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किराएदारी का अधिकार



 रेंट एग्रीमेंट(किरायानामा) करने की प्रक्रिया-

  • किराएदारी का एग्रीमेंट (किरायानामा) यदि एक वर्ष या इस से अधिक अवधि का है तो उसे पंजीकृत होना चाहिए और उस पर स्टाम्प डूयूटी भी लगनी चाहिए।
  • सामान्य रुप से किराएदार और मकान मालिक 11 माह के लिए मकान किराए पर देने का एग्रीमेंट करते हैं।
  • एग्रीमेंट को एक नॉन ज्यूडीशियल स्टाम्प पेपर पर लिखा जाता है। यह स्टाम्प पेपर एग्रीमेंट के लिए आवश्यक मूल्य का होना चाहिए।
  • हर राज्य में एग्रीमेंट के लिए आवश्यक मूल्य अलग-अलग हो सकता है। जो स्टाम्प बेचने वाला व्यक्ति ही आपको बता देगा।
  • एग्रीमेंट पर मकान मालिक और किराएदार के अतिरिक्त दो गवाहों के हस्ताक्षर होना पर्याप्त है। लेकिन आप चाहें तो किराएनामे को नोटेरी के यहाँ जा कर सत्यापित करवा सकते हैंजहाँ नोटेरी के रजिस्टर पर मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर होते हैं।
  • किराएदार को हर माह किराए का भुगतान करके मकान मालिक से उसकी रसीद अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए। क्योंकि किराया तभी भुगतान किया हुआ माना जाता हैजबकि उस की रसीद किराएदार के पास हो।
  • मकान मालिककिराएदार को अपने हस्ताक्षर युक्त रसीद अवश्य दे और इस रसीद की एक प्रति किराएदार से हस्ताक्षर करा कर अपने पास सुरक्षित रख ले। 
  • अगर मकान मालिक और किराएदार में विवाद हो जाता है तो ये रसीदें और उनकी प्रतियाँ बहुत मूल्यवान दस्तावेज होते हैं।
  • किराएदार को किराए की रसीद देने के लिए बाजार में रसीदबुकें छपी छपाई मिलती हैं। इन रसीद बुकों पर प्रत्येक क्रमांक की एक रसीद और उस की डुप्लीकेट होती है तथा इस पर किराएदारी की शर्तें भी लिखी होती हैं।
  • जब मकान मालिक हस्ताक्षर कर रसीद देता है और डुप्लीकेट (दूसरी) प्रति पर किराएदार के हस्ताक्षर करवा लेता है तो हर माह किरायानामा बढ़ता रहता है।
  • इस रसीद बुक से रसीद देना दोनों के लिए बहुत लाभदायक है।
  • किराएदार कभी भी मकान का स्वामी नहीं हो सकता है।
  • किराएदार अगर किराया कम देता है तो आप दुकान को खाली नहीं करवा सकते हैं। आप किराया बढ़ाने के लिए न्यायालय में वाद संस्थित कर सकते हैं। जिसमें वाद प्रस्तुत करने की तिथि से बाजार दर से किराया बढ़ाया जा सकता है।
  • अगर आप बेरोजगार हैं, और आप को खुद का व्यवसाय करने के लिए दुकान की आवश्यकता है, तो आप अपनी आवश्यकता के लिए उस दुकान को खाली करवा सकते हैं।
  • बिना रसीद प्राप्त किए कभी भी किराया अदा नहीं करना चाहिए या फिर चैक से या बैंक खाते में हस्तान्तरण के माध्यम से ही किराया अदा करना चाहिए।
  • किराए का नियम है कि यदि किराएदार के पास किराया अदा करने की रसीद नहीं है तो किराया भुगतान किया हुआ नहीं माना जाएगा। 
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