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सुरक्षित पर्यावरण का अधिकार



पर्यावरण क्या है

हमारी धरती और इसके आसपास के कुछ हिस्सों को पर्यावरण में शामिल किया जाता है। इसमें सिर्फ मानव ही नहीं, बल्कि धरती पर आप जिस किसी चीज को देखते और महसूस करते हैं, वह पर्यावरण का हिस्सा है। इसमें मानव, जीव-जंतु, पहाड़, चट्टान जैसी चीजों के अलावा हवा, पानी, ऊर्जा आदि को भी शामिल किया जाता है। देश के पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 2 (क) के अनुसार पर्यावरण में वायु, जल, भूमि, मानवीय प्राणी, अन्य जीव-जन्तु, पौधे, सूक्ष्म जीवाणु और उनके मध्य विद्यमान अन्तर्सम्बन्ध सम्मिलित हैं। 

अनुच्छेद 21:- इसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जायेगा, अन्यथा नहीं।

अनुच्छेद 48(क):- राज्र्य देश के पर्यावरण का संरक्षण तथा उसमें सुधार करने और वन  तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा। 

अनुच्छेद 51(क):- भार के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह- 

अनुच्छेद 51(ख):-  प्राकृतिक वातावरण , जिसके अंतर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव हैं की रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दया भाव रखे। 

  • भारत सरकार द्वारा सन् 1980 में पर्यावरण मंत्रालय की स्थापना की गई। 

सामान्य कानून (Common Laws) – 

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 372 कॉमन लॉ पर आधारित है। इस कानून के अंतर्गत किसी भी कार्य के विरुद्ध जो किसी संपत्ति या व्यक्ति की हानि का कारण बना हो, प्रभावित पक्ष क्षतिपूर्ति या निषेधाज्ञा या दोनों का दावा कर सकता है।  

संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions)

  • भारतीय संविधान विश्व का पहला संविधान है, जिसमें पर्यावरण के लिए विशिष्ट प्रावधान है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना यह सुनिश्चित करती है कि हमारा देश समाजवादी समाज की अवधारणा पर आधारित है, जहां राज्य व्यक्ति की अपेक्षा सामाजिक समस्याओं को प्राथमिकता देता है। समाजवाद का मूल लक्ष्य है, सभी को जीवन का सुखद स्तर उपलब्ध करवाना, जो केवल एक प्रदूषण मुक्त वातावरण में ही संभव है।

प्रदूषण का तात्पर्य:-

  • प्रदूषण से तात्पर्य जल का अशुद्धिकरण अथवा उसमें भौतिकरासायनिक या जीव विज्ञानी परिवर्तन करना है अथवा सीवेज (Sewage) या कोई अन्य औद्योगिक,कृषि या किसी अन्य न्यायसंगत कार्य के लिए अयोग्य या पशु-पक्षी अथवा जलीय वनस्पति के लिए अयोग्य कर दें।
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