आपका अधिकार

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ग्राम पंचायत का अधिकार



  • ग्राम न्यायालय को सिविल और दांडिक दोनों प्रकरणों की अधिकारिता प्रदान की गई है ।
  • ग्राम न्यायालय में अधिनियम की अनुसूची-1 के अनुसार दिये गये दांडिक प्रकरणों का है ।
  • दूसरी अनुसूची में दिये गये सिविल प्रकरणों का निराकरण किया जावेगा ।

 ग्राम न्यायालय के विचारण की शक्तियां- 

  • दांडिक मामलो का विचारण करते समय ग्राम न्यायालय दं0प्र0सं0 मेंदी गई संक्षिप्त प्रक्रिया का अनुुसरण करेगें और संक्षिप्त प्रक्रिया अपनाते हुये मामलों का निपटारा करेगें।
  • इस संबंध में सौदा अभिवाक् से संबंधित अध्याय 21क दं0प्र0सं0 के प्रावधान पूर्णतः ग्राम न्यायालय को लागू होगें ।
  • सरकार की तरफ से ग्राम न्यायालय में दांडिक मामलो का संचालन करने के लिये सहायक लोक अभियोजन अधिकारी कार्य कर सकेंगे और न्यायालय की इजाजत से परिवादी अपना अधिवक्ता नियुक्त कर सकते हैं ।
  • ग्राम न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पक्षकारो को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करायेगी ।
  • मामले के निर्णय की निःशुल्क प्रति तत्काल दोनो पक्षकारो को दी जावेगी ।
  • निर्णय विचारण समाप्ति के 15 दिन के अन्दर सुनाया जाएगा ।
  • ग्राम न्यायालय में साक्ष्य अभिेलेखन की प्रक्रिया ।
  • ग्राम न्यायालय में भारतीय साक्ष्य अधिनियम कठोरता से लागू नहीं की जाएगी ।
  • साक्षियों की साक्ष्य विस्तार से अभिलिखित न कर संक्षेप में लिपिबद्ध की जाएगी ।
  • औपचारिक प्रकृति की साक्ष्य को शपथ पत्र पर प्रकट किए जाने की अनुमति दी जाएगी।
  • ग्राम न्यायालय द्वारा प्रत्येक सिविल विवादो में विशेष प्रक्रिया का पालन किया जावेगा, 100/-कोर्टफीस के साथ दावा ग्राम न्यायालय में प्रस्तुत किया जावेगा ।

ग्राम न्यायालय के निर्णय-

  • सिविल वाद का निराकरण 6 माह की अवधि के अंदर किया जावेगा और तर्क सुनने के ठीक 15 दिन के अंदर निर्णय पारित किया जावेगा
  • निर्णय की प्रतिलिपि तीन दिन के अंदर निःशुल्क दी जावेगी ।
  • ग्राम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय डिक्री का निष्पादन सिविल प्रक्रिया के तहत होगा ।
  • लेकिन इसमें नैसर्गिक न्याय के सिद्वांतो का अनुरण किया जावेगा ।
  • न्यायालय प्रथम दो अवसर पर यह प्रयास करेगी कि प्रत्येक वाद या कार्यवाही समझौते से निपटाई जावे ।
  • पक्षकारो के बीच समझौता कराये जाने का प्रयास किया जायेगा ।
  • इसके लिये सुलाहदारों की नियुक्ति जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से की जावेगी ।
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