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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की नई व्यवस्था शुरु

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की नई व्यवस्था शुरु

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस की नई व्यवस्था शुरू की है । इसके तहत अब प्रदेश भर के आरटीओ कार्यालय से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस परिवहन आयुक्त मुख्यालय लखनऊ से जारी किए जाएंगे। और मुख्यालय से ही ड्राइविंग लाइसेंस डाक के जरिए आवेदकों के घर भेजे जाएंगे। इसकी शुरुआत लखनऊ से हो गयी है। 

नई व्यवस्था में अब आवेदक को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। और इसके बाद प्रिंट आउट लेकर आरटीओ कार्यालय जाना होगा। यहां पर सबसे पहले दिए गए लाइसेंस के प्रपत्रों की जांच होगी। और फिर फोटो और हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी की जाएगी । प्रपत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके लिए शुक्रवार को ही आरटीओ कार्यालय में कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके बाद परिवहन कर्मचारी आवेदक की परीक्षा लेंगे। आवेदकों को दो टेस्ट से गुजरना होगा। पहला टेस्ट कम्प्यूटर पर 15 प्रश्नों का होगा। इसके बाद दूसरे टेस्ट में ट्रायल होगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सारथी-4 के जरिए मुख्यालय में सभी जानकारी पहुंच जाएगी। इसके बाद अनुमोदन मिलने पर ड्राइविंग लाइसेंस मुख्यालय में प्रिंट हो जाएगा और दस दिन के भीतर आवेदक के घर पर पहुंचेगा। गौरतलब है कि लाइसेंस आवेदकों को अब आवेदन पत्र के साथ 22 रुपये का रजिस्टर्ड लिफाफा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य 

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।