आपका अधिकार

Diyaa



Diyaa
अगर आपके आस-पास अधिकार के लिए कोई अच्छा काम कर रहा है या फिर अधिकार का उल्लंघन कर रहा है, जिसे आप लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आप अपनी रिपोर्ट- info.adhikarexpress@gmail.com पर हमें भेजें |

लोकहित मुकदमा(Public Interest Litigation)



 लोकहित मुकदमे(Public Intrest Litigation) का क्या अर्थ है?

  • आम जनता या किसी विशेष वर्ग के लोगों के हित को लागू करने के लिए न्यायालय में वैधक कार्यवाही आरम्भ करना जिससे जनता या किसी विशेष वर्ग या समुदाय के वैधिक अधिकार और दायित्व पूर्ण किये जा सकें।

लोकहित मुकदमे का उद्देश्य-

  • न्यायमूर्ति वी आर कृण्षा अय्यर के अनुसार पीआईएल लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया है । यह वैधिक प्रक्रिया लोगों की समस्या उठाने व उनकी आाज बुलंद करने में मदद करती है। इसका उद्देश्य है आम लोगों को न्याय दिलाना और उनकी वैधिक समस्याओं की सुनवाई कर उन्हें राहत पहुंचाना है।
  • नागरिक को यह अधिकार है कि वो संविधान के अनुच्छेद 32 (1)  में दिए गए प्रावधानों के अनुसार उच्चतम न्यायलय मे सविधान के भाग lll में दिए गये मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए उचित निर्देश, आदेश या रिट देने के लिए आवेदन कर सकता है । यह रिट विभिन्न प्रकार की हो सकती है , जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट, परमादेश रिट, प्रतिषेध रिट, अधिकार पृच्छा रिट।
  • अनुच्छेद 226 के अनुसार हर उच्च न्यायालय के पास यह शक्ति है कि वह अपने कार्य क्षेत्र में संविधान में दिए गये मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए अपने न्याय अधिकारों का प्रयोग कर किसी भी व्यक्ति या अधिकारण को निर्देश दे सकता है या रिट आदेश जारी कर सकता है । यह रिट बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश रिट, उत्प्रेषण रिट, प्रतिषेध रिट या अधिकारपृच्छा रिट हो सकती है ।

न्यायालय में आवेदन का समय-

  • जब किसी व्यक्ति या विशेष वर्ग के व्यक्तियों को वैधिक हानि पहुंचती हो या उनके साथ अन्याय होता हो जो उनके संवैधानिक या वैधिक अधिकारों के उल्लंघन के कारण हुआ हो और ऐसे व्यक्ति अपनी निर्धनता, असहाय स्थिति, अक्षमता या आर्थिक तथा सामाजिक दुर्बलता के कारण न्यायलय में राहत हेतु आवेदन करने में असमर्थ हो, तब जनता का कोई भी सदस्य उचित निर्देश, आदेश या रिट हेतु आवेदन कर सकता है ।
  • अगर किसी नागरिक (आम आदमी) के किसी भी मूल अधिकार का हनन हो रहा है, तो वह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मूल अधिकार की रक्षा के लिए गुहार लगा सकता है। वह अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट का और अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

जनहित याचिकाओं के प्रकार :-

  1. प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन :- अगर किसी व्यक्ति का अधिकार प्रभावित हुआ है, तो वह खुद प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन के तहत याचिका दायर कर सकता है। इसके लिए उसे संविधान के अनुच्छेद -32 के तहत सुप्रीम कोर्ट और अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता को अदालत को बताना होता है कि उसके मूल अधिकार का उल्लंघन कैसे हुआ है?  
  1. पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन :- इसके तहत जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को बताना होगा कि आम लोगों के अधिकार का उल्लंघन कैसे हुआ है? इसमें अपने लाभ के लिए जनहित याचिका का इस्तेमाल नहीं हो सकता है।

 

और अधिक पढ़ें  >>>

अधिकार के हीरो

जनमत

फोटो गैलरी

वीडियो

अन्य