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पुलिस और कानूनी अधिकार



पुलिस कौन है?

पुलिस एक ऐसे व्यक्तियों का समूह है जिनका चयन और प्रशिक्षण कानून और व्यवस्था तथा जनता की सुरक्षा और सेवा के लिए किया जाता है ।

पुलिस के काम

  • कानून और व्यवस्था बनाए रखना
  • अपराध का निवारण करना
  • अपराध की जांच करना
  • संज्ञेय अपराध करने वाले अभियुक्त की गिरफ्तारी करना
  • किसी व्यक्ति के जान, माल औऱ आजादी की सुरक्षा करना
  • किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए हर कानूनी आदेश और वारंट को निष्पादित करना

पुलिस का प्रशासनिक ढांचा

  • एसएचओ (पुलिस थाने का इंचार्ज होता है )
  • डीएसपी (सब डिविजन का पुलिस अधिकारी होता है जबकि मेट्रोपोलिटन शहरों में असिस्टेंट कमिश्नर कहा जाता है ,एसएचओ के काम की देखरेख करता है)
  • एसपी (एक जिले की कानून और व्यवस्था में डीएम की मदद करता है)
  • एसएसपी(एक जिले के पुलिस प्रशासन का इंचार्ज होता है , जो जिला मजिस्ट्रेट के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में काम करता है, जबकि मेट्रोपोलिटन शहरों में डिप्टी कमिश्नर इंचार्ज होता है, इसकी मदद असिस्टेंट कमिश्नर करता है )
  • डीआईजीपी (एक राज्य के के तीन चार जिलों का इंचार्ज होता है )
  • आईजीपी या डीजीपी (राज्य स्तर के पुलिस प्रशासन का इंचार्ज होता है)

संघ शासित पुलिस प्रशासन

  • संघ शासित क्षेत्र में पुलिस प्रणाली की देखरेख केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा किया जाता है । ये अधिकारी आईजीपी के सारे अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है ।

प्रथम सूचना रिपोर्ट(एफआईआऱ)

पुलिस थाने या चौकी में दर्ज की  गयी ऐसी पहली अपराध की रिपोर्ट को प्रथम सूचना रिपोर्ट या एफआईआर कहा जाता है।

  • हर व्यक्ति अपने तरीके से अपराध के उस समय ज्ञात ब्योरे देते हुए रिपोर्ट लिखवा सकता है ।
  • पुलिस इस एफआईआऱ को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लेगी और पावती के रुप में एक प्रति रिपोर्ट दर्ज कराने वाले को देगी।
  • पुलिस सभी प्रकार के अपराधों की रिपोर्ट दर्ज करती है , लेकिन केवल संज्ञेय अपराधों के मामलों में ही पुलिस स्वयं जांच पड़ताल कर सकती है ।
  • असंज्ञेय अपराधों के मामलों में पुलिस पहले मामले को मजिस्ट्रेट को पेश करती है और उससे आदेश प्राप्त होने के बाद ही वह जांच-पड़ताल शुरु कर सकती है ।
  • संज्ञेय अपराधों में गंभीर किस्म के अपराध आते हैं जैसे कि हत्या , रेप , डकैती , लूट आदि। सीआरपीसी की धारा-154 के तहत संज्ञेय अपराध में पुलिस एफआईआर दर्ज करना जरूरी है। 
  • अगर थाने में मौजूद पुलिस कर्मचारी/अधिकारी रिपोर्ट लिखने से मना कर दे तो शिकायतकर्ता उस क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक या उप पुलिस अधीक्षक को डाक से रिपोर्ट भेज सकता है ।

 

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