आपका अधिकार

Diyaa



Diyaa
अगर आपके आस-पास अधिकार के लिए कोई अच्छा काम कर रहा है या फिर अधिकार का उल्लंघन कर रहा है, जिसे आप लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आप अपनी रिपोर्ट- info.adhikarexpress@gmail.com पर हमें भेजें |

पुलिस और कानूनी अधिकार



  •  अगर रिपोर्ट लिखवाने वाला/वाली अनपढ़ हो तो ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी उसके बताए विवरण के मुताबिक उसकी ओर से रिपोर्ट लिखनी चाहिए और उसे पढ़कर सुनानी चाहिए।
  • ऐसी एफआईआर को सुनकर शिकायतकर्ता करने वाला/वाली रिपोर्ट पर अपने अंगूठे का निशान लगा सकता/सकती है।
  • अगर शिकायतकर्ता को लगता है कि रिपोर्ट में तथ्य ठीक नहीं लिखे गये हैं तो वह रिपोर्ट लिखने वाले पुलिस अधिकारी से आवश्यक संशोधन करने को कह सकता है ।

एफआईआर में निम्नलिखित विषय हों

  • अभियुक्त का नाम और पता हो
  • अपराध होने का दिन,स्थान तथा समय हो
  • अपराध करने का तरीका तथा उसके पीछे नीयत आदि हो
  • साक्षी का परिचय हो
  • अपराध से सम्बद्ध सभी विशेषताएं हों 

एनसीआर ( नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट ):-  

  • असंज्ञेय अपराधों की कैटिगरी में मामूली अपराध आते हैं जैसे कि मारपीट , छीनाछपटी आदि। ऐसे मामले में सीधे तौर पर पुलिस के सामने शिकायत नहीं की जाती। ऐसे मामले में पुलिस एनसीआर ( नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट ) दर्ज करती है और मामला मैजिस्ट्रेट को रेफर कर दिया जाता है। असंज्ञेय अपराध में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करती जबकि संज्ञेय अपराध में पुलिस को सीधे एफआईआर दर्ज करना होता है।

एफआईआर दर्ज ना होने पर शिकायत(परिवाद) :- 

  • जब पुलिस अधिकारी एफआईआर के आधार पर कार्यवाही नहीं करता है, तब व्यथित व्यक्ति उस मजिस्ट्रेट को शिकायत कर सकता है , जिसे उस अपराध पर संज्ञान लेने की अधिकारिता है ।
  • अगर एफआईआर दर्ज न हो तो पीड़ित पक्ष इलाके के अडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट या चीफमेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा -156 (3) के तहत शिकायत कर सकता है। हर जिला अदालत में एक अडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट बैठता है।
  • दिल्ली से बाहर के मामले में चीफ जूडिशियल मैजिस्ट्रेट ( सीजेएम ) के सामने शिकायत की जा सकती है। इसके बाद अदालत मामले को संबंधित मैजिस्ट्रेट को रेफर करती है। इसके बाद मैजिस्ट्रेट के सामने शिकायती अपना पक्ष रखता है और उससे संतुष्ट होने के बाद मैजिस्ट्रेट एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता है। अगर मैजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी तो उस अदालती फैसलेके खिलाफ ऊपरी अदालत में अर्जी दाखिल की जा सकती है।

परिवाद के विषय वस्तु

  • कथित अपराध का विवरण हो
  • अभियुक्त तथा परिवादी का नाम तथा पता हो
  • साक्षियों के नाम तथा पते हों
और अधिक पढ़ें  >>>

अधिकार के हीरो

जनमत

फोटो गैलरी

वीडियो

अन्य