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पारदर्शी राशन वितरण प्रणाली व्यवस्था पर उठे सवाल

Feb 27, 2016

जोधपुर (राजस्थान)। कालाबाजारी से परेशान राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को पारदर्शी तरीके से राशन वितरण की सुविधा देने की एक नई पहल की। इसके लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी तरीके से रसद सुविधाएं देना का शुरु किया। प्वाइंट ऑफ सेल की तर्ज पर अन्नपूर्णा भंडार खोले और डिजिटल राशनकार्ड भी बनाए। और अब विभाग को ऑनलाइन भी करने की तैयारी है, लेकिन सरकार की ये सभी कवायदें पूरी होती नहीं दिखाई दे रही हैं।

आपको बता दें कि सरकार जयपुर से तो मामले की मॉनिटरिंग कर रही है और अफसरों को काम पूरा करने की डेडलाइन दे दी है, लेकिन संबंधित अफसर इस काम को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं अन्नपूर्णा योजना के प्रभारी रमेश कुमार विश्नोई का अपने बचाव में अपना ही तर्क है, उनका कहना है कि मंत्री ने मुख्यमंत्री के दौरे से पहले कुछ दुकानें चालू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनी सामान ही दे पायी। और जब फ्यूचर ग्रुप के सीनियर मैनेजर मनीष पारख से मामले पर जवाब मांगा गया तो उनका कहना था कि वह डिस्पैच सेंटर खोल रहे हैं और जल्दी ही सप्लाई कर देंगे। इस पूरे मामले पर जब खाद्य आपूर्ति मंत्री हेम सिंह भडाना से सवाल किया गया तो उन्होंने मुद्दे पर गोलमाल जवाब दिया। उनका कहना था कि सरकार के फोकस पारदर्शी तरीक से रसद विभाग का सिस्टम डेवलप करना है। और वह जल्दी ही सब कुछ सही करवा देंगे।

 

गौतलब है कि जोधपुर में करीब 9 लाख राशनकार्ड धारक हैं, जिनमें से 20 हजार राशनकार्ड नकली हैं। इसके बावजूद अभी तक शहर के करीब 20 हजार और ग्रामीण इलाके के 90 हजार से ज्यादा लोगों के राशनकार्ड बनने बाकी हैं। जोधपुर में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत 4.72 लाख 914 योग्य परिवार है, जिनमें से 2.56 लाख परिवारों की सीडिंग हो चुकी है। इसमें से ज्यादातर लोगों के पास नए राशकार्ड, भामाशाह व अधार नंबर नहीं हैं। पीपीपी मोड पर प्राधिकृत राशन डीलर को जोधपुर में 310 राशन की दुकानें खोलनी हैं, लेकिन अभी तक शहर में 10 जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28 दुकानें ही तैयार हैं, जिनमें सामान ही नहीं आया है। बाकी दुकानों को मार्च में खोलने के लिए कहा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय से शहर में पात्र लोगों की सूची बनायी जा रही है, लेकिन फिर भी अभी तक 27 फीसदी लोगों के नाम ही जुड़ सके हैं। चिंता की बात यह है कि योजना के नाम नहीं पूरा होने की स्थिति में पात्र लोग अनाज के साथ ही योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। वहीं प्वाइंट ऑफ सेल के तहत राशन सामग्री के वितरण के लिए शहर में अभी तक 90 मशीनें ही शुरु हो पायी हैं, जबकि 1100 ज्यादा मशीनों को लगाया जाना बाकी है। वहीं ग्रामीण इलाकों में 706 मशीनों में 243 मशीनें ही शुरु हो पायी हैं। इनमें भी सीडिंग नहीं होने और नेटवर्क की कमजोरी की वजह से बायोमैट्रिक तरीके से अनाज देने में डीलरों को परेशानी हो रही है।

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