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यह है दिल्ली का नेहरु प्लेस इलाका। इसे कंप्यूटर हार्डवेयर और साफ्टवेयर के हब के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर देश के कोने-कोने से लोग कंप्यूटर का सामान खरीदने आते हैं । और यहां के आटो ड्राइवरों की बेईमानी का शिकार हो जाते हैं। यहां के आटो ड्राइवर पुलिस वैन की मौजूदगी में भी किसी भी कीमत पर मीटर से चलने के लिए तैयार नहीं होते हैं। और मुंह मांगा किराया देने पर ही यात्री को गंतव्य स्थान तक ले जाने के लिए सहमत होते हैं। आटो ड्राइवरों का यह कारनामा खुलेआम पूरी दिल्ली में चल रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन कार्रवाई करने की बजाय मामले से आंखें मूंदे हुए है।

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आज जिस तरह मीडिया कारपोरेट ढर्रे पर चल रही है, इसी ने हमें यह संकल्प लेने पर मजबूर किया कि हमें चुपचाप मौजूदा मीडिया के रास्ते पर नहीं चलना है, बल्कि देश के उन करोड़ों लोगों के अधिकारों की आवाज बनना है, जो इस लोकतांत्रिक देश में हर रोज अपने अधिकारों को पाने के लिए पुलिस, अधिकारी और नेता की मनमानी का शिकार बन रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। इसीलिए अधिकार एक्सप्रेस में हमने लोकसेवा अधिकारों की जानकारी देने और संबधित घटनाओं को लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत की।

हमारा ऐसा मानना है कि यदि लोकसेवा अधिकारों को बचाए रखना है तो ऐसी पत्रकारिता को आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी। इसके लिए कारपोरेट घरानों और नेताओं की बजाय आम जनता को इसमें भागीदार बनना होगा। जो लोग भ्रष्टाचार मुक्त सच्ची पत्रकारिता को बचाए रखना चाहते हैं, वे सामने आएं और अधिकार एक्सप्रेस को चलाने में मदद करें। एक संस्थान के रूप में ‘अधिकार एक्सप्रेस’ लोकहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार चलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमें पढ़ें और इस जानकारी को जन-जन तक पहुंचाएं, शेयर करें, और बेहतर करने का सुझाव दें।            (अधिकार एक्सप्रेस आपका, आपके लिए और आपके सहयोग से चलने वाला पत्रकारिता संस्थान है)