आपका अधिकार

Diyaa



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अगर आपके आस-पास अधिकार के लिए कोई अच्छा काम कर रहा है या फिर अधिकार का उल्लंघन कर रहा है, जिसे आप लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आप अपनी रिपोर्ट- info.adhikarexpress@gmail.com पर हमें भेजें |

कर्मचारियों के अधिकार



4-बिजली की फिटिंग के रख-रखाव का काम ।

किस चोट पर मुआवजा

1-ऐसी चोट जिससे मौत हो जाए, शऱीर का कोई अंग कट जाए या आंख की रोशनी चली जाय आदि।

2-चोट की वजह  से लकवा या अंग-भंग जैसी हालत हो जाए, जिसकी वजह से व्यक्ति रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहे।

3-ऐसी चोट जिसकी वजह से कर्मचारी कम से कम तीन दिन तक काम करने  के लायक ना रहे ।

किस चोट पर मुआवजा नहीं

1-शराब पीने या नशीली चीजों के सेवन से दुर्घटना हुई हो।

2-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बने किसी नियम या निर्देश का जान-बूझकर उल्लंघन करने से हुई दुर्घटना ।

3-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों का जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने से हुई दुर्घटना ।

मुआवजे लिए प्रमाण

1-कर्मचारी को सबसे पहले अपनी मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट की कॉपी अपने पास रखें।

2-कर्मचारी दुर्घटना की रिपोर्ट नजदीकी थाने में लिखवा देना चाहिए । रिपोर्ट में चोट का पूरा ब्योरा होना चाहिए।

3-दुर्घटना के चश्मदीद गवाह होने चाहिए।

महिला कर्मचारियों को विशेष अधिकार

1-फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन कक्ष होना चाहिए।

2-अगर किसी फैक्ट्री में 30 से ज्यादा महिला कर्मचारी हों तो वहां बच्चों के लिए शिशुगृह की व्यवस्था होनी चाहिए

3-फैक्ट्री में काम सवेरे 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए।

4-मशीन में तेल डालने या साफ कराने का काम नहीं कराया जाना चाहिए ।

5-एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।

6-लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।

7-खानों में जमीन के नीचे काम करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।

 मुआवजे का दावा

1-दुर्घटना होने पर सबसे पहले नियोक्ता को नोटिस दें, नोटिस में कर्मचारी का नाम, चोट के कारण , तारीख और स्थान लिखें।

2-अगर नियोक्ता मुआवजा नहीं देता या पर्याप्त मुआवजा नहीं देता है तो कर्मचारी लेबर कमिश्नर को आवेदन दे ।

3-आवेदन में कर्मचारी का पेशा, चोट की प्रकृति, चोट की तारीख, स्थान , नियोक्ता का नाम, पता नियोक्ता को नोटिस देने की तिथि, अगर नियोक्ता को नोटिस नहीं भेजा हो तो नोटिस नहीं भेजने का कारण का उल्लेख करें ।

3-यह आवेदन दुर्घटना होने के 2 साल के अंदर दे दिया जाना चाहिए। विशेष हालात में 2 साल के बाद भी आवेदन किया जा सकता है ।

4-कुछ मामलों में मुआवजा श्रम आयुक्त के जरिये ही दिया जा सकता है । जैसे , कर्मचारी  की मृत्यु की स्थिति में, उसके संबंधियों को श्रम आयुक्त के माध्यम से ही मुआवजा दिया जा सकता है ।

महिलाओं का मातृत्व लाभ

मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में महिला कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष लाभ दिए गए हैं ।

 

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