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यूपी पुलिस की पिटाई से पूर्व पत्रकार की मौत!

Nov 05, 2015

यूपी में लखनऊ में एक बार फिर पुलिस की बर्बरता सामने आर्ई है। इस बार बेलगाम सरोजनीनगर थानाध्यक्ष की पिटाई से अधमरे पूर्व पत्रकार व लेखक राजीव चतुर्वेदी की मौत हो गर्ई। थानाध्यक्ष के मातहतों ने बड़ी चतुराई के साथ उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया था। चालक ने जब उनकी तलाश में मोबाइल पर फोन किया तो पता चला कि सीएचसी में उनकी मौत हो चुकी है। यह खबर फैलते ही सामुदायिक केंद्र पर जमावड़ा लग गया। फिलहाल इस मालमें में पुलिस कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

   मूलरूप से इटावा के रहने वाले पूर्व पत्रकार व लेखकर राजीव चतुर्वेदी कृष्णलोक कालोनी के बगल में अपने निजी मकान में रहते थे। बताया जा रहा है कि मौजूदा वक्त राजीव आधार ग्रुप प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड नाम से प्लास्टिक की फैक्ट्री चलाते थे। मंगलवार को वह अपने चालक सलाही के साथ सरोजनीनगर थाना गये थे। चालक सलाही के मुताबिक राजीव थाने के भीतर चले गये। उसके बाद उनका कोई सुराग नहीं लगा।

    मंगलवार को राजीव सलाही के साथ हजरतगंज गये थे। उसके बाद उन्होंने सरोजनीनगर थाना चलने की बात कही। सलाही की मानें तो दोपहर करीब दो बजे उसने थाना के बाहर उन्हें उतार दिया , वह भीतर चले गये और सलाही पड़ोस में मौजूद मंदिर के किनारे गाड़ी खड़ी करके चाय के होटल पर बैठ गया। तीन बजे तक राजीव बाहर नहीं निकले तो उसने उनके मोबाइल पर फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं मिला। इस पर उसने राजीव की परिचित राजभवन में रहने वाली सविता सिंह से सम्पर्क किया। फिर उन्होंने भी राजीव के मोबाइल पर फोन मिलाया।

    सलाही के मुताबिक राजीव के मोबाइल को किसी ने उठाया और बताया कि वह सामुदायिक केंद्र में मृत हालत में है। उन्हें पुलिस ने भर्ती कराया है। यह सुनते ही सलाही  सामुदायिक केंद्र पहुंचा तो देखा कि राजीव का शव पड़ा हुआ था। राजीव के जूते और बेल्ट गायब थी। आशंका जताई जा रही है कि राजीव को पुलिस ने हवालात में बंद कर दिया था, क्योंकि पुलिस आरोपी को जब हवालात में बंद करती है तो पहले जूते और बेल्ट निकलवा देती है।

    बताया जा रहा है कि बागपत के अग्रवाल मंडी का रहने वाला कारोबारी बिहारीलाल गुप्ता ने राजीव के खिलाफ 31 अक्टूबर को 25 लाख रुपये गबन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करार्ई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस बाबत ही उन्हें बुलाया था। एसओ सरोजनीनगर सुधीर कुमार का कहना है कि राजीव चतुर्वेदी को थाने नहीं बुलाया गया था। वह सड़क पर पड़े तड़प रहे थे। पुलिस की मदद से उन्हें सामुदायिक केंद्र में भर्ती कराया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह ज्ञात हो सकेगी।

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