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वाहन रजिस्ट्रेशन का अधिकार



वाहन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया-

  • एक निश्चित समय सीमा में वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक निर्धारित प्रार्थना पत्र मूल कैशमेमो, बीमा व अऩ्य दस्तावेजों औऱ निर्धारित फीस के साथ अधिकृत पंजीकरण अधिकारी को पेश करना होता है।
  • अगर रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित प्रार्थनापत्र, दस्तावेज औऱ फीस निश्चित समय पर पेश नहीं किया जाता है, तो इस देरी के लिए जुर्माना लगेगा।
  • वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए राज्य सरकार हर जिले में एक जिला परिवहन अधिकारी की नियुक्ति करती है। संबंधित जिले में मिलने वाले सभी वाहनों का पंजीकरण इसी अधिकारी के कार्यालय में किया जाता है।
  • एक राज्य में कराया गया रजिस्ट्रेशन पूरे देश में वैध माना जाता है, लेकिन जब किसी रजिस्टर्ड वाहन को अन्य राज्य में एक वर्ष से अधिक समय तक रखा जाता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन उस राज्य में कराना होता है, जहां वाहन को रखा जा रहा है। हालांकि इससे संबंधित हर राज्य में अलग-अलग नियम हैं।
  • अगर किसी वाहन के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर दिया गया है और रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला है, तो उस वाहन पर यथास्थान 'अप्लाइड फॉर' लिखकर ही वाहन को सार्वजनिक स्थान में ले जाना चाहिए औऱ जैसे ही रजिस्ट्रेशन प्राप्त हो जाए, उसे यथास्थान राज्य सरकार द्वारा निर्धारित रंग, साइज व स्थान पर पक्के रंग से लिखवा लेना चाहिए।
  • रजिस्ट्रेशन के लिए प्रार्थना-पत्र प्राप्त होने पर परिवहन अधिकारी उसकी पूर्ण जांच करने के पश्चात अपने कार्यालय में संधारित रजिस्टर में इंट्री करने के पश्चात उस वाहन को रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित कर उसका रजिस्ट्रेशन कर देता है।

पुराने वाहन का रजिस्ट्रेशन-

  • अगर वाहन पुराना है तो उसका फिटेनस प्रमाणपत्र भी पेश करना आवश्यक है।
  • रजिस्ट्रेशन प्रार्थनापत्र के साथ पेश किए गए दस्तावेजों या वाहन की हालत देखकर या फीस की कमी के कारण अगर परिहन अधिकारी संतुष्ट नहीं होता ह, तो वह वाहन के रजिस्ट्रेशन से इनकार कर सकता है, जिसके विरुद्ध आवश्यक अपील उच्च अधिकारियों से की जा सकती है।
  • पुराने वाहन को खऱीदने और बेचने वाले दोनों व्यक्तियों का वाहन की बिक्री की तिथि से एक निश्चित समय में परिवहन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य है । रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट में मोटरयान के मालिक का पता दिया होता है। अगर इस पते में किसी प्रकार का बदलाव होता है तो उसकी सूचना एक महीने के अंदर यातायात अधिकारी को देना जरुरी है।
  • अगर वाहन सड़क पर चलने योग्य न हो या उसके नियमों का उल्लंघन किया हो तो परिवहन अधिकारी ऐसे वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है। इसके लिए वह वाहन मालिक को पहले नोटिस देगा और नोटिस के छह महीने के पश्चात् रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है।
  • जिसका नाम वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में लिखा होता है, वहीं उसका मालिक होता है, चाहे उस वाहन को कितनी भी बार बेचा गया हो, वाहन के प्रति उसका उत्तरदायित्व कायम रहता है।
  • अगर वाहन को किसी कारणवश पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी जब्त कर लेता है तो उसकी सुपुर्दगी लेने या जमानत प्रार्थनापत्र पेश करने का अधिकार भी उसी व्यक्ति को होगा , जिसका नाम वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट में है या फिर उसके द्वारा मुख्तियार नियुक्त है।
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