आपका अधिकार

Diyaa



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हर व्यक्ति को आत्मरक्षा का अधिकार



4-जमीन के वास्तविक मालिक को अधिकार है कि वो कानूनी तरीके से बाहरी व्यक्ति को अपनी जमीन में ना घुसने दे।

5-बाहरी व्यक्ति को शारीरिक हमले से आत्मरक्षा का अधिकार तभी होगा जब वो संपत्ति का यह अधिकार लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा हो।

6-अगर वास्तविक मालिक बलपूर्वक अचानक जमीन पर कब्जा करने वाले बाहरी व्यक्ति से बलपूर्वक अपनी जमीन को प्राप्त करेगा , तो वह किसी अपराध का दोषी नहीं होगा ।

7-यदि कोई बाहरी व्यक्ति असली मालिक को जानते हुए भी गलती से किसी जमीन के टुकड़े को लंबे समय तक इस्तेमाल करता है तो असली मालिक कानून को अपने हाथ में नही ले सकता है। उसे कानूनी उपचारों की मदद लेनी होगी।

8-आईपीसी की धारा 103 के मुताबिक लूट, रात्रि में घर में सेंध,आगजनी,चोरी आदि की स्थिति में अगर जान का खतरा हो तो आक्रमणकारी की हत्या करना न्याय संगत होगा।

संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार

1-संपत्ति की निजी प्रतिरक्षा का अधिकार तब शुरु होता है , जब संपत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका शुरु होती है ।

2-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा का अधिकार चोरी के खिलाफ अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक होती है अथवा लोक प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त कर लेने तक बनी रहती है ।

3-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा अधिकार लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है , जब तक कि अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसे नुकसान पहुंचाने तक विरोध करता है  या फिर कोशिश करता रहता है । अथवा जब तक तुरंत मौत का या निजी विरोध का भय बना रहता है ।

4-संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार अत्याचार के खिलाफ तब तक बना रहता है । जब तक कि अपराधी अत्याचार करता रहता है ।

5-संपत्ति का निजी प्रतिरक्षा का अधिकार रात में घर में सेंध लगाने के खिलाफ तब तक बना रहता है । जब तक  सेंध से शुरु हुआ गृह अत्याचार जारी रहता है ।

 

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