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स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार

स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार

स्वास्थ्य सुरक्षा क्या है? 

स्वास्थ्य सुरक्षा सामाजिक-चिकित्सा धारण है । यह केवल मेडिकल नहीं है । इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा केवल बीमारी के समय इलाज तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है जहां तक हो सके मरीज के शारीरिक , मानसिक तथा कल्याण को बढ़ावा मिल सके।

स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार

उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार स्वास्थ्य का अधिकार मौलिक अधिकार है , क्योंकि इसकी उत्पत्ति अनुच्छेद 21 में दिए गए जीने के अधिकार से होती है ।

स्वास्थ्य का अधिकार मानव अधिकार 

1948 का मानवधिकार घोषाणपत्र का अनुच्छेद 21 यहा सुनिश्चित करता है कि हर एक को ऐसे मापदण्ड के साथ जीने का अधिकार है जो उसके तथा उसके परिवार स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पर्याप्त हों, जिसमें चिकित्सा अवधान तथा जरुरी समाज की सेवाएं एवं बीमारी , अपंगता, वृद्धावस्था आदि से संबंधित सुरक्षा का अधिकार शामिल हैं ।

मनपसंद सुविधा का अधिकार

  • मरीज को किसी भी समय दोबारा सोचने का अधिकार है।
  • मरीज को अपने इलाज का मेडिकल रिकार्ड लेने का अधिकार है । वह किसी अन्य व्यक्ति का लिखित रुप में इस रिकॉर्ड को लेने की जिम्मेदारी दे सकता है ।
  • जहां तक हो सके मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल एवं डॉक्टर से इलाज कराने का अधिकार प्राप्त है।
  • मरीज को अपनी बीमारी के बारे में जानकारी मिलने के बाद यह अधिकार है कि वह इलाज करवाए या नहीं करवाए।
  • यदि मरीज किसी डॉक्टर के इलाज से संतुष्ट नहीं है तो वह डॉक्टर बदल सकता है ।

सुविधा ग्रहण करने का अधिकार

  • इलाज एवं जांच से पहले मरीज को संबंधित इलाज तथा अन्य विकल्पों के बारे में जानने का पूरा अधिकार है ।
  • जहां पर संभव हो वहां मरीज को इलाज से संबंधित खतरों, समस्याओं, इलाज के बाद प्रभावों, मृत्यु की संभावना, इलाज के असफल होने की संभावना के बारे में सूचना दी जा सकती है।
  • मरीज से यह भी बताया जा सकता है कि इलाज की प्रक्रिया छात्रों के सामने की जायेगी या छात्रों के द्वारा की जायेगी।
  • मरीज किसी भी इलाज एवं जांच करवाने से मना कर सकता है ।

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