Main Menu

प्राथमिक शिक्षक भर्ती गड़बड़ी में 2 अफसरों पर गिरी गाज

प्राथमिक शिक्षक भर्ती गड़बड़ी में 2 अफसरों पर गिरी गाज

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 68500 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में एक बार फिर गड़बड़ी उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने तत्कालीन रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार को निलंबित करने का अदेश दिया है। और साथ ही एससीईआरटी के सात अधिकारियों के खिलाफ अनुशानिक जांच के आदेश दिए हैं। और अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी में नंबर जोडऩे में गलतियां करने वाले परीक्षकों के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को अपनी उत्तरपुस्तिकाओं का नि:शुल्क पुनर्मूल्यांकन कराने का मौका दिया है। 

आपको बता दें कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती परीक्षा में गड़बडिय़ों की जांच के लिए प्रमुख सचिव चीनी एवं गन्ना विकास संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार ने शुक्रवार को जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने पर्यवेक्षण कार्य में लापरवाही बरतने पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय, इलाहाबाद के तत्कालीन रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी और मौजूदा डिप्टी रजिस्ट्रार प्रेमचंद कुशवाहा को निलंबित करने का निर्देश दिया है। वहीं उन्होंने परीक्षा के पर्यवेक्षण में ढिलाई बरतने पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के सात अफसरों के खिलाफ अनुशासनिक जांच का निर्देश दिया है। 

अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार का कहना है कि सभी अभियर्थियों को दोबारा अपनी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन का मौक़ा मिलेगा। इसके लिए अभियर्थी 11 से 20 अक्टूबर के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कोई फीस देनी नहीं होगी। इसकी सूचना अखबारों में प्रकाशित की जाएगी। अभ्यर्थी सिर्फ अपनी उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे। जिन 53 फेल अभ्यर्थियों को नौकरी मिल गयी थी, वह अगर पुनर्मूल्यांकन में फेल होते हैं तो उनकी नौकरी चली जाएगी। लिखित परीक्षा में शामिल हुए सभी 1,07,825 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी कराई गई थी। इनमें से 343 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में नंबर जोडऩे में गलतियां पाई गईं। मुख्यमंत्री ने इन उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने वाले परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस देकर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। 

वहीं परीक्षा कराने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने मैनेजमेंट कंट्रोल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक जिस निजी एजेंसी की सेवाएं ली थीं, मुख्यमंत्री ने उसे भी ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया है। इस एजेंसी का पता 29, विधानसभा मार्ग, लखनऊ है। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ.प्रभात कुमार को सभी विभागों को यह सूचना देने का निर्देश दिया है कि वे इस एजेंसी से कोई काम न लें। यदि किसी विभाग को इस एजेंसी को कोई भुगतान करना बाकी है तो वह न करे। परीक्षा कार्य को लेकर यदि भविष्य में एजेंसी के खिलाफ कोई अनियमितता उजागर होती है तो सरकार उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।

नागरिक का मौलिक कर्तव्य

(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र्गान का आदर करें। 

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में संजोए रखें व उनका पालन करें।

(ग) भारत की प्रभुता एकता व अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें। 

(घ) देश की रक्षा करें और आवाह्न किए जाने पर राष्ट् की सेवा करें। 

(ङ) भारत के सभी लोग समरसता और सम्मान एवं भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग के भेदभाव पर आधारित न हों, उन सभी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हों।

(च) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें। 

(छ) प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील,नदी वन्य प्राणी आदि आते हैं की रक्षा व संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।

(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवतावाद व ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें । 

(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें व हिंसा से दूर रहें। 

(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में सतत उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करें, जिससे राष्ट्र प्रगति करते हुए प्रयात्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।

(ट) यदि आप माता-पिता या संरक्षक हैं तो 6 वर्ष से 14 वर्ष आयु वाले अपने या प्रतिपाल्य (यथास्थिति) बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

बंदी (कैदी) का अधिकार