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संपत्ति का अधिकार



रजिस्ट्री और जीपीए क्या होते हैं?   

  • जीपीए किसी भी काम के लिए दिया जा सकता है। इसे मुख्तारनामा आम भी कहा जाता है। जीपीए के जरिए बैंक अकाउंट ऑपरेट व लॉकर ऑपरेट करनेप्रॉपर्टी खरीद-बिक्री के अधिकार से लेकर दूसरे तमाम सरकारी कामों का अधिकार दिया जाता है।
  • हालांकि जीपीए कभी भी रद्द किया जा सकता है और इसे रद्द करने के बाद जिसके नाम से जीपीए बनाया गया हैउसे नोटिस दिया जाता है। साथ ही पेपर के जरिए लोगों को बताना होता है कि जीपीए रद्द कर दिया गया है। कुछ जीपीए ऐसे भी होते हैंजो अखंडनीय (इरिवोकेबल) होते हैं यानी जिन्हें रद्द नहीं किया जा सकता। लेकिन स्पेशल केस में ऐसे जीपीए को भी रद्द किया जा सकता है। इसी तरह स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी होता है जो किसी खास काम के लिए बनाया जाता है। जीपीए का दायरा बड़ा होता है।
  • पावर ऑफ अटॉर्नी प्रिंसिपल या एजेंट की मौत के बाद वैध नहीं रहती। अगर किसी दुर्घटना के असर से प्रिंसिपल कोई कानूनी दस्तावेज साइन करने की स्थिति में नहीं रहता, तो पहले की गई पीओए की समय सीमा भी समाप्त हो जाती है। इसके अलावा, प्रिंसिपल कैंसिलेशन डीड के जरिए पूर्व में की गई पीओए को कैंसल कर सकता है। काम पूरा होने पर एसपीए को समाप्त मान लिया जाता है। दोनों पक्षों की आपसी सहमति से पीओए कभी भी कैंसल की जा सकती है। यहां ड्यूरेबल पावर ऑफ अटॉर्नी का जिक्र करना लाजिमी होगा।

ड्यूरेबल पावर ऑफ अटॉर्नी क्या है? 

  • जिसमें प्रिंसिपल ने यह साफ तौर पर लिखा हो कि उसके अक्षम हो जाने पर भी पीओए जारी रहेगी। हालांकि प्रिंसिपल की मौत होने पर इसकी भी वैधता समाप्त हो जाती है। कुछ जगहों पर ड्यूरेबल पावर ऑफ अटानीर् को हेल्थकेयर पावर ऑफ अटॉर्नी भी कहा जाता है। इसके तहत एजेंट प्रिंसिपल की मेडिकल केयर से जुडे़ अहम फैसले लेने का अधिकारी होता है।
  • जनरल पावर ऑफ अटार्नी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं होता। वैसे, इसका रजिस्ट्रेशन कराने पर इसे ज्यादा महत्व दिया जा सकता है। खासतौर पर जब मामला अचल संपत्ति से जुड़ा हो। जिन जगहों पर 'रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908' लागू है, वहां इस डीड को सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड कराया जाता है, बाकी जगहों पर अटेस्टेशन नोटरी या प्रशासनिक अधिकारियों से कराया जाता है। इसके रजिस्ट्रेशन के समय दो या इससे ज्यादा गवाहों का होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन के बाद प्रिंसिपल को एग्जिक्यूटेंट और इसे पाने वाले को जीपीए/एसपीए होल्डर कहते हैं।

विदेश में पॉवर अटॉर्नी 

  • भारत स्थित किसी प्रॉपर्टी की डील करने के लिए विदेश में भी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार और रजिस्टर्ड कराई जा सकती है। अगर पीओए का रजिस्ट्रेशन भारत से बाहर कराया गया है, तो इन कागजात के भारत पहुंचने के तीन महीने के अंदर इसे जिलाधिकारी से मान्यता दिलानी होगी। मान लीजिए, अमेरिका में रहने वाला एक एनआरआई अपनी पुश्तैनी प्रॉपर्टी को बेचना चाहता है, लेकिन इसके लिए भारत नहीं आना चाहता। ऐसे में वह यूएस में पीओए तैयार कराकर उसे नोटराइज्ड करा सकता है।
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