आपका अधिकार

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गोद लेने का अधिकार



कौन गोद ले सकता है?

  • भारत में केवल हिंदू ही बच्चा गोद ले सकते हैं । इनमें सिखजैन और बौद्ध शामिल हैं ।
  • विवाहित अथवा अविवाहित स्त्री या पुरुष बच्चा गोद ले सकते हैं ।
  • बच्चों को गोद लेते समय गोद लेने वाला/ वाली नाबालिग अथवा पागल नहीं होना चाहिए।
  • गोद लेने वाला/वाली लड़का गोद ले सकते हैं अगर गोद लेते समय उसकी कोई अपनी या गोद ली हुई पुरुष संतान (बेटा/पोता /पड़पोता आदि) ना हो।
  • गोद लेने वाला/वाली लड़की गोद ले सकता/सकती हैंअगर गोद लेते समय उसकी कोई अपनी या गोद ली हुई कन्या  संतान ना हो।
  • कोई भी व्यक्ति अपने विपरीत लिंग के कम से कम 21 साल छोटे लड़के/लड़की को गोद ले सकता/सकती  है।
  • गोद लिया हुआ व्यक्ति 15 वर्ष से कम उम्र का तथा अविवाहित होना चाहिए।
  • कोई पुरुष ऐसे बच्चे को गोद नहीं ले सकता हैजिसकी मां का गोद लेने वाले के साथ ऐसा संबंध हो जिसमें विवाह वर्जित है। (जैसे बहन अथवा बेटी के पुत्र को गोद नहीं लिया जा सकता)
  • अगर पत्नी जीवित है तो उसकी सहमति से ही बच्चा/बच्ची गोद ले सकता है। लेकिन अगर पत्नी पागल होहिंदू नहीं होया संन्यासिन हो गयी हो तो उसकी सहमति आवश्यक नहीं है ।
  • विधवा महिला संतान गोद ले सकती है ।
  • विवाहित महिला विवाह खत्म हो जाने,अदालत द्वारा पति को पागल घोषित कर दिए जाने या उसके संन्यासी हो जाने की स्थिति में संतान गोद ले सकती है ।
  • आपसी सहमति से अपने बच्चे को किसी और को गोद दे सकते हैं। अगर मां या बाप में से किसी एक को भी ऐतराज होगा, तो बच्चे को गोद नहीं दिया जा सकता। 
  • उसी बच्चे को गोद दिया जा सकता है, जिसे पहले किसी और को गोद न दिया गया हो। 

नाबालिग बच्चों के संरक्षक-

  • पुत्रों और अविवाहित पुत्रियों, दोनो का नैसर्गिक संरक्षक पहले पिता है और इसके बाद माता। पांच वर्ष से कम आयु के बच्‍चों की संरक्षकता के मामले में ही मां का अधिकार प्रथम माना गया है।
  • अवैध बच्‍चों के मामले में मां को कथित पिता से बेहतर अधिकार प्राप्‍त हैं। इस अधिनियम के अनुसार, बच्‍चे के शरीर और उसकी संपत्ति में कोई अंतर नहीं रखा गया है। 

गैर हिंदुओं के लिए कानून-

  • गैर हिंदू व्यक्ति किसी बच्चे को गोद नहीं ले सकता है लेकिन वह गार्जियन्स एंड वार्ड्स एक्ट के अंतर्गत अभिभावक बन सकता है ।
  • ऐसा बच्चा 21 साल की उम्र में अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हो जाता है ।
  • अदालत अभिभावकत्व रद्द कर सकती है अगर अभिभावक इसे रद्द करने के लिए आवेदन करे अथवा अभिभावक का कार्य असंतोषजनक पाया जाए।
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