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करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला जिला आबकारी अधिकारी

करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला जिला आबकारी अधिकारी

इंदौर (मध्य प्रदेश)। धार में पदस्थ जिला आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह चंद्रावत के इंदौर, जावरा और धार के कई ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी के दौरान सैकड़ों करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी का कहना है कि उन्हें चंद्रावत के पास अनुपातहीन संपत्ति जमा करने की शिकायत मिली थी। मामले की जांच के बाद शुक्रवार को उन्होंने टीमें बनाकर उनके घर पर दबिश दी, जहां से बड़ी संख्या में संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए गए। इंदौर में ही चंद्रावत के दो पेट्रोल पंप, स्कीम नंबर 74 में एक बंगला मिला है। जावरा और धार में भी संपत्ति मिली है। लोकायुक्त की टीम के छापे के दौरान चंद्रावत के घर से मर्सिडीज और इनोवा दो कार मिली हैं, जबकि एक ऑडी लेकर उनकी माताजी कालूखेड़ा गांव गई हुई थीं। जांच टीम को जब लगा कि मर्सिडीज कार में कुछ दस्तावेज हैं तो उसकी तलाशी ली गई। टीम ने कारों की डिक्की भी खुलवा ली। दोनों पेट्रोप पंप भी सील कर दिए गए।

इस छापेमारी में  स्कीम नंबर 74 में एक आलीशान मकान, बीसीएम हाईटस में एक फ्लैट,  बंशी ट्रेड सेंटर में दो दुकान,  लसूड़िया मोरी और स्कीम 140 एक-एक प्लॉट, दो पेट्रोल पंप,  6 टैंकर, करीब साढ़े 11 लाख रुपए नकद, करीब 1 करोड़ रुपए के जेवर,  गुलाब बाग में एक सिक्युरिटी एजेंसी में पत्नी की पार्टनशिप, करीब 7 बैंक खाते, दो लॉकर विजय नगर स्थित निजी बैंक में,  जावरा में वेयर हाउस होने का खुलासा हुआ है। 

आपको बता दें कि चंद्रावत पूर्व कांग्रेसी नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के भतीजे हैं। उनकी अनुकंपा नियुक्ति में भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने काफी मदद की थी। चंद्रावत के पिता नरेंद्रसिंह चंद्रावत पुलिस में टीआई थे। 90 के दशक में महू में एक आरोपी को पकड़ते समय हुई मुठभेड़ में वे शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उन्हें डीएसपी का दर्जा भी दिया गया। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सयाजी चौराहे पर पेट्रोल पंप भी दिया गया। वर्ष 2001 में पराक्रम को आबकारी विभाग में नियुक्ति दी गई। 2003 से उन्होंने विभाग में ज्वाइनिंग दे दी। उनकी अब तक की कुल तनख्वाह करीब 1 करोड़ रुपए होती है। 

हैरानी की बात यह है कि चंद्रावत 15 साल से काली कमाई कर रहा था, लेकिन भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ रखने वाली सरकार की कभी उस पर नजर नहीं गई। अब मामला सामने आने के बाद भाजपा पराक्रम के कालूखेड़ा का भतीजा होने का कनेक्शन कांग्रेस से जोड़कर अपनी झेंप छुपाने का प्रयास कर रही है।

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