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हमारे बारे में

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भारत एक लोकतांत्रिक देश है। भारत के संविधान के अनुसार जनता देश की मालिक है और सरकार उसकी सेवक है, लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि हमारे देश में इसका उल्टा हो रहा है। यहां सरकार देश की मालिक बन बैठी है और जनता उसकी सेवक बनी हुई है। ऐसी दशा में जनता इन तथाकथित मालिकों के दर पर भिखारियों की तरह लोकसेवा अधिकारों की भीख मांग रही है। वहीं अहंकार में मद-मस्त ये सरकारें और उनके अधिकारी-कर्मचारी जनता को न केवल उनके लोकसेवा अधिकारों से वंचित कर रहे हैं, बल्कि उनसे गुलामों जैसा व्यवहार कर रहे हैं और सरेआम रिश्वत की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

दूसरी ओर कारपोरेट घरानों द्वारा चलाए जा रहे मी़डिया संस्थानों के बीच भी किसी ऐसे संस्थान की कल्पना नहीं की जा सकती है कि जहां जनता के लोकसेवा अधिकारों की खबरों को महत्व दिया जाए। वर्तमान में अखबार, टेलीविजन चैनल या मीडिया वेबसाइट संस्थान के मालिक, किसी नेता, किसी अधिकारी या फिर विज्ञापनदाता को ध्यान में रखकर खबरों को महत्व दे रहे हैं। इसकी वजह से बदलते समय के साथ पत्रकारिकता का स्तर नीचे गिरता चला जा रहा है। मीडिया संस्थान पत्रकारिता की आड़ में समझौते कर रहे हैं। इसके चलते लोकेसवा अधिकार की सूचनाएं और महत्वपूर्ण समाचार जनता तक पहुंच ही नहीं पाते हैं, क्योंकि मीडिया संस्थान किसी नेता या अधिकारी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसे मुद्दों को सामने लाना ही नहीं चाहते हैं। जिससे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो सके।  इसी वजह से लोकतंत्र का 'चौथा स्तंभ' होने का दावा करने वाला मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। 

इसी उद्देश्य के चलते मार्च, 2018 में 'अधिकार एक्सप्रेस' अस्तित्व में आया। हम भरोसा दिलाते हैं कि इस न्यूज पोर्टल के जरिए हम जनता के लोकसेवा अधिकारों और उनके समाचारों के सच को सामने लाएंगे। साथ ही लोकसेवा अधिकारों के प्रति उन्हें जागरुक करेंगे। जिससे देश में भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण बने और सच्चा लोकतंत्र स्थापित हो सके। 

हमारा ऐसा मानना है कि यदि लोकसेवा अधिकारों को बचाए रखना है तो ऐसी पत्रकारिता को आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी। इसके लिए कारपोरेट घरानों और नेताओं की बजाय आम जनता को इसमें भागीदार बनना होगा। जो लोग भ्रष्टाचार मुक्त सच्ची पत्रकारिता को बचाए रखना चाहते हैं, वे सामने आएं और अधिकार एक्सप्रेस को चलाने में मदद करें। एक संस्थान के रूप में ‘अधिकार एक्सप्रेस’ लोकहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार चलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमें पढ़ें और इस जानकारी को जन-जन तक पहुंचाएं, शेयर करें, और बेहतर करने का सुझाव दें। 

संस्थापक संपादक

अधिकार एक्सप्रेस के संस्थापक संपादक वीरेंद्र द्विवेदी हैं। वह डीडी न्यूज, साधना न्यूज और न्यूज 24 सहित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों में कार्य कर चुके हैं।

अधिकार एक्सप्रेस फाउंडेशन

अधिकार एक्सप्रेस का प्रकाशन अधिकार एक्सप्रेस फाउंडेशन के द्वारा किया गया है, जो कंपनी एक्ट, 2013 के सेक्शन 8 के तहत पंजीकृत एक गैर-लाभकारी कंपनी है। इसका पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली में है।

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आज जिस तरह मीडिया कारपोरेट ढर्रे पर चल रही है, इसी ने हमें यह संकल्प लेने पर मजबूर किया कि हमें चुपचाप मौजूदा मीडिया के रास्ते पर नहीं चलना है, बल्कि देश के उन करोड़ों लोगों के अधिकारों की आवाज बनना है, जो इस लोकतांत्रिक देश में हर रोज अपने अधिकारों को पाने के लिए पुलिस, अधिकारी और नेता की मनमानी का शिकार बन रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हालांकि जब हमने इसे शुरु किया तो हमारे सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गयी, लेकिन हमने चुनौती को स्वीकार करते हुए थोड़े कम पैसों में ही एक कठिन रास्ते पर चलने की ठान ली और एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई। इंटरनेट का सहारा लिया और बिल्कुल अगल ही तरह का न्यूज पोर्टल बनाया। इसमें हमने अधिकारों की जानकारी देने के साथ ही अधिकारों से संबधित घटनाओं को लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत की।

हमारा ऐसा मानना है कि यदि लोकसेवा अधिकारों को बचाए रखना है तो ऐसी पत्रकारिता को आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी। इसके लिए कारपोरेट घरानों और नेताओं की बजाय आम जनता को इसमें भागीदार बनना होगा। जो लोग भ्रष्टाचार मुक्त सच्ची पत्रकारिता को बचाए रखना चाहते हैं, वे सामने आएं और अधिकार एक्सप्रेस को चलाने में मदद करें। एक संस्थान के रूप में ‘अधिकार एक्सप्रेस’ लोकहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार चलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमें पढ़ें और इस जानकारी को जन-जन तक पहुंचाएं, शेयर करें, और बेहतर करने का सुझाव दें।