आपका अधिकार

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पत्नी,बच्चों,माता-पिता को भरण- पोषण का अधिकार



साधन संपन्न व्यक्ति का कर्तव्य  

  • अपनी पत्नी जो खुद अपना खर्च नहीं चला सकती है , उसका खर्च वहन करे।
  • कुछ मामलों में जैसे जब पत्नी घर का खर्च चला रही हो, तो हिंदू विवाह कानून के मुताबिक पति को गुजारे का खर्च दिया जाना चाहिए
  • मुस्लिम पत्नी को तलाक पाने के बाद तुरंत बाद गुजारे के लिए मेहर पाने का अधिकार है । (मेहर की रकम शादी से पहले या शादी के समय मिले उपहारों अथवा अदालत द्वारा तय की जाती है )
  • मुस्लिम पत्नी विवाह के समय उपहारों को भी मांग सकती है ।
  • मुस्लिम पत्नी को इद्दत के बाद गुजारे का हक पाने का अधिकार नहीं है ।(इद्दत वह अवधि है जिसमें तलाक के बाद मुस्लिम महिला दोबारा शादी नहीं कर सकती है )
  • इद्दत के बाद पत्नी के भरण-पोषण की अनिवार्य जिम्मेदारी उसके माता-पिता या बच्चे या उसकी संपत्ति के वारिस रिश्तेदारों की होती है ।
  • अपनी हर वैध अथवा नाबालिग संतान का चाहे वह शादीशुदा है या नहीं, जो खुद का खर्च चलाने में समर्थ नहीं है , उसका खर्च वहन करे।
  • बालिग हो चुके संतानों की देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता की नहीं है ।
  • अपने माता या पिता जो अपना खर्च चलाने के काबिल नहीं हैं, उनका खर्च वहन करे।
  • माता-पिता अपनी विवाहित लड़की से भी भरण-पोषण का दावा करने के हकदार हैं।

अदालत का आदेश

  • प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को , पत्नी , बच्चों या माता-पिता का खर्च उठाने व उनको मासिक खर्च देने का आदेश जारी कर सकते हैं
  • मजिस्ट्रेट जितना उचित समझे , उतना मासिक खर्च का आदेश जारी कर सकता है ।
  • नाबालिग लड़की के पति के पास जीवन पोषण के पर्याप्त साधन न होने पर  अदालत लड़की के पिता को उसके बालिग होने तक एक तयशुदा खर्च का आदेश दे सकती है ।
  • मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को जिसके खिलाफ भरण-पोषण की याचिका दायर की गयी है , उसे यह आदेश दे सकता है कि वह अपनी पत्नी बच्चों माता-पिता के लिए अंतरिम भरण-पोषण की व्यवस्था करे तथा मजिस्ट्रेट यह भी आदेश दे सकता है कि याचिका में आए खर्चे का भी वहन वह व्यक्ति करे।
  • भरण-पोषण का खर्च आदेश की तारीख से अथवा आदेश होने पर उसके लिए दी गयी अर्जी की तारीख से मिल सकता है ।
  • मजिस्ट्रेट किसी भी पक्ष के हालातों में फेरबदल होने पर भरण-पोषण की रकम व अंतरिम आदेश की रकम घटा-बढ़ा सकता है
  • धारा 125 के मुताबिक खर्च के आदेश के खिलाफ अपील नहीं हो सकती है । असंतुष्ट पक्ष आदेश के पुनर्निरीक्षण(रिवीजन) के लिए ऊपर की अदालत में अर्जी दे सकता है ।

पत्नी का पति के साथ न रहने की सही वजह

  • व्यभिचार(पर-स्त्रीगमन), निर्दयता, स्वधर्मत्याग, ईसाई अथवा हिंदू पति द्वारा दूसरी शादी करना।
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