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पत्नी,बच्चों,माता-पिता को भरण- पोषण का अधिकार



भरण-पोषण का अधिकार क्या है?

किसी व्यक्ति की समान्य आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु धन देना उसका भरण-पोषण है।

हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम की धारा 3(ख) के अनुसार-

  1. सब दशाओं में भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और चिकित्सकीय परिचर्या और इलाज का उपबंध आता है,
  2. अविवाहित पुत्री की दशा में उसके विवाह के युक्तियुक्त प्रासंगिक व्यय भी आते हैं।

भरण-पोषण प्राप्त करने के अधिकारी-

  • पूर्वज तथा वंशज, दोनों ही भरण-पोषण प्राप्त करने के अधिकारी हैं। पूर्वजों में माता-पिता तथा दादा-दादी सम्मिलित हैं। इसमें नि:संतान सौतेली माता भी आती है।
  • महिला का विवाह की निरंतरता के दौरान, विवाह-विघटन के पश्चात् तथा विधवा होने के समय भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार बना रहता है,

भरण-पोषण के लिए आश्रित-

  • पिता, माता, विधवा, अवयस्क धर्मज और अधर्मज पुत्र, अवयस्क अविवाहित धर्मज और अधर्मज पुत्री, विधवा पुत्री, विधवा पुत्रवधू, विधवा पौत्रवधू, अविवाहित पौत्र, अवयस्क प्रपौत्र, अविवाहित पौत्री, अविवाहित प्रपौत्री।

आश्रितों के भरण-पोषण के नियम-

  1. भरण-पोषण का अधिकार व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि संपत्ति के विरुद्ध हैं। यह व्यक्तिगत दायित्व नहीं है। यह दायित्व संपत्ति तक ही सीमित है। मृत व्यक्ति के उत्तराधिकारी से आश्रित उससे अधिक भरण-पोषण नहीं पा सकते हैं, जितनी मृत की संपत्ति उनके पास है।
  2. धारा 22 (2) के अनुसार आश्रित भरण-पोषण की मांग तभी कर सकता है जबकि मृत व्यक्ति की संपत्ति में से उत्तराधिकारी के रुप में कोई अंश नहीं मिला है। चाहे उत्तराधिकारी के नाम पर वसीयत हो या न हो।
  3. धारा 22 (3) के अनुसार जो व्यक्ति संपत्ति लेते हैं, उनमें से प्रत्येक का दायित्व अपने द्वारा ली गयी संपत्ति के अंश या भाग के मूल्य के अनुपात में होगा।
  4. धारा 22 (4) के अनुसार में आश्रितों के भरण-पोषण की एक और सीमा दी गयी है। इस उपधारा के अनुसार उपधारा (2) या उपधारा (3) में किसी बात के अंतर्विष्ट होते हुए भी कोई भी व्यक्ति , जो स्वयं एक आश्रित है, अन्य के भरण-पोषण के लिए अभिदाय करने का दायी ना होगा, यदि जो अंश या भाग उसे अभिप्राप्त हुआ हो, उसका मूल्य उससे,   जो उसे भरण-पोषण के रुप में इस अधिनियम के अधीन अधिर्निणीत हो, कम हो या कम हो जाएगा, यदि अभिदान करने के दायित्व का प्रवर्तन किया जाए।

भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 के मुताबिक पत्नी , बच्चों व माता-पिता को भरण पोषण का कानूनी अधिकार है, वहीं पति, पिता और पुत्रों पर पत्नी , बच्चों व माता-पिता के भरण पोषण की जिम्मेदारी डाली गयी है । 

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