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अब घायलों की मरहम-पट्टी करेगी पुलिस

अब घायलों की मरहम-पट्टी करेगी पुलिस

जबलपुर (मध्य प्रदेश) । देशभर में सड़क हादसों में तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से अक्सर कई घायलों की मौत हो जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए जबलपुर की पुलिस ने एक सराहनीय कदम उठाया है। अब पुलिस सड़क हादसा होने या मारपीट के मामले में घायलों को तुरंत राहत देने के लिए मरहम-पट्टी करेगी। इसके लिए वह अपने वाहनों में फर्स्ट एड किट रखेगी। इस योजना के तहत पहले चरण में राजपत्रित पुलिस अधिकारियों व थाना प्रभारियों के वाहनों को इस किट के लिए चिन्हित किया गया है। 

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह का कहना है कि मारपीट या हादसों में घायलों तक सबसे पहले पुलिस पहुंचती है। अक्सर मौके पर एम्बुलेंस पहुंचने या अस्पताल तक पहुंचाने में घायलों के शरीर से काफी मात्रा में खून बह चुका होता है, जिससे जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। और उनके इलाज की कोई सुविधा नहीं रहती है। ऐसी स्थिति में पुलिस वाहनों में किट उपलब्ध होने से घायलों को राहत मिलेगी। पुलिस वाहनों में मौजूद फर्स्ट एड किट में दर्द व बुखार की दवा के साथ एंटीबायोटिक, मलहम, पट्टी, एंटीसेप्टिक भी सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। इसके लिए फिलहाल 50 फर्स्ट एड किट की खरीदी की गई है।

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(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।