आपका अधिकार

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उत्तराधिकार का अधिकार



हिंदुओं को उत्तराधिकार 

  • किसी हिंदू की मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति उसकी विधवा बच्चों(लड़के तथा लड़कियां) तथा मां के बीच बराबर बांटी जाती है ।
  • अगर उसके किसी पुत्र की उससे पहले मृत्यु हो गयी हो तो बेटे की विधवा तथा बच्चों को संपत्ति का एक हिस्सा मिलेगा।
  • हिंदू महिला की संपत्ति उसके बच्चों (लड़के तथा लड़कियां ) तथा पति को मिलेगी । उससे पहले मरने वाले बेटे के बच्चों को भी बराबर का एक हिस्सा मिलेगा ।
  • अगर किसी हिंदू व्यक्ति के परिवार के नजदीकी सदस्य जीवित नहीं हैंतो उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पाने वाले उत्तराधिकारियों का निश्चित वर्गीकरण होता है ।
  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम में हिन्दू माता-पिता की पुत्री को अपने माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए पुत्रों के समान ही अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन कृषि भूमि के संबन्ध में सभी राज्यों में वैसी स्थिति नहीं है। कृषि भूमि राज्यों का विषय है और समस्त कृषि भूमि को राज्य की संपत्ति माना गया है। कृषक को कृषि भूमि पर कृषि करने मात्र का अधिकार होता है जिसे सांपत्तिक अधिकार न मान कर ऐसा अधिकार माना गया है जैसा कि किसी अन्य स्थावर संपत्ति के मामले में किराएदार को होता है। इस कारण से कृषि भूमि पर कृषक के अधिकार का उत्तराधिकार राज्य में कृषि भूमि से संबन्धित कानून से शासित होता है।
  • एक हिंदू पुरूष के संपत्ति के उत्तराधिकारी पुत्रपुत्रीविधवा मांमृतक पुत्र का पुत्रमृतक पुत्र की पुत्रीमृतक पुत्री के बेटा-बेटीमृतक बेटे की विधवामृतक बेटे के बेटे का बेटामृतक बेटे के बेटे की विधवामृतक बेटे के मृतक बेटे की बेटी हो सकते है
  • संपत्ति का बँटवारा पत्र का पंजीकृत होना जरूरी है। यदि वह पंजीकृत नहीं है तो मान्य नहीं होगा, लेकिन यदि पहले बँटवारा हो चुका हो और बाद में बँटवारे का ज्ञापन लिख कर उसे नोटेरी से सत्यापित कराया गया हो तो वह बँटवारे की सही सबूत हो सकता है। 
  • स्त्री का पति से तलाक न होने पर वह संतानों के समान ही पति की संपत्ति की उत्तराधिकारी है।
  • पैतृक संपत्ति में पुत्रियों को भी पुत्रों के समान अधिकार दिया गया है, लेकिन यह अधिकार केवल पैतृक संपत्ति में ही है।  
  • यदि पुश्तैनी संपत्ति को बेच कर या उस से होने वाली आय से नई संपत्ति बनाई गयी है तो वह भी पुश्तैनी ही मानी जाएगी।
  • किसी महिला को उसके पति द्वारा अर्जित संपत्ति पर मृत्यु के पहले अधिकार प्राप्त था और उसका उत्तराधिकार पति के देहावसान के समय ही निश्चित हो चुका था, तो उस संपत्ति में उसका और उसके बच्चों का अधिकार बना रहेगा। दूसरा विवाह करने से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर उसका अधिकार समाप्त नहीं होगा।
  • पिता के पेंशन की अधिकारी सिर्फ आप की मां होती है, लेकिन ग्रेच्युटी और अन्य लाभ जो भी उन्हें मिले हैं, उन की वे ट्रस्टी मात्र होती हैं, उस पर मां के साथ ही सभी बच्चों का बराबर अधिकार होता है।
  • आम तौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरान्त उत्तराधिकार के नियम के अनुसार राजस्व अधिकारी उस के उत्तराधिकारियों के नाम नामांतरण कर देते हैंयह सामान्य नियम है।
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