आपका अधिकार

Diyaa



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आपके मूल अधिकार



भारतीय संविधान हर नागरिक को कुछ मूल अधिकार देता है जो उसे सरकार के मनमाने और अन्यायपूर्ण कार्यों के खिलाफ संरक्षण देते हैं  और उसके लिए गरिमापूर्ण जीवन की परिस्थितियां बनाते हैं । अपने मूल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए , आप सीधे उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायलय में जा सकते हैं ,  जबकि दूसरे मामलों में आप पहले निचली अदालतों में मामला दायर करते हैं और वहां के फैसलों के खिलाफ अपील करते हुए ही बड़ी अदालतों तक पहुंचते हैं ।

भारतीय संविधान में मूल अधिकारों की संरक्षा का कार्य उच्चतम न्यायालय को सौंपा गया है । मूल अधिकार अत्यंतिक अधिकार नहीं है। इन अधिकारों पर, आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक हित में, निर्बंधन लगाए जा सकते हैं। किसी भी सामाजिक व्यवस्था में व्यक्ति और समाज , दोनों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक अधिकारों पर निर्बंध लगाए जाएं।

मूल अधिकारों के प्रकार

  1. समता का अधिकार (14, 15, 16, 17, 18)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (19)
  3. अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (20)
  4. प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (21)
  5. बंदीकरण एवं निरोध के विरुद्ध संवैधानिक संरक्षण (22)
  6. शोषण के विरुद्ध अधिकार (23, 24)
  7. धर्म- स्वतंत्रता का अधिकार (25, 26, 27, 28)
  8. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (29, 30)
  9. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (32, 33, 34, 35)
  • 14-समता का अधिकार  राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
  • 15- धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध

(1) राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर-

(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश या

(ख) पूर्णत: या भगत: राज्य निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग, के संबंध में किसी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बंधन या शर्त के अधीन नहीं होगा।

(3) अनुच्छेद 15 की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी ।

(4) अनुच्छेद 15 की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी ।

 

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