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फर्जी मदरसों के नाम 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी

फर्जी मदरसों के नाम 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी

आगरा (उत्तर प्रदेश)। पुलिस ने फर्जी मदरसों के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से चालीस लाख रुपए की स्कॉलरशिप निकालने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। थाना एत्माद्दौला पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने दो ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालकों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से बड़ी संख्या में पासबुक, एटीएम कार्ड सहित खाता खोलने के उपकरण, कंप्यूटर बरामद किए गए हैं। 

पुलिस अधीक्षक क्राइम मनोज कुमार सोनकर ने प्रेस वार्ता में गुरुवार को बताया कि आरोपियों में नितिन चौहान नई आबादी, राम बिहार कालोनी, टेढ़ी बगिया, राकेश कुमार धौरऊ, हसनपुर, खंदौली, रवींद्र शर्मा न्यू जनता कालोनी, सदर, उमाकांत नंदनी विहार, नंदलालपुर और आदित्य प्रताप सिंह नई आबादी, टेढ़ी बगिया का रहने वाले हैं। आरोपियों के पास से एक सीपीयू, एक एलसीडी मॉनीटर, एक पावर एडेप्टर, दो बायोमेट्रिक स्कैनर, एक पीओएस/ईडीसी मशीन, 254 एसबीआई कियोस्क कस्टमर कार्ड, 9 एटीएम कार्ड, 593 सील पैक एटीएम कार्ड, एसबीआई की 187 पासबुक , तीन चेकबुक , एक कीबोर्ड, एक पावर केबल, एक क्लोन फिंगरप्रिंट (सिलीकॉन) बरामद हुए हैं। 

पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी नितिन चौहान ने भारतीय स्टेट बैंक की फाउंड्री नगर शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) कालिंदी विहार में खोल रखा है। इस कारण वह बैंक में जाता था। बैंक के पूर्व प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ की सहमति से बैंक के ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उमाकांत की लॉग इन आईडी से खाताधारकों की जानकारी प्राप्त कर लेता था। नितिन लंबे समय से कोई लेन देन न हो रहे खातों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को बदल देता था और खातों से रकम निकाल लेता था। आरोपी नितिन तकरीबन पांच साल से यह काम कर रहा था। इतना ही नहीं रकम निकालने के लिए खातों के नए एटीएम कार्ड भी जारी करा लेता था। वहीं एक और आरोपी राकेश, जो पोस्टमैन है। वह एटीएम आने पर खाताधारकों को न देकर नितिन को उपलब्ध करा देता था। इसके बाद नितिन का पड़ोसी आदित्य एटीएम केबिन में जाकर ओटीपी जेनरेट करके पासवर्ड जारी कर लेता था और फिर खाते से रकम निकाल लेते थे। इसके बाद खातों से रकम निकालकर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को पहले की ही तरह दर्ज कर देते थे, जिससे फर्जीवाड़े का पता न तो ग्राहक को चलता था और न ही बैंक के कर्मियों को चलता था। वहीं जब ग्राहक राशि निकाले जाने की शिकायत करने बैंक आता था तो उसे कर्मचारी एटीएम से पैसा निकलने की जानकारी देते थे। हालांकि कई बार चुप बैठ जाते थे। जबिक कई लोगों ने पुलिस को शिकायत भी दर्ज कराई थी। 

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार एक अभियुक्त रविंद्र शर्मा भी बैंक ऑफ इंडिया, आगरा कैंट की शाखा का ग्राहक सेवा केंद्र चलाता है। दो साल पहले मदरसा संचालक मोहम्मद इलियास और मोहम्मद सफी ने रविंद्र से संपर्क किया। दो मदरसों के लिए फर्जी तरीके से खाते खोलने के लिए कहा। रविंद्र ने नितिन से संपर्क किया। नितिन चौहान ने 500 रुपये प्रति खाते के हिसाब से कमीशन लेकर बिना केवाईसी के खाते खोल दिए। इस तरीके से एक हजार खाते खोले गए। खाते खोलने के लिए नया ग्राहक सेवा केंद्र भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में खोला गया। इसमें आदित्य का आधार कार्ड लगाया गया। उसकी फिंगरप्रिंट के लिए सिलीकॉन की फिंगरप्रिंट बनाई गई। 2016-2017 में तकरीबन एक हजार खाते मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के नाम पर खोल लिए गए। इनमें आधार कार्ड नहीं लगा था। एक खाते के लिए तकरीबन चार हजार रुपये आने थे। इस हिसाब से केंद्र सरकार से मिली 40 लाख रुपये की स्कालरशिप फरवरी 2017 में निकाल ली गई।

खाते खोलने में एक विद्यार्थी के फोटो का इस्तेमाल पांच से सात खातों में किया गया। इसके साथ ही इलियास, सफी, नितिन और आदित्य अपनी फिंगर प्रिंट लगाते थे। आधार लिंक न होने के कारण इन फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने के कारण फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आ रहा था। वहीं इस फर्जीवाड़े से बैंक बेखबर था। आरोपी नितिन ने बताया कि एक खाता खोलने के लिए उसने मदरसा संचालकों से 500 रुपये तय किए थे। इसके साथ ही जब खातों में रकम आ गई तो हर दिन दो लाख रुपये वह बैंक से निकालकर आया। इसके बदले में उसने 15000 रुपये मदरसा संचालकों से लिए। उन्होंने 20 दिन में 40 लाख रुपये निकाल लिए। आदित्य का सिलीकॉन फिंगर प्रिंट ग्राहक सेवा केंद्र को लाग इन करने में इस्तेमाल करता था।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि बैंक के पूर्व के प्रबंधक पंकज कुलश्रेष्ठ का ट्रांसफर पलवल, हरियाणा में हो चुका है। उनकी भूमिका संदिग्ध है। पहले तो उनके समय में बैंक के चपरासी का लागइन आईडी बनाया गया। इस पर प्रबंधक ने नितिन को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया। ऐसे में उनकी भूमिका की जांच की जा  रही है। इसलिए एक टीम को पलवल भेजा गया है। पुलिस को आशंका है कि जिन मदरसों के विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप आई थी वह भी फर्जी हो सकते हैं। क्योंकि पकड़े गए आरोपी नितिन और आदित्य को मदरसों का पता तक नहीं मालूम है। उनके मोबाइल नंबर तक नहीं हैं। आशंका है कि मदरसे सिर्फ कागजों में ही चल रहे थे। पुलिस को बड़ा घपला सामने आने की आशंका है। पुलिस के सामने कई पीड़ित आए हैं। जिनके खातों से यह रकम निकाली गई है। इनमें कई के मुकदमे तक दर्ज नहीं है। पूर्व में एक पीड़ित सरोज देवी के खाते से 45 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। वह भी सामने आईं हैं। हालांकि आगे की कार्रवाई के बाद ही पता चल सकेगा कि अभी तक इन्होंने और कितनी राशि की धोखाधड़ी की है।

 

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