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उत्तर प्रदेश में किसान बही योजना

उत्तर प्रदेश में किसान बही योजना
  • उत्तर प्रदेश का प्रत्येक किसान कितनी खेती योग्य जमीन का मालिक है और उसके पास कितना भू-राजस्व है, इसके लिए साल 1992 में किसान बही योजना की शुरूआत की गई थी।
  • भूमि-स्वामित्व का यह प्रमाण खेती योग्य जमीन के खरीद-बिक्री के लिए अनिवार्य था। जिसमें प्रत्येक किसान को किसान बही नाम से एक प्रमाणपत्र तहसील से जारी किया था।
  • बैंक के पासबुक की तरह किसान बही में किसान के बारे में सभी प्रकार की जानकारी रहती थी। जिसमें किसान का नाम, पता, उसके पास उपलब्ध जमीन का विवरण और किसान की पहचान के लिए उसका फोटोग्राफ रहता था।
  • तहसीलदार और कानूनगो के हस्ताक्षर से इसे जारी किया गया था। लेकिन कुछ सालों बाद यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई और किसानों को राजस्व विभाग से समय से किसान बही उपलब्ध ही नहीं कराई जाती थी।
  • किसान बही किसानों का यह एक ऐसा दस्तावेज है जो किसान की पहचान का प्रमाणपत्र था और यह सभी सरकारी विभागों के साथ ही बैंक में अभी भी मान्य है।
  • किसान अपनी आय, अधिवास और जाति प्रमाणपत्र की जगह भी इसका इस्मेमाल कर सकता है।
  • जिन किसानों के पास किसान बही है उनसे किसान बही को अपडेट करने को कहा गया है।
  • सरकार की तरफ से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही बीज और खाद की सुविधा पाने के लिए किसानों को किसान बही दिखलाना जरूरी होता है।
  • इसका मकसद होता है कि विभाग को यह पता चल सके कि बीज और खाद पाने वाले किसान के पास खेती की कितनी जमीन है और वह इन सुविधाओं को वास्तविक हकदार है कि नहीं।