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डॉक्टरों ने गरीबों का मुफ्त इलाज से किया इनकार

डॉक्टरों ने गरीबों का मुफ्त इलाज से किया इनकार

रायपुर (छत्तीसगढ़)। नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी जन स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' को निजी अस्पतालों ने पलीता लगाना शुरु कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई के आह्वान पर राज्य के निजी अस्पतालों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया है। इतना ही नहीं जिन मरीजों का इलाज पहले से चल रहा था, उनकी भी छुट्टी की कर दी है। आईएमए का कहना है कि विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए पैकेज 'मनमाने और काफी कम' हैं। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है। 

'आयुष्मान भारत' योजना के बारे में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि वो सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं। डाक्टरों का तर्क है कि अफसरों ने अपनी मर्जी से बीमारियों के पैकेज तय कर दिए। कई बीमारियों का यहां तक कि जनरल सर्जरी और वार्ड का चार्ज भी कम कर दिया गया है। ऐसी दशा में अब वे इलाज नहीं करेंगे। वहीं आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. अशोक त्रिपाठी ने कहा 'हम इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। डॉक्टरों से चर्चा के बाद इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।' 

डाक्टरों के इस विरोध और तकनीकी खामी के कारण राजधानी में ही 500 से ज्यादा मरीजों का फ्री इलाज नहीं हो सका। अंबिकापुर की रहने वाली सहोदरा बाई ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। जब वह इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचीं और अपना स्मार्ट कार्ड दिखाया तो काउंटर पर से ही उन्हें ये कहकर लौटा दिया गया कि इस कार्ड के जरिए उनका इलाज नहीं हो सकता है।  इसी तरह राजनंदगांव के राम दयाल कश्यप भी अपने एंजियोप्लास्टी के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें ये कहकर लौटा दिया कि उनका इलाज तभी हो सकता है जब वह कैश में शुल्क चुकाने के लिए तैयार हों। अस्पताल का कहना था कि मुफ्त इलाज फिलहाल रोक दिया गया है।

हालांकि विरोध के बाद सरकार ने डॉक्टरों को शांत करने की कोशिश की है। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक की मौजूदगी में हुई बैठक में डाक्टरों ने ग्रेडिंग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा बीमा कंपनी ने सभी अस्पतालों को सी ग्रेड मानकर क्लेम की राशि में 15 फीसदी कटौती कर ली है। उच्च स्तर पर निर्देश के बाद भी बीमा कंपनी भुगतान नहीं कर रही है। इस पर डॉक्टरों ने नाराजगी जताई। अधिकारियों ने कहा कि इसका भी भुगतान जल्द कर दिया जाएगा। फिर भी पैकेज की रकम के कारण बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला। 

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) का 23 सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुभारंभ किया। इस योजना के तहत देश के 10.74 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलेगी।

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