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बिजली की चोरी रोकने के लिए खुलेंगे पुलिस थाने

बिजली की चोरी रोकने के लिए खुलेंगे पुलिस थाने

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। प्रदेश में बिजली चोरी करने वालों की अब खैर नहीं है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बिजली चोरी रोकने के लिए बड़ा अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक थाने खोले जाएंगे। मंगलवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इन थानों को एंटी पावर थेफ्ट के नाम से जाना जाएगा। थानों की स्थापना के बाद सभी मुकदमे और विवेचना की पैरवी बिजली विभाग के अधीन पुलिसकर्मी करेंगे। 

योगी सरकार यूपी को चौबीस घंटे बिजली देने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बिजली चोरी को मानती है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि राज्य में चौबीस घंटे बिजली सुनिश्चित करने के लिए चोरी रोकना आवश्यक है। श्रीकांत शर्मा ने बताया कि बिजली चोरी होने की वजह से सुचारु आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न होती है और आम लोगों का हक मारा जाता है। अब तक विद्युत चोरी के मामलों की विवेचना भी ठीक से नहीं हो पाती थी। थाना खुलने से मुकदमा दर्ज कराने से लेकर तकनीकी रूप से विवेचना में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधीन वर्तमान 33 छापेमार दल कार्यरत है और यूपी शासन 55 अतिरिक्त प्रवर्तन दल की स्वीकृत दी जा चुकी हैं। इन थानों के खुलने से व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही वितरण हानि में कमी आएगी और ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण होगा। उन्होंने बताया कि गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था चल रही है। सरकार ने थानों में तैनात किये जाने वाले पुलिसबल की संख्या निर्धारित कर दी है। हर थाने में 28 पुलिसकर्मी तैनात किये जाएंगे। इनमें इंस्पेक्टर के रूप में एक प्रभारी निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, 11 मुख्य आरक्षी, नौ आरक्षी और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात होंगे। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस बल के तैनात से पारदर्शी विवेचना होगी और चोरी पर अंकुश लगेगा। थानों में पुलिस बल की तैनाती के लिए सरकार ने 2157 पदों का सृजन किया है। इस बल की तैनाती के बाद राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड इस व्यवस्था पूरा खर्च उठाएगा। पुलिसकर्मियों के वेतन से लेकर सभी सुविधाओं के व्यय भार का दायित्व पावर कारपोरेशन का ही होगा। 

दरअसल बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने में खुद बिजली विभाग को ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। एफआईआर दर्ज कराने में ही विभाग के अधिकारियों को थानों में चक्कर लगाने पड़ते हैं। अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराने में समय भी लगता है। उधर पुलिस थानों में काम भी ज्यादा है, लिहाजा कार्रवाई महज खाना पूर्ति बनकर रह जाती थी। अब सरकार ने तैयारी की है कि नए बिजली थाने खोले जाएं, जिनकी व्यवस्था पुलिस ही संभालेगी, लेकिन यहां सिर्फ बिजली के मामले ही निपटाए जाएंगे।

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