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कर्मठ महिला सिपाही और मां को डीजीपी का तोहफा

कर्मठ महिला सिपाही और मां को डीजीपी का तोहफा

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । झांसी की एक कर्मठ महिला सिपाही और छह माह की बच्ची की मां को डीजीपी ने सराहनीय तोहफा दिया। महिला सिपाही अर्चना सिंह का काम के प्रति समर्पण को देखते हुए डीजीपी ओपी सिंह ने झांसी से उसके गृह जनपद आगरा के पास पोस्टिंग देने का आदेश दे दिया। डीजीपी ने उन्हें 21वीं सदी की महिला का बेहतरीन उदाहरण बताया। डीजीपी ने रविवार को अर्चना से बात की और उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने ट्वीट किया कि इस मां ने हमें हर पुलिस लाइंस में पालना घर खोलने के लिए प्रेरित किया है।

सोशल मीडिया पर झांसी कोतवाली में बतौर सिपाही तैनात अर्चना सिंह को छह महीने के बच्चे को डेस्क पर लिटा कर काम करते हुए तस्वीर वायरल हो गई थी। अर्चना की इस कर्तव्य निष्ठा को देखकर लोगों ने काफी तारीफ की थी। वहीं डीआईजी सुभाष सिंह ने महिला सिपाही की कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए एक हजार रुपए का नगद पुरस्कार भी दिया।

आपको बता दें कि झांसी में अर्चना के के साथ कोई नहीं है, इसलिए वह अपनी छह माह की बच्ची को अपने साथ कोतवाली ड्यूटी पर ले जाती हैं। अर्चना के पति गुड़गांव में प्राइवेट नौकरी करते हैं। एक और बड़ी बेटी है, जो कानपुर में दादा-दादी के साथ रहकर पढ़ाई कर रही है। अर्चना का कहना है कि इसमें उन्हें काफी परेशानी आती है। सुबह-सुबह घर में काम करना पड़ता है। अगर थोड़ा भी लेट हो जाए तो उन्हें डर सताता है। अर्चना ने बताया कि पिछले महीने ही उन्होंने छह माह की छुट्टी पूरी होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन की है। अर्चना अपनी छह माह की बेटी को लेकर नाइट ड्यूटी भी करती हैं। इसके लिए उन्होंने एक बैग तैयार किया है, जिसमें सभी जरुरत की चीजें पहले से मौजूद होती हैं, बस उसमें दूध की बोतल रखनी होती है। लेकिन स्टाफ के सहयोग के कारण उनके नौकरी के घंटे आसानी से कट जाते हैं।

 

 

नागरिक का मौलिक कर्तव्य

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

बंदी (कैदी) का अधिकार