आपका अधिकार

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भोजन का अधिकार



सर्वोच्च न्यायालय का फैसला-

सर्वोच्च न्यायालय ने 2001 में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।

सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि जीवन के अधिकार (धारा 21) के तहत भोजन का अधिकार सम्मान, नियोजन आदि के अधिकार में अंतर्निहित है। राज्यों को ऐसी नीति बनाने का संविधान द्वारा निर्देश है कि प्रत्येक नागरिक को समान रूप से जीविका के समुचित साधन प्राप्त करने का अधिकार हो तथा राज्य नागरिकों के पोषाहार तथा जीवन स्तर को उठाने व जन स्वास्थ्य में सुधार का प्रयास करें। अनुच्छेद 39 (ए) तथा 47 में कहा है कि यह राज्य का प्राथमिक दायित्व होगा।

 राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्‍यादेश 2013- 

खाद्य सुरक्षा विधेयक का खास जोर गरीब से गरीब व्‍यक्तिमहिलाओं और बच्‍चों की जरूरतें पूरी करने पर होगा। अगर लोगों को अनाज नहीं मिल पाया तो उन्‍हें खाद्य सुरक्षा भत्‍ता दिया जायेगा। इस विधेयक में शिकायत निवारण तंत्र की भी व्‍यवस्‍था है। अगर कोई जन सेवक या अधिकृत व्‍यक्ति इसका अनुपालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ शिकायत की सुनवाई हो सकेगी। इस विधेयक की अन्‍य खास बातें निम्‍नलिखित हैं-

  1. दो तिहाई आबादी को मिलेगा ऊंची सब्सिडी वाला अनाज 

देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 50 प्रतिशत शहरी जनसंख्‍या को हर महीने बहुत ऊंची सब्सिडी वाली दरों पर यानी तीन रूपयेदो रूपयेएक रूपये प्रति किलो चावलगेहूं और मोटा अनाज पाने का अधिकार होगा। इससे हमारी 1.2 अरब आबादी के दो तिहाई भाग को लक्षित सार्वजनिक वितरण व्‍यवस्‍था (टीपीडीएस) के अंतर्गत सब्सिडी वाला अनाज पाने का हक मिलेगा। 

  1. अति गरीब को 35 किलो प्रति परिवार मिलता रहेगा अनाज- 

समाज के अति गरीब वर्ग के हर परिवार को हर महीने अंत्‍योदय अन्‍न योजना के अंतर्गत तीन रूपयेदो रूपयेएक रूपये की दरों पर सब्सिडी वाले अनाज की आपूर्ति जारी रहेगी। यह भी प्रस्‍ताव है कि राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मौजूदा दर पर अनाज की आपूर्ति होती रहेगी और इसे तभी कम किया जायेगाजब पिछले तीन वर्षों तक उनकी औसत उठान इससे कम हो।

  1. पात्र परिवारों की पहचान करेंगी राज्‍य सरकारें- 

अखिल भारतीय स्‍तर की शहरी आबादी के 50 प्रतिशत और ग्रामीण जनसंख्‍या के 75 प्रतिशत को इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित करने का फैसला केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा। इस मामले में पात्र परिवारों की पहचान की जिम्‍मेदारी राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदशों पर छोड़ दी गई है जो इसके लिए अगर चाहें तो सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आँकड़ों के आधार पर मापदंड बना सकते हैं। 

  1. महिलाओं और बच्‍चों को विशेष रूप से पोषण संबंधी सहायता- 

इस विधेयक में महिलाओं और बच्‍चों के पोषण संबंधी समर्थन  पर खासतौर पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माताएं निर्धारित पोषण संबंधी मापदंडों के अनुरूप पोषक भोजन पाने की हकदार होंगी। उन्‍हें कम से कम 6 हजार रुपये मातृत्‍व लाभ‍ भी मिलेगा। 6 महीने से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग तक के बच्‍चे घर पर राशन पाने अथवा पोषण संबंधी मापदंडों के आधार पर गर्म पका भोजन पाने के हकदार होंगे।

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