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सांसद निधि से क्षेत्र का विकास या भ्रष्टाचार !

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सांसद निधि से क्षेत्र का विकास या भ्रष्टाचार !

हमारे देश की जनता 'लोकसभा चुनाव' के जरिए अपना सांसद चुनती है। इन सांसदों की सहमति से ही देश के लिए नए कानून बनाए जाते हैं और पुराने कानूनों में न्यायोचित संशोधन किया जाता है। इसके साथ ही ये सांसद देश के विकास के लिए योजनाएं एवं देश के नागरिकों की तरक्की व रोजगार के लिए प्रबंधन भी करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि संसद में देश का भविष्य तय किया जाता है। यानी सांसद देश का भाग्य विधाता होता है। लेकिन सच में क्या ऐसा है ? शायद नहीं ! लाखों रुपए वेतन-भत्ते और पांच करोड़ रुपए सांसद निधि पाने वाले हमारे भाग्य विधाता सांसद देश के नागरिकों का भाग्य बदलने की बजाय अपना और अपने परिवार का भाग्य बदलने में जुटे हुए हैं। वह रातों-रात खाकपति से करोड़पति बन रहे हैं। वहीं उनको चुनने वाली जनता उन्हें देखकर हैरान और परेशान है कि आखिर इनकी मनमानी कब रुकेगी?

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हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य 

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।