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निजी स्कूलों के शिक्षकों की नौकरी होगी पक्की!

निजी स्कूलों के शिक्षकों की नौकरी होगी पक्की!

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश के निजी माध्यमिक स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। योगी सरकार ने एक अहम फैसला लेने जा रही है, इसके तहत अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को अंशकालिक की जगह अब पूर्णकालिक कहा जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षक को निकालना आसान नहीं होगा। ऐसा करने से पहले स्कूल के प्रबंधक को शिक्षक को निकालने का कारण ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षक को बताना होगा।  इतना ही नहीं स्कूलों में भर्ती किए गए शिक्षकों का भी पूरा ब्यौरा देना होगा। इन शिक्षकों के सेवा अनुभव का अनुभव प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन और डीआइओएस संयुक्त जारी करेंगे। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि निजी स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली में कई ऐसे महत्वपूर्ण अधिकार जोड़े गए हैं, जिससे वह मजबूती के साथ नौकरी कर सकेंगे। यही नहीं 15 हजार रुपये वेतन भी स्कूल को देना होगा। प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली के लिए माध्यमिक शिक्षा एक्ट में बदलाव किया जा रहा है। सेवा नियमावली के लिए एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। संशोधन के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस फैसले पर लखनऊ शिक्षक खंड के एमएलसी व माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी कहना है कि इससे वित्त विहीन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। वित्तविहीन शिक्षकों ने इसके लिए काफी लंबी लड़ाई लड़ी है।

 

 

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हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य 

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।