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नई दिल्ली। अगर अभी तक आपके घर में बिजली का कनेक्शन नहीं लगा है तो आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। डाक विभाग के कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बिजली विहीन घरों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और उसकी रिपोर्ट बिजली विभाग को देंगे, जिससे उन परिवारों को सौभाग्य योजना से जोड़कर बिजली उपलब्ध करायी जा सके। केंद्र सरकार के आदेश पर डाक विभाग द्वारा 25 अक्टूबर तक इस कार्य को पूरा किया जाना है।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विहीन गांवों के घरों का सर्वे करने का काम अब तक बिजली विभाग के पास था। विभाग अपने हिसाब से घरों का सर्वे करके बिजली का कनेक्शन दे रहा था। लेकिन जब केंद्र सरकार को इसमें कई खामियों की जानकारी मिली तो सरकार ने सर्वे करने की जिम्मेदारी बिजली विभाग से लेकर डाक विभाग के डाकिया को दिया। ताकि किस घर में बिजली का कनेक्शन है और किस में नहीं है, इसकी सही जानकारी मिल सके । इस सर्वे के तहत डाक सेवकों को जिम्मेदारी दी गयी कि वो कुछ निर्धारित बिंदुओं पर जानकारी जुटाएं और फिर उसे बिजली निगम को ऑनलाइन भेजें। शासन की तरफ से सर्वे की तिथि 25 अक्तूबर तक रखी गई है। इसी को आधार मानकर केन्द्र सरकार 2019 में अपने आंकड़ों को जनता तक पहुंचाने का काम करेगी। दूसरा भविष्य में डाक विभाग को बिजली बिल वसूली से लेकर अन्य काम से विभाग को जोड़ा जा सके।
आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी गरीबी रेखा के नीचे एवं गरीबी रेखा से ऊपर जीवन निर्वाह करने वाले परिवार बिना विद्युत कनेक्शन के रह रहे हैं। कई योजनाओं के बाद भी गरीबों को विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। वहीं अफसरों द्वारा गलत रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई। जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत कनेक्शन की सत्यता जांचने के लिए केंद्र सरकार के आदेश पर शासन द्वारा डाक विभाग को जिम्मेदारी सौंपी ।
बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) । स्वच्छ भारत मिशन के तहत बन रहे शौचालयों की राशि में धांधली का दौर जारी है। बाराबंकी जिले में शौचालय निर्माण के लिए आए बजट में अधिकारियों ने करीब 15 करोड़ रुपये की धांधली कर दी। जब इस धांधली की जानकारी उच्च अधिकारियों को मिली तो उन्होंने आनन-फानन में शौचालय की राशि की वापसी की कवायद शुरु कर दी । हालांकि उच्च अधिकारियों की इस कवायद के बाद अब तक 8 करोड़ रुपये की वापसी हो चुकी है।
गौरतलब है कि बाराबंकी जिले में पैसों की कमी होने के बावजूद पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने अनोखा कारनामा कर दिखाया । इन्होंने 125 ग्राम पंचायतों को शौचालय निर्माण के लिए जरूरत से ज्यादा, करीब 15 करोड़ की धनराशि उपलब्ध करा दी। जब इस गड़बड़ी की जानकारी जिले के मुख्य विकास अधिकारी को हुई तो उन्होंने संबंधित ग्राम पंचायतों को चिन्हित कराकर राशि की रिकवरी किए जाने का आदेश दिया। हालांकि इस कवायद के बाद अब तक 15 करोड़ में से करीब 8 करोड़ रुपयों की रिकवरी की जा चुकी है, और करीब 7 करोड़ रुपये की रिकवरी के लिए ग्राम पंचायतों को नोटिस दिया गया है। जिन ग्राम पंचायतों ने राशि वापस नहीं की है, उन्हें मुख्य विकास अधिकारी ने 4 दिन का और समय दिया है। यदि इस समय के बीत जाने के बावजूद ग्राम पंचायतें राशि नहीं लौटाती हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवायी जाएगी। वहीं स्वच्छ भारत मिशन के जिला सलाहकार उद्धव राय ने बताया कि ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव और एडीओ पंचायतों की लापरवाही से जरूरत से अधिक की धनराशि की डिमांड कर दी गई थी। यही कारण है कि शौचालय निर्माण का आया पैसा पंचायतों में अतिरिक्त चला गया है, जिसके रिकवरी के आदेश हो चुके हैं।
अमृतसर (पंजाब) । जौड़ा फाटक दशहरा में भीषण हादसे में 59 लोगों की रेलगाड़ी की चपेट में आने से मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। दशहरा का आयोजन करने वाली दशहरा कमेटी ने दो पत्र जारी किया है। पहले पत्र में कमेटी ने पुलिस से सुरक्षा-व्यवस्था की मांग की थी। जबकि दूसरा पत्र पुलिस ने आयोजन कमेटी को लिखा, जिसमें कुछ शर्तो के साथ दशहरा कार्यक्रम आयोजित करने की मंजूरी दी गई है। लेकिन, मेला आयोजकों ने पुलिस की शर्तों का पालन नहीं किया।
पुलिस कमिश्नर एस.एस. श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने धोबी घाट ग्राउंड पर दशहरा उत्सव के लिए मंजूरी दी थी, लेकिन आयोजकों ने इसकी मंजूरी नगर निगम से नहीं ली। पुलिस ने मेला आयोजन की अनुमति के साथ ही शर्त लगायी थी कि मेला कमेटी को लाउड स्पीकर लगाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी होगी। आयोजन के कारण शहर के ट्रैफिक में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति आयोजन स्थल पर हथियार नहीं ले जा सकेगा। अमृतसर नगर निगम कमिश्नर सोनाली गिरी ने फिर दोहराया कि उनसे धोबीघाट में आयोजन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। हमें आयोजन की जानकारी नहीं थी। मेला आयोजक और कांग्रेस पार्षद विजय मदान के बेटे व आयोजक सौरभ मदान ने बताया कि हमने 19 अक्टूबर के आयोजन के लिए पुलिस से अनुमति ली थी। हमने कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डाक्टर नवजोत कौर सिद्धू के बतौर मुख्य अतिथि आने की जानकारी भी दी थी। इसके लिए सुरक्षा की मांग की थी। जबकि उत्तरी रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने जारी बयान में कहा कि यह कार्यक्रम एक ऐसे क्षेत्र में हो रहा था, जो रेलवे के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
आपको बता दें कि जौड़ा फाटक दशहरा में भीषण हादसे में मात्र 5 सेकेंड में 59 लोग रेलगाड़ी के नीचे कट गए और उनकी मौत हो गयी, जबकि करीब 150 गंभीर रुप से घायल हो गए । इस हादसे का ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शिकार बने। घायलों का सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर देश के पचास करोड़ मोबाइल नंबर बंद होने की खबर वायरल होने से अब डरने की कोई जरुरत नहीं है। बृहस्पतिवार को आधार नंबर जारी करने वाली संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) और दूरसंचार विभाग ने अपने एक संयुक्त बयान जारी किया है। जिसमें कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार में दिये अपने निर्णय में कहीं नहीं कहा है कि आधार नंबर के जरिए जिन सिम कार्डो का ईकेवाइसी हुआ है वे बंद हो जाएंगे। इसलिए घबड़ाने की कोई जरुरत नहीं है।
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा है कि मोबाइल फोन धारकों को तभी नया केवाइसी कराने की आवश्यकता है, जब वो अपने सिम कार्ड को आधार से डीलिंक कराना चाहते हैं। वहीं दूरसंचार विभाग और यूआइडीएआइ मिल कर एक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया में हैं, जिसके तहत एक मोबाइल एप के जरिए नए सिम कार्ड जारी करने के लिए ईकेवाइसी की सरल प्रक्रिया होगी। इसके तहत फोटो के जरिए व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
आपको बता दें कि पिछले माह सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया था, जिसमें आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए निजी कंपनियों की ओर से आधार डाटा को इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। आदेश दिया था कि मोबाइल कंपनियां यूजर्स की पहचान के लिए आधार नंबर का वेरीफिकेशन नहीं कर सकती हैं। इसके बाद यूआइडीएआइ ने टेलीकॉम कंपनियों को 15 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर देश के पचास करोड़ मोबाइल नंबर बंद होने की खबर वायरल होने से अब डरने की कोई जरुरत नहीं है। बृहस्पतिवार को आधार नंबर जारी करने वाली संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) और दूरसंचार विभाग ने अपने एक संयुक्त बयान जारी किया है। जिसमें कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार में दिये अपने निर्णय में कहीं नहीं कहा है कि आधार नंबर के जरिए जिन सिम कार्डो का ईकेवाइसी हुआ है वे बंद हो जाएंगे। इसलिए घबड़ाने की कोई जरुरत नहीं है।
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा है कि मोबाइल फोन धारकों को तभी नया केवाइसी कराने की आवश्यकता है, जब वो अपने सिम कार्ड को आधार से डीलिंक कराना चाहते हैं। वहीं दूरसंचार विभाग और यूआइडीएआइ मिल कर एक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया में हैं, जिसके तहत एक मोबाइल एप के जरिए नए सिम कार्ड जारी करने के लिए ईकेवाइसी की सरल प्रक्रिया होगी। इसके तहत फोटो के जरिए व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
आपको बता दें कि पिछले माह सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिकता पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया था, जिसमें आधार की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए निजी कंपनियों की ओर से आधार डाटा को इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। आदेश दिया था कि मोबाइल कंपनियां यूजर्स की पहचान के लिए आधार नंबर का वेरीफिकेशन नहीं कर सकती हैं। इसके बाद यूआइडीएआइ ने टेलीकॉम कंपनियों को 15 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे।
जबलपुर (मध्य प्रदेश)। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जबलपुर में एक जिला खेल अधिकारी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हए रंगे हाथों पकड़ा है। जिला खेल अधिकारी पर आरोप है कि उसने ग्रामीण युवा समन्वयक से बिल पास करने के एवज में 10 हजार रुपए मांगे थे। जिसकी शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने जिला खेल अधिकारी को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
लोकायुक्त पुलिस के डीएसपी का कहना है कि , अगस्त 2018 में जबलपुर में मुख्यमंत्री कप के तहत खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता के आयोजन के लिए शासन स्तर पर 36 हजार रुपए की राशि मंजूर हुई थी। प्रतियोगिता के लिए आयोजन के लिए जिला खेल अधिकारी ने 36 हजार में से 16 हजार की राशि मंजूर कर दी थी। लेकिन जब शाहपुरा ब्लॉक की ग्रामीण युवा समन्वयक नैंसी जैन ने जिला खेल अधिकारी को बाकी की राशि 20 हजार रुपए का चेक पेश किया था, तो उन्होंने बिल पास करने के एवज में 10 हजार की रिश्वत की मांग की। जिला खेल अधिकारी की इस हरकत से परेशान नैंसी जैन ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस से कर दी । इस मामले की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जिला खेल अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ने का प्लान बनाया। और इसी प्लान के तहत जब नैंसी जैन ने बुधवार को जिला खेल अधिकारी को रिश्वत के दस हजार रुपए दिए तो लोकायुक्त की टीम ने जिला खेल अधिकारी को रंगेहाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त पुलिस अब जिला खेल अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने में जुट गयी है।
शिमला (हिमाचल प्रदेश) । पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर प्रदेशभर में जारी महासंग्राम के बीच नई खबर सामने आयी है। जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार प्रदेश के हजारों कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली को लेकर विचार कर रही है। पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र वित्त सचिव को भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली पर विचार कर रहे हैं।
कर्मचारियों के महासंघ के प्रधान गजिंद्र ठाकुर ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से वित्त सचिव को भेजा गया पत्र प्राप्त हुआ। जिसमें सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली के मामले का जिक्र किया गया है। इस पत्र से साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार हजारों कर्मचारियों की मांग को पूरा करने पर विचार कर रही है।
आपको बता दें कि वर्ष 2003 के बाद नियु्क्त कर्मचारियों को पेंशन सेवा का लाभ देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। इसको लेकर कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। जबकि सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि प्रदेश की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। देश के सभी राज्यों ने नई पेंशन योजना अपनाई है, इसलिए हिमाचल में भी यही पॉलिसी है। जब विधायक रमेश धवाला और राकेश सिंघा ने पेंशन योजना को लेकर कमेटी गठित करने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार इस सुझाव पर विचार कर सकती है।
शिमला (हिमाचल प्रदेश) । पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर प्रदेशभर में जारी महासंग्राम के बीच नई खबर सामने आयी है। जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार प्रदेश के हजारों कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली को लेकर विचार कर रही है। पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र वित्त सचिव को भेजा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली पर विचार कर रहे हैं।
कर्मचारियों के महासंघ के प्रधान गजिंद्र ठाकुर ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से वित्त सचिव को भेजा गया पत्र प्राप्त हुआ। जिसमें सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली के मामले का जिक्र किया गया है। इस पत्र से साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार हजारों कर्मचारियों की मांग को पूरा करने पर विचार कर रही है।
आपको बता दें कि वर्ष 2003 के बाद नियु्क्त कर्मचारियों को पेंशन सेवा का लाभ देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। इसको लेकर कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। जबकि सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि प्रदेश की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। देश के सभी राज्यों ने नई पेंशन योजना अपनाई है, इसलिए हिमाचल में भी यही पॉलिसी है। जब विधायक रमेश धवाला और राकेश सिंघा ने पेंशन योजना को लेकर कमेटी गठित करने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार इस सुझाव पर विचार कर सकती है।
नई दिल्ली । यदि आपके साथ ट्रेन में कोई दुर्घटना होती है तो अब आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है। रेल विभाग ने यात्रियों के लिए एक मोबाइल एप योजना शुरू की है। इसके तहत ट्रेन में यात्रा के दौरान यात्री बिना विलंब के ट्रेन में छेड़छाड़, चोरी, लूट, जहरखुरानी और मारपीट की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। मोबाइल एप से शिकायत के बाद इसे 'जीरो एफआइआर' में तब्दील कर आरपीएफ तुरंत मामले की जांच शुरू कर देगी। इसके लिए आपको संबंधित पुलिस थाने में जाने की जरुरत नहीं होगी।
'जीरो एफआइआर' के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन पर दर्ज करा सकता है। बाद में यह एफआइआर उस पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दी जाती है जहां पर यह दुर्घटना हुई है। यह प्रावधान सभी के लिए किया गया है। इसका मकसद ये है कि किसी को न्याय मिलने में देर न हो और जल्द से जल्द शिकायत पुलिस तक पहुंच जाए।
आपको बता दें कि वर्तमान में यदि आपके साथ ट्रेन में कोई घटना हो जाती है तो टीटीई आपको एक शिकायत फार्म देता है। आपको इसे भरकर अगले स्टेशन पर आरपीएफ अथवा जीआरपी को देना होता है। बाद में यह शिकायत स्वत: एफआइआर में बदल जाती है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में जहां मामले की जांच में विलंब होता है, वहीं यात्री को तुरंत राहत नहीं मिलती है। इस एप के माध्यम से आप ऑफलाइन भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालांकि अब इस मोबाइल एप के जारी हो जाने से यात्रियों को बहुत राहत मिलेगी। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मोबाइल एप से शिकायत दर्ज कराने का पायलट प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश में पहले से चल रहा है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे खास बात यह है कि इस एप से सिर्फ आरपीएफ को ही नहीं जीआरपी, टीटीई और ट्रेन कंडक्टर को भी जोड़ा गया है।
नई दिल्ली । अरविंद केजरीवाल की सरकार में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। आयकर विभाग ने इनकम टैक्स रिटर्न्स को लेकर एक बार फिर उनके घर में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान 100 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ। आयकर विभाग ने गहलोत और उनके परिवार के सदस्यों के यहां छापेमारी में 35 लाख रुपए कैश बरामद किए हैं। वहीं 175 से ज्यादा बेनामी संपत्ति के बिल के दस्तावेज भी मिले हैं। छापेमारी में एक ड्राइवर के नाम से भी प्रॉपर्टी भी मिली है। वहीं 2 करोड़ रुपए से ज्यादा के जेवरात भी मिले हैं। कहा जा रहा है कि इस मामले में ईडी और सीबीआई केस दर्ज कर सकती है।
आयकर विभाग की 19 टीमों ने दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के दिल्ली में वसंतकुंज, पश्चिम विहार, नजफगढ़, और गुरुग्राम समेत कई ठिकानों पर सुबह साढ़े छह बजे से ही आयकर विभाग के 19 टीमों के सौ से ज्यादा कर्मचारियों ने एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की। आयकर विभाग की प्रवक्ता शुभी अहलूवालिया ने बताया कि "यह छापेमारी ब्रिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स लिमेटेड और कॉरपोरेट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के दफ्तर समेत दिल्ली और गुरुग्राम के 16 ठिकानों पर हुई। जिसे गहलोत और उनके परिवार के लोग चलाते हैं। उन्होंने बताया कि मंत्री और अन्य लोगों से जुड़े दो विनिर्माण फर्मों के खिलाफ कर चोरी की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की जा रही है। छापे में 35 लाख नगद के साथ ही बेनामी संपत्ति के कागज मिले हैं।"
वहीं इस कार्रवाई के बाद आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए प्रधानमंत्री से दिल्ली वालों से माफी मांगने को कहा। वहीं दिल्ली भाजपा प्रदेशा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कैलाश गहलोत को तुरंत मंत्री पद से हटाने की मांग की है। आपको बता दें कि कैलाश गहलोत दिल्ली सरकार में परिवहन, कानून, राजस्व सूचना प्रौद्योगिकी व प्रशासनिक विभाग के मंत्री हैं और नजफगढ़ से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं।
नई दिल्ली । दुनियाभर में भ्रष्टाचार के मामले में भारत की रैंकिंग की स्थिति के बारे में तो आपने पढ़ा ही होगा। अब ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और लोकल सर्कल्स ने भारत में भ्रष्टाचार को लेकर एक नया आंकड़ा जारी किया है। भारत भ्रष्टाचार सर्वेक्षण 2018 नामक रिपोर्ट में ऑनलाइन कराए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में संपत्ति पंजीकरण, पुलिस और नगरपालिका निगम सबसे भ्रष्ट संस्थाएं हैं। 2018 के इस सर्वे में 56 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्हें सरकारी कार्यालयों में काम कराने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। जबकि 2017 में रिश्वत देने का यह आंकड़ा 45 ही फीसदी था।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और लोकल सर्कल्स द्वारा भारत के 215 जिलों में 50 हजार नागरिकों पर यह सर्वे कराया। जिसमें मेट्रो शहरों से 25 फीसदी, द्वितीय श्रेणी के शहरों से 34 फीसदी और तृतीय श्रेणी के शहरों से 21 फीसदी लोगों को शामिल किया गया है। देशभर में कराए गए इस सर्वे में 79 फीसद लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले बाबू सबसे ज्यादा भ्रष्ट हैं। जबकि पंजाब में 56 फीसदी और मध्य प्रदेश में 50 फीसदी बाबू भ्रष्ट हैं। इस मामले में देश की राजधानी दिल्ली भी दूध की धुली नहीं है। सर्वे के अनुसार 46 फीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया कि उन्हें पिछले एक साल में दिल्ली के सरकारी कार्यालयों में काम कराने के लिए घूस देनी पड़ी। गौरतलब है कि 2017 के मुकाबले एक साल में घूस देने के मामले में 11 फीसदी की रिकार्ड वृद्धि हुई है।
भारत भ्रष्टाचार सर्वेक्षण 2018 नाम से जारी इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि 91 फीसदी लोगों ने राज्य सरकारों के दावों की पोल खोलते हुए बताया कि उनको पता नहीं है कि उनकी राज्य सरकारों के पास भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन नंबर है। जबकि 82 फीसदी लोगों बताया कि स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार ने पिछले एक साल में भ्रष्टाचार को रोकने के दावों के अलावा उनके लिए कुछ भी नहीं किया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल और लोकल सर्कल्स के ऑनलाइन सर्वेक्षण से इस बात की पुष्टि होती है कि राज्य सरकारों ने भ्रष्टाचार से लड़ने और जागरुकता पैदा करने के लिए कोई ठोस कोशिश नहीं की है।
हालांकि देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए संसद ने भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) अधिनियम 2018 पारित किया है। यह कानून घूस लेने और देने वाले दोनों को दोषी ठहराता है। इसमें रिश्वत देने वाले को 7 साल की सजा या जुर्माना या सजा और जुर्माना दोनों लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि आरोपी को अपना पक्ष रखने के लिए सात से 15 दिन का समय दिया जाएगा। लेकिन अब देखना यह होगा कि इस कानून के आने के बाद भ्रष्टाचार में कमी आती है या फिर रिश्वतखोरी का यह सिलसिला हमेशा जारी रहेगा।
पलामू (झारखंड) । केंद्र सरकार देश में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर इस योजना का बुरा हाल है। राज्य के पलामू और चतरा जिले के कई स्कूलों के शिक्षकों को हर रोज अपनी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करवाने के लिए पेड़ पर चढ़ना पड़ता है। शिक्षकों की पेड़ पर, स्कूल की छत पर या टावर पर चढ़कर हाजिरी लगाना मजबूरी हो गई है। दरअसल दिक्कत यह है कि यहां पर इंटरनेट कनेक्शन ज्यादातर खराब रहता है। जिसकी वजह से हर रोज अध्यापकों को स्कूल परिसर में खड़े पेड़ पर चढ़कर इंटरनेट कनेक्शन का इंतजार करना पड़ता है। यदि ये शिक्षक रोज ऑनलाइन अपनी हाजिरी दर्ज नहीं करवाएंगे तो उनका वेतन काट लिया जाएगा।
सुबह के समय पलामू और चतरा जिले के कई स्कूलों का अलग ही नजारा रहता है । यहां हर सुबह 12वीं तक के स्कूल के अध्यापक पेड़ पर चढ़े हुए देखे जा सकते हैं। हाजिरी दर्ज करने में देर न हो जाए, इस डर की वजह से शिक्षक पढ़ाने के बदले ऐसी ऊंची जगह की तलाश में जुट जाते हैं, जहां नेटवर्क काम करे, और उनकी हाजिरी लग सके। दरअसल उन्हें सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत बायोमीट्रिक सिस्टम से अपनी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करवानी पड़ती है। इसके लिए उन्हें टैबलेट दिए गए हैं, जिनके साथ बायोमेट्रिक रीडर कनेक्ट हैं। एक अध्यापक का कहना है कि 'हमारे स्कूल परिसर में इंटरनेट की कोई कनेक्टिविटी नहीं है। हमें पेड़ पर चढ़कर इंटरनेट के आने का इंतजार करना पड़ता है। तब कहीं जाकर कमजोर 2जी नेटवर्क मिल पाता है।' वहीं सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक 40 की उम्र को पार कर चुके हैं, इसलिए सभी हर रोज पेड़ पर नहीं चढ़ सकते हैं। क्योंकि इससे हादसा होने का खतरा है। 'जब टैबलेट इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होते हैं तो हमें रजिस्टर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी पड़ती है। कम से कम कोई तो रिकॉर्ड रहता है।' हालांकि मामले के मीडिया में आने के बाद जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा कि बॉयोमीट्रिक सिस्टम से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ दिक्कतें आ रही हैं। नेटवर्क की समस्या से विभाग को अवगत कराया जाएगा।
आपको बता दें कि वर्ष 2017 में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने ज्ञानोदय योजना की शुरुआत की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने स्कूलों को टैबलेट बांटे थे। इन टैबलेट के अंदर पहले से ही ई-विद्या वाहिनी ऐप मौजूद है, जो अध्यापकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने, छात्रों के दाखिले और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों इत्यादि के रिकॉर्ड को मॉनिटर करता है। वहीं इंटरनेट सेवा खराब होने की वजह से इस योजना को पलीता लग रहा है।
दिल्ली में एक कंपनी सचिव के क्रेडिट कार्ड से आधी रात को 82,500 रुपए निकाल लिए गए। जबकि क्रेडिट कार्ड कंपनी सचिव सुमन कुमार के पास मौजूद था। हालांकि मामले की पुलिस थाने में शिकायत के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने उनके 60,000 रुपए लौटा दिए हैं, लेकिन वहीं बकाया 22,500 रुपए वापस करने की बजाय बैंक सुमन कुमार से 22,500 रुपए की मांग कर रहा है।
नई दिल्ली । मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने शनिवार को प्रेंस कांफ्रेंस में 5 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया। 5 राज्यों में से अकेला छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां सुरक्षा कारणों से दो चरणों में मतदान होगा। बाकी चार राज्यों में एक ही चरण में पूरी वोटिंग कराई जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि 15 दिसंबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। चुनाव के लिए वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि हर बूथ पर सुरक्षाबलों की तैनाती होगी। वहीं पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू कर दी गई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। मध्यप्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को वोटिंग होगी। वहीं, राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। रावत ने कहा कि शिमोगा, बेल्लारी और मांड्या (कर्नाटक) में उपचुनाव 3 नवंबर को होंगे। सभी राज्यों में नतीजों का ऐलान 11 दिसंबर को किया जाएगा। अभी इन राज्यों में से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की सरकार है। मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। 50 सीटों वाले मिजोरम में विधानसभा को मौजूदा कार्यकाल 15 दिसंबर को खत्म हो रहा है। वहीं 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा का मौजूदा अवधि 5 जनवरी 2019, 230 सीटों वाले मध्य प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 7 जनवरी, 200 सीटों वाले राजस्थान विधानसभा का कार्यकाल 20 जनवरी तक है। चुनाव आयोग ने कहा कि उम्मीदवार अधिकतम 28 लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे। वहीं मिजोरम में खर्च की सीमा 20 लाख तय की गई है। तेलंगाना को छोड़कर बाकी चारों राज्यों यानी मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव यानी अभी से लागू हो जाएगी। वहीं आयोग ने साफ कर दिया है प्राकृतिक आपदाओं जैसे तूफान की वजह से अभी तेलंगाना में चुनाव नहीं कराए जाएंगे।
राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव
अधिसूचना : 12 नवंबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 19 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 20 नवंबर 2018
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख : 22 नवंबर 2018
मतदान : 7 दिसंबर 2018
मध्यप्रदेश और मिजोरम विधानसभा चुनाव
अधिसूचना : 2 नवंबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 9 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 12 नवंबर 2018
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख : 14 नवंबर 2018
मतदान : 28 नवंबर 2018
छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव
पहला चरण: नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान
कुल सीटें : 18
अधिसूचना : 16 अक्टूबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 23 अक्टूबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 24 अक्टूबर 2018
नामांकन न वापसी की आखिरी तारीख : 26 अक्टूबर 2018
मतदान : 12 नवंबर 2018
दूसरा चरण:
कुल सीटें : 72
अधिसूचना : 26 अक्टूबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 2 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 3 नवंबर 2018
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख : 5 नवंबर 2018
मतदान : 20 नवंबर 2018
राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल
छत्तीसगढ़ : 5 जनवरी 2019
मध्यप्रदेश : 7 जनवरी 2019
राजस्थान : 20 जनवरी 2019
मिजोरम : 15 दिसंबर 2018
नई दिल्ली । मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने शनिवार को प्रेंस कांफ्रेंस में 5 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया। 5 राज्यों में से अकेला छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां सुरक्षा कारणों से दो चरणों में मतदान होगा। बाकी चार राज्यों में एक ही चरण में पूरी वोटिंग कराई जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि 15 दिसंबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। चुनाव के लिए वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि हर बूथ पर सुरक्षाबलों की तैनाती होगी। वहीं पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू कर दी गई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। मध्यप्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को वोटिंग होगी। वहीं, राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। रावत ने कहा कि शिमोगा, बेल्लारी और मांड्या (कर्नाटक) में उपचुनाव 3 नवंबर को होंगे। सभी राज्यों में नतीजों का ऐलान 11 दिसंबर को किया जाएगा। अभी इन राज्यों में से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की सरकार है। मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। 50 सीटों वाले मिजोरम में विधानसभा को मौजूदा कार्यकाल 15 दिसंबर को खत्म हो रहा है। वहीं 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा का मौजूदा अवधि 5 जनवरी 2019, 230 सीटों वाले मध्य प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 7 जनवरी, 200 सीटों वाले राजस्थान विधानसभा का कार्यकाल 20 जनवरी तक है। चुनाव आयोग ने कहा कि उम्मीदवार अधिकतम 28 लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे। वहीं मिजोरम में खर्च की सीमा 20 लाख तय की गई है। तेलंगाना को छोड़कर बाकी चारों राज्यों यानी मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव यानी अभी से लागू हो जाएगी। वहीं आयोग ने साफ कर दिया है प्राकृतिक आपदाओं जैसे तूफान की वजह से अभी तेलंगाना में चुनाव नहीं कराए जाएंगे।
राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव
अधिसूचना : 12 नवंबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 19 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 20 नवंबर 2018
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख : 22 नवंबर 2018
मतदान : 7 दिसंबर 2018
मध्यप्रदेश और मिजोरम विधानसभा चुनाव
अधिसूचना : 2 नवंबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 9 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 12 नवंबर 2018
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख : 14 नवंबर 2018
मतदान : 28 नवंबर 2018
छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव
पहला चरण: नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान
कुल सीटें : 18
अधिसूचना : 16 अक्टूबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 23 अक्टूबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 24 अक्टूबर 2018
नामांकन न वापसी की आखिरी तारीख : 26 अक्टूबर 2018
मतदान : 12 नवंबर 2018
दूसरा चरण:
कुल सीटें : 72
अधिसूचना : 26 अक्टूबर 2018
नामांकन की आखिरी तारीख : 2 नवंबर 2018
नामांकन की स्क्रूटनी : 3 नवंबर 2018
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख : 5 नवंबर 2018
मतदान : 20 नवंबर 2018
राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल
छत्तीसगढ़ : 5 जनवरी 2019
मध्यप्रदेश : 7 जनवरी 2019
राजस्थान : 20 जनवरी 2019
मिजोरम : 15 दिसंबर 2018
लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 68500 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में एक बार फिर गड़बड़ी उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तत्कालीन रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार को निलंबित करने का अदेश दिया है। और साथ ही एससीईआरटी के सात अधिकारियों के खिलाफ अनुशानिक जांच के आदेश दिए हैं। और अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी में नंबर जोडऩे में गलतियां करने वाले परीक्षकों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को अपनी उत्तरपुस्तिकाओं का नि:शुल्क पुनर्मूल्यांकन कराने का मौका दिया है।
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती परीक्षा में गड़बडिय़ों की जांच के लिए प्रमुख सचिव चीनी एवं गन्ना विकास संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने पर्यवेक्षण कार्य में लापरवाही बरतने पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय, इलाहाबाद के तत्कालीन रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी और मौजूदा डिप्टी रजिस्ट्रार प्रेमचंद कुशवाहा को निलंबित करने का निर्देश दिया है। वहीं उन्होंने परीक्षा के पर्यवेक्षण में ढिलाई बरतने पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के सात अफसरों के खिलाफ अनुशासनिक जांच का निर्देश दिया है।
अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार का कहना है कि सभी अभियर्थियों को दोबारा अपनी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन का मौक़ा मिलेगा। इसके लिए अभियर्थी 11 से 20 अक्टूबर के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कोई फीस देनी नहीं होगी। इसकी सूचना अखबारों में प्रकाशित की जाएगी। अभ्यर्थी सिर्फ अपनी उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे। जिन 53 फेल अभ्यर्थियों को नौकरी मिल गयी थी, वह अगर पुनर्मूल्यांकन में फेल होते हैं तो उनकी नौकरी चली जाएगी। लिखित परीक्षा में शामिल हुए सभी 1,07,825 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी कराई गई थी। इनमें से 343 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में नंबर जोडऩे में गलतियां पाई गईं। मुख्यमंत्री ने इन उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने वाले परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस देकर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
वहीं परीक्षा कराने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने मैनेजमेंट कंट्रोल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक जिस निजी एजेंसी की सेवाएं ली थीं, मुख्यमंत्री ने उसे भी ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया है। इस एजेंसी का पता 29, विधानसभा मार्ग, लखनऊ है। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ.प्रभात कुमार को सभी विभागों को यह सूचना देने का निर्देश दिया है कि वे इस एजेंसी से कोई काम न लें। यदि किसी विभाग को इस एजेंसी को कोई भुगतान करना बाकी है तो वह न करे। परीक्षा कार्य को लेकर यदि भविष्य में एजेंसी के खिलाफ कोई अनियमितता उजागर होती है तो सरकार उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।
नई दिल्ली । केंद्र सरकार नागरिकों को अपराधों से जुड़ी शिकायतों के लिए दर-दर भटकने से छुटकारा दिलाने के लिए नई पहल करने जा रही है। सरकार इसके लिए जल्द ही सभी राज्यों के लिए 'नागरिक केंद्रित पोर्टल' शुरू करने जा रही है। लोग इस पोर्टल पर सात अपराधों और उससे जुड़ी सेवाओं की ऑनलाइन शिकायत दाखिल करने के साथ ही एफआइआर दर्ज करा सकेंगे। इस पोर्टल के जरिये नागरिक अपने संभावित घरेलू सहायकों, ड्राइवरों, किरायेदारों आदि की पृष्ठभूमि का सत्यापन भी करा सकेंगे। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नागरिक केंद्रित पोर्टल जल्द ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरुआत के लिए तैयार हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि 'नागरिक केंद्रित पोर्टल' गृह मंत्रालय की 'स्मार्ट' पुलिस की अवधारणा पर आधारित है। स्मार्ट यानी एसएमएआरटी में एस ''स्ट्रिक्ट और ''सेसेंटिव (सख्त और संवेदनशील) के लिए है जबकि एम ''मॉडर्न एवं मोबाइल के लिए है। वहीं ए ''एलर्ट(चौकस) तथा ''एकांटेबेल (जवाबदेह) के लिए है। आर ''रिलायबल (भरोसेमंद) के लिए है जबकि टी ''ट्रेन्ड (प्रशिक्षित) तथा ''टैक्नो-सैवी (तकनीक का जानकार) के लिए है। इस पोर्टल से 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सात अपराधों और संबंधित सेवाओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए ऑनलाइन सुविधा मिलेगी। इनमें कर्मचारियों, किरायेदारों और नर्सों के सत्यापन, सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अनुमति, खोई-पाई चीजों और वाहन चोरी शामिल हैं। संबंधित व्यक्ति की निजता की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से पोर्टल पर अपराध से संबंधित आंकड़े और रिपोर्ट सिर्फ अधिकृत पुलिस अधिकारी ही सर्च कर सकेंगे। किसी की आपराधिक पृष्ठभूमि के सत्यापन के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को इसकी सूचना ईमेल के जरिये उपलब्ध कराई जाएगी। इस पोर्टल का उद्देश्य आपराधिक जांच को नागरिकों के अनुकूल बनाना है। इस पर दर्ज नागरिकों की रिपोर्ट और अनुरोध को बिना समय गंवाए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाते हैं ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
नई दिल्ली । केंद्र सरकार नागरिकों को अपराधों से जुड़ी शिकायतों के लिए दर-दर भटकने से छुटकारा दिलाने के लिए नई पहल करने जा रही है। सरकार इसके लिए जल्द ही सभी राज्यों के लिए 'नागरिक केंद्रित पोर्टल' शुरू करने जा रही है। लोग इस पोर्टल पर सात अपराधों और उससे जुड़ी सेवाओं की ऑनलाइन शिकायत दाखिल करने के साथ ही एफआइआर दर्ज करा सकेंगे। इस पोर्टल के जरिये नागरिक अपने संभावित घरेलू सहायकों, ड्राइवरों, किरायेदारों आदि की पृष्ठभूमि का सत्यापन भी करा सकेंगे। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नागरिक केंद्रित पोर्टल जल्द ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरुआत के लिए तैयार हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि 'नागरिक केंद्रित पोर्टल' गृह मंत्रालय की 'स्मार्ट' पुलिस की अवधारणा पर आधारित है। स्मार्ट यानी एसएमएआरटी में एस ''स्ट्रिक्ट और ''सेसेंटिव (सख्त और संवेदनशील) के लिए है जबकि एम ''मॉडर्न एवं मोबाइल के लिए है। वहीं ए ''एलर्ट(चौकस) तथा ''एकांटेबेल (जवाबदेह) के लिए है। आर ''रिलायबल (भरोसेमंद) के लिए है जबकि टी ''ट्रेन्ड (प्रशिक्षित) तथा ''टैक्नो-सैवी (तकनीक का जानकार) के लिए है। इस पोर्टल से 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सात अपराधों और संबंधित सेवाओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए ऑनलाइन सुविधा मिलेगी। इनमें कर्मचारियों, किरायेदारों और नर्सों के सत्यापन, सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अनुमति, खोई-पाई चीजों और वाहन चोरी शामिल हैं। संबंधित व्यक्ति की निजता की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से पोर्टल पर अपराध से संबंधित आंकड़े और रिपोर्ट सिर्फ अधिकृत पुलिस अधिकारी ही सर्च कर सकेंगे। किसी की आपराधिक पृष्ठभूमि के सत्यापन के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को इसकी सूचना ईमेल के जरिये उपलब्ध कराई जाएगी। इस पोर्टल का उद्देश्य आपराधिक जांच को नागरिकों के अनुकूल बनाना है। इस पर दर्ज नागरिकों की रिपोर्ट और अनुरोध को बिना समय गंवाए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाते हैं ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने अपने चुनावी वायदे को पूरा करते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1800 रुपए से बढ़ाकर 2000 रुपए प्रतिमाह कर दिया है। यह बढ़ोतरी हरियाणा दिवस यानी 1 नवंबर माह से लागू होगी। इस बढ़ोतरी से पेंशन पाने वालों को वार्षिक 207 करोड़ का फायदा होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर वित्त विभाग ने मासिक पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान 2000 रुपये मासिक पेंशन का वादा किया था, जिसे एक साल पहले ही पूरा कर दिया गया है। अभी तक इन श्रेणियों को 1800 रुपए प्रतिमाह पेंशन मिल रही थी। कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि 1 नवंबर से विधवा पेंशन, नि:शक्त जन पेंशन, लाडली पेंशन, लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता, बौना भत्ता और किन्नर भत्ता को भी 1800 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 2 हजार रुपए कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब निराश्रित बच्चों को 900 रुपए प्रतिमाह की बजाय 1100 रुपए प्रतिमाह और स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को 1200 रुपए की बजाय 1400 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे ।
कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार वर्तमान में हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन लेने वालों की संख्या 15,13,602 है। विधवा पेंशन पाने वाली महिलाओं की संख्या 6,73,629 और निशक्त पेंशन लेने वाले 1,53,789 हैं। लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ते के लाभार्थी 33,907 हैं और निराश्रित बच्चों की संख्या 2,11,403 है। इसी प्रकार अन्य पेंशन लेने वालों की संख्या करीब 9800 है। ऐसा माना जा रहा है कि मोहर लाल खट्टर की सरकार आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में किए गए अपने वादों को पूरा करने में लगी हुई है।
चंडीगढ़ (हरियाणा) । हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने अपने चुनावी वायदे को पूरा करते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1800 रुपए से बढ़ाकर 2000 रुपए प्रतिमाह कर दिया है। यह बढ़ोतरी हरियाणा दिवस यानी 1 नवंबर माह से लागू होगी। इस बढ़ोतरी से पेंशन पाने वालों को वार्षिक 207 करोड़ का फायदा होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर वित्त विभाग ने मासिक पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान 2000 रुपये मासिक पेंशन का वादा किया था, जिसे एक साल पहले ही पूरा कर दिया गया है। अभी तक इन श्रेणियों को 1800 रुपए प्रतिमाह पेंशन मिल रही थी। कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि 1 नवंबर से विधवा पेंशन, नि:शक्त जन पेंशन, लाडली पेंशन, लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता, बौना भत्ता और किन्नर भत्ता को भी 1800 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 2 हजार रुपए कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब निराश्रित बच्चों को 900 रुपए प्रतिमाह की बजाय 1100 रुपए प्रतिमाह और स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को 1200 रुपए की बजाय 1400 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे ।
कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार वर्तमान में हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन लेने वालों की संख्या 15,13,602 है। विधवा पेंशन पाने वाली महिलाओं की संख्या 6,73,629 और निशक्त पेंशन लेने वाले 1,53,789 हैं। लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ते के लाभार्थी 33,907 हैं और निराश्रित बच्चों की संख्या 2,11,403 है। इसी प्रकार अन्य पेंशन लेने वालों की संख्या करीब 9800 है। ऐसा माना जा रहा है कि मोहर लाल खट्टर की सरकार आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में किए गए अपने वादों को पूरा करने में लगी हुई है।