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किराएदारी का अधिकार



 रेंट एग्रीमेंट(किरायनामा) क्या होता है? 

  • इसमें उन शर्तों का जिक्र होता है, जिस आधार पर प्रॉपर्टी किराए पर दी जाती है। इसमें रेंट वैल्यू और पीरियड का जिक्र होता है। साथ ही, सिक्योरिटी डिपॉजिट की भी बात रहती है, जिसे किराएदार को मकान मालिक के पास जमा करना होता है। एग्रीमेंट में किराया भुगतान किए जाने की तारीख का भी साफ-साफ जिक्र होना चाहिए। मिसाल के तौर पर यह हर महीने की 5वीं या 10वीं तारीख को हो सकती है। अगर किराएदार संबंधित अवधि के भीतर किराए का भुगतान नहीं करता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • इसमें पार्किंग स्पेस, सोसायटी जिम आदि सुविधाओं का जिक्र हो सकता है। साथ ही, सोसायटी मेंटेनेंस चार्ज और क्लब फीस जैसे अतिरिक्त मासिक खर्चों के बारे में भी बताया जा सकता है। अगर सुविधाओं के लिए अतिरिक्त चार्ज की शर्तों के बारे में साफ तौर पर जिक्र हो तो यह और बेहतर हो सकता है। एग्रीमेंट में इसके बारे में यह बताया जाना चाहिए कि इसका भुगतान किसे किया जाना है। अगर दोनों में से कोई भी पक्ष एग्रीमेंट की शर्तों का पालन नहीं करता है तो संबंधित पक्ष जुर्माने का दावा कर सकता है।

रेंट एग्रीमेंट(किरायानामा) के प्रमुख बिंदु-

  1. मकान का मासिक किराया कितना होगा।
  2. नल, बिजली का खर्च कितना और किस प्रकार भुगतान होगा।
  3. मकान या उसके किसी हिस्से को किस प्रकार उपयोग में लिया जाएगा और किस तरह के उपयोग में नहीं लिया जाएगा।
  4. किराए पर लिए गए परिसर के साथ क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी।
  5. छत और आंगन का उपयोग किस सीमा तक किया जा सकेगा।
  6. मकान के किराए में वृद्धि की दर क्या होगी।
  7. मकान मालिक परिसर खाली कराना चाहे या फिर किराएदार खाली करना चाहे तो कितने दिन पहले नोटिस देना होगा।(आम तौर पर परिसर खाली करने लिए एक या दो माह का नोटिस पर्याप्त माना जाता है)
  8. हर महीने का किराया एडवांस देना होगा या महीना पूरा होने पर अंतिम दिन में देना होगा।
  9. मकान की सीक्योरिटी राशि क्या होगी।

रेंट एग्रीमेंट(किरायानामा) शु्ल्क का भुगतान- 

  • भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 62 कहती है कि निर्धारित स्टाम्प शुल्क से कम पर दस्तावेज बनाया जाना अपराध है। इसका सीधा अर्थ है कि 50 या 100 रु. के स्टाम्प पर बने किरायानामे गलत हैं। यदि किसी मकान का किराया 10 हजार रुपए प्रतिमाह है तो उसका सालाना कुल किराया लाख 20 हजार रुपए होगा। तीन साल के लिए यदि किराया अनुबंध होता है तो इस सालाना किराए की कुल राशि का दो फीसदी यानी 2400 रुपए का स्टाम्प अनुबंध के लिए आवश्यक होगा। इसलिए उचित स्टाम्प शु्ल्क का भुगतान करें। 
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