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पुलिसकर्मी ने मां से कहा 'बेटी का शव कपड़े में सिलो' !

पुलिसकर्मी ने मां से कहा 'बेटी का शव कपड़े में सिलो' !

मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के तमाम दावों के बावजूद पुलिस प्रशासन अपना चाल और चरित्र बदलने को तैयार नहीं है। आए दिन प्रदेश में इनकी निरंकुशता देखने को मिलती ही रहती है। पुलिसवालों ने ताजा कारनामा मैनपुरी में किया है, जहां उन्होंने सारी मानवीय संवेदनाएं तार-तार कर दीं। पुलिसवालों ने एक रोती बिलखती मां को ही अपनी बच्ची के शव को सील करने का फरमान सुना दिया। इतना ही नहीं पीड़ित मां को आदेश दिया कि वह बच्ची का शव सील करने के बाद उसे पोस्टमार्टम हाउस ले चले।

आपको बता दें कि मोहन नगर निवासी स्वराज सिंह की बेटी अंजलि कक्षा 10 की छात्रा थी। यूपी बोर्ड की परीक्षा का परिणाम आया था, जिसमें वह वह फेल हो गयी थी। इस बात से वह बहुत आहत थी। गुरुवार की सुबह मां सुनीता और पिता स्वराज सिंह मजदूरी करने गए थे और छोटा भाई घर से बाहर खेलने के लिए चला गया था। अंजलि घऱ में अकेली थी, इसी दौरान उसने फांसी का फँदा लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना की सूचना मिलने के बाद मां-बाप घर पहुंचे और बेटी के शव को फंदे से नीचे उतारा।  कुछ देर बाद पुलिसवाले मौके पर पहुंचे और शव पोस्टमार्टम हाउस ले जाने के लिए खुद व्यवस्था करने की बजाय परिजनों को फरमान सुना दिया। जिसके बाद परिवार के लोग शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। हद तो तब हो गयी जब परिजन घटना की तहरीर देने कोतवाली पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने मृतक बच्ची के मां-बाप को एक और फरमान सुना दिया। और कहा कि घर से कपड़ा लाकर अपनी बेटी की लाश को कपड़े में सिल दो। जिसके बाद परिवार के लोग घर से पुरानी चादर लेकर आए। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने रोती बिलखती मां सुनीता से शव को कपड़े में बंद कर सिलने को कहा। बेसुध मां ने जब अपनी बेटी की लाश को कपड़े में सिलने के लिए सुई-धागा हाथ में लिया तो उसके हाथ कांपने लगे। हालांकि मौके पर मौजूद एक महिला व पड़ोसी युवक ने सुई-धागा थाम लिया और किसी तरह बच्ची के शव को कपड़े में सिला।

वहीं हमेशा की तरह मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक अजय शंकर राय ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो मामला गंभीर है। मामले की जांच कराई जाएगी। और  दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अब इन आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कितनी कड़ी कार्रवाई होगी ये तो समय बताएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तरह कब तक प्रदेश की जनता पुलिस की निरंकुशता को बर्दाश्त करती रहेगी।  

नागरिक का मौलिक कर्तव्य

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

आधार की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए UIDAI ने अब नया क्यूआर कोड (QR code) जारी किया है। जिसे 12 अंकों का आधार नंबर बताए बिना ऑफलाइन यूजर वेरिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

दिव्यांग का अधिकार

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साइबर (इंटरनेट) सेवा का अधिकार