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लोकहित मुकदमा(Public Interest Litigation)



पत्र के जरिए जनहित याचिका:- 

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर कोई शख्स हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर भी समस्या के बारे में सूचित करता है, तो अदालत उस पत्र को जनहित याचिका में बदल सकती है।
  • यह पत्र सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को संबोधित कर लिखा जा सकता है। यह पत्र कोई भी नागरिक लिख सकता है। 

लोकहित मुकदमा दायर करने के योग्य नहीं-

  1. वह व्यक्ति जो पर्याप्त लोक हित में कार्य न कर रहा हो,
  2. वह व्यक्ति जो निजी स्वार्थ के लिेए कार्य कर रहा हो,
  3. वह व्यक्ति जो राजनीति में उलझा हो,
  4. वह व्यक्ति जिसका आसदभावपूर्ण आशय हो।

लोकहित मुकदमा दायर करने के योग्य-

  •  अगर यह मामला निजी न होकर व्यापक जनहित से जुड़ा है तो याचिका को जनहित याचिका के तौर पर देखा जाता है। पीआईएल डालने वाले शख्स को अदालत को यह बताना होगा कि कैसे उस मामले में आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है।
  • अगर मामला निजी हित से जुड़ा है या निजी तौर पर किसी के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसे जनहित याचिका नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में दायर की गई याचिका को पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन कहा जाता है और इसी के तहत उनकी सुनवाई होती है। 
  • दायर की गई याचिका जनहित है या नहींइसका फैसला कोर्ट ही करता है।
  • पीआईएल में सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट सरकार को उचित निर्देश जारी करती हैं। यानी पीआईएल के जरिए लोग जनहित के मामलों में सरकार को अदालत से निदेर्श जारी करवा सकते हैं।

लोकहित मुकदमे में उठाए जाने वाले मामले-

  1. मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, पानी, दवाईयां, बिजली, प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक चिकत्सा सुविधा, बस सुविधा इत्यादि,
  2. विस्थापित लोगों का पुनर्वास,
  3. बंधुआ एवं बाल मजदूरों की पहचान व पुनर्वास,
  4. बंदी व्यक्तियों को अवैध गिरफ्तारी में रखना,
  5. पुलिस के संरक्षण में बंदियों पर यंत्रणा,
  6. अभिरक्षा में मृत्यु, 
  1.  कैदियों के अधिकारों का संरक्षण,
  2. जेल सुधार,
  3. विचाराधीन कैदियों की शीघ्र सुनवाई,
  4. कालेजों में रैगिंग,
  5. पुलिस द्वारा अत्याचार,
  6. अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों पर अत्याचार,
  7. सरकारी कल्याण गृहों में निवासियों की उपेक्षा,
  8. अभिरक्षा में बच्चे,
  9. बच्चों का दत्तक ग्रहण, 
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