Main Menu

आंगनबाड़ी केंद्र के पुष्टाहार पर बार कोडिंग से रुकेगी कालाबाजारी

आंगनबाड़ी केंद्र के पुष्टाहार पर बार कोडिंग से रुकेगी कालाबाजारी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार पर बार कोडिंग की नई व्यवस्था शुरू की है। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की कालाबाजारी को रोकने के लिए ये नई पहल की है। इतना ही नहीं पुष्टाहार अब बाल विकास परियोजना कार्यालय के बजाय सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जायेगा। सरकार ने पुष्टाहार की विविधता बढ़ाने के लिए इसमें नमकीन व मीठा दलिया के साथ ही प्रीमिक्स लड्डू को भी शामिल किया है। 

योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को 14 मंडल समूहों में पुष्टाहार सप्लाई के लिए हुए न्यूनतम रेट लगाने वाली फर्मों के टेंडर फाइनल कर दिए। योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाले पुष्टाहार की सप्लाई के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किये थे। इस बार प्रदेश के 18 मंडलों को 14 हिस्सों में बांटकर यह टेंडर किये गए थे। कैबिनेट ने टेंडर में पुष्टाहार सप्लाई की आई न्यूनतम दरों को मंजूरी दे दी है। पुष्टाहार की सप्लाई में कोई घपला न हो इसलिए इसमें अलग-अलग रंग के पैकेट रखे गए हैं। बच्चे, गर्भवती महिलाएं व धात्री महिलाएं सभी के लिए पोषाहार के पैकेट अलग-अलग रंग के होंगे। पुष्टाहार के पैकेटों की बार कोडिंग से यह पता चल जायेगा कि पोषाहार का पैकेट किस आंगनबाड़ी केंद्र का है। इससे पोषाहार की कालाबाजारी करने वालों को पकड़ा जा सकेगा। इस बार पुष्टाहार की सप्लाई करने वाली पांच कंपनियां यूपी के बाहर की हैं। इनमें तमिलनाडु, गुवाहाटी व राजस्थान की एक-एक व झारखंड की दो कंपनियां शामिल हैं।

हमें लिखें

यदि आप कोई सूचना, लेख, ऑडियो-वीडियो या प्रश्न हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो हमें भेजें।

सहायता करें


आज जिस तरह मीडिया कारपोरेट ढर्रे पर चल रही है, इसी ने हमें यह संकल्प लेने पर मजबूर किया कि हमें चुपचाप मौजूदा मीडिया के रास्ते पर नहीं चलना है, बल्कि देश के उन करोड़ों लोगों के अधिकारों की आवाज बनना है, जो इस लोकतांत्रिक देश में हर रोज अपने अधिकारों को पाने के लिए पुलिस, अधिकारी और नेता की मनमानी का शिकार बन रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हालांकि जब हमने इसे शुरु किया तो हमारे सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गयी, लेकिन हमने चुनौती को स्वीकार करते हुए थोड़े कम पैसों में ही एक कठिन रास्ते पर चलने की ठान ली और एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई। इंटरनेट का सहारा लिया और बिल्कुल अगल ही तरह का न्यूज पोर्टल बनाया। इसमें हमने अधिकारों की जानकारी देने के साथ ही अधिकारों से संबधित घटनाओं को लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत की।

हमारा ऐसा मानना है कि यदि लोकसेवा अधिकारों को बचाए रखना है तो ऐसी पत्रकारिता को आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी। इसके लिए कारपोरेट घरानों और नेताओं की बजाय आम जनता को इसमें भागीदार बनना होगा। जो लोग भ्रष्टाचार मुक्त सच्ची पत्रकारिता को बचाए रखना चाहते हैं, वे सामने आएं और अधिकार एक्सप्रेस को चलाने में मदद करें। एक संस्थान के रूप में ‘अधिकार एक्सप्रेस’ लोकहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार चलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमें पढ़ें और इस जानकारी को जन-जन तक पहुंचाएं, शेयर करें, और बेहतर करने का सुझाव दें।            (अधिकार एक्सप्रेस आपका, आपके लिए और आपके सहयोग से चलने वाला पत्रकारिता संस्थान है)