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राघौगढ़ नगरपालिका की मनमानी से परेशान मृतक आश्रित

Mar 31, 2016

हमारी मां का स्‍वर्गवास मार्च १९९८ में हो गया था उनसे हम दो पुत्र है और मेरे पिताजी नगरपालिका राघौगढ में लेखापाल के पद पर कार्यरत थे उनका स्‍वर्गवास दिनांक ३०.१२.२०१२ को सेवाकाल में रहते हुए हो गया था च्रद्रकांता नाम की महिला बताती है कि उसने हमारे पिताजी से हमारी मां का स्‍वर्गवास होने के २ साल बाद गायत्री मंदरि से शादी की थी लेकिन इस शादी के बारे में च्रद्रकांता के अलावा कोई नहीं जानता कि शादी हुई थी या नहीं इस संबंध में जिस गायत्री मंदिर से शादी की बात वो करती है वहां से भी हमने इनकी शादी का प्रमाण मांगा था लेकिन उनहोंने प्रमाणपत्र दिया है कि हमारे पिताजी और च्रंद्रकांता शर्मा की शादी से संबंधित हमारे यहां कोई रिकार्ड उपलब्‍ध नहीं है। इस संबंध में चंब्रकांता शर्मा के पास शादी का कोई वैध प्रमाण पत्र भी नहीं है बल्‍कि च्रद्रकांता शर्मा पहले से ही शादी शुदा है और जिसका प्रमाण भी हमें आंगनबाडी कार्यालय से मिला जहां यह सहायिका के पद पर पर कार्य करती थी वहां इन्‍होंने अपने आवेदन में खुद को परित्‍याक्‍ता बताते हुए आवेदन दिया था और आवेदन के साथ एक सिलाई परीक्षा पास करने का प्रमाण पत्र भी इनके द्वारा दिया गया था जिसमें उनके पूर्व पति का नाम उनके पति के नाम पर उल्‍लेखित है इसके साथ ही उनके मोहल्‍ले के वार्ड मेंबर ने भी इनकी अनुशंसा का प्रमाण पत्र स्‍वंय के हाथों से लिखकर दिया है कि उनके पति द्वारा इनाको छोड दिया गया है अत: यह महिला पूर्णत: बे सहारा है इसको सहायिका के पद पर नियुक्ति दी जावे । इन सभी तथ्‍यों से स्‍पस्‍ट होता है कि चंद्रकांता शर्मा का विवाह पूर्व में किसी और व्‍यक्ति से हो चुका है और उस व्‍यक्ति से चंद्रकांता शर्मा के कानूनन विवाह विच्‍छेद आज दिनांक तक नहीं हुआ है और इस बात की पुष्टि भी हमने की है कि उनका अपने पूर्व पति से कोई विवाह विच्‍छेद नहीं हुआ है तो फिर बिना डिवोस लिए यह हमारे पिताजी से केसे शादी कर सकती है और अगर शादी हुई भी है है तो तो उस शादी को शून्‍य माना जाना चाहिए लेकिन नगरपालिका अधिकारी ने इन सभी तथ्‍यों को नकारते हुए पूरा पैसा चंद्रकांता शर्मा के खाते में जामा करा दिया है जिसका नोमीनेशन हम दोनों भईयों के नाम है और नोमिनेशन में इनका कहीं भी नाम नहीं है और न ही सर्विस रिकार्ड में इनका कोई नाम उल्‍लेखित है फिर भी इनको हमारे पिताजी की पत्‍नी मानकर हमारे सभी अधिकार इनको क्‍यों दिये जा रहे है । इस संबंध में हम आपकी उचित सलाह चाहतें है कि हमें क्‍या करना चाहिए। और हमें यह भी बताने की कृपा करें कि जिस व्‍यक्ति के नाम सरकारी से सर्विस के दौरान नोमिनेशन क्‍यों कराया जाता है और जब नोमिनेशन कराया जाता है तो उस नामिनेशन का क्‍या अर्थ है क्‍योंकि जिस व्‍यक्ति का नोमिनेशन किया गया है उस व्‍यक्ति को नजरअंदाज क्‍यों किया जाता है कृपया हमें यह बताने की कृपा करें कि हमारे पिताजी की संपत्ति में हमारे क्‍या अधिकार है और हम इनको कि तरह प्राप्‍त कर सकते है । और यह भी बताने की कृपा करें कि जब नोमिनेटेड व्‍यक्ति को हर तरीके से नजरअंदाज कर दिया जाता है तो फिर सरकारी कर्म्‍चारी से नोमिनेशन क्‍यों करवाए जाते है । आपसे अनुरोध है कि इस संबंध में हमें उचित मार्गदर्शन देने की कृपा करें । 

Thanks

 

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