर से ही उन्हें ये कहकर लौटा दिया गया कि इस कार्ड के जरिए उनका इलाज नहीं हो सकता है। इसी तरह राजनंदगांव के राम दयाल कश्यप भी अपने एंजियोप्लास्टी के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें ये कहकर लौटा दिया कि उनका इलाज तभी हो सकता है जब वह कैश में शुल्क चुकाने के लिए तैयार हों। अस्पताल का कहना था कि मुफ्त इलाज फिलहाल रोक दिया गया है।
हालांकि विरोध के बाद सरकार ने डॉक्टरों को शांत करने की कोशिश की है। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक की मौजूदगी में हुई बैठक में डाक्टरों ने ग्रेडिंग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा बीमा कंपनी ने सभी अस्पतालों को सी ग्रेड मानकर क्लेम की राशि में 15 फीसदी कटौती कर ली है। उच्च स्तर पर निर्देश के बाद भी बीमा कंपनी भुगतान नहीं कर रही है। इस पर डॉक्टरों ने नाराजगी जताई। अधिकारियों ने कहा कि इसका भी भुगतान जल्द कर दिया जाएगा। फिर भी पैकेज की रकम के कारण बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) का 23 सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुभारंभ किया। इस योजना के तहत देश के 10.74 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलेगी।
मुंगेर (बिहार) । आजकल मोबाइल से सेल्फी लेकर अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को फोटो भेजते हुए आपने बहुत देखा होगा, लेकिन क्या आपने कर्माचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सेल्फी का इस्तेमाल करते हुए सुना या देखा है, यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं। मुंगेर के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने विकास कार्यों में गति लाने और लापरवाह अधिकारियों पर नियंत्रण कसने को लेकर 'सेल्फी अटेंडेंस' बनने की नई प्रणाली की शुरुआत की है। जिलाधिकारी ने संसेवा ऐप के नाम से शुरू इस एप्लिकेशन का पहला प्रयोग ग्रामीण विकास विभाग में किया है। दूसरे चरण में इस सेवा की शुरुआत जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में की गई है। इस सेवा का इस्तेमाल करने वाला मुंगेर देश का पहला जिला है।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने संग्राहलय सभागार में 'संसेवा मोबाइल एप' की शुरुआत की । उन्होंने बताया की मुंगेर भारत का पहला जिला होगा, जहां 'सेल्फी अटेंडेंस मॉनेटरिंग सेवा' के माध्यम से कर्मियों को उपस्थिति बनाया जाएगा। सेल्फी अटेंडेंस के लिए ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि विभाग के अधिकारियों और कर्मियों का डाटाबेस तैयार किया गया है। इसके बाद संसेवा एप से सभी कर्मियों एवं अधिकारियों को जोड़ा गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि जैसे ही सेल्फी उपलोड होगी, वैसे ही उसका जीपीएस लोकेशन अंकित हो जाएगा और सेल्फी लेने वाले के चेहरे की पहचान कर ली जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा की क्षेत्रीय कर्मियों और पदाधिकारियों के कार्य क्षेत्र निर्धारित होते हैं और बिना आवश्यक कारण के अपने कार्य क्षेत्र से बाहर न जाए इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई कर्मी कार्य क्षेत्र से बाहर निकलता है तो उसका मोबाइल पर ऑटो जनरेटेड स्पष्टीकरण आ जाएगा। स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि हाईली एडवांस टेक्नोलॉजी युक्त यह एप जिओ, फेसिंग, वर्चुअल, इमेज जीपीएस जैसी तकनीकों से लैस है। एक जुलाई से यह पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगी। आनंद शर्मा ने यह भी बताया कि अगले चरण में अन्य विभागों को भी इस एप से जोड़ा जाएगा।
मुंगेर (बिहार) । आजकल मोबाइल से सेल्फी लेकर अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को फोटो भेजते हुए आपने बहुत देखा होगा, लेकिन क्या आपने कर्माचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सेल्फी का इस्तेमाल करते हुए सुना या देखा है, यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं। मुंगेर के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने विकास कार्यों में गति लाने और लापरवाह अधिकारियों पर नियंत्रण कसने को लेकर 'सेल्फी अटेंडेंस' बनने की नई प्रणाली की शुरुआत की है। जिलाधिकारी ने संसेवा ऐप के नाम से शुरू इस एप्लिकेशन का पहला प्रयोग ग्रामीण विकास विभाग में किया है। दूसरे चरण में इस सेवा की शुरुआत जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में की गई है। इस सेवा का इस्तेमाल करने वाला मुंगेर देश का पहला जिला है।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने संग्राहलय सभागार में 'संसेवा मोबाइल एप' की शुरुआत की । उन्होंने बताया की मुंगेर भारत का पहला जिला होगा, जहां 'सेल्फी अटेंडेंस मॉनेटरिंग सेवा' के माध्यम से कर्मियों को उपस्थिति बनाया जाएगा। सेल्फी अटेंडेंस के लिए ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि विभाग के अधिकारियों और कर्मियों का डाटाबेस तैयार किया गया है। इसके बाद संसेवा एप से सभी कर्मियों एवं अधिकारियों को जोड़ा गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि जैसे ही सेल्फी उपलोड होगी, वैसे ही उसका जीपीएस लोकेशन अंकित हो जाएगा और सेल्फी लेने वाले के चेहरे की पहचान कर ली जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा की क्षेत्रीय कर्मियों और पदाधिकारियों के कार्य क्षेत्र निर्धारित होते हैं और बिना आवश्यक कारण के अपने कार्य क्षेत्र से बाहर न जाए इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई कर्मी कार्य क्षेत्र से बाहर निकलता है तो उसका मोबाइल पर ऑटो जनरेटेड स्पष्टीकरण आ जाएगा। स्पष्टीकरण का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि हाईली एडवांस टेक्नोलॉजी युक्त यह एप जिओ, फेसिंग, वर्चुअल, इमेज जीपीएस जैसी तकनीकों से लैस है। एक जुलाई से यह पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगी। आनंद शर्मा ने यह भी बताया कि अगले चरण में अन्य विभागों को भी इस एप से जोड़ा जाएगा।
नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय ने आधार कार्ड की अनिवार्यता और नंबर शेयर करने पर बहुत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने आधार पर फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक रूप से वैध तो माना, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि इसे हर किसी से शेयर करना जरूरी नहीं है। न्यायालय ने अपने फैसले में साफ किया कि आधार नंबर कहां देना जरूरी है और कहां देना जरुरी नहीं है। न्यायालय ने केंद्र को हिदायत भी दी है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने यह फैसला सुनाया।
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले के दौरान क्या कहा:-
- आधार आम लोगों के हित के लिए काम करता है और इससे समाज में हाशिये पर बैठे लोगों को फायदा होगा।
- आधार डेटा को 6 महीने से ज्यादा डेटा स्टोर नहीं किया जा सकता है। 5 साल तक डेटा रखना बैड इन लॉ है।
- सुप्रीम कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए कहा कि प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
- आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। इसके डुप्लिकेट होने का कोई खतरा नहीं है। आधार एकदम सुरक्षित है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने लोकसभा में आधार बिल को वित्त विधेयक के तौर पर पास करने को सही ठहराया है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार बायॉमीट्रिक डाटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए सरकार से आधार के लिए मजबूत डाटा प्रोटेक्शन कानून लाने के लिए कहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार,आइए जानते हैं अब कहां जरूरी होगा आधार और कहां नहीं जरुरी होगा।
आधार कार्ड कहां जरूरी है:-
- पैन कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा। इसके बाद आधार को पैन कार्ड से लिंक भी कराना होगा।
- आयकर रिटर्न भरने के लिए भी आधार नंबर की डिटेल्स फाइल करनी होगी।
- आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार नंबर जरूरी होगा।
- सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा। लेकिन यह भी कहा गया है कि किसी को भी आधार न होने के चलते इन योजनाओं का लाभ लेने से वंचित नहीं किया जा सकता है।
आधार कार्ड कहां नहीं जरूरी है:-
- मोबाइल सिम के लिए कंपनी आपसे आधार नहीं मांग सकती है।
- बैंक अकाउंट खोलने के लिए आधार नंबर नहीं मांग सकते हैं।
- मोबाइल वॉलेट के केवाईसी के लिए भी अब आधार देने की जरूरत नहीं होगी।
- स्कूल प्रवेश के समय बच्चे का आधार नंबर नहीं मांग सकते हैं। यह बच्चों के माता-पिता की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वे स्कूल में बच्चों का आधार नंबर देना चाहते हैं या नहीं।
- सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं है।
- सीबीएसई, बोर्ड एग्जाम में शामिल होने के लिए छात्रों से आधार की मांग नहीं की जा सकती है।
- 14 साल से कम के बच्चों के पास आधार नहीं होने पर उसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली जरूरी सेवाओं से वंचित नही किया जा सकता है।
- म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट के केवाईसी के लिए भी आधार कार्ड देने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है।
- टेलिकॉम कंपनियां, ई-कॉमर्स फर्म, प्राइवेट बैंक और अन्य इस तरह के संस्थान आधार की मांग नहीं कर सकते हैं।
नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय ने आधार कार्ड की अनिवार्यता और नंबर शेयर करने पर बहुत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने आधार पर फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक रूप से वैध तो माना, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि इसे हर किसी से शेयर करना जरूरी नहीं है। न्यायालय ने अपने फैसले में साफ किया कि आधार नंबर कहां देना जरूरी है और कहां देना जरुरी नहीं है। न्यायालय ने केंद्र को हिदायत भी दी है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने यह फैसला सुनाया।
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले के दौरान क्या कहा:-
- आधार आम लोगों के हित के लिए काम करता है और इससे समाज में हाशिये पर बैठे लोगों को फायदा होगा।
- आधार डेटा को 6 महीने से ज्यादा डेटा स्टोर नहीं किया जा सकता है। 5 साल तक डेटा रखना बैड इन लॉ है।
- सुप्रीम कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए कहा कि प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
- आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। इसके डुप्लिकेट होने का कोई खतरा नहीं है। आधार एकदम सुरक्षित है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने लोकसभा में आधार बिल को वित्त विधेयक के तौर पर पास करने को सही ठहराया है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार बायॉमीट्रिक डाटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए सरकार से आधार के लिए मजबूत डाटा प्रोटेक्शन कानून लाने के लिए कहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार,आइए जानते हैं अब कहां जरूरी होगा आधार और कहां नहीं जरुरी होगा।
आधार कार्ड कहां जरूरी है:-
- पैन कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा। इसके बाद आधार को पैन कार्ड से लिंक भी कराना होगा।
- आयकर रिटर्न भरने के लिए भी आधार नंबर की डिटेल्स फाइल करनी होगी।
- आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भी आधार नंबर जरूरी होगा।
- सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा। लेकिन यह भी कहा गया है कि किसी को भी आधार न होने के चलते इन योजनाओं का लाभ लेने से वंचित नहीं किया जा सकता है।
आधार कार्ड कहां नहीं जरूरी है:-
- मोबाइल सिम के लिए कंपनी आपसे आधार नहीं मांग सकती है।
- बैंक अकाउंट खोलने के लिए आधार नंबर नहीं मांग सकते हैं।
- मोबाइल वॉलेट के केवाईसी के लिए भी अब आधार देने की जरूरत नहीं होगी।
- स्कूल प्रवेश के समय बच्चे का आधार नंबर नहीं मांग सकते हैं। यह बच्चों के माता-पिता की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वे स्कूल में बच्चों का आधार नंबर देना चाहते हैं या नहीं।
- सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं है।
- सीबीएसई, बोर्ड एग्जाम में शामिल होने के लिए छात्रों से आधार की मांग नहीं की जा सकती है।
- 14 साल से कम के बच्चों के पास आधार नहीं होने पर उसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली जरूरी सेवाओं से वंचित नही किया जा सकता है।
- म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट के केवाईसी के लिए भी आधार कार्ड देने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है।
- टेलिकॉम कंपनियां, ई-कॉमर्स फर्म, प्राइवेट बैंक और अन्य इस तरह के संस्थान आधार की मांग नहीं कर सकते हैं।
यदि आपके पास कटे-फटे नोट हैं, जिसे आप बदलना चाहते हैं तो चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप अपने नजदीकी बैंक शाखा में जाकर बड़ी आसानी से अपने कटे-फटे नोट बदल सकते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (नोट रिफंड) नियम 2009 के अनुसार नोट वापसी के निम्नलिखित नियम हैं।
कटे-फटे नोट बदले जाने के नियम:-
- कटे-फटे नोट, वे हैं, जिसमें एक हिस्सा गुम है या जो दो से अधिक टुकड़ों से बना है।
- किसी भी नोट को जानबूझ कर या गुस्से में नहीं काटा जा सकता इसलिए जिन नोटों को जानबूझ कर काटा गया है, उन्हें बदलने का दावा नहीं माना जाएगा।
- जिन नोटों पर नारे या राजनैतिक संदेश लिखे हों, उन्हें भी बतौर मुद्रा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यदि बैंक अधिकारी को लगता है कि आपने जानबूझ कर नोट को फाड़ा या काटा है, तो वह आपकी मुद्रा बदलने से इनकार कर सकता है।
- आरबीआई के नियमानुसार, हर बैंक को पुराने, फटे या मुड़े नोट स्वीकार करने होंगे बशर्ते वे नकली न हों। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। इसके लिए उस बैंक का ग्राहक होना जरूरी नहीं है।
- यदि किसी के पास मौजूद नोट में रंग या स्याही लग गयी है तो उसे किसी भी बैंक शाखा में बदला जा सकता है।
- यदि नोट में दीमक लग गए हैं या फिर नोट जल गया है और नोट का नंबर सुरक्षित है तो उसे भी किसी भी बैंक शाखा में बदला जा सकता है।
- रिजर्व बैंक के नियमानुसार, इन नोटों को फिर से जारी नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक नए नोट ही जारी करेगा।
- किसी भी कानून के प्रावधान के उल्लंघन में भारत के बाहर किसी भी स्थान से नोट आयात किया गया हो, तो बैंक आपकी मुद्रा बदलने से इनकार कर सकता है।
- निर्धारित अधिकारी द्वारा बुलाए गए किसी भी सूचना को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर दावेदार द्वारा नोट प्रस्तुत नहीं किया जाता है या जानकारी मांगने के लिए पत्र भेजने पर प्रस्तुत नहीं होता है, तो भी वह आपकी मुद्रा बदलने से इनकार कर सकता है।
कटे-फटे नोटों से धनवापसी के नियम:-
- कटे-फटे नोट केवल आरबीआई के कार्यालय और विभिन्न बैंकों की सभी करेंसी चेस्ट शाखाओं पर स्वीकार किए जाएंगे। विभिन्न बैंकों की करेंसी चेस्ट शाखा की सूची आरबीआई वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। इन शाखाओं में कटे-फटे नोट काउंटर पर स्वीकार किए जाएंगे और फॉर्म में एक टोकन डीएन-1 को नोट जमा करने वाले व्यक्ति को जारी किया जाएगा। अलग-अलग नोटों के लिए धनवापसी और मानदंड अलग-अलग हैं।
- रिजर्व बैंक ने कहा है कि ऐसे नोट जो पानी, पसीना या कोई अन्य चीज लगने से बुरी तरह गंदे हो गए हो या जिनके दो टुकड़े हो गए हों, लेकिन उनमें कोई जरूरी फीचर गायब न हुआ हो, उनसे सरकारी बकाया हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, वाटर टैक्स, बिजली बिल आदि का भुगतान किया जा सकता है। साथ ही बैंक काउंटर पर उन्हें स्वीकार किया जाए। हालांकि इन नोटों को दोबारा जनता को जारी नहीं किया जाए। इस तरह के नोटों को आरबीआई के इश्यू ऑफिस में ही जा सकता है। इसके बाद इन्हें नष्ट करने के लिए भेजा जाए।
- आप पांच नोट की संख्या तक के नोट उन बैंकों में बदल सकते हैं, जिनमें मुद्रा तिजोरी नहीं होती। इसके एवज में बैंक आपको रसीद देगा। इस जमा के बदले आपको 30 दिनों में राशि दी जाएगी।
- 50 रुपये या इससे अधिक के लिए आरबीआई ने हाल में 65% या 80% से अधिक की पूरी वापसी के लिए आवश्यक अविभाजित टुकड़े के क्षेत्र को बढ़ाने के नियमों में संशोधन किया है। अब प्रस्तुत किए गए नोट के एकल सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का क्षेत्र संबंधित मूल्य के 80% से अधिक क्षेत्र का है तो पूर्ण धनवापसी तभी की जाएगी।
- यदि प्रस्तुत किए गए नोट के एकल सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का अविभाजित क्षेत्र 40% से अधिक या संबंधित मूल्य के 80% से कम या उसके बराबर है तो आधा मूल्य वापस किया जाएगा। सबसे बड़े अविभाजित टुकड़े का अविभाजित क्षेत्र 40% से कम हो तो कोई धनवापसी नहीं होगी।
- यदि 50 रुपये और उससे अधिक मूल्यों के कटे-फटे नोटों का दावा एक ही नोट के दो टुकड़ों से बना एक नोट होता है। दो टुकड़े, व्यक्तिगत रूप से उस क्षेत्र में नोट के कुल क्षेत्रफल के 40% से अधिक या उसके बराबर है तो एक की पूर्ण धनवापसी की जाएगी।
- 2000 रुपये के नोट की पूरी कीमत के लिए ग्राहक को नोट के वास्तविक आकार का कम से कम 88 फीसद हिस्सा देना होगा। 44 फीसद हिस्सा लौटाने पर नोट की आधी कीमत मिलेगी।
- यदि किसी के पास कटे-फटे नोट 20 टुकड़ों में हैं और उनका मूल्य अधिकतम 5000 रुपए के बराबर होता है तो वह एक दिन में इतने नोट बैंक के काउंटर पर नि:शुल्क बदल सकता है।
- यदि किसी के पास 20 से ज्यादा टुकड़ों में नोट हैं और उनका मूल्य 5000 रुपए से ज्यादा है तो वह उन्हें बदलने के लिए बैंक जा सकता है, लेकिन उनका मूल्य बाद में क्रेडिट किया जाएगा। इसके लिए बैंक स्वीकृत शुल्क भी वसूल सकता है।
- यदि किसी के पास 20 से ज्यादा टुकड़ों में नोट 50,000 रुपए से ज्यादा हैं तो बैंक सामान्य सावधानी बरतेगी।
भोपाल (मध्य प्रदेश) । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अविवाहित महिलाओं के लिए एक अहम फैसले को मंजूरी दी गयी। मध्य प्रदेश सरकार ने 50 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी पेंशन देने का फैसला किया है।
शिवराज कैबिनेट की बैठक के फैसले की जानकारी देते हुए जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि बैठक में सामाजिक सुरक्षा के तहत सरकार 50 साल के ऊपर की उम्र की अविवाहित महिलाओं को पेंशन देने का फैसला लिया गया है। इसमें 50 से 79 आयु वर्ग की महिलाओं को 300 रुपए महीना और 80 साल से अधिक आयु की महिला को 500 रुपए प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। इसके लिए महिलाओं का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य होगा। आयकर दाता या सेवारत महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सामाजिक न्याय विभाग के इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इसके अलावा कैबिनेट ने सभी पुलिस थानों में टॉयलेट बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिये अलग से कक्ष बनाए जाएंगे। 676 थानों में महिला पुलिसकर्मी और महिला फरियादी के लिये कक्ष और टॉयलेट बनाये जाएंगे।
कैबिनेट की बैठक में ये भी तय किया गया कि प्रदेश सरकार प्रतिभावान 100 युवाओं को अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली में कोचिंग दिलाएगी। उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश ने मूल निवासियों के लिए इस नई योजना को लागू किया है, इसको कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसमें 100 युवाओं का चयन किया जाएगा। इन्हें रोजमर्रा के खर्च के लिए हर माह साढ़े 12 हजार छात्रवृत्ति देने के साथ किताबें खरीदने एकमुश्त 15 हजार रुपए भी दिए जाएंगे।
भोपाल (मध्य प्रदेश) । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अविवाहित महिलाओं के लिए एक अहम फैसले को मंजूरी दी गयी। मध्य प्रदेश सरकार ने 50 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी पेंशन देने का फैसला किया ।
शिवराज कैबिनेट की बैठक के फैसले की जानकारी देते हुए जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि बैठक में सामाजिक सुरक्षा के तहत सरकार 50 साल के ऊपर की उम्र की अविवाहित महिलाओं को पेंशन देने का फैसला लिया गया है। इसमें 50 से 79 आयु वर्ग की महिलाओं को 300 रुपए महीना और 80 साल से अधिक आयु की महिला को 500 रुपए प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। इसके लिए महिलाओं का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य होगा। आयकर दाता या सेवारत महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सामाजिक न्याय विभाग के इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इसके अलावा कैबिनेट ने सभी पुलिस थानों में टॉयलेट बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिये अलग से कक्ष बनाए जाएंगे। 676 थानों में महिला पुलिसकर्मी और महिला फरियादी के लिये कक्ष और टॉयलेट बनाये जाएंगे।
कैबिनेट की बैठक में ये भी तय किया गया कि प्रदेश सरकार प्रतिभावान 100 युवाओं को अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली में कोचिंग दिलाएगी। उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश ने मूल निवासियों के लिए इस नई योजना को लागू किया है, इसको कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसमें 100 युवाओं का चयन किया जाएगा। इन्हें रोजमर्रा के खर्च के लिए हर माह साढ़े 12 हजार छात्रवृत्ति देने के साथ किताबें खरीदने एकमुश्त 15 हजार रुपए भी दिए जाएंगे।
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज झारखंड की राजधानी रांची में स्वास्थ्य सुरक्षा देना वाली महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सरकार का देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य है। लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में आएंगे। इस योजना के तहत सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के करीब 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और सीनियर सिटीजन इंश्योरेंस स्कीम का स्थान लेगी। यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा प्रोग्राम है।
आयुष्मान भारत योजना से लाभ:-
- 2011 की जनगणना में गरीबी रेखा से नीचे के करीब 50 लाख लोगों को 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ मिलेगा।
- लाभार्थी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इसका लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों परिवारों की पेशेवर श्रेणियां आयेगी।
- एसईसीसी के डाटाबेस में वंचना के आधार पर पात्रता तय की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में वंचना की श्रेणियों (डी1,डी2,डी3,डी4,डी5, डी6 और डी7) के आधार पर लाभार्थियों की पहचान की गयी है।
- शहरी क्षेत्रों में 11 पेशवेर मापदंड पात्रता तय करेंगे। उनमें कूड़ा चुनने वाले, भिखारी, घरेलू सहायक, रेहड़ी-पटरी वाले, मोची, फेरीवाले या सड़क पर सेवाएं प्रदान करने वाले अन्य, निर्माण श्रमिक, नलसाज, राजमिस्त्री, श्रमिक, सफेदी करने वाले, वेल्डर, सेक्युरिटी गार्ड, कूली, सफाईकर्मी आदि शामिल हैं।
- ऐसे परिवार जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं उनकों भी इसमें शामिल किया गया है।
- सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के मुताबिक, ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ गरीब परिवारों को इससे लाभ होगा।
- इस योजना में शामिल होने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाना जरूरी नहीं है। सरकार सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना-2011(एसईसीसी) के आधार पर लाभार्थियों को खुद चुन कर कार्ड भेजेगी। छोटी-बड़ी कुल 1350 से अधिक बीमारियों का इलाज कैशलेस होगा।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में लाभार्थियों की मदद करने के लिए आयुष्मान मित्र भी तैनात किये गये है। ये आयुष्मान मित्र आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की मदद करेंगे। वह लाभार्थी व हॉस्पिटल के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।
- इस योजना के लाभार्थी देश भर में सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इतना ही नहीं सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों को इस स्कीम में शामिल माना जाएगा। इसके साथ ही प्राइवेट और ईएसआई अस्पताल में भी शामिल रहेंगे।
- देश भर के सरकारी एवं निजी क्षेत्र के 15,000 से अधिक अस्पतालों में लाभार्थियों को 5 लाख तक के मुफ्त इलाज का लाभ मिलेगा।
- बीमा कवर के लिए उम्र की भी बाध्यता नहीं रहेगी। इसमें पहले से मौजूद बीमारियां भी कवर होंगी।
- इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पहले आपको अपनी पंचायत में पता करना होगा। इसके अलावा आपको mera.pmjay.gov.in पर जाना होगा। यहां आपको अपना मोबाइल नंबर टाइप करना होगा और कैप्चा डालना होगा। इसके बाद जेनरेट ओटीपी पर क्लिक करते ही आपके फोन पर एक मैसेज आएगा। उसमें लिखे ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को वेबसाइट पर डालकर ओटीपी वेरिफाइ करना होगा। इसके बाद राज्य सेलेक्ट करना होगा और अन्य जानकारी जैसे मोबाइल नंबर या नाम आदि विकल्प चुनकर अपना नाम देख सकेंगे। लेकिन mera.pmjay.gov.in पर आपका नाम तभी दिखायी देगा जब आपका नाम सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) डेटाबेस में दर्ज होगा।
- आपको अस्पताल में जाकर आरोग्य मित्र से मिलना होगा और उसे अपना पहचान पत्र देना होगा। आरोग्य मित्र अपने डेटा में चेक करेगा कि मरीज योजना में योग्य है या नहीं। इसके बाद वह आपको एक ई-कार्ड देगा। इस कार्ड में आपकी फोटो और पता दर्ज होगा। एक बार ई-कार्ड बन जाने के बाद पूरी प्रक्रिया को दोहराना नहीं पड़ेगा। ई-कार्ड दिखा कर ही आगे भी योजना का लाभ ले सकेंगे।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा। अस्पताल इसके लिए कोई राशि नहीं मांगेगे। यदि कोई आपसे रुपये की मांग करता है तो आप हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।
- इस योजना में आपको ओपीडी का पैसा नहीं मिलेगा। मरीज को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब वह अस्पताल में भर्ती होगा। यदि आप अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं तो आपको इलाज का पैसा नहीं दिया जाएगा। भर्ती होने से तीन दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद के खर्च की राशि मरीज को मिलेगी।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है।
'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दो भाग:-
- पहला: 10.74 लाख परिवारों को मुफ्त 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा।
- दूसरा: हेल्थ वेलनेस सेंटर।
- देश में 1.5 लाख गांव में हेल्थ और वेलनेस सेंटर खुलेंगे। यहां सिर्फ बीमारी का इलाज ही नही होगा बल्कि यहां पर हेल्थ चेकअप की सुविधा भी मिलेगी।
- इन केंद्रों पर मुफ्त इलाज व दवाई की सुविधा मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में एक हजार, गुजरात में 1185, राजस्थान में 505, झारखंड में 646, मध्य प्रदेश में 700, महाराष्ट्र में 1450, पंजाब में 800, बिहार में 643 और हरियाणा में 255 हेल्थ वेलनेस सेंटर बनेंगे।
'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' का किसे नहीं मिलेगा लाभ:-
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' पूरी तरह से कैशलेस और पेपरलेस होगी।
- सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना 2011 के हिसाब से जिस परिवार के पास 2 पहिया, 3 पहिया, 4 पहिया वाहन है या फिशिंग बोट है, या एग्रीकल्चर इक्विपमेंट (ट्रैक्टर) हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- परिवार जिसके पास 50 हजार रुपए से ज्यादा की लिमिट का क्रेडिट कार्ड है वो इस योजना में शामिल नहीं होंगे।
- परिवार जिसका सदस्य सरकारी नौकरी करता है वो भी इस स्कीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
- आयुष्मान भारत योजना के लाभ के लिए शर्तें परिवार जिसका गैर कृषि कारोबार सरकार में रजिस्टर्ड है वो आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं उठाएंगे।
- यदि परिवार में कोई सदस्य 10 हजार रुपए से अधिक कमाता है तो वो भी पात्र नहीं है।
- इसके अलावा इनकम टैक्स भरने वाले परिवार को भी इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
- जो प्रोफेशनल टैक्स भरते हैं या जिनके पास 3 या उससे अधिक कमरे का पक्की दीवार और छत वाला मकान है। जिसके पास 2.5 एकड़ से ज्यादा की जमीन और 1 सिंचाई यंत्र है वो भी शामिल नहीं होंगे।
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज झारखंड की राजधानी रांची में स्वास्थ्य सुरक्षा देना वाली महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सरकार का देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य है। लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में आएंगे। इस योजना के तहत सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के करीब 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और सीनियर सिटीजन इंश्योरेंस स्कीम का स्थान लेगी। यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा प्रोग्राम है।
आयुष्मान भारत योजना से लाभ:-
- 2011 की जनगणना में गरीबी रेखा से नीचे के करीब 50 लाख लोगों को 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ मिलेगा।
- लाभार्थी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इसका लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों परिवारों की पेशेवर श्रेणियां आयेगी।
- एसईसीसी के डाटाबेस में वंचना के आधार पर पात्रता तय की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में वंचना की श्रेणियों (डी1,डी2,डी3,डी4,डी5, डी6 और डी7) के आधार पर लाभार्थियों की पहचान की गयी है।
- शहरी क्षेत्रों में 11 पेशवेर मापदंड पात्रता तय करेंगे। उनमें कूड़ा चुनने वाले, भिखारी, घरेलू सहायक, रेहड़ी-पटरी वाले, मोची, फेरीवाले या सड़क पर सेवाएं प्रदान करने वाले अन्य, निर्माण श्रमिक, नलसाज, राजमिस्त्री, श्रमिक, सफेदी करने वाले, वेल्डर, सेक्युरिटी गार्ड, कूली, सफाईकर्मी आदि शामिल हैं।
- ऐसे परिवार जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं उनकों भी इसमें शामिल किया गया है।
- सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के मुताबिक, ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ गरीब परिवारों को इससे लाभ होगा।
- इस योजना में शामिल होने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाना जरूरी नहीं है। सरकार सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना-2011(एसईसीसी) के आधार पर लाभार्थियों को खुद चुन कर कार्ड भेजेगी। छोटी-बड़ी कुल 1350 से अधिक बीमारियों का इलाज कैशलेस होगा।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में लाभार्थियों की मदद करने के लिए आयुष्मान मित्र भी तैनात किये गये है। ये आयुष्मान मित्र आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की मदद करेंगे। वह लाभार्थी व हॉस्पिटल के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।
- इस योजना के लाभार्थी देश भर में सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इतना ही नहीं सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों को इस स्कीम में शामिल माना जाएगा। इसके साथ ही प्राइवेट और ईएसआई अस्पताल में भी शामिल रहेंगे।
- देश भर के सरकारी एवं निजी क्षेत्र के 15,000 से अधिक अस्पतालों में लाभार्थियों को 5 लाख तक के मुफ्त इलाज का लाभ मिलेगा।
- बीमा कवर के लिए उम्र की भी बाध्यता नहीं रहेगी। इसमें पहले से मौजूद बीमारियां भी कवर होंगी।
- इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पहले आपको अपनी पंचायत में पता करना होगा। इसके अलावा आपको mera.pmjay.gov.in पर जाना होगा। यहां आपको अपना मोबाइल नंबर टाइप करना होगा और कैप्चा डालना होगा। इसके बाद जेनरेट ओटीपी पर क्लिक करते ही आपके फोन पर एक मैसेज आएगा। उसमें लिखे ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को वेबसाइट पर डालकर ओटीपी वेरिफाइ करना होगा। इसके बाद राज्य सेलेक्ट करना होगा और अन्य जानकारी जैसे मोबाइल नंबर या नाम आदि विकल्प चुनकर अपना नाम देख सकेंगे। लेकिन mera.pmjay.gov.in पर आपका नाम तभी दिखायी देगा जब आपका नाम सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) डेटाबेस में दर्ज होगा।
- आपको अस्पताल में जाकर आरोग्य मित्र से मिलना होगा और उसे अपना पहचान पत्र देना होगा। आरोग्य मित्र अपने डेटा में चेक करेगा कि मरीज योजना में योग्य है या नहीं। इसके बाद वह आपको एक ई-कार्ड देगा। इस कार्ड में आपकी फोटो और पता दर्ज होगा। एक बार ई-कार्ड बन जाने के बाद पूरी प्रक्रिया को दोहराना नहीं पड़ेगा। ई-कार्ड दिखा कर ही आगे भी योजना का लाभ ले सकेंगे।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा। अस्पताल इसके लिए कोई राशि नहीं मांगेगे। यदि कोई आपसे रुपये की मांग करता है तो आप हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।
- इस योजना में आपको ओपीडी का पैसा नहीं मिलेगा। मरीज को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब वह अस्पताल में भर्ती होगा। यदि आप अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं तो आपको इलाज का पैसा नहीं दिया जाएगा। भर्ती होने से तीन दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद के खर्च की राशि मरीज को मिलेगी।
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है।
'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दो भाग:-
- पहला: 10.74 लाख परिवारों को मुफ्त 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा।
- दूसरा: हेल्थ वेलनेस सेंटर।
- देश में 1.5 लाख गांव में हेल्थ और वेलनेस सेंटर खुलेंगे। यहां सिर्फ बीमारी का इलाज ही नही होगा बल्कि यहां पर हेल्थ चेकअप की सुविधा भी मिलेगी।
- इन केंद्रों पर मुफ्त इलाज व दवाई की सुविधा मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में एक हजार, गुजरात में 1185, राजस्थान में 505, झारखंड में 646, मध्य प्रदेश में 700, महाराष्ट्र में 1450, पंजाब में 800, बिहार में 643 और हरियाणा में 255 हेल्थ वेलनेस सेंटर बनेंगे।
'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' का किसे नहीं मिलेगा लाभ:-
- 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' पूरी तरह से कैशलेस और पेपरलेस होगी।
- सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना 2011 के हिसाब से जिस परिवार के पास 2 पहिया, 3 पहिया, 4 पहिया वाहन है या फिशिंग बोट है, या एग्रीकल्चर इक्विपमेंट (ट्रैक्टर) हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- परिवार जिसके पास 50 हजार रुपए से ज्यादा की लिमिट का क्रेडिट कार्ड है वो इस योजना में शामिल नहीं होंगे।
- परिवार जिसका सदस्य सरकारी नौकरी करता है वो भी इस स्कीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
- आयुष्मान भारत योजना के लाभ के लिए शर्तें परिवार जिसका गैर कृषि कारोबार सरकार में रजिस्टर्ड है वो आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं उठाएंगे।
- यदि परिवार में कोई सदस्य 10 हजार रुपए से अधिक कमाता है तो वो भी पात्र नहीं है।
- इसके अलावा इनकम टैक्स भरने वाले परिवार को भी इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
- जो प्रोफेशनल टैक्स भरते हैं या जिनके पास 3 या उससे अधिक कमरे का पक्की दीवार और छत वाला मकान है। जिसके पास 2.5 एकड़ से ज्यादा की जमीन और 1 सिंचाई यंत्र है वो भी शामिल नहीं होंगे।
नरेंद्र मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना रविवार (23) सितंबर से शुरू हो जाएगी। इस योजना का उद्देश्य गरीब लोगों को स्वास्थ्य संबंधी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के करीब 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना से लाभ:-
- 2011 की जनगणना में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा।
- इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पहले आपको अपनी पंचायत में पता करना होगा। इसके अलावा आपको mera.pmjay.gov.in पर जाना होगा। यहां आपको अपना मोबाइल नंबर टाइप करना होगा और कैप्चा डालना होगा। इसके बाद जेनरेट ओटीपी पर क्लिक करते ही आपके फोन पर एक मैसेज आएगा। उसमें लिखे ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को वेबसाइट पर डालकर ओटीपी वेरिफाइ करना होगा। इसके बाद राज्य सेलेक्ट करना होगा और अन्य जानकारी जैसे मोबाइल नंबर या नाम आदि विकल्प चुनकर अपना नाम देख सकेंगे। लेकिन mera.pmjay.gov.in पर आपका नाम तभी दिखायी देगा जब आपका नाम सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) डेटाबेस में दर्ज होगा।
- आपको अस्पताल में जाकर आरोग्य मित्र से मिलना होगा और उसे अपना पहचान पत्र देना होगा। आरोग्य मित्र अपने डेटा में चेक करेगा कि मरीज योजना में योग्य है या नहीं। इसके बाद वह आपको एक ई-कार्ड देगा। इस कार्ड में आपकी फोटो और पता दर्ज होगा। एक बार ई-कार्ड बन जाने के बाद पूरी प्रक्रिया को दोहराना नहीं पड़ेगा। ई-कार्ड दिखा कर ही आगे भी योजना का लाभ ले सकेंगे।
- आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा। अस्पताल इसके लिए कोई राशि नहीं मांगेगे। यदि कोई आपसे रुपये की मांग करता है तो आप हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।
- इस योजना में आपको ओपीडी का पैसा नहीं मिलेगा। मरीज को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब वह अस्पताल में भर्ती होगा। यदि आप अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं तो आपको इलाज का पैसा नहीं दिया जाएगा। भर्ती होने से तीन दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद के खर्च की राशि मरीज को मिलेगी।
- आयुष्मान भारत योजना के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है।
आयुष्मान भारत योजना के दो भाग हैं:-
- पहला: 10.74 लाख परिवारों को मुफ्त 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा।
- दूसरा: हेल्थ वेलनेस सेंटर।
- इसमें देश भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल किए जाएंगे।
- इन केंद्रों पर मुफ्त इलाज व दवाई की सुविधा मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में एक हजार, गुजरात में 1185, राजस्थान में 505, झारखंड में 646, मध्य प्रदेश में 700, महाराष्ट्र में 1450, पंजाब में 800, बिहार में 643 और हरियाणा में 255 हेल्थ वेलनेस सेंटर बनेंगे।
नरेंद्र मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना रविवार (23) सितंबर से शुरू हो जाएगी। इस योजना का उद्देश्य गरीब लोगों को स्वास्थ्य संबंधी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के करीब 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना से लाभ:-
- 2011 की जनगणना में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलेगा।
- इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पहले आपको अपनी पंचायत में पता करना होगा। इसके अलावा आपको mera.pmjay.gov.in पर जाना होगा। यहां आपको अपना मोबाइल नंबर टाइप करना होगा और कैप्चा डालना होगा। इसके बाद जेनरेट ओटीपी पर क्लिक करते ही आपके फोन पर एक मैसेज आएगा। उसमें लिखे ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को वेबसाइट पर डालकर ओटीपी वेरिफाइ करना होगा। इसके बाद राज्य सेलेक्ट करना होगा और अन्य जानकारी जैसे मोबाइल नंबर या नाम आदि विकल्प चुनकर अपना नाम देख सकेंगे। लेकिन mera.pmjay.gov.in पर आपका नाम तभी दिखायी देगा जब आपका नाम सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) डेटाबेस में दर्ज होगा।
- आपको अस्पताल में जाकर आरोग्य मित्र से मिलना होगा और उसे अपना पहचान पत्र देना होगा। आरोग्य मित्र अपने डेटा में चेक करेगा कि मरीज योजना में योग्य है या नहीं। इसके बाद वह आपको एक ई-कार्ड देगा। इस कार्ड में आपकी फोटो और पता दर्ज होगा। एक बार ई-कार्ड बन जाने के बाद पूरी प्रक्रिया को दोहराना नहीं पड़ेगा। ई-कार्ड दिखा कर ही आगे भी योजना का लाभ ले सकेंगे।
- आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा। अस्पताल इसके लिए कोई राशि नहीं मांगेगे। यदि कोई आपसे रुपये की मांग करता है तो आप हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।
- इस योजना में आपको ओपीडी का पैसा नहीं मिलेगा। मरीज को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब वह अस्पताल में भर्ती होगा। यदि आप अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं तो आपको इलाज का पैसा नहीं दिया जाएगा। भर्ती होने से तीन दिन पहले और डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद के खर्च की राशि मरीज को मिलेगी।
- आयुष्मान भारत योजना के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ उठाने के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत नहीं है।
आयुष्मान भारत योजना के दो भाग हैं:-
- पहला: 10.74 लाख परिवारों को मुफ्त 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा।
- दूसरा: हेल्थ वेलनेस सेंटर।
- इसमें देश भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल किए जाएंगे।
- इन केंद्रों पर मुफ्त इलाज व दवाई की सुविधा मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में एक हजार, गुजरात में 1185, राजस्थान में 505, झारखंड में 646, मध्य प्रदेश में 700, महाराष्ट्र में 1450, पंजाब में 800, बिहार में 643 और हरियाणा में 255 हेल्थ वेलनेस सेंटर बनेंगे।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में सरकारी धन में भारी घोटाले का खुलासा हुआ है। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, अखिलेश सरकार में 97 हजार करोड़ रुपये का बंदरबांट किया गया। 97 हजार करोड़ रुपया कहां पर खर्च किया गया है, इसका हिसाब कैग को नहीं मिला है। सरकार कैग को इन सभी खर्चों के प्रमाणपत्र पेश नहीं कर पायी है। सबसे ज्यादा घपला समाज कल्याण, शिक्षा व पंचायतीराज विभाग में हुआ है। सिर्फ इन तीन विभागों में 25 से 26 हजार करोड़ रुपये कहां खर्च हुए। इन खर्चों का अभी तक विभागीय अफसरों ने कोई हिसाब-किताब नहीं दिया है।
देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी कैग ने 31 मार्च, 2017-18 तक यूपी में खर्च हुए बजट की जांच की है। वर्ष 2018 की अगस्त में आई रिपोर्ट नंबर एक में कैग ने इस पूरे गड़बड़झाले को उजागर किया है। कैग ने जांच की तो पता चला कि इसमें बहुत बड़ा गड़बड़ी हुई है। 2014 से 31 मार्च 2017 के बीच हुए करीब ढाई लाख से ज्यादा कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध ही नहीं हैं। धनराशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा न करने का मामला कई बार शासन के सामने लाया गया, मगर कोई सुधार नहीं हुआ है। गंभीर बात यह रही कि पिछली ग्रांट खर्च न करने और उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र न देने पर भी कई विभागों को बजट जारी कर दिया गया। करीब दो लाख 55 हजार उपयोगिता प्रमाणपत्रों के पेंडिंग होने पर सीएजी ने फंड के दुरुपयोग की आशंका जताई है।
सीएजी की जांच में सबसे ज्यादा गड़बड़ी समाज कल्याण विभाग में देखने को मिली। समाज कल्याण विभाग ने 26 हजार 927 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र ही नहीं दिया है। इसी तरह पंचायतीराज विभाग में 25 हजार 490.95 करोड़, शिक्षा विभाग ने 25 हजार 693.52 करोड़ का हिसाब-किताब ही नहीं दिया है।
वहीं वित्तीय नियम कहते हैं कि जब किसी विशेष मकसद या योजना के तहत विभागों को बजट जारी होता है तो तय-सीमा बीतने के बाद उन्हें उपयोगिता प्रमाणपत्र(यूसी) जमा करना होता है। बजट जारी करने वाले विभाग पर यह सर्टिफिकेट लेने की जिम्मेदारी है। जब तक विभाग सर्टिफिकेट नहीं देते तब तक उन्हें बजट की दूसरी किश्त नहीं जारी की जा सकती। व्यवस्था इसलिए है, ताकि पता चल सके कि बजट का इस्तेमाल संबंधित कार्यों के लिए ही हुआ है। उपयोगिता प्रमाणपत्र से पता चलता है कि बजट का कितना हिस्सा कहां और किस तरह खर्च हुआ। इस प्रमाणपत्र की जांच से बजट के दुरुपयोग की गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है। यह सख्त निर्देश है कि बिना उपयोगिता प्रमाणपत्र जारी किए दोबारा बजट जारी नहीं हो सकता। नियम के मुताबिक विभाग संबंधित संस्थाओं से यह प्रमाणपत्र लेने के बाद उसकी क्रास चेकिंग कर महालेखाकार(ऑडिटर जनरल) को भेजते हैं। मगर जांच के दौरान पता चला कि यूपी में बिना यूसी हासिल किए ही आंख मूंदकर विभागों को बजट जारी होता रहा।
कैग रिपोर्ट आने के बाद यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि जिस प्रकार से अखिलेश यादव की सरकार में हुआ है उससे यह पता चलता है कि शासन के नाम पर कुशासन चल रहा था। वहीं भ्रष्टाचार पैदा करना और उनकी नींव डालना इस प्रदेश में मायावती से शुरू हुआ था, जहां अखिलेश यादव ने उस वृक्ष को पाला है। जबकि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील यादव ने कहा कि कैग की रिपोर्ट से भ्रष्टाचार की बात साबित नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक अनुमान है। ऐसी ही रिपोर्ट महाराष्ट्र और गुजरात में आ चुकी हैं लेकिन राज्य सरकार ने तब भी किसी भ्रष्टाचार की बात नहीं मानी थी। यादव ने कहा कि कैग की रिपोर्ट ने तो 2 जी में भी घोटले की बात कही थी लेकिन कोर्ट से सभी आरोप खारिज हो चुके हैं।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । पंजाब और चंडीगढ़ के बाद अब हरियाणा में भी दोपहिया वाहन चलाने वाली महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य हो गया है। इतना ही नहीं यदि महिला किसी पुरुष चालक के पीछे दोपहिया वाहन पर बैठी है तो उसे भी हेलमेट पहनना पड़ेगा। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतों को कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मनोहर लाल खट्टर सरकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए हरियाणा सरकार ने महिलाओं के लिए हेलमेट को जरूरी कर दिया है। हेल्मेट न पहनने वाली महिलाओं का चालान किया जाएगा और जुर्माना लगेगा। परिवहन विभाग इसके बारे में जिलों को जल्द ही लिखित आदेश जारी कर देगा।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में पहले से ही महिलाओं के लिए हेलमेट पहनने का प्रावधान है। अब इन नियमों को हरियाणा में सख्ती से लागू किया जाएगा। यदि महिलाएं नियम का उल्लंघन करेंगी तो उनका चालान तो होगा ही जुर्माना भी लगेगा।
आपको बता दें कि हरियाणा में हर वर्ष करीब 12 हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग साढ़े पांच हजार लोगों की मौत हो जाती है।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । पंजाब और चंडीगढ़ के बाद अब हरियाणा में भी दोपहिया वाहन चलाने वाली महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य हो गया है। इतना ही नहीं यदि महिला किसी पुरुष चालक के पीछे दोपहिया वाहन पर बैठी है तो उसे भी हेलमेट पहनना पड़ेगा। मनोहर लाल खट्टर सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतों को कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मनोहर लाल खट्टर सरकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करते हुए हरियाणा सरकार ने महिलाओं के लिए हेलमेट को जरूरी कर दिया है। हेल्मेट न पहनने वाली महिलाओं का चालान किया जाएगा और जुर्माना लगेगा। परिवहन विभाग इसके बारे में जिलों को जल्द ही लिखित आदेश जारी कर देगा।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में पहले से ही महिलाओं के लिए हेलमेट पहनने का प्रावधान है। अब इन नियमों को हरियाणा में सख्ती से लागू किया जाएगा। यदि महिलाएं नियम का उल्लंघन करेंगी तो उनका चालान तो होगा ही जुर्माना भी लगेगा।
आपको बता दें कि हरियाणा में हर वर्ष करीब 12 हजार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग साढ़े पांच हजार लोगों की मौत हो जाती है।
जयपुर (राजस्थान) । आखिरकार तमाम अटकलों के बीच चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों की बैलेट पेपर के जरिए मतदान करवाने की मांग को भी खारिज कर दिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि देश में पहली बार अगले विधानसभा चुनावों में वीवीपेट और इवीएम एम थ्री मशीनों से मतदान करवाए जाएंगे। इन मशीनों में किसी भी तरह से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान सेल्फी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता हुआ पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि मतदान के लिए अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ की शंका नहीं है। उन्होंने कहा कि सिटीजन विजिलेंस व्यवस्था भी पहली बार लागू की जा रही है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी भी तरह की गड़बड़ी का वीडियो डाउनलोड करेगा, तो उस पर 24 घंटे के भीतर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही, शिकायतकर्ता चाहे तो उसका नाम भी गुप्त रखा जाएगा।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने राजनीतिक पार्टियों की बैलेट पेपर के जरिए मतदान करवाने की मांग को खारिज कर दिया। रावत ने कहा कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को मशीनों में छेड़छाड़ कर गड़बड़ी साबित करने का दो बार मौका दिया। लेकिन कोई नहीं आया। उन्होंने कहा कि सभी मशीनें अच्छी तरह से जांच ली गई हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिनमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ की शंका है ही नहीं। फर्जी मतदाता या दोहरा मतदान करने की गुंजाइश लगभग न के बराबर है। यदि फिर भी ऐसी कोई घटना सामने आएगी, तो इस संबंध में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली । आखिरकार अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण और अमानवीय व्यवहार को रोकने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लाने जा रही है। भुगतान न होने की स्थिति में मरीज या मरीज के शव को अस्पताल में रोके जाने जैसी अमानवीय हरकतों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों के अधिकारों को लेकर एक चार्टर जारी किया है। यदि यह चार्टर लागू हो गया, तो अस्पताल बिल भुगतान पर विवाद होने की स्थिति में मरीजों को छुट्टी देने से इन्कार नहीं कर सकेंगे। वे मरीजों के रिश्तेदारों को शव सौंपने से भी इन्कार नहीं कर पाएंगे। यदि ऐसा करते हुए वे पाए गए तो उन्हें इसके लिए अपराधी माना जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी चार्टर के अनुसार:-
- अस्पताल भुगातन को लेकर किसी भी हालत में अपने यहां मरीजों को बंधक बनाकर नहीं रख सकते हैं।
- वे अस्पताल के बिल में भुगतान को लेकर विवाद जैसे प्रक्रियागत आधार पर मरीजों को छुट्टी देने से इन्कार भी नहीं कर सकते हैं।
- अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज की देखभाल कर रहे उसके परिजनों को शव देने से इनकार नहीं कर सकते हैं।
- अस्पताल के बिल के भुगतान के संबंध में कोई विवाद होता है तो भी शव को अस्पताल में रोककर नहीं रखा जा सकेगा।
- मरीज और उसके परिवार की शिकायतों का निष्पक्ष और त्वरित निवारण होना चाहिए।
- मरीज और उसके परिवार की शिकायत मिलने के 15 दिन के भीतर लिखित में इसके निस्तारण की जानकारी उन्हें मिल जानी चाहिए।
- हर अस्पताल और क्लीनिक को आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा।
चार्टर के अनुसार राज्यों की जिम्मेदारी:-
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार चार्टर को राज्य सरकारों के जरिये लागू किया जाए।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार चार्टर का मसौदा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तैयार किया है और इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।
- इस मसौदे को जनता और संबंधित पक्षों से इस पर सुझाव और टिप्पणियां मंगाई गई हैं।
- राज्य मरीजों के अधिकार चार्टर या मौजूदा कानूनों के मुताबिक जारी आदेशों पर कार्रवाई करेंगे।
- यदि मरीज के किसी अधिकार का उल्लंघन होता है, तो उसे इसकी शिकायत का अधिकार है।
चार्टर मसौदे में दिए गए मरीजों के 17 अधिकार:-
- सूचना का अधिकार,
- रिकॉर्ड और रिपोर्ट का अधिकार,
- आपातकालीन चिकित्सा देखभाल का अधिकार,
- सूचना पर सहमति का अधिकार,
- गोपनीयता का अधिकार,
- मानव गरिमा और गोपनीयता,
- दूसरा परामर्श लेने का अधिकार,
- दरों में पारदर्शिता का अधिकार,
- गैर-भेदभाव का अधिकार,
- मानकों के अनुसार सुरक्षा और गुणवत्ता देखभाल का अधिकार,
- उपलब्ध होने पर वैकल्पिक उपचार चयन करने का अधिकार,
- दवाएं या परीक्षण प्राप्त करने के लिए स्रोत चुनने का अधिकार,
- उचित रेफरल और हस्तांतरण का अधिकार,
- नैदानिक परीक्षणों में शामिल रोगियों के लिए सुरक्षा का अधिकार,
- बायोमेडिकल और स्वास्थ्य अनुसंधान में शामिल प्रतिभागियों की सुरक्षा का अधिकार,
- रोगी का निर्वहन करने का अधिकार, या अस्पताल से मृतक का शरीर प्राप्त करना,
- रोगी को शिक्षा का अधिकार, सुनने का अधिकार और निवारण की तलाश का अधिकार।
नई दिल्ली । आखिरकार अस्पतालों में मरीजों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण और अमानवीय व्यवहार को रोकने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लाने जा रही है। भुगतान न होने की स्थिति में मरीज या मरीज के शव को अस्पताल में रोके जाने जैसी अमानवीय हरकतों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों के अधिकारों को लेकर एक चार्टर जारी किया है। यदि यह चार्टर लागू हो गया, तो अस्पताल बिल भुगतान पर विवाद होने की स्थिति में मरीजों को छुट्टी देने से इन्कार नहीं कर सकेंगे। वे मरीजों के रिश्तेदारों को शव सौंपने से भी इन्कार नहीं कर पाएंगे। यदि ऐसा करते हुए वे पाए गए तो उन्हें इसके लिए अपराधी माना जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी चार्टर के अनुसार:-
- अस्पताल भुगातन को लेकर किसी भी हालत में अपने यहां मरीजों को बंधक बनाकर नहीं रख सकते हैं।
- वे अस्पताल के बिल में भुगतान को लेकर विवाद जैसे प्रक्रियागत आधार पर मरीजों को छुट्टी देने से इन्कार भी नहीं कर सकते हैं।
- अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज की देखभाल कर रहे उसके परिजनों को शव देने से इनकार नहीं कर सकते हैं।
- अस्पताल के बिल के भुगतान के संबंध में कोई विवाद होता है तो भी शव को अस्पताल में रोककर नहीं रखा जा सकेगा।
- मरीज और उसके परिवार की शिकायतों का निष्पक्ष और त्वरित निवारण होना चाहिए।
- मरीज और उसके परिवार की शिकायत मिलने के 15 दिन के भीतर लिखित में इसके निस्तारण की जानकारी उन्हें मिल जानी चाहिए।
- हर अस्पताल और क्लीनिक को आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा।
चार्टर के अनुसार राज्यों की जिम्मेदारी:-
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार चार्टर को राज्य सरकारों के जरिये लागू किया जाए।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार चार्टर का मसौदा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तैयार किया है और इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।
- इस मसौदे को जनता और संबंधित पक्षों से इस पर सुझाव और टिप्पणियां मंगाई गई हैं।
- राज्य मरीजों के अधिकार चार्टर या मौजूदा कानूनों के मुताबिक जारी आदेशों पर कार्रवाई करेंगे।
- यदि मरीज के किसी अधिकार का उल्लंघन होता है, तो उसे इसकी शिकायत का अधिकार है।
चार्टर मसौदे में दिए गए मरीजों के 17 अधिकार:-
- सूचना का अधिकार,
- रिकॉर्ड और रिपोर्ट का अधिकार,
- आपातकालीन चिकित्सा देखभाल का अधिकार,
- सूचना पर सहमति का अधिकार,
- गोपनीयता का अधिकार,
- मानव गरिमा और गोपनीयता,
- दूसरा परामर्श लेने का अधिकार,
- दरों में पारदर्शिता का अधिकार,
- गैर-भेदभाव का अधिकार,
- मानकों के अनुसार सुरक्षा और गुणवत्ता देखभाल का अधिकार,
- उपलब्ध होने पर वैकल्पिक उपचार चयन करने का अधिकार,
- दवाएं या परीक्षण प्राप्त करने के लिए स्रोत चुनने का अधिकार,
- उचित रेफरल और हस्तांतरण का अधिकार,
- नैदानिक परीक्षणों में शामिल रोगियों के लिए सुरक्षा का अधिकार,
- बायोमेडिकल और स्वास्थ्य अनुसंधान में शामिल प्रतिभागियों की सुरक्षा का अधिकार,
- रोगी का निर्वहन करने का अधिकार, या अस्पताल से मृतक का शरीर प्राप्त करना,
- रोगी को शिक्षा का अधिकार, सुनने का अधिकार और निवारण की तलाश का अधिकार।
नई दिल्ली। आधार न होने की वजह से यदि आपके बच्चे का स्कूल में एडमिशन नहीं हो रहा है तो अब आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने स्कूली छात्रों को राहत देते हुए कहा है कि अब आधार न होने की स्थिति पर कोई भी स्कूल बच्चों के एडमिशन से इनकार नहीं कर सकता है। अथॉरिटी ने अपने जारी किए गए सर्कुलर में साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई भी स्कूल आधार कार्ड के बिना एडमिशन लेने में इनकार करते हैं तो यह कानून के तहत अवैध होगा। और ऐसा करने की अनुमति नहीं है।
यूआइडीएआइ ने बिना आधार के बच्चों के एडमिशन के संबंध में राज्यों के सचिवों को सर्कुलर भी जारी कर दिया है। यूआईडीएआई ने स्कूलों को प्रोत्साहित किया कि वह स्थानीय बैंकों, डाक कार्यालयों, राज्य शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के साथ मिलकर अपने परिसर में बच्चों का आधार कार्ड बनवाने और उसे अपडेट कराने के लिए विशेष शिविर लगाएं। हालांकि इससे पहले आधार कार्ड बनवाने के लिए स्थानीय बैंकों, पोस्ट ऑफिस, राज्य शिक्षण संस्थान, जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित करने के लिए कहा गया है। यूआईडीएआई ने कहा, '' जब तक ऐसे छात्रों के लिए आधार नंबर जारी नहीं हो जाता और बायोमेट्रिक को अपडेट नहीं कर दिया जाता तब तक उन्हें सभी सुविधाएं पहचान स्थापित करने के अन्य माध्यमों के जरिए मुहैया कराई जाए"। यूआइडीएआइ के इस आदेश के बाद अब अथॉरिटी का यह कदम उन छात्रों और उनके माता-पिता के लिए काफी राहत भरा है, जिन पर स्कूल प्रशासन दाखिले के समय आधार नंबर देने की शर्त लगा देते थे। इसलिए अब सभी माता-पिता अपने बच्चों का स्कूल में एडमिशन बिना किसी अड़चन के आसानी से करवा सकते हैं।